Dilli Mein Uninde
(0)
Author:
Gagan GillPublisher:
Rajkamal Prakashan SamuhLanguage:
HindiCategory:
Language-linguistics₹
299
₹ 239.2 (20% off)
Available
Ships within 48 Hours
Free Shipping in India on orders above Rs. 1100
गगन गिल की ये गद्य रचनाएँ एक ठोस वस्तुजगत, एक साकार संसार को अपने भीतर की छायाओं में पकड़ना है। यथार्थ की चेतना और स्मृति का संसार—इन दो पाटों के बीच बहती हुई अनुभव-धारा जो कुछ किनारे पर छोड़ जाती है, गगन गिल उसे बड़े जतन से समेटकर अपनी रचनाओं में लाती हैं—मोती, पत्थर, जलजीव—जो भी उनके हाथ का स्पर्श पाता है, जग उठता है। यह एक कवि का स्वप्निल गद्य न होकर गद्य के भीतर से उसकी काव्यात्मक संभावनाओं को उजागर करना है...कविता की आँच में तपकर गगन गिल की ये गद्य रचनाएँ एक अलग तरह की ऊष्मा और ऐंद्रिक स्वप्नमयता प्राप्त करती हैं।</p> <p>दिल्ली का उनींदा ऑटोवाला जो कहता है कि मैं जब धुएँ में साँस लेता हूँ तो मेरा भीतर तक सिकुड़ जाता है। कैलोंग की निस्तब्ध पहाड़ियाँ और वह उदास भिक्षु जिसकी भिक्षु बनने की इच्छा न थी, श्रीनगर का वह ट्रक ड्राइवर जो कहता है कि मेरा दिल जल गया है; भिक्षु, गोम्पा, मठ, बुद्ध और समूचे पाठ में तैरता अकंप बौद्ध-भाव जो पूछता है कि क्या समस्त मानवता एक-दूसरे से इसीलिए नहीं चिमटी है कि वह डरी हुई है! यह सब इस पुस्तक को एक विशिष्ट परिपक्वता देता है।</p> <p>‘दिल्ली में उनींदे’ डायरी, नोट्स, यात्राओं, यात्राओं में मिले लोगों की स्मृतियों का एक अनूठा संचयन है।
Read moreAbout the Book
गगन गिल की ये गद्य रचनाएँ एक ठोस वस्तुजगत, एक साकार संसार को अपने भीतर की छायाओं में पकड़ना है। यथार्थ की चेतना और स्मृति का संसार—इन दो पाटों के बीच बहती हुई अनुभव-धारा जो कुछ किनारे पर छोड़ जाती है, गगन गिल उसे बड़े जतन से समेटकर अपनी रचनाओं में लाती हैं—मोती, पत्थर, जलजीव—जो भी उनके हाथ का स्पर्श पाता है, जग उठता है। यह एक कवि का स्वप्निल गद्य न होकर गद्य के भीतर से उसकी काव्यात्मक संभावनाओं को उजागर करना है...कविता की आँच में तपकर गगन गिल की ये गद्य रचनाएँ एक अलग तरह की ऊष्मा और ऐंद्रिक स्वप्नमयता प्राप्त करती हैं।</p>
<p>दिल्ली का उनींदा ऑटोवाला जो कहता है कि मैं जब धुएँ में साँस लेता हूँ तो मेरा भीतर तक सिकुड़ जाता है। कैलोंग की निस्तब्ध पहाड़ियाँ और वह उदास भिक्षु जिसकी भिक्षु बनने की इच्छा न थी, श्रीनगर का वह ट्रक ड्राइवर जो कहता है कि मेरा दिल जल गया है; भिक्षु, गोम्पा, मठ, बुद्ध और समूचे पाठ में तैरता अकंप बौद्ध-भाव जो पूछता है कि क्या समस्त मानवता एक-दूसरे से इसीलिए नहीं चिमटी है कि वह डरी हुई है! यह सब इस पुस्तक को एक विशिष्ट परिपक्वता देता है।</p>
<p>‘दिल्ली में उनींदे’ डायरी, नोट्स, यात्राओं, यात्राओं में मिले लोगों की स्मृतियों का एक अनूठा संचयन है।
Book Details
-
ISBN9789360867355
-
Pages200
-
Avg Reading Time7 hrs
-
Age18+ yrs
-
Country of OriginIndia
Recommended For You
Ityadi
- Author Name:
Gagan Gill
- Book Type:

- Description:
संस्मरणों की गगन गिल की यह दूसरी किताब है। ‘दिल्ली में उनींदें’ पहली थी। वे इन्हें ‘स्मृति-आख्यान’ कहती हैं। स्मृति जिसमें जितने दूसरे रहते हैं, उतना ही हमारा बीता हुआ समय, हमारे वर्तमान से पीछे छूट गया, हमारे स्व का एक हिस्सा, जिसके चिह्न अभी भी हमारे अस्तित्व में कहीं खुबे होते हैं।
कुछ क्षण जो कभी-कभी बहुत पास आकर हमें घेर लेते हैं, और कभी-कभी इतनी दूर दिखाई देते हैं कि हम उन्हें एक फ़ासले से देखते हुए शब्दबद्ध कर पाते हैं।
गगन गिल की भाषा को स्मृति का अंकन आता है। वे उन क्षणों को, जो बीत चुके हैं, भाषा के वर्तमान में इस कौशल से पिरोती हैं कि पाठक एक तरफ़ उनके साथ समय के उस खंड में यात्रा भी करता है, और चिन्तन भी करता है, जिसकी प्रेरणा उसे लेखक के आत्म-चिन्तन से मिलती है।
‘इत्यादि’ के स्मृति-आख्यानों में आयोवा युनिवर्सिटी के इंटरनेशनल राइटिंग प्रोग्राम के संस्थापक-निदेशक पॉल एंगल से मुलाक़ात, सारनाथ में दीक्षा, कोलकाता में शंख घोष से भेंट व अन्य संस्मरणों के अलावा 1984 के सिख-विरोधी दंगों की भीषण स्मृतियाँ भी हैं जिन्हें पढ़ते हुए आप सिहर उठते हैं।
Deh Ki Munder Par
- Author Name:
Gagan Gill
- Book Type:

- Description:
गगन गिल मानती हैं कि सारा स्त्री-लेखन उन जगहों पर ठिठककर देखने का क्षण है, जहाँ ‘पुरुष लेखक’ तो क्या, शायद ईश्वर भी स्थितियों की साधारणता, अनाटकीयता के कारण नहीं रुकता।
स्त्री की दृष्टि और स्त्री-दृष्टि में फ़र्क़ करते हुए वे कहती हैं कि ज़रूरी नहीं हर स्त्री के पास स्त्री-दृष्टि हो, जिसका नतीजा इस विडम्बना के रूप में सामने आता है कि स्त्री-लेखन का एक बड़ा हिस्सा स्वयं को पुरुष-दृष्टि से परखने का लेखन हो जाता है।
‘देह की मुँडेर पर’ पुस्तक में उनके निबन्ध संकलित हैं। इनमें अधिकांश वे हैं जो उन्होंने विभिन्न परिसंवादों, संगोष्ठियों और साहित्योत्सवों में पढ़े।
कविता, स्त्री, भाषा, साहित्य, स्त्री-विमर्श और पुस्तकों के विषय में चिन्तन करते हुए वे स्त्री होने के अपने वैशिष्ट्य को कभी नहीं भूलतीं, अपनी स्त्री-दृष्टि को कहीं तिरोहित नहीं होने देतीं। इसलिए इस पुस्तक में संकलित एक निबन्ध में महादेवी को ‘ऋषिका’ कहते हुए वे उनके साहित्य और रचनात्मकता का ऐसा सघन विवेचन कर पाती हैं जिसमें उनकी अपनी दृष्टि की सूक्ष्मता भी सहज ही दिखाई देती है।
Awaak : Kailash - Mansarovar : Ek Antaryatra
- Author Name:
Gagan Gill
- Book Type:

- Description:
किसी भी यात्रा में भूगोल कुछ-न-कुछ बदलता है। जगहें, चेहरे, घटनाएँ, दृश्य आदि बदलते हैं पर हर यात्रा ज़रूरी नहीं कि अन्तर्यात्रा हो। जब होती है तो हम भी साथ-साथ बदलते हैं, हमारी आन्तरिकता का भूगोल भी बदल जाता है। ऐसी यात्राओं के वृत्तान्त बिरले हैं। कवयित्री गगन गिल का यह अन्तर्यात्रा-वृत्तान्त हिन्दी में एक अनोखा दस्तावेज़ है जिसमें वृत्तान्त का टीसपन, कथा का प्रवाह और कविता की सघन आत्मीयता सब एक साथ है। उसमें स्मृतियों, संस्कारों, अन्तर्ध्वनियों, जीवन की लयों आदि सबका एक वृन्दवादन लगातार सुनाई देता है। कुछ इस तरह का भाव कि सब कुछ एक-दूसरे से जुड़ा है, प्रतिकृत और झंकृत है।
इस अन्तर्यात्रा में अनेक व्यक्ति आते-जाते हैं, उनकी छवियाँ, उक्तियाँ, संवाद, भंगिमाएँ और क्रियाएँ-प्रतिक्रियाएँ बेहद संवेदनशीलता से अपनी समूची चित्रमयता में उकेरी गई हैं। कैलाश-मानसरोवर जाते और वहाँ से लौटते मानो एक तरह की कथायात्रा भी चलती रहती है। प्रकृति, मनुष्य, हिमालय, ठंड, झीलें, नदियाँ, जल, वायु आदि सब एक निरन्तर प्रवाह में हैं, कभी आकस्मिक, कभी अप्रत्याशित, कभी रहस्यमय, कभी कुतूहल उपजाते, कभी नीरव, कभी घोर विस्मय में डालते लोग, घटनाएँ, दृश्य आदि हमें चुपचाप अनुभव और भावनाओं के एक ऐसे भौतिक देश और अन्तर्देश में ले जाते हैं जिनमें हममें से अधिकतर, शायद ही पहले कभी गये हों।
यह अनूठा गद्य है जिसमें गद्य और कविता, वृत्तान्त और चिन्तन के पारम्परिक द्वैत झर गये हैं और जिसमें होने की, मनुष्य होने के रहस्य और विस्मय का निर्मल आलोक, अपनी कई मोहक रंगतों में आर-पार फैला हुआ है।
—अशोक वाजपेयी
Ek Din Lautegi Ladki
- Author Name:
Gagan Gill
- Book Type:

- Description:
‘एक दिन लौटेगी लड़की’ गगन गिल का पहला कविता-संग्रह है। आज भी यह कविताएँ अपनी दृढ़ता और शब्द-संयम से आने वाले परिष्कार का बोध कराती हैं जो उनके बाद के काम में फलीभूत भी हुआ।
गगन की इन कविताओं में स्त्री-मन का एक अनुशासित लेकिन भव्य संशय और दुःखबोध है, जो अभी तक रूढ़ि नहीं बना। इन कविताओं के रचाव का रंग बड़ी सहजता से कहीं गहन और कहीं धीमा होता चलता है, ऊपर से चढ़ाया कोई रोग़न इनमें लगभग नहीं है। इसलिए इन कविताओं में भावों का गठन और विकास गगन का एकदम अपना भी है, और हमारे समय में एक स्त्री की अवस्थिति की खुरदुरी सचाइयों का आईना भी! उदासी का मतलब यहाँ पूरी चारित्रिक दृढ़ता से एक ऐतिहासिक सच से रू-ब-रू होना है—रूखी हृदयहीनता या पीड़ा का विलास नहीं।
इतिहास गगन की परवर्ती कविताओं में दुःख, निर्लिप्तता, राग और विराग के सन्दर्भों में बार-बार आया है। उत्कट मोह और उत्कट वीतरागिता से भरे ब्यौरे उनमें यत्र-तत्र ऐतिहासिक अवशेषों की मार्मिक और आतंकित करने वाली भव्यता के साथ बिखरे हुए हैं। इतिहास के या किन्हीं शब्दातीत अनुभवों को बड़ी कुशलता से उद्दीप्त कर पाने की गगन की क्षमता यहाँ पहले-पहल अपने अँखुए खोल रही है।
गगन के पास पंजाब की भाषा के, इतिहास के गहरे संस्कार हैं। कई मध्ययुगीन ऐतिहासिक अनुभवों-दुःस्वप्नों की टापें इसीलिए कई बार अचानक इन कविताओं में हमें सुनाई देती हैं। शब्दों की यह आह्वानात्मक ताक़त गगन के गद्य में भी है, और पद्य में भी।
सच्चे और सही मायनों में यह विवेक की कविताएँ हैं, काल को वामन-डगों से मापती हुईं।
—मृणाल पांडे
Pratinidhi Kavitayein : Gagan Gill
- Author Name:
Gagan Gill
- Book Type:

- Description:
गगन गिल की कविताओं की एक यात्रा स्पष्ट दिखाई देती है—बाहर से भीतर की ओर की। ‘एक दिन लौटेगी लड़की’ शीर्षक उनका संग्रह अपने समय की एक घटना थी। हिन्दी के कविता-संसार ने उसे ख़ूब ही उत्साह से ग्रहण किया था। इस संग्रह की कविताओं ने भीतर से उदास लेकिन फिर भी संसार में अपनी जगह को लेकर पर्याप्त सजग एक लड़की की छवि को प्रकाशित किया। भीतर की वह उदासी, अकेलापन, अपने ‘होने’ और अपने एक ‘स्त्री होने’ का वह अहसास जैसे बड़ा होता गया; संसार का बाहरी शोर और दिल की थपक-थपक जैसे आमने-सामने खड़ी इकाइयाँ हो गईं। इस दौर में उन्होंने जो लिखा वह सृष्टि के पवित्रतम की खोज थी, जो मनुष्य के आत्म की कंदराओं में स्थित होता है। आकांक्षाओं से मुक्त, अपने होने की कील से बिंधा हुआ, सम्पूर्ण और व्यथित। इस चयन में उनकी पूरी चेतना-यात्रा को सुविचारित ढंग से सँजोया गया है—‘मैं जब तक आई बाहर’ संग्रह तक, जिसमें पीड़ा का संचार भीतर और बाहर दोनों तरफ़ होता है। देश और काल की पौरुषपूर्ण व्यवस्था के बीच स्त्री की सूक्ष्म असहमति और अपने दुःख को देखने का साक्षी भाव उनके संवेदनशील और सटीक शब्द-संयोजन में एक अविस्मरणीय अनुभव की तरह अंकित होता है।
Thapak Thapak Dil Thapak Thapak
- Author Name:
Gagan Gill
- Book Type:

- Description:
भाषा के छंद और स्वच्छंद के बीच से अपना रास्ता बनातीं गगन गिल की ये कविताएँ न केवल उनकी अपनी रचना-यात्रा का, बल्कि आधुनिक हिंदी कविता का भी एक नया पड़ाव मानी गयीं। इस संग्रह के साथ, कह सकते हैं कि, हिंदी कविता में लय का संताप और संताप की लय इतनी मुखर होकर लौटी।
गगन गिल का केंद्रीय सरोकार मानव-नियति का दुख रहा है। कभी वह उन्हें शोकगीतों तक ले गया है और कभी बौद्ध दर्शन तक। उन्होंने इस विषय को इतनी विविध तरह से टटोला है, गोया दुख ईश्वर जैसे किसी मूर्तिकार का कोई शिल्प हो। इस प्रक्रिया में उन्होंने जिस चीज़ को एक औज़ार की तरह बरता है वह है भाषा और कहन का शिल्प।
‘थपक थपक दिल थपक थपक’ की संश्लिष्ट बुनावट भाषा-प्रयोग में एक घटना की तरह है। किसी स्थिति-विशेष को भाषा (की चाबी) से खोलते हुए, फिर भाषा को लय से, लय को शब्द-आवृत्ति से और शब्द-आवृत्ति से मौन को, अबोले को उघाड़ते-उलीचते ये रचनाएँ एक अनूठी संरचना गढ़ती हैं जो हमें कविता के उत्स की अनुभूति कराती है। दुःख की पहली आह की तरह।
ये कविताएँ दुर्बोध दीखती हैं, हैं नहीं। सरल जान पड़ती हैं, निकलती नहीं। वे अर्थ-विशेष के आशय से बार-बार फिसलती हैं और इस विचलन में ही अर्थवान होने का स्वप्न रचती हैं, इस आकांक्षा में, कि यदि कहीं कोई तत्त्व है, तो वह भाषा और शब्दार्थ से परे है जिसे जानना उतना ज़रूरी नहीं जितना महसूस करना और आत्मसात करना।
Main Jab Tak Aayi Bahar
- Author Name:
Gagan Gill
- Book Type:

- Description:
‘मैं क्यों कहूँगी तुम से/अब और नहीं/सहा जाता/मेरे ईश्वर’—गगन गिल की ये काव्य-पंक्तियाँ किसी निजी पीड़ा की ही अभिव्यक्ति हैं या हमारे समय के दर्द का अहसास भी? और जब यह पीड़ा अपने पाठक को संवेदित करने लगती है तो क्या वह अभिव्यक्ति प्रकारान्तर से प्रतिरोध की ऐसी कविता नहीं हो जाती, जिसमें ‘दर्दे-तनहा’ और ‘ग़मे-ज़माना’ का कथित भेद मिटकर ‘दर्दे-इनसान’ हो जाता है? कविता इसी तरह इतिहास अर्थात समय का काव्यान्तरण सम्भव करने की ओर उन्मुख होती है।
गगन गिल की इन आत्मपरक-सी लगती कविताओं के वैशिष्ट्य को पहचानने के लिए मुक्तिबोध के इस कथन का स्मरण करना उपयोगी हो सकता है कि कविता के सन्दर्भ ‘काव्य में व्यक्त भाव या भावना के भीतर से भी दीपित और ज्योतित’ होते हैं, उनका स्थूल संकेत या भाव-प्रसंगों अथवा वस्तु-तथ्यों का विवरण आवश्यक नहीं है। इन कविताओं का अनूठापन इस बात में है कि वे एक ऐसी भाषा की खोज करती हैं, जिसमें सतह पर दिखता हल्का-सा स्पन्दन अपने भीतर के सारे तनावों-दबावों को समेटे होता है—बाँध पर एकत्रित जलराशि की तरह।
यह भी कह सकते हैं कि ये कविताएँ प्रार्थना के नये-से शिल्प में प्रतिरोध की कविताएँ हैं—प्रतिरोध उस हर सत्ता-रूप के सम्मुख जो मानवत्व मात्र पर, स्त्रीत्व पर भी, आघात करता है। इन आघातों का दर्द अपने एकान्त में सहने पर ही कवि-मन पहचान पाता है कि ‘मैं जब तक आयी बाहर एकान्त से अपने/बदल चुका था मर्म भाषा का’। ये कविताएँ काव्य-भाषा को उसकी मार्मिकता लौटाने की कोशिश कही जा सकती हैं।
—नन्दकिशोर आचार्य
Andhere Mein Buddha
- Author Name:
Gagan Gill
- Book Type:

- Description:
उनींद, अवसाद, शोक, स्मृतियाँ, आत्मा के ख़ाली पात्र को भरता एकान्त और उसे वापस सोख लेता अकेलापन, मृत्यु, बिछोह और दुख, ‘अँधेरे में बुद्ध’ की कविताएँ ऐसे ही तत्वों से बनी हैं। ये कविताएँ जितनी अपने बारे में हैं उतनी ही दूसरों के बारे में, और उन चीज़ों के बारे में जो सबकी हैं, जैसे सपने, जैसे हताशाएँ, जैसे पीड़ा।
ये कविताएँ अपने आधे सिर के दर्द के साथ कभी ईश्वर से संवाद करती हैं, कभी अपनी देह से, कभी-कभी उन लोगों से भी जो चले गए, लेकिन जो हमारी देह की किसी टीसती नस में अभी भी जीवित बहते हैं।
ये कविताएँ उन ततैयों के बारे में भी हैं जो जीवन की दीप्ति में प्रकाशमान हमारे माथों के भीतर चुपचाप बैठे रहते हैं, और व्यर्थताबोध की किसी तीखी कौंध में अचानक भन्नाने लगते हैं, और बेशक उनके बारे में भी जो चुप बैठते ही नहीं, रात-दिन भन्नाते ही रहते हैं—हर साँस पर और तेज़।
दुख के खोटे सिक्के को बचाने को व्याकुल इन कविताओं में प्रेम का दुख भी है, आत्मा और देह के दुख भी हैं, इतिहास के दुख भी हैं, जीवन की दैनिंदिनी की मशीन से झरते दुख भी हैं...और वह दुख भी है जो बस इसीलिए होता है, क्योंकि हम होते हैं, जिसे बुद्ध ने देखा।
Yah Aakanksha Samay Nahin
- Author Name:
Gagan Gill
- Book Type:

- Description:
कोई भी कविता अपने समय से गुज़रकर ही सार्थकता अर्जित करती है, यह बात गगन गिल की कविता भी प्रमाणित तो करती है, लेकिन इस तरह नहीं कि समय उनके यहाँ कविता का कोई घोषित विषय हो। ये कविताएँ निस्सन्देह नितान्त निजी अनुभूतियों की कविताएँ हैं। लेकिन यदि कवयित्री इन नितान्त निजी अनुभूतियों और अपने स्वर-वैशिष्ट्य को अक्षत रखते हुए भी युग-संवेदन को व्यंजित कर पाती है, तो इसकी वजह यही है कि समय उसकी काव्योक्तियों में नहीं बल्कि उसके स्थापत्य में, उसकी लय-संरचना में विन्यस्त होता है। यही कारण है कि गगन गिल की कविता को एक दृश्य की तरह देखें तो वह एक शान्त, निरावेग झील का आभास देती है, लेकिन उसे स्पर्श करें तो समय के सभी तनावों-दबावों की थरथराहट महसूस होती है। अक्सर यह कविता शब्दों में नहीं, उनके बीच के अन्तराल में सम्भव होती है। गगन गिल की कविता में शब्द और शब्द के बीच जिस तनाव का अनुभव होता है, उसे सिर्फ़ संगीत की तरह महसूस किया जा सकता है, उसका वक्तव्य नहीं हो सकता।
इसलिए इस बात का महत्त्व एक हद तक ही है कि ये कविताएँ प्रेम के बारे में हैं, वैराग्य के बारे में अथवा स्त्री की स्थिति आदि के बारे में। 'जल के भीतर सूख रहे जल', 'गूँगे के कंठ में याद आया गीत' अथवा 'पिछले जन्म में अधबनी रह गयी थी रोटी तुम्हारे नाम की' ऐसी निजी अनुभूतियों को व्यंजित करते शब्दों के बीच के अन्तराल को विन्यस्त करती एक सम्पीडक-कॉम्प्रेस्ड- लय न केवल समय की जटिलता और विकलता की ध्वन्याकृति हो जाती है, बल्कि इसी कारण अपनी ही एक भाषा की तलाश भी। इसलिए इन काव्यानुभूतियों से गुज़रते हुए रॉबर्तो हुआरोज़ की इस उक्ति का स्मरण आना अस्वाभाविक नहीं है कि कविता भाषा के तल में अस्तित्व का विस्फोट है।
—नन्दकिशोर आचार्य
Vichar Ka Aina Kala Sahitya Sanskriti : Mahatma Gandhi
- Author Name:
Mahatma Gandhi
- Book Type:

- Description:
विचार का आईना शृंखला के अन्तर्गत ऐसे साहित्यकारों, चिन्तकों और राजनेताओं के ‘कला साहित्य संस्कृति’ केन्द्रित चिन्तन को प्रस्तुत किया जा रहा है जिन्होंने भारतीय जनमानस को गहराई से प्रभावित किया। इसके पहले चरण में हम मोहनदास करमचन्द गांधी, रवीन्द्रनाथ ठाकुर, प्रेमचन्द, जयशंकर प्रसाद, जवाहरलाल नेहरू, राममनोहर लोहिया, रामचन्द्र शुक्ल, सूर्यकान्त त्रिपाठी ‘निराला’, महादेवी वर्मा, सच्चिदानन्द हीरानन्द वात्स्यायन ‘अज्ञेय’ और गजानन माधव मुक्तिबोध के विचारपरक लेखन से एक ऐसा मुकम्मल संचयन प्रस्तुत कर रहे हैं जो हर लिहाज से संग्रहणीय है।
मोहनदास करमचन्द गांधी ऐसे जननेता हैं जो वैश्विक उपस्थिति रखते हैं। वे भारतीय स्वतंत्रता आन्दोलन के ऐसे नायक हैं जिन्होंने इसे जनता का आन्दोलन बना दिया। औपनिवेशिक सत्ता का प्रतिरोध करते हुए उन्होंने सत्य और अहिंसा को अपनी लड़ाई का केन्द्रीय शिल्प बनाया। उन्होंने साध्य ही नहीं साधन की भी पवित्रता की बात की, बेलगाम उपभोग की संस्कृति का विरोध किया। सत्याग्रही के रूप में विरोधी के प्रति भी किसी तरह की कटुता न रखने की बात कही। अपने समय के शीर्ष लेखकों, चिन्तकों और कलाकारों पर गांधी के विचारों का गहरा असर रहा। वे लोगों से निरन्तर संवादरत रहे और अपने विचारों को मजबूती से रखते रहे। हमें उम्मीद है कि उनके कला, साहित्य और संस्कृति सम्बन्धी लेखन को पढ़ते हुए इस कठिन समकाल से जूझने की अनेक राहें रोशन होंगी।
Urdu Shabdon Ka Guldasta
- Author Name:
Azra Naqvi
- Book Type:

- Description:
Urdu is known for its beauty, elegance, and rich vocabulary. “Urdu Shabdon ka Guldasta” is a unique attempt by Rekhta Foundation to help you learn these Urdu words in an easy and interesting manner. This is not a dictionary, but Urdu words are presented here in a story format to make vocabulary learning more pleasant. Words are also grouped by situation to help learners learn multiple related words from a single word. Exercises are provided at the end of each chapters for quick revisions. This book will prove to be an important guide to help you learn commonly used words in urdupoetry and you would also be able to learn basic communications in Urdu. Do not forget to write your comments and views here to share your thoughts about the book. The offered book is a ‘Word Power Made Easy’ style book to learn and improve your urduvocabulary quickly! The book contains a plethora of words on various topics including Greetings, Love, Knowledge, Relations, People, Domestic Things, Attire, Taste, Colours, Parts of Body, Market, Travel, Occupations, Poetry, Tavern, Garden, and Nature. Through the various chapters of this book, you will get to know the common mistakes made by people and learn to pronounce and spell Urdu words correctly. You will also learn about the roots and various forms of different words, and how plural words are formed from singular ones. Also, you will learn how to greet, host, and thank people on different occasions. Loaded with easy-to-understand explanations, basic grammar lessons, and chapter-wise exercises, the book helps you greatly to learn to speak Urdu with confidence. In short, this book will turn you into a sophisticated person with proper knowledge of Urdu language and necessary etiquette.
Kavya Bhasha Par Teen Nibandh
- Author Name:
Ramswaroop Chaturvedi
- Book Type:

- Description:
काव्य-भाषा सम्बन्धी चिन्तन समकालीन आलोचना के केन्द्र में आ गया है। हिन्दी में, इस विषय पर मौलिक दृष्टि से लिखी गई पुस्तकें बहुत कम हैं। प्रख्यात आलोचक डॉ. रामस्वरूप चतुर्वेदी के आलोचनात्मक चिन्तन का प्रमुख प्रतिमान काव्य-भाषा रही है। इस पुस्तक में उन्हीं के लिखे हुए तीन निबन्ध संकलित हैं जिनकी हिन्दी आलोचना में प्रशंसा होती रही है।
इस विषय पर इन निबन्धों का ऐतिहासिक और वैचारिक महत्त्व है।
Hindi Sahitya : Ek Saral Parichay
- Author Name:
Suraiyya Sheikh
- Book Type:

- Description:
इतिहास ग्रन्थों के अतिरिक्त हिन्दी साहित्य के विभिन्न कालखंडों, काल-रूपों और धाराओं पर अनेक शोध-प्रबन्ध एवं समीक्षात्मक ग्रन्थ प्रकाश में आए हैं। इनमें साहित्य के अनेक अज्ञात तथ्यों और अनिर्णीत प्रश्नों को नवीन दृष्टिकोण से नवालोक में प्रस्तुत किया गया है, किन्तु हिन्दी अनुसन्धान-जगत के इन नवीन निष्कर्षों और परिणामों का अतीव सतर्कतापूर्वक समन्वय एवं समाहितीकरण इतिहास-लेखन की दिशा में अभी शेष है। अतः नवीन शोध-परिणामों और विकसित साहित्य-चेतना के आलोक में हिन्दी साहित्य के इतिहास का पुनर्गठन और लेखन आवश्यक है। निस्सन्देह आज हिन्दी साहित्य के इतिहास में सम्बन्धित शताब्दिक पुस्तकें उपलब्ध हैं, किन्तु अभी तक इस दिशा में उचित व सन्तोषजनक प्रगति नहीं हुई है। हमने उस अभाव को दृष्टि में रखकर इस ग्रन्थ का प्रणयन किया है।
Ghati
- Author Name:
Dr. Rashmi
- Book Type:

- Description:
This Book Doesn't have any Description.
Vibhajan Ki Vibheeshika
- Author Name:
Shri Manohar Puri
- Book Type:

- Description:
भारत का विभाजन विश्व के सबसे बड़े नरसंहार के रूप में हिंदुओं और सिखों की महिलाओं की छाती पर हुआ। इसमें 30 लाख से अधिक लोगों की नृशंस हत्या हुई। विभाजन के समय हिंदू और सिख पुरुषों को एक लाइन में खड़ा करके पाकिस्तानी सेना ने गोलियों से भून दिया। एक लाख से अधिक महिलाओं का अपहरण व बलात्कार करके अधिकांश को मौत के घाट उतार दिया गया | उनकी संपत्ति को हड़प लिया अथवा उसे आग के हवाले कर दिया । विश्व में यह एकमात्र ऐसा उदाहरण है, जब करोड़ों की जनसंख्या का विनिमय बिना किसी योजना एवं पूर्व प्रबंधों के अचानक कर दिया गया। पाकिस्तान द्वारा प्रायोजित इन दंगों में 1.5 करोड़ लोग विस्थापित हुए। विभाजन का यह काला अध्याय विस्थापित हुए, भगाए गए, मारे गए और भटककर मौत को गले लगानेवाली मनुष्यता के खून के छींटों से भरा हुआ है। यह इतिहास के चेहरे पर पुती वह कालिमा है, जिसे कभी साफ नहीं किया जा सकेगा। इसका दंश इस पीढ़ी ने झेला, पर उसका दर्द और मार वहाँ से विस्थापित हुए परिवार आज भी झेल रहे हैं। विभाजन का दुर्भाग्यपूर्ण पक्ष यह है कि इसके लिए उत्तरदायी नेता अपने इस अमानवीय कुकृत्य के लिए कभी शर्मिंदा नहीं हुए, बल्कि विभीषिका को “रक्तहीन क्रांति' कहकर स्वयं को गौरवान्वित करते रहे । इन्हीं खून के धब्बों की लोमहर्षक घटनाओं पर उकेरा गया है यह अत्यंत मर्मस्पर्शी एवं संवेदनशील उपन्यास--'विभाजन की विभीषिका ।
Kargil Girl
- Author Name:
Flt Lt Gunjan Saxena
- Book Type:

- Description:
सन् 1994 में बीस साल की गुंजन सक्सेना पायलट कोर्स के लिए चौथे शॉर्ट सर्विस कमिशन (महिलाओं के लिए) की चयन प्रक्रिया में शामिल होने के लिए मैसूर जानेवाली ट्रेन पर सवार होती है। चौहत्तर सप्ताह की कमरतोड़ ट्रेनिंग के बाद वह डिंडीगुल स्थित एयरफोर्स एकेडमी से पायलट ऑफिसर गुंजन सक्सेना के रूप में पास आउट होती है। 3 मई, 1999 को स्थानीय चरवाहों ने कारगिल में पाकिस्तानी घुसपैठ की खबर दी। मध्य मई तक घुसपैठियों को खदेड़ने के मकसद से हजारों भारतीय सैनिक पहाड़ पर लड़े जानेवाले युद्ध में शामिल थे। भारतीय वायुसेना ने ऑपरेशन ‘सफेद सागर’ का आगाज किया, जिसमें उसके सभी पायलट मोर्चे पर थे। महिला पायलटों को जहाँ अब तक युद्ध क्षेत्र में नहीं उतारा गया था, वहीं उन्हें घायलों के बचाव, रसद गिराने और टोह लेने के लिए भेजा गया। गुंजन सक्सेना को अपनी क्षमता प्रमाणित करने का यह स्वर्णिम अवसर था। द्रास और बटालिक क्षेत्रों में बेहद जरूरी आपूर्ति को हवा से गिराने और लड़ाई के बीच से घायलों का बचाव करने से लेकर, पूरी सावधानी से दुश्मनों के ठिकानों की जानकारी अपने सीनियर अधिकारियों तक पहुँचाने और एक बार तो अपनी एक उड़ान के दौरान पाकिस्तानी रॉकेट मिसाइल से बाल-बाल बचने तक, सक्सेना ने निर्भीकतापूर्वक अपने दायित्वों को निभाया, जिससे उन्होंने यह नाम अर्जित किया—कारगिल गर्ल। महिलाओं की सामर्थ्य, क्षमताओं और अद्भुत जिजीविषा की कहानी है गुंजन सक्सेना की यह प्रेरणाप्रद पुस्तक
Azadi Banam Phansi Athva Kalapani
- Author Name:
Raghunandan Sharma
- Book Type:

- Description:
संवेदनशील मन के राष्ट्रबोध की छटपटाहट जब अभिव्यक्त होने को मचलती है तब आती है ‘आजादी बनाम फाँसी अथवा कालापानी’ जैसी कृति। भारतीयों के लिए काला पानी केवल शब्द या भू-खंड की संज्ञा नहीं है। वह भारत के हुतात्माओं के बलिदानों की, ब्रिटिश साम्राज्यवाद की क्रूर यातनाओं की कहानी का जीवंत इतिहास है। निस्संदेह अहिंसक सत्याग्रह ने सामान्य जन के मन में स्वतंत्रता की ज्वाला को प्रज्वलित रखा लेकिन उन हुतात्माओं के बलिदानों की अनदेखी नहीं की जा सकती, जो हँसते-हँसते भारतमाता को स्वतंत्र कराने का सपना लेकर फँसी के फंदों पर चढ़ गए और मरते-मरते भी ‘वंदे मातरम्’ का जयघोष करते रहे। इस रक्तरंजित इतिहास का बार-बार स्मरण वही कर सकते हैं जिनके हृदयों ने राष्ट्रबोध को आत्मसात कर लिया है। इस कृति के रचनाकार श्री रघुनंदन शर्मा उस आत्मबोध को कहते ही नहीं, स्वयं जीते भी हैं। देश की नई पीढ़ी स्वतंत्रता संघर्ष की अनेक गाथाओं से अपरिचित है। प्रस्तुत पुस्तक उस इतिहास को सीधी सरल भाषा में उन तक पहुँचा देगी। यह इसलिए भी आवश्यक है कि हम उस पराधीन मानसिकता से मुक्त हों, जिसके कारण यह भुला दिया गया है कि भारत राजनीतिक रूप से भले ही पराधीन रहा हो, पर उसने स्वतंत्रता के मूल्य को संरक्षित रखने के लिए बडे़-से-बड़ा बलिदान देने की आत्म सजगता को बनाए रखा। —कैलाशचंद्र पंत (मंत्री संचालक म.प्र. राष्ट्रभाषा प्रचार समिति)
Pokhran
- Author Name:
Uday Singh
- Book Type:

- Description:
1974 में परमाणु-परीक्षण 'स्माइलिंग बुद्धा' की सफलता ने भारत को परमाणु-शक्ति के तौर पर उल्लेखनीय गति प्रदान की। लेकिन पोखरण के निवासियों, विशेषकर चैतन्य पर, इसके दुष्प्रभाव की खबर मीडिया की सुर्खियाँ नहीं बनीं । बहुत जल्द ही यह स्पष्ट हो गया कि रेडियो एक्टिव फॉलआउट के इर्द-गिर्द बुने गए इस षड्यंत्र का गहरा संबंध इसकी स्थापना से जुड़ा था। इस षड्यंत्र को छिपाने में जिनका हाथ है, वे इस राज को दफनाने के लिए भरपूर और हरसंभव प्रयास कर रहे हैं । चैतन्य इस सच्चाई को उजागर करने की राह पर चल पड़ता है। जारा का साथ पाकर उसे विश्वास हो जाता है कि वह लोगों को न्याय दिला सकता है । लेकिन जब नियति जारा को उससे दूर कर देती है, तो वह प्रतिशोेध की आग में जलने लगता है। धमकियों से डरे बिना वह एक मिशन पर निकल पड़ता है, जो उसे पोखरण के रेगिस्तान से सीरिया की जमीन तक पहुँचा देता है और एम.आई.टी. की सभाओं तक। एक दिलचस्प मोड़ लेते हुए ' पोखरण' मुख्य रूप से बदले की असाधारण यात्रा, साहस, प्रेम और अजेय मानवीय शक्ति की कहानी है, जिसे पढ़कर पाठक रोमांचित हो जाएँगे।
Kashmir Ka Sanskritik Avabodh Aur Samkaleen Vimarsh
- Author Name:
Prof. Kripashankar Chaubey +1
- Book Type:

- Description:
स्वतंत्रता के बाद के 75 वर्षो में कुछ प्रत्यय अर्थात् गहन चर्चा के, गंभीर विमर्श के विषय बने रहे हैं। उनमें कश्मीरियत सबसे प्रमुख प्रत्यय है। कश्मीरियत अर्थात् कश्मीर की पहचान । कश्मीर के लोगों का वैशिष्ट्य । पर इस विमर्श में सर्वदा दो हिस्से दिखाई देते रहे। एक वह जो कश्मीरियत को भारत से असंपृक्त, विभक्त और एकांतिक रूप में देखता रहा है तो दूसरी ओर वह जो कश्मीरियत को भारतीयता के उत्सबिंदु के रूप में देखता है। पर देखने की ये दोनों दृष्टियां सांस्कृतिक कम, राजनीतिक अधिक हैं। यह पुस्तक कश्मीर को नए तरीके से नहीं बल्कि यत्न है कश्मीर को सम्यक् तरीके से देखना या समग्रता में देखना। पार होकर देखना और पारावार में देखना। पौराणिकता में देखना तो आधुनिकता में देखना । दोनों या पौराणिकता और आधुनिकता के बीच निरंतरता में देखने से ही सुरभि होती है। ठहराव सड़न और दुर्गध पैदा करती है। ठहराव खत्म हुआ है तो निरंतरता आएगी। इस विश्वास के साथ इस पुस्तक में सांस्कृतिक अवबोध और समकालीन विमर्श को काल के सातत्य में रखने की कोशिश की गई है।
Kashmir Ka Sanskritik Avabodh Aur Samkaleen Vimarsh
Prof. Kripashankar Chaubey
20% off₹ 300
₹ 240
Available
Duniya Ko Badal Denewale 50 Yuddha
- Author Name:
Pallav Kishore
- Book Type:

- Description:
प्रकति में जब भूकंप या सूनामी इत्यादि आपदाओं के कारण उथल-पुथल मचती है तो दुनिया के नक्शे में बदलाव होता है और जब कतिपय कारणों से सामाजिक वर्णों में युद्ध छिड़ता है तो समाज के स्तर पर दुनिया में बड़ा बदलाव आता है। प्रथम विश्वयुद्ध के बाद अनेक यूरोपीय और अफ्रीकी देशों की भू- सीमाओं और मानविकी में उल्लेखनीय परिवर्तन हुआ, जिससे स्थानीय सभ्यता और संस्कृति पर दीर्घकालिक प्रभाव पड़ा। दूसरे विश्वयुद्ध ने आग में घी का काम किया और पूरी दुनिया को प्रभावित किया। भारत के आजादी के संग्राम और उसके बाद भारत का विभाजन कर पाकिस्तान बनाया गया--उस दौरान हुए भीषण संघर्ष में न केवल दुनिया के नक्शे पर एक नए देश का आविर्भाव हुआ, वरन् भयंकर रक्तक्रांति भी हुईं। इसने आगामी अनेक वर्षों तक मानव सभ्यता को प्रभावित किया। दरअसल जब से दुनिया बनी है, युद्ध कहीं-न-कहीं होते रहे हैं। आज भी अनेक देश युद्ध की आग में झुलस रहे हैं--सीरिया संकट, उत्तर कोरिया संकट, अफगानिस्तान में तालिबान संकट, भारत- पाक तना-तनी, इजराइल-फिलिस्तीन संकट। दुनिया में अमन-शांति के लिए आवश्यक है कि मानवहित में इन युद्धों पर पूर्णविराम लगे।
Customer Reviews
Be the first to write a review...
0 out of 5
Book