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Sensex Kshetriya Dalon Ka

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प्रसिद्ध पत्रकार अकु श्रीवास्तव की यह पुस्तक आजाद भारत की राजनीति के इतिहास में केंद्र के बरक्स राज्यों के बीच अंतर्विरोधों और द्वंद्वो के साथ उपजे क्षेत्रीय दलों के उतार-चढ़ाव का समग्र अध्ययन करती है। ये अंतर्विरोध सबसे पहले पिछली सदी के सत्तर के दशक में तब प्रकट हुए थे, जब सात-आठ राज्यों में स्थानीय राजनीतिक स्पृहाओं ने अपनी संयुक्त सरकारें बनाकर केंद्रवादी कांग्रेस की नीतियों की जगह स्थानीयतावादी विकल्प पेश किए। भाषागत व स्थानीय सांस्कृतिक अस्मिताओं ने इस परिवर्तन को संभव किया केंद्र में भी दो बार गैर कांग्रेसी दलों व स्थानीय स्पृहमाओं ने सरकारें बनाईं। ग्लोबलाइजेशन के दौर में विकेंद्रीकरण की यह वृत्ति और भी ताकतवर हुई। शायद इसीलिए अब जब कांग्रेस के केंद्रवाद की जगह भाजपा ले चुकी है, तब भी बहुत सी स्थानीयतावादी अस्मिताएँ भाजपा के केंद्रवाद से भी टकराती रहती हैं। जम्मू- कश्मीर, तमिलनाड, केरल, बंगाल, ओडिशा, केरल आदि तो केंद्रवाद को अरसे से टक्कर देते ही रहे हैं, महाराष्ट्र पंजाब और दिल्ली भी इसी लाइन में है और सत्ता से बाहर होकर भी बिहार, यू.पी. आदि के स्थानीय दल केंद्रवाद से टकराते रहते हैं । अकु श्रीवास्तव भारतीय राजनीति के इस बुनियादी अंतर्विरोध के विविध आयामों को गहराई में जाकर पकड़ते हैं और बताते हैं कि यह अंतर्विरोध हमारी समकालीन राजनीति का वह अतरंग अंतर्विरोध है, जो प्रत्यक्षतः जनतंत्र के लिए अभिशाप नजर आता है, लेकिन परोक्षतः वही जनतंत्र को जीवित रखनेवाला मालूम होता है । मेरी नजर में यह पुस्तक समकालीन और भावी राजनीति की नब्ज को समझने के लिए एक एकदम पठनीय है। --सुधीश पचौरी

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प्रसिद्ध पत्रकार अकु श्रीवास्तव की यह पुस्तक आजाद भारत की राजनीति के इतिहास में केंद्र के बरक्स राज्यों के बीच अंतर्विरोधों और द्वंद्वो के साथ उपजे क्षेत्रीय दलों के उतार-चढ़ाव का समग्र अध्ययन करती है। ये अंतर्विरोध सबसे पहले पिछली सदी के सत्तर के दशक में तब प्रकट हुए थे, जब सात-आठ राज्यों में स्थानीय राजनीतिक स्पृहाओं ने अपनी संयुक्त सरकारें बनाकर केंद्रवादी कांग्रेस की नीतियों की जगह स्थानीयतावादी विकल्प पेश किए।
भाषागत व स्थानीय सांस्कृतिक अस्मिताओं ने इस परिवर्तन को संभव किया केंद्र में भी दो बार गैर कांग्रेसी दलों व स्थानीय स्पृहमाओं ने सरकारें बनाईं। ग्लोबलाइजेशन के दौर में विकेंद्रीकरण की यह वृत्ति और भी ताकतवर हुई। शायद इसीलिए अब जब कांग्रेस के केंद्रवाद की जगह भाजपा ले चुकी है, तब भी बहुत सी स्थानीयतावादी अस्मिताएँ भाजपा के केंद्रवाद से भी टकराती रहती हैं।
जम्मू- कश्मीर, तमिलनाड, केरल, बंगाल, ओडिशा, केरल आदि तो केंद्रवाद को अरसे से टक्कर देते ही रहे हैं, महाराष्ट्र पंजाब और दिल्ली भी इसी लाइन में है और सत्ता से बाहर होकर भी बिहार, यू.पी. आदि के स्थानीय दल केंद्रवाद से टकराते रहते हैं ।
अकु श्रीवास्तव भारतीय राजनीति के इस बुनियादी अंतर्विरोध के विविध आयामों को गहराई में जाकर पकड़ते हैं और बताते हैं कि यह अंतर्विरोध हमारी समकालीन राजनीति का वह अतरंग अंतर्विरोध है, जो प्रत्यक्षतः जनतंत्र के लिए अभिशाप नजर आता है, लेकिन परोक्षतः वही जनतंत्र को जीवित रखनेवाला मालूम होता है ।
मेरी नजर में यह पुस्तक समकालीन और भावी राजनीति की नब्ज को समझने के लिए एक एकदम पठनीय है। --सुधीश पचौरी

Book details

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100% OriginalGenuine copy from Prabhat Prakashan
Format
Paperback
Publisher
Prabhat Prakashan
Weight
400 grams
ISBN-13
9789355211477
Pages
376
Reading time
~13 hrs
Age
18+
Country of origin
India
Dimensions
14 × 21.5 cm
Language
Hindi

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