Nagasaki Ki Vidhvans-Katha
(0)
Author:
Hayashi KyokoPublisher:
Rajkamal Prakashan SamuhLanguage:
HindiCategory:
Historical-fiction₹
250
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ख़तरे की चेतावनी के बिना ऊपर आकाश से पैराशूट के खुलने के साथ गिर रहे परमाणु बम को कुछ लोग मुँह बाए देख रहे थे। उन्होंने सोचा कि शायद जहाज़ अमेरिकी युद्धबन्दियों के लिए खाद्य-सामग्री गिरा रहे हैं। ये पंक्तियां उस पल के बारे में हैं जब अमेरिका का बोक्सकार नामक जहाज नागासाकी के ऊपर परमाणु बम गिरा रहा था। इस उपन्यास की लेखिका उस समय स्कूल में पढ़ती थीं और उस दिन सैकड़ों छात्रों और मजदूरों के साथ उस स्थान से कुछ ही दूरी पर श्रमदान में लगी हुई थीं। परमाणु-विस्फोट की भुक्तभोगी लेखिका के इस आत्मकथात्मक उपन्यास में नागासाकी पर गिराए गए परमाणु बम के फौरी तथा बाद के समय में सामने आए प्रभावों-अनुभवों का यथार्थ विवरण प्रस्तुत किया गया है। जहाँ आवश्यक था वहाँ उन्होंने सर्वेक्षण-रपटों और अन्य दस्तावेजों का प्रयोग भी इसमें किया है। मुख्यतः नौ अगस्त, 1945 की सुबह से लेकर उसके बाद की लगभग दो महीनों की अवधि के दौरान जापान के नागासाकी शहर और उसके आसपास के क्षेत्रों में हुए घटनाक्रम का यह वास्तविक लेखा-जोखा युद्ध के विरुद्ध एक चेतावनी है जो आज के समय, जब युद्ध के लिए एक अजीब सी व्याकुलता विश्व में देखी जा रही है, खास तौर पर प्रासंगिक है। इस उपन्यास को पढ़ना एक पीड़ादायी अनुभव है लेकिन इससे गुजरना भी जरूरी है।
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ख़तरे की चेतावनी के बिना ऊपर आकाश से पैराशूट के
खुलने के साथ गिर रहे परमाणु बम को कुछ लोग मुँह
बाए देख रहे थे। उन्होंने सोचा कि शायद जहाज़ अमेरिकी
युद्धबन्दियों के लिए खाद्य-सामग्री गिरा रहे हैं।
ये पंक्तियां उस पल के बारे में हैं जब अमेरिका का बोक्सकार नामक जहाज नागासाकी के ऊपर परमाणु बम गिरा रहा था। इस उपन्यास की लेखिका उस समय स्कूल में पढ़ती थीं और उस दिन सैकड़ों छात्रों और मजदूरों के साथ उस स्थान से कुछ ही दूरी पर श्रमदान में लगी हुई थीं।
परमाणु-विस्फोट की भुक्तभोगी लेखिका के इस आत्मकथात्मक उपन्यास में नागासाकी पर गिराए गए परमाणु बम के फौरी तथा बाद के समय में सामने आए प्रभावों-अनुभवों का यथार्थ विवरण प्रस्तुत किया गया है। जहाँ आवश्यक था वहाँ उन्होंने सर्वेक्षण-रपटों और अन्य दस्तावेजों का प्रयोग भी इसमें किया है।
मुख्यतः नौ अगस्त, 1945 की सुबह से लेकर उसके बाद की लगभग दो महीनों की अवधि के दौरान जापान के नागासाकी शहर और उसके आसपास के क्षेत्रों में हुए घटनाक्रम का यह वास्तविक लेखा-जोखा युद्ध के विरुद्ध एक चेतावनी है जो आज के समय, जब युद्ध के लिए एक अजीब सी व्याकुलता विश्व में देखी जा रही है, खास तौर पर प्रासंगिक है।
इस उपन्यास को पढ़ना एक पीड़ादायी अनुभव है लेकिन इससे गुजरना भी जरूरी है।
Book Details
-
ISBN9789360860172
-
Pages112
-
Avg Reading Time4 hrs
-
Age18+ yrs
-
Country of OriginIndia
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- Description: इतिहास पर लिखना बहुत मुश्किल होता है, और विशेषकर उस इतिहास पर लिखना, जिसके बारे में कहीं कोई विशेष जानकारी नहीं मिलती हो। आकाश माथुर ने एक ऐसा ही विषय उठा लिया। कुँवर चैन सिंह की जगह उन्हीं के साथ शहीद हुई नर्तकी उमेदा की कहानी लिखना। नर्तकी का नाम तक कहीं नहीं मिलता, बस एक टूटी-फूटी समाधि है, जो सीहोर में कुँवर चैन सिंह की छतरी के पास बनी हुई है। समाधि भी धीरे-धीरे टूट रही है, या यूँ कहें कि तोड़ी जा रही है। और कुछ समय में वहाँ समाधि का नामो-निशान तक नहीं मिलेगा। लेकिन अब कम से कम यह तो है कि आकाश ने उसकी कहानी को सुरक्षित कर दिया है। प्रशंसा करनी होगी आकाश की कि उसने एक ऐसी शहीद नर्तकी की कहानी लिखी, जिसके बारे में कहीं एक शब्द भी नहीं लिखा गया है। इस उपन्यास को पढ़ते हुए यह विश्वास करना मुश्किल होता है कि कुछ बहुत छोटे-छोटे सूत्रों से ही इस पूरे उपन्यास को लिख दिया गया है और उमेदा की कहानी रच दी गई है। आकाश ने बहुत मेहनत की है इस उपन्यास पर। इन दिनों जब शोध कर के लिखने की परंपरा ही समाप्त होती जा रही है, ऐसे में यह उपन्यास इसलिए भी महत्त्वपूर्ण है क्योंकि इसके लेखक ने न केवल किताबों की यात्रा की है, बल्कि उन स्थानों की भी यात्रा की, जहाँ-जहाँ इस उपन्यास को लेकर उसे सूत्र मिल सकते थे। जाने किस-किस से मुलाक़ात की, उन सब से, जिनके पास से कोई छोटी से छोटी भी जानकारी मिल सकती थी। यह मेहनत, यह श्रम और यह शोध इस उपन्यास को पढ़ते समय शब्द दर शब्द महसूस होता है। उपन्यास बहुत रोचक बना है, जिसको पढ़ते समय कभी भी पठनीयता की कमी महसूस नहीं होती है। आकाश का यह पहला उपन्यास है, उम्मीद करता हूँ कि आगे और भी उपन्यास आकाश की लेखनी से सामने आएँगे। मेरी शुभकामनाएँ। - पंकज सुबीर
Indira Gandhi ka samajwad
- Author Name:
Hiranand Acharya
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- Description: History
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