🇮🇳 India’s home-grown full-stack ecosystem for Publishers, Authors, Writers, and Readers. 🎊🎊 Celebrate Your Language, Authors from Your Own Land, with Rachnaye!!! 🎊🎊 Enjoy 🎧 Audiobooks at Rachnaye, download the Rachnaye App from Play Store or App Store

Samkalin Hindi Upanyas : Samay Se Sakshatkar

Ships within 48 Hours

Free Shipping in India on orders above Rs. 1100


About the book

हिन्दी उपन्यास और साठोत्तरी भारतीय जीवन–सन्दर्भ विशिष्ट संवाद–सूत्रों के सहारे आपस में जुड़े हुए हैं। इस जुड़ाव का विस्तार जिन कृतियों में ख़ास तौर पर विद्यमान हैं, उनमें ‘राग दरबारी’, ‘महाभोज’ और ‘जहाँ बाँस फूलते हैं’ की पहचान सबसे अलग है। साठोत्तरी भारत का कड़वा और नंगा सच इन रचनाओं की विषयवस्तु का जनक है। अपने देश और समाज के साथ–साथ अपने समय की परख करने के लिए इन उपन्यासों तथा इनके जैसी आँच रखनेवाले कुछेक अन्य उपन्यासों का अध्ययन विश्लेषण अनिवार्य है। डॉ. ई. विजयलक्ष्मी ने अपनी इस समीक्षा–पुस्तक में मुख्यत: दस साठोत्तरी उपन्यासों को अध्ययन का आधार बनाया है और उनके सहारे अपने समय से साक्षात्कार का प्रयास किया है। उनके द्वारा चुने गए सभी उपन्यास महत्त्वपूर्ण लेखकों के हैं तथा लम्बे समय से चर्चा में रहे हैं। लेखिका ने उनके विश्लेषण व मूल्यांकन में उपलब्ध सामग्री का सदुपयोग किया है और अपने निजी अध्ययन से प्राप्त नवीन निष्कर्ष पाठकों तक पहुँचाने की कोशिश की है। डॉ. विजयलक्ष्मी का यह समीक्षा–ग्रन्थ अध्ययन की स्वस्थ एवं तटस्थ परम्परा की पहचान करानेवाला है।

Read more

₹ 795

636 20% off

Available

Rachnaye membership

Pick a membership and see exactly what it gets you

  • 15 Free Deliveries
  • 1 Free Book up to ₹500 MRP

Format

Frequently bought together
Samkalin Hindi Upanyas : Samay Se Sakshatkar This book ₹636
Adhyatmik Guruon Ke Prerak Vichar Swati Gautam ₹250
3 books selected ₹1,345 ₹1,186

100% Original

Fast Dispatch

Secure Payment

About the Book

हिन्दी उपन्यास और साठोत्तरी भारतीय जीवन–सन्दर्भ विशिष्ट संवाद–सूत्रों के सहारे आपस में जुड़े हुए हैं। इस जुड़ाव का विस्तार जिन कृतियों में ख़ास तौर पर विद्यमान हैं, उनमें ‘राग दरबारी’, ‘महाभोज’ और ‘जहाँ बाँस फूलते हैं’ की पहचान सबसे अलग है। साठोत्तरी भारत का कड़वा और नंगा सच इन रचनाओं की विषयवस्तु का जनक है। अपने देश और समाज के साथ–साथ अपने समय की परख करने के लिए इन उपन्यासों तथा इनके जैसी आँच रखनेवाले कुछेक अन्य उपन्यासों का अध्ययन विश्लेषण अनिवार्य है।

डॉ. ई. विजयलक्ष्मी ने अपनी इस समीक्षा–पुस्तक में मुख्यत: दस साठोत्तरी उपन्यासों को अध्ययन का आधार बनाया है और उनके सहारे अपने समय से साक्षात्कार का प्रयास किया है। उनके द्वारा चुने गए सभी उपन्यास महत्त्वपूर्ण लेखकों के हैं तथा लम्बे समय से चर्चा में रहे हैं। लेखिका ने उनके विश्लेषण व मूल्यांकन में उपलब्ध सामग्री का सदुपयोग किया है और अपने निजी अध्ययन से प्राप्त नवीन निष्कर्ष पाठकों तक पहुँचाने की कोशिश की है। डॉ. विजयलक्ष्मी का यह समीक्षा–ग्रन्थ अध्ययन की स्वस्थ एवं तटस्थ परम्परा की पहचान करानेवाला है।

Book details

Fast dispatchShips within 48 hours
Secure paymentOnline, or cash on delivery on eligible orders
100% OriginalGenuine copy from Rajkamal Prakashan Samuh
Format
Hardbound
Publisher
Rajkamal Prakashan Samuh
Edition
3rd
Publication year
2006
Weight
414 grams
ISBN-13
9788183610636
Pages
246
Reading time
~8 hrs
Age
18+
Country of origin
India
Dimensions
14 × 22 cm
Language
Hindi

Recommended for you

Customer reviews

Be the first to write a review

Read this one? Tell other readers what you thought about the story, the translation and the print.

Offers

Loading offers…

whatsapp