Nimnavargiya Prasang : Vol. 1
Author:
Gyanendra PandeyPublisher:
Rajkamal Prakashan SamuhLanguage:
HindiCategory:
History-and-politics0 Ratings
Price: ₹ 796
₹
995
Available
‘निम्नवर्गीय प्रसंग’ एक ऐसी रचना है जिसमें निम्न वर्ग अर्थात् आम जनता—ग़रीब किसान, चरवाहा, कामगार, स्त्री समाज, दलित जातियों—के संघर्षों और विचार को बहुत क़रीब से समझने का प्रयास किया गया है। यह रचना अभिजन के दायरे से बाहर जाकर निम्न वर्ग की ऐतिहासिक प्रक्रियाओं को परखने के साथ–साथ, अभिजन और निम्न जन की प्रक्रियाओं को दो अलग–अलग पटरियों पर न धकेलकर, इन दोनों के पारस्परिक सम्बन्ध, आश्रय और द्वन्द्व के आधार पर उपनिवेश काल की हमारी समझ को गतिशील करती है।
दरअसल निम्नवर्गीय इतिहास एक सफल और चौंका देनेवाला प्रयोग है जिसके तहत भारतीय समाज में प्रभुत्व और मातहती के बहुआयामी रूप सामने आते हैं। वर्ग-संघर्ष और आर्थिक द्वन्द्व को कोरी आर्थिकता (Economism) के कठघरे से आज़ाद कर उसके सामाजिक और सांस्कृतिक प्रतिरूपों और विशिष्टताओं का इसमें गहराई के साथ विवेचन किया गया है।
इस पुस्तक में स्वतंत्रता संग्राम, गांधी का माहात्म्य, किसान आन्दोलन, मज़दूर वर्ग की परिस्थितियाँ, आदिवासी स्वाभिमान और आत्माग्रह, निचली जातियों के सामाजिक–राजनीतिक और वैचारिक विकल्प जैसे अहम मुद्दों पर विवेकपूर्ण तर्क और निष्कर्षों से युक्त अद्वितीय सामग्री का संयोजन किया गया है।
‘निम्नवर्गीय प्रसंग : भाग-2’ आम जनता से सम्बन्धित नए इतिहास को लेकर चल रही अन्तरराष्ट्रीय बहस को आगे बढ़ाने का प्रयास है। 1982 में भारतीय इतिहास को लेकर की गई यह पहल, आज भारत ही नहीं, वरन् ‘तीसरी दुनिया’ के अन्य इतिहासकारों और संस्कृतिकर्मियों के लिए एक चुनौती और ध्येय दोनों है। हाल ही में सबॉल्टर्न स्टडीज़ शृंखला से जुड़े भारतीय उपनिवेशी इतिहास पर केन्द्रित लेखों का अनुवाद स्पैनिश, फ़्रेंच और जापानी भाषाओं में हुआ है। प्रस्तुत संकलन के लेख आम जनता से सम्बन्धित आधे-अधूरे स्रोतों को आधार बनाकर, किस प्रकार की मीमांसाओं, संरचनाओं के ज़रिए एक नया इतिहास लिखा जा सकता है, इसकी अनुभूति कराते हैं।
रणजीत गुहा का निबन्ध ‘चन्द्रा की मौत’ 1849 के एक पुलिस-केस के आंशिक इक़रारनामों की बिना पर भारतीय समाज के निम्नस्थ स्तर पर स्त्री-पुरुष प्रेम-सम्बन्धों की विषमताओं का मार्मिक चित्रण है। ज्ञान प्रकाश दक्षिण बिहार के बँधुआ, कमिया-जनों की दुनिया में झाँकते हैं कि ये लोग अपनी अधीनस्थता को दिनचर्या और लोक-विश्वास में कैसे आत्मसात् करते हुए ‘मालिकों’ को किस प्रकार चुनौती भी देते हैं। गौतम भद्र 1857 के चार अदना, पर महत्त्वपूर्ण बागियों की जीवनी और कारनामों को उजागर करते हैं। डेविड आर्नल्ड उपनिवेशी प्लेग सम्बन्धी डॉक्टरी और सामाजिक हस्तक्षेप को उत्पीड़ित भारतीयों के निजी आईनों में उतारते हैं, वहीं पार्थ चटर्जी राष्ट्रवादी नज़रिए में भारतीय महिला की भूमिका की पैनी समीक्षा करते हैं।
इस संकलन के लेख अन्य प्रश्न भी उठाते हैं। अधिकृत ऐतिहासिक महानायकों के उद्घोषों, कारनामों और संस्मरण पोथियों के बरक्स किस प्रकार वैकल्पिक इतिहास का सृजन मुमकिन है? लोक, व्यक्तिगत, या फिर पारिवारिक याददाश्त के ज़रिए ‘सर्वविदित' घटनाओं को कैसे नए सिरे से आँका जाए? हिन्दी में नए इतिहास-लेखन का क्या स्वरूप हो? नए इतिहास की भाषा क्या हो? ऐसे अहम सवालों से जूझते हुए ये लेख हिन्दी पाठकों के लिए अद्वितीय सामग्री का संयोजन करते हैं।
ISBN: 9788171784103
Pages: 246
Avg Reading Time: 8 hrs
Age: 18+
Country of Origin: India
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Description:
इस पुस्तक का नाम है—'संसद में मेरी बात' लेकिन यदि आप इसे ध्यान से पढ़ें तो आप कहेंगे कि इसका नाम होना चाहिए था—'देश की बात'।
प्रो. रामगोपाल यादव ने लगभग 40 विषयों पर अपने विचार व्यक्त किए हैं। 40 तो शीर्षक भर हैं।
एक-एक शीर्षक में कई-कई मुद्दे हैं। हर मुद्दे पर उन्होंने अपनी बेबाक राय रखी है। शिक्षा, स्वास्थ्य, ग़रीबी, खेती, हिन्दी, विदेश नीति, राष्ट्रीय सुरक्षा, आरक्षण जैसे बुनियादी मुद्दों पर उन्होंने अपनी दो-टूक बात तो कही ही है, तात्कालिक महत्त्व के कई प्रश्नों पर उन्होंने अनेक रचनात्मक सुझाव भी रखे हैं। राजनीतिशास्त्र के अध्येता और अध्यापक रहने के अनुभव ने भाषणों को गम्भीर और तर्कसम्मत भी बनाया है। उनके भाषणों को पढ़ने पर आप आसानी से समझ जाएँगे कि एक औसत नेता और एक विद्वान नेता में क्या फ़र्क़ होता है। इस संकलन में आप जब गांधी, लोहिया, अम्बेडकर आदि के साथ-साथ सुकरात, अरस्तू, थॉमस हिल ग्रीन, जॉन स्टुअर्ट मिल आदि विचारकों के प्रासंगिक सन्दर्भ देखेंगे तो आप समझ जाएँगे कि समाजवादी पार्टी ने अपने इस प्रतिभाशाली सांसद को संसद में सदा बने रहने के लिए बाध्य क्यों किया है। इस ग्रन्थ को पूरा पढ़ने पर आपको रामगोपाल जी के सपनों का भारत साफ़-साफ़ दिखाई पड़ने लगेगा। डॉ. राममनोहर लोहिया के समतामूलक समाज और बृहत्तर भारत की कल्पना को यह सपना साकार करता है।
—वेदप्रताप वैदिक
Gandhi : Rise of a Mahatma and Diaspora
- Author Name:
Dr. Ruchi Verma +2
- Book Type:

- Description: The year 2019-2020 marked the 150 birth anniversary of Mahatma Gandhi that was widely commemorated in India and in many parts of the world remembering Gandhiji’s philosophy and teachings. During his education of law in the UK, Gandhiji developed firm faith in the principles and merits of the rule of law. Ironically, this faith was severely challenged when he moved as a lawyer to assist some Indian origin businessmen in South Africa. There, Gandhiji came face to face not only with violations of the sacrosanct principles of the rule of law but also the discrimination built in the laws themselves. This shock laid the foundation of barrister Gandhi’s journey in the process of making of a mahatma. Though Gandhiji’s commitment to Swaraj through Satyagraha has a much wider global appeal, his path to sainthood was inseparably intertwined with his experiences with the Indian diaspora. In keeping with Antar Rashtriya Sahayog Parishad (ARSP’s) pioneering work with Indian diaspora, Diaspora Research and Resource Centre of ARSP, in collaboration with Gandhi Smriti and Darshan Samiti, New Delhi organised a series of conferences on the theme ‘Gandhi and diaspora’, which were attended by over 100 experts from India and abroad. This book is a compilation of the proceedings, presentations and the outcomes of these important events. We hope, this publication would be useful to academics and scholars dealing with Gandhian teachings, ideology and diaspora studies.
Anna Kranti
- Author Name:
Ashutosh
- Book Type:

- Description: "अगस्त 2011 में मजबूत लोकपाल विधेयक की माँग को लेकर अन्ना हजारे का आमरण अनशन स्वतंत्र भारत के इतिहास की ऐतिहासिक घटना थी। कई घोटालों के उजागर होने के तुरंत बाद हुआ यह आंदोलन जिस तेजी से मध्यम वर्ग के बीच फैला उसने भारतीय जनमानस को आंदोलित कर दिया। उसमें एक आशा का संचार किया कि भारत से भ्रष्टाचार का खात्मा हो सकता है। मशहूर पत्रकार आशुतोष ने भारत को बदल देनेवाले इन 13 दिनों की कहानी बुनी है। उन्होंने सारी घटनाओं की सीधी जानकारी इसमें दी है, क्योंकि वे स्वयं भी अनशन स्थल, दिल्ली के रामलीला मैदान में उपस्थित थे और दोनों पक्षों—केंद्र की यू.पी.ए. सरकार तथा टीम अन्ना के साथ सीधे संपर्क में थे। अन्ना हजारे के आंदोलन की मानसिकता को समझाने के लिए आशुतोष ने जयप्रकाश नारायण के आंदोलन और महात्मा गांधी के सत्याग्रह को याद करते हुए स्वतंत्रता पूर्व के भारत की राजनीति की भी पड़ताल की है। भारत से भ्रष्टाचार के खिलाफ आम आदमी के आक्रोश के क्रांतिकारी 13 दिनों की सजीव दास्ताँ है यह पुस्तक। "
Bharatiya Sahitya Mein Kashmir
- Author Name:
Prof. Kripashankar Chaubey +1
- Book Type:

- Description: जम्मू-कश्मीर सदा सर्वदा से भारतीय साहित्य में केंद्रीय स्थान रखता रहा है। जम्मू-कश्मीर, कश्मीर मंडल, शारदा क्षेत्र, सप्त सिंधु प्रदेश आदि विविध नामों से इतिहास, पुराण, नाटक, उपन्यास, कविता, कथा, कहानी; सर्वत्र संस्कृत सहित सभी आधुनिक भारतीय भाषाओं में स्थान प्राप्त करता रहा है। स्वतंत्रता के पूर्व, स्वतंत्रता के बाद और 1990 के बाद; ये तीन ऐसे विशिष्ट कालखंड हैं जिनके बीच समस्त भारतीय साहित्य में कश्मीर संबंधी विमर्श और प्रस्तुतियां अलग-अलग रूपों में दिखाई देती हैं। प्राकृतिक सुषमा से लेकर मानव निर्मित आपदाओं तक व्यक्ति और समाज के जीवन का कोई ऐसा रंग नहीं है जो कश्मीर में न हो और कश्मीर में जो कुछ होता रहा है, वह समकाल में ही भारतीय साहित्य में प्रतिध्वनित भी होता रहा है। उन सब को एक स्थान पर एकत्रित करना लगभग असंभव है, पर कश्मीर को ले करके विविध भारतीय भाषाओं में, सामासिक रूप से कहा जाए तो भारतीय साहित्य में जो कुछ भी लिखा गया है, रचा गया है, उन सबको प्रवृत्तिररक अनुशीलन के द्वारा प्रस्तुत करने के यत्न करने के रूप में यह पुस्तक उपादेय है।
The Hero of Kargil & Other Stories
- Author Name:
Lt. Gen. Yashwant Mande
- Book Type:

- Description: The stories in this book pertain to the wars, which India has fought since its Independence in 1962, 65, 71 and 99. The war stories have always aroused the curiosity of the readers. Although many books have been written on conflicts between India and its neighbours, no author has attempted to write stories. This book is therefore unique, the only one of its kind, a book of fiction on events and characters, in the background of war. The wars have topical interest and as time passes, one forgets them and gets engrossed in current issues. This is natural. However, certain events such as missile attack on Karachi, shattering of enemy offensive by Hunter aircraft at Longewala, the role played by the aircraft carrier INS VIKRANT and the heroics of men in uniform have a lasting value, an element of permanence. These stories provide insight into ethos, culture and lifestyle of the armed forces, their values, hardships and character. The stories narrate the account of war and unfold its conduct in easy and interesting manner. The stories have been written in simple and endearing style. It is a book, which ought to be read by all, the old and young.
Putin And The Russian Renaissance
- Author Name:
Dinkar Kumar
- Book Type:

- Description: The book invites you to uncover the remarkable journey of Vladimir Putin, one of the most intriguing and controversial leaders of our time. From the gritty streets of post-war Leningrad to the heights of global power, this is the story of a man who reshaped Russia and left the world divided. Explore Putin's transformation from a quiet KGB officer to a political force who rose unexpectedly to lead a nation. Witness his efforts to revive a faltering Russia, his bold and often polarizing decisions, and his relentless pursuit of restoring Russia's place on the global stage. But who is Vladimir Putin beyond the politics? This book peels back the layers to reveal the person behind the power-his early life, personal values and the driving force behind his vision. Told with clarity and depth, The Putin Story blends gripping storytelling with insightful analysis to offer a fresh perspective on a leader who has shaped history
Asur Adivasi
- Author Name:
Shrirang
- Book Type:

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Description:
विलुप्ति के कगार पर खड़ी भारत की एक सबसे प्राचीन मानी जानेवाली असुर आदिवासी जनजाति पिछले दिनों काफ़ी चर्चा में रही है। अपनी कुछ ख़ास विशेषताओं, मान्यताओं और कुछ ख़ास माँगों के कारण इसने सभ्य समाज का ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया है।
दरअसल इस असुर जनजाति के लोग लौह अयस्क को खोजनेवाले तथा लौह धातु से हथियार आदि निर्माण करनेवाले विश्व की चुनिन्दा जनजातियों में से एक हैं। ये लोग अपने को पौराणिक असुरों का वंशज मानते हैं। पिछले दिनों ये चर्चा में तब आए जब इनके कुछ बुद्धिजीवी कार्यकत्ताओं ने यह माँग उठाई कि दशहरा में दुर्गा की महिषासुर मर्दिनी की जो प्रतिमा लगाई जाती है तथा उसमें उन्हें हिंसक रूप और महिषासुर का वीभत्स तरीक़े से वध करते हुए दिखाया जाता है, इससे उनकी भावना को ठेस पहुँचती है। यह उनके पूर्वजों का ही नहीं, अपितु सम्पूर्ण असुर आदिवासी समुदाय का अपमान है। सभ्य समाज के लिए ऐसा वीभत्स और अभद्र अमानवीय प्रदर्शन सभ्यता के विरुद्ध है। इसलिए इस पर तत्काल रोक लगनी चाहिए।
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