Pt. Deendayal Upadhyaya's Roadmap for India
Author:
Vivasvan ShastriPublisher:
Prabhat PrakashanLanguage:
EnglishCategory:
History-and-politics0 Ratings
Price: ₹ 240
₹
300
Available
Pt. Deendayal Upadhyaya was an Indian philosopher, economist, sociologist, historian, journalist, and political scientist. He went on to define an alternative philosophy of development called Integral Humanism and led the Bharatiya Jana Sangh, the forerunner of the present-day Bharatiya Janata Party (BJP). Pandit Deendayal’s philosophy continues to inspire and guide the policies of the BJP government at the centre and the state.
This book presents a roadmap for the redevelopment and reconstruction of a nation as diverse and vast as India, based on the ideas and writings of Pandit Deendayal Upadhyaya. The roadmap takes into account India’s unique history, culture and ethos. This book is also a tribute to a rishi like Pandit Deendayal Upadhyaya on his 100th birth anniversary.
ISBN: 9789352664023
Pages: 144
Avg Reading Time: 5 hrs
Age: 18+
Country of Origin: India
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बैसाख की पहली तिथि पंजाबी पंचांग के अनुसार नववर्ष दिवस के रूप में मनाई जाती है। इसी दिन 13 अप्रैल, 1978 को जरनैल सिंह भिंडरावाले ने धूम-धड़ाके से पंजाब के रंगमंच पर पदार्पण किया। इस घटना से न केवल पंजाब के जन-जीवन में तूफ़ान आया बल्कि पूरे देश के लिए इसके दूरगामी परिणाम हुए। पूरा पंजाब अशान्त और आतंकवाद के हाथों क्षत-विक्षत हो गया और धीरे-धीरे यह समस्या इतनी पेचीदा बन गई कि देश की अखंडता के लिए यह सचमुच का ख़तरा बनती दिखाई दी। सुप्रसिद्ध लेखक और पत्रकार खुशवंत सिंह की प्रस्तुत पुस्तक सुस्पष्ट रूप से इस समस्या का इतिहास दर्शाती है, स्वतंत्रता-प्राप्ति के बाद पंजाबियों के गिले-शिकवों और असन्तोष का विवरण देती है, और सभी प्रमुख घटनाओं पर रोशनी डालती है।
लेखक का व्यक्तिगत जुड़ाव पुस्तक को विशेष प्रामाणिकता प्रदान करता है, जो लगभग इसके प्रत्येक पृष्ठ पर प्रकट है। इसमें लेखक ने एक तरफ़ पंजाब की राजनीति तथा दूसरी ओर केन्द्र सरकार द्वारा जानबूझकर खेले जानेवाले शरारतपूर्ण राजनीतिक खेलों पर अपने विचार प्रकट किए हैं। इसका परिणाम यह हुआ कि भारत के सबसे उन्नतिशील राज्य की प्रगति के मार्ग में गत्यवरोध आ गया, यहाँ की कृषि और औद्योगिक अर्थव्यवस्था तहस-नहस होने लगी, इसका प्रशासन और न्यायपालिका पंगु बनकर रह गए। जो लोग इस गत्यवरोध को अधिक गहराई से समझना चाहते हैं, उनके लिए यह पुस्तक अवश्य पठनीय है।
Sampradayik Dange Aur Bhartiya Police
- Author Name:
Vibhuti Narayan Rai
- Book Type:

- Description: साम्प्रदायिक दंगों को प्रशासन की एक बड़ी असफलता के रूप में लिया जाना चाहिए। हाल के वर्षों में इस विषय पर एक व्यापक समझ तैयार करने में पूर्व पुलिस अधिकारी व प्रतिष्ठित लेखक विभूति नारायण राय का यह अध्ययन बहुत महत्त्वपूर्ण है। श्री राय ने यह अध्ययन नेशनल पुलिस अकादमी, हैदराबाद के लिए एक वर्ष के गहन परिश्रम के बाद पूरा किया था। दुर्भाग्य से, इसकी कुछ स्थापनाओं को छिपाने–दबाने की कोशिश भी की गई। इसको प्रकाश में लाने का श्रेय नेशनल अकेडमी ऑफ़ एडमिनिस्ट्रेशन, मसूरी को जाता है, जिसने इसे सबसे पहले प्रकाशित किया। मेरी राय है कि प्रशासन और पुलिस के तमाम अधिकारियों के लिए इस पुस्तक का पठन–पाठन अनिवार्य कर दिया जाना चाहिए। —पदम रोशा, पुलिस महानिदेशक (सेवानिवृत्त) साम्प्रदायिक दंगों के दौरान पुलिस–व्यवहार पर यह एक ठोस, विश्वसनीय और आधिकारिक अध्ययन है–––लेखक का यह कहना एकदम सही है कि पुलिस में काम करनेवाले लोग उसी समाज से आते हैं जिसमें साम्प्रदायिकता के विषाणु पनपते हैं, उनमें वे सब पूर्वग्रह, घृणा, सन्देह और भय होते हैं जो उनका समुदाय किसी दूसरे समुदाय के प्रति रखता है। पुलिस में भर्ती होने के बावजूद वे ख़ुद को अपने ‘सहधार्मिकों’ के ‘हम’ में शामिल रखते हैं और दूसरे समुदाय को ‘वे’ मानते रहते हैं। —ए.जी. नूरानी (‘फ़्रंटलाइन’ में) गृह मंत्रालय और पुलिस ब्यूरो ऑफ़ रिसर्च एंड डेवलपमेंट तथा अपने सर्वेक्षण से प्राप्त आँकड़ों के विस्तृत विश्लेषण पर आधारित यह शोध बताता है कि प्रत्येक दंगे के 80 प्रतिशत शिकार मुस्लिम होते हैं और जो लोग गिरफ़्तार किए जाते हैं, उनमें भी लगभग 90 प्रतिशत अल्पसंख्यक ही होते हैं। श्री राय के अनुसार, ‘‘यह तर्क–विरुद्ध है। अगर 80 प्रतिशत शिकार मुस्लिम हैं तो होना यह चाहिए कि गिरफ़्तार लोगों में 70 प्रतिशत हिन्दू हों। लेकिन ऐसा कभी होता नहीं है।’’ —सिबल चटर्जी (‘आउटलुक’ में)
Nagarikta Sanshodhan Adhiniyam (Tathya Evam Satya : Ek Bauddhik Vimarsh)
- Author Name:
Geeta Singh
- Book Type:

- Description: "भारत सदैव विश्व के सभी सताए हुए लोगों की शरणस्थली रहा, उसी के नागरिकों को उसी की भूमि पर अवसरवाद के इस खेल ने शरणार्थी बना दिया। आज हमें एक मजबूत इच्छाशक्ति वाली मानवतावादी सरकार मिली है, जो इन पीडि़तों एवं शोषितों को सहारा देने के लिए सर्वसम्मति से ‘नागरिकता संशोधन अधिनियम’ को पारित करवाकर लाई, तो अवसरवादी तुच्छ राजनीति करने वाले लोग फिर देश को गुमराह करने में लग गए हैं। समाज में हर तबके के अंदर देश के कोने-कोने में आज सी.ए.ए., एन.पी.आर. एवं एन.आर.सी. पर लोगों के मन में जहर घोलकर तरह-तरह की भ्रांतियाँ बैठा दी गई हैं। उन्हीं भ्रमों के निवारण के लिए तथा इन सभी अधिनियमों के सत्य को सामने लाने के लिए सी.पी.डी.एच.ई. (यू.जी.सी.एच. आर.डी.सी) दिल्ली विश्वविद्यालय के तत्त्वावधान में एक विचार गोष्ठी का आयोजन हुआ, जिसमें राष्ट्र के अग्रणी चिंतक डॉ. इंद्रेश कुमारजी के सान्निध्य एवं संरक्षण में बौद्धिक विमर्श हुआ, जिसमें देश भर के विविध विश्वविद्यालयों से आए विभिन्न चिंतकों, प्राध्यापकों एवं शिक्षाविदों ने गंभीर विचार-विमर्श किया। उस वैचारिक मंथन से प्राप्त ज्ञान-सुधा को जन-जन तक पहुँंचाने के लिए यह पुस्तक प्रकाशित की गई है। केरल के राज्यपाल श्री आरिफ मोहम्मद खान की प्रस्तावना ने इस विषय के महत्त्व को दृढ़ता और प्रामाणिकता से रेखांकित किया है। "
Poorvi Africa Ka Praveshdwar Uganda
- Author Name:
Ramesh Pokhriyal 'Nishank'
- Book Type:

- Description: "युगांडा अफ्रीका का नैसर्गिक सुंदरता और जैव-विविधता से परिपूर्ण देश है जिसे ब्रिटिश प्रधानमंत्री विस्टन चर्चिल ने ‘अफ्रीका का मोती’ तक कहा है। यह नील नदी का स्रोत है, जो दुनिया की दूसरी सबसे लंबी नदी है। रंग-बिरंगी तितलियों से लेकर पहाड़ी गोरिल्ला, लुप्तप्राय प्रजातियों के घर के रूप में और एक वैश्विक पर्यटक केंद्र के रूप में युगांडा आकर्षक गंतव्य है। युगांडा के बारे में एक और महत्त्वपूर्ण बात यह है कि यह दुनिया भर के शरणार्थियों का स्वागत अत्यंत खुले मन से करता है। उत्तम बात यह है कि जहाँ शरणार्थी सामाजिक सेवाओं का आनंद लेते हैं, वही वह स्वतंत्र रूप से आगे बढ़ सकते हैं और काम कर सकते हैं। एक राष्ट्र के रूप में युगांडा ने अपनी चुनौतियों से मुकाबला कर, अपने मुश्किलों से भरे हुए अतीत को छोड़ते हुए देश को एक सक्षम, समृद्ध राष्ट्र के रूप में स्थापित किया। एक अनुशासित, मेहनतकश राष्ट्र के रूप में युगांडा ने तमाम कठिनाइयों के बावजूद अपने लोगों को एक नई पारी के लिए न केवल तैयार किया, बल्कि एक नई जीवन-शैली के लिए प्रेरित किया। यह पुस्तक इस देश के विषय में समग्र जानकारी देती है। इसमें युगांडा की संस्कृति, अर्थव्यवस्था, रीति-रिवाज, इतिहास, भूगोल से लेकर वहाँ के पर्यटक स्थलों, शैक्षिक तंत्र, धार्मिक विविधता, भाषा, जैव-विविधता, राजनैतिक व्यवस्था की जानकारी सरल-सुबोध भाषा में दी है।
Uttar Pradesh Ka Swatantrata Sangram : Gautam Buddh Nagar
- Author Name:
Baljinder Nasrali
- Book Type:

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Description:
आज जब हम चारों ओर नजरें दौड़ाते हैं तो एक अजीब विडम्बना से साक्षात्कार होता है। हम सब एक ऐसी विदेशी सभ्यता के लिए जिम्मेदारी महसूस करते हैं, जिसने आजादी से पहले के लगभग दो सौ वर्षों में हमारी संस्कृति की लय को बुरी तरह से विकृत कर दिया था।
अंग्रेज विद्वानों ने हमारे शास्त्रों और पुराणों का विश्लेषण किया तो हम शायद अतिरिक्त चौकन्ने होकर ऐसी परम्परा के प्रति सजग हुए, जिसे आज तक हम बिना परिभाषित किये सहज भाव से अपने जीवन में अपनाते रहे थे। शास्त्रों और पुराणों में हमारी जिन्दगी थी। इस तरह के इतिहास के दखल होने से पहले, इस तरह की सामाजिक व्याख्या से पहले भी हमारा अपनी संस्कृति के साथ एक सहज और स्पष्ट लगाव था। वह परिभाषित नहीं था, उसे परिभाषित होने की जरूरत भी नहीं थी, क्योंकि वह हमारी धड़कनों में था। एक भारतीय कभी अपनी संस्कृति को बाहर से नहीं देखता। संस्कृति तो उसके अंदर बसी होती है। अतिरिक्त सजगता तभी उत्पन्न होती है, जब मनुष्य का अपने अतीत और परम्परा से अलगाव हो जाता है। एक भारतीय की परम्परा कहीं बाहर नहीं, उसके भीतर रहती है, इसलिए सजग रूप से उससे स्वयं को जोड़ने का प्रश्न ही उत्पन्न नहीं होता। इसलिए यह पुस्तक गौतम बुद्ध नगर की परम्परा, संस्कृति, स्वाभिमान, सभ्यता और आजादी पर जब कुछ बातों को आपके सामने लाती है तो एक पाठक होने के नाते आप एक सहज लगाव, एक सहज भारतीय बोध स्वाभाविक रूप से महसूस करते हैं। साथ ही, गौतम बुद्ध नगर के स्वाभिमान भरे इतिहास को पढ़ते हुए आपको गर्व का अनुभव होगा। समय की धारा में ठहरे हुए संकेत और सूत्र इस पुस्तक में स्वाभिमान की एक नई कहानी कह रहे हैं।
Jakheere Mein Shahadat
- Author Name:
Sudhir Vidyarthi
- Book Type:

- Description: भारतीय क्रान्तिकारी दल के मस्तिष्क, दिल्ली में वायसराय ट्रेन बम विस्फोट कांड के प्रमुख सूत्रधार, ‘नौजवान भारत सभा’ व ‘हिन्दुस्तान समाजवादी प्रजातंत्र संघ’ के घोषणापत्रों के साथ ही गांधी के ‘कल्ट ऑफ द बम’ के सैद्धान्तिक व तर्कपूर्ण प्रत्युत्तर ‘बम का दर्शन’ के साक्षात् रूप क्रान्तिकारी भगवतीचरण वोहरा की 28 मई, 1930 को बम परीक्षण में रावी तट पर हुई शहादत हमारे राष्ट्रीय आन्दोलन की अति विशिष्ट घटना है। भगवती भाई क्रान्तिकारी दल के सेनापति चन्द्रशेखर आजाद के दाहिने हाथ थे, तो वहीं भगतसिंह के अन्यतम सहयोगी भी थे। आजाद उनकी क्षमताओं से बखूबी परिचित थे। असेम्बली बम कांड में भगत सिंह की गिरफ्तारी और बाद में भगवती भाई की शहादत आजाद को बहुत अकेला कर गई। यदि आजाद, भगवती और भगत सिंह की क्रान्तिकारी त्रिमूर्ति अधिक समय तक क्रान्तिकारी आन्दोलन का नेतृत्व करने के लिए जिन्दा रहती तो देश के विप्लवी इतिहास को सर्वथा नया आयाम प्राप्त हुआ होता। भगवतीचरण की पत्नी दुर्गा भाभी ने भी अपने कृतित्व से भारतीय क्रान्तिकारी आन्दोलन के इतिहास में स्त्री की भूमिका को कदम-ब-कदम अपनी तरह से दर्ज किया है। मुक्ति-संग्राम के इतिहास में भगवती भाई और दुर्गा भाभी के नाम के हरूफ नई पीढ़ी के हृदयों को सदा स्पन्दित और आलोकित करते रहेंगे। भारतीय क्रान्तिकारी संग्राम के सजग अध्येता व विश्लेषक सुधीर विद्यार्थी ने निरन्तर खोजबीन करके क्रान्तिकारी शहीद भगवतीचरण वोहरा के दुर्लभ जीवन-प्रसंगों और उनकी क्रान्तिकारी विचार-यात्रा के पड़ावों को उनके हमसफरों तथा कुछेक दस्तावेजों के जरिए पाठकों के सामने लाने की अनोखी कोशिश की है। इस पुस्तक में उन्होंने भगवतीचरण वोहरा के व्यक्तित्व के चारों ओर बनाए गए कुहासे को भी निष्पक्षता और प्रामाणिकता से छाँटने के जरूरी काम को अंजाम दिया है। पुस्तक में इस कथा की भीतरी परतों को साहसपूर्ण ढंग से अनावृत करने का जोखिम भी दिखाई पड़ता है।
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