🇮🇳 India’s home-grown full-stack ecosystem for Publishers, Authors, Writers, and Readers. 🎊🎊 Celebrate Your Language, Authors from Your Own Land, with Rachnaye!!! 🎊🎊 Enjoy 🎧 Audiobooks at Rachnaye, download the Rachnaye App from Play Store or App Store

Aadhunik Kavita Ka Punarpath

Ships within 48 Hours

Free Shipping in India on orders above Rs. 1100


About the book

प्रस्तुत पुस्तक भारतेन्दु से लेकर समसामयिक कविता तक में विद्यमान नए पाठ की सम्भावना का सन्‍धान करते हुए उसका वस्तुनिष्ठ एवं गहन विश्लेषण प्रस्तुत करती है। इसमें ‘भारतेन्दु का काव्यदर्शन’, ‘शलाकापुरुष महावीर प्रसाद द्विवेदी की नारी चेतना’, ‘साकेत की उर्मिला का पुनर्पाठ’, ‘गुप्त जी की कैकेयी का नूतन पक्ष’, ‘जयशंकर प्रसाद के पुनर्मूल्यांकन के ठोस आयाम’, ‘प्रसाद साहित्य में राष्ट्रीय चेतना का स्वरूप’, ‘कामायनी में प्रकृति-चित्रण का स्वरूप’, ‘कामायनी : एक उत्तर आधुनिक विमर्श’, ‘स्त्री-विमर्श और प्रसाद काव्य के शिखर नारी चरित्र’, ‘निराला की आलोचना-दृष्टि का विश्लेषण’, ‘दिनकर का कुरुक्षेत्र’, ‘रश्मिरथी का पुनर्पाठ’, ‘शिवमंगल सिंह ‘सुमन’ के काव्य में राष्ट्रीय चेतना’, ‘अज्ञेय के काव्य में संवेदनशीलता’, ‘भवानी प्रसाद मिश्र के काव्य में गांधीवादी चेतना’, ‘नरेश मेहता का संवेदनात्मक औदात्य’, ‘मुक्तककार बेकल’, ‘अन्तस् के स्वर : कवि मन की पारदर्शी अभिव्यक्ति’, ‘धूमिल अर्थात् कविता में लोकतंत्र’, ‘ग़ज़ल दुष्यन्त के बाद : एक विश्लेषण’, ‘कविता का समाजशास्त्र एवं शोभनाथ यादव की कविताएँ’, ‘कविताओं का सौन्दर्यशास्त्र और शोभनाथ की कविताएँ’, ‘रुद्रावतार : अद्भुत भाषा सामर्थ्य की विलक्षण कविता’, ‘संशयात्मा के ख़तरे से आगाह कराती कविताएँ’, ‘हिन्दी ग़ज़ल का दूसरा शिखर : दीक्षित दनकौरी’, ‘ग़ज़ल का अन्दाज़ ‘कुछ और तरह से भी’’, ‘चहचहाते प्यार की गन्ध से घर-बार महकाते गीत’, ‘सामाजिक प्रतिबद्धता का दलित-स्त्रीवादी वृत्त’, ‘समकालीन हिन्दी कविता : दशा एवं दिशा’ तथा ‘समकालीन कविता के सामाजिक सरोकार’ जैसे विषयों के अन्तर्गत इस युग के समूचे काव्य का विशद् विश्लेषण किया गया है। साथ ही परिशिष्ट के अन्तर्गत ‘जन अमरता के गायक विंदा करंदीकर’ तथा ‘परम्परा एवं आधुनिकता के समरस कवि अरुण कोलटकर’ जैसे शीर्षकों के अन्तर्गत मराठी के दो शिखर कवियों का सम्यक् विश्लेषण किया गया है। छात्रों, मनीषियों, चिन्तकों तथा सामान्य पाठकों के लिए समान रूप से उपयोगी यह पुस्तक आधुनिक काव्य पर विशिष्ट अध्ययन होने के साथ-साथ नवीन समीक्षात्मक प्रतिमानों के सन्‍धान द्वारा उसका पुनर्पाठ तैयार करने का एक गम्भीर और साहसिक प्रयास है।

Read more

₹ 995

796 20% off

Available

Rachnaye membership

Pick a membership and see exactly what it gets you

  • 15 Free Deliveries
  • 1 Free Book up to ₹500 MRP

Format

Frequently bought together
Aadhunik Kavita Ka Punarpath This book ₹796
Gorakhbani Gorakhnath ₹199
Hindi Ka Vishva Sandarbha Karunashankar Upadhyay ₹795
3 books selected ₹1,989 ₹1,790

100% Original

Fast Dispatch

Secure Payment

About the Book

प्रस्तुत पुस्तक भारतेन्दु से लेकर समसामयिक कविता तक में विद्यमान नए पाठ की सम्भावना का सन्‍धान करते हुए उसका वस्तुनिष्ठ एवं गहन विश्लेषण प्रस्तुत करती है। इसमें ‘भारतेन्दु का काव्यदर्शन’, ‘शलाकापुरुष महावीर प्रसाद द्विवेदी की नारी चेतना’, ‘साकेत की उर्मिला का पुनर्पाठ’, ‘गुप्त जी की कैकेयी का नूतन पक्ष’, ‘जयशंकर प्रसाद के पुनर्मूल्यांकन के ठोस आयाम’, ‘प्रसाद साहित्य में राष्ट्रीय चेतना का स्वरूप’, ‘कामायनी में प्रकृति-चित्रण का स्वरूप’, ‘कामायनी : एक उत्तर आधुनिक विमर्श’, ‘स्त्री-विमर्श और प्रसाद काव्य के शिखर नारी चरित्र’, ‘निराला की आलोचना-दृष्टि का विश्लेषण’, ‘दिनकर का कुरुक्षेत्र’, ‘रश्मिरथी का पुनर्पाठ’, ‘शिवमंगल सिंह ‘सुमन’ के काव्य में राष्ट्रीय चेतना’, ‘अज्ञेय के काव्य में संवेदनशीलता’, ‘भवानी प्रसाद मिश्र के काव्य में गांधीवादी चेतना’, ‘नरेश मेहता का संवेदनात्मक औदात्य’, ‘मुक्तककार बेकल’, ‘अन्तस् के स्वर : कवि मन की पारदर्शी अभिव्यक्ति’, ‘धूमिल अर्थात् कविता में लोकतंत्र’, ‘ग़ज़ल दुष्यन्त के बाद : एक विश्लेषण’, ‘कविता का समाजशास्त्र एवं शोभनाथ यादव की कविताएँ’, ‘कविताओं का सौन्दर्यशास्त्र और शोभनाथ की कविताएँ’, ‘रुद्रावतार : अद्भुत भाषा सामर्थ्य की विलक्षण कविता’, ‘संशयात्मा के ख़तरे से आगाह कराती कविताएँ’, ‘हिन्दी ग़ज़ल का दूसरा शिखर : दीक्षित दनकौरी’, ‘ग़ज़ल का अन्दाज़ ‘कुछ और तरह से भी’’, ‘चहचहाते प्यार की गन्ध से घर-बार महकाते गीत’, ‘सामाजिक प्रतिबद्धता का दलित-स्त्रीवादी वृत्त’, ‘समकालीन हिन्दी कविता : दशा एवं दिशा’ तथा ‘समकालीन कविता के सामाजिक सरोकार’ जैसे विषयों के अन्तर्गत इस युग के समूचे काव्य का विशद् विश्लेषण किया गया है। साथ ही परिशिष्ट के अन्तर्गत ‘जन अमरता के गायक विंदा करंदीकर’ तथा ‘परम्परा एवं आधुनिकता के समरस कवि अरुण कोलटकर’ जैसे शीर्षकों के अन्तर्गत मराठी के दो शिखर कवियों का सम्यक् विश्लेषण किया गया है।
छात्रों, मनीषियों, चिन्तकों तथा सामान्य पाठकों के लिए समान रूप से उपयोगी यह पुस्तक आधुनिक काव्य पर विशिष्ट अध्ययन होने के साथ-साथ नवीन समीक्षात्मक प्रतिमानों के सन्‍धान द्वारा उसका पुनर्पाठ तैयार करने का एक गम्भीर और साहसिक प्रयास है।

Book details

Fast dispatchShips within 48 hours
Secure paymentOnline, or cash on delivery on eligible orders
100% OriginalGenuine copy from Rajkamal Prakashan Samuh
Format
Hardbound
Publisher
Rajkamal Prakashan Samuh
Edition
3rd
Publication year
2008
Weight
488 grams
ISBN-13
9788183612593
Pages
304
Reading time
~10 hrs
Age
18+
Country of origin
India
Dimensions
14.5 × 22 cm
Language
Hindi

Recommended for you

Customer reviews

Be the first to write a review

Read this one? Tell other readers what you thought about the story, the translation and the print.

Offers

Loading offers…

whatsapp