Clarinda (Rare Book Series)
Author:
Lakshmi Holmstrom, A. MadhaviahPublisher:
Sahitya AkademiLanguage:
EnglishCategory:
Historical-fiction3 Ratings
Price: ₹ 145.25
₹
175
Unavailable
Clarinda written in English is a novel set in the mid-18th century. The story is based on a historical figure, a real Clarinda, the widow of a Maratha Brahmin, who had been one of the King's servants in Tanjore, and after her husband's death became theconcubine of an English oficer of the name Lyttleton. She asked Rev. Schwartz to baptize her when he visited Palayamkottai. He refused, however, because of her 'irregular union'. Some years laterm after her husband's death, she was accepted into the chruch.
From these bare facts, Madhaviah creates a fictionlized early life of Clarinda as she grows up in the principality of Tanjore. The imagined story of this unusual woman, who gradually takes control of her life, gives Madhaviah the opportunity to work out some of his favourite themes: woman's education, the question of sati and widow re-marriage and the encounter between Hinduism and Christianity. The cross cultural, inter-religious relationship which is at the heart of the novel is unusual and profoundly interesting.
ISBN: 9798126019167
Pages: 322
Avg Reading Time: 11 hrs
Age: 18+
Country of Origin: India
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Shobha Limboo
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- Description: ‘शुकमाया हाङमा’ लिम्बू आदिवासी समुदाय की एक सशक्त, स्वाभिमानी स्त्री की सच्ची कहानी पर आधारित उपन्यास है। शुकमाया के जीवन का आरम्भ नैसर्गिक सुषमा से परिपूर्ण और पारम्परिक जीवनशैली की प्रधानता वाले परिवेश में होता है। लेकिन विवाह के बाद वह ख़ुद को न केवल नई जगह और नए परिवेश में पाती है, बल्कि उसका जीवन भी नई चुनौतियों से घिर जाता है। बर्मा युद्ध का छिड़ना शुकमाया के लिए एक प्रचंड आघात साबित होता है जिसमें उसे अपने पति, पुत्र और श्वसुर को खो देना पड़ता है। वस्तुत: बर्मा युद्ध को पृष्ठभूमि बनाकर रची गई यह कृति उस युद्ध के दौरान विस्थापित हुए लोगों की पीड़ा और क्षत-विक्षत मन की कहानी को भी पूरी मार्मिकता से सामने लाती है। विपरीत-से-विपरीत परिस्थितियों में शुकमाया जिस दृढ़ता से खड़ी रहती है और जीवन को सँभालती चलती है, वह अपनी परवर्ती पीढ़ी के लिए प्रेरक और स्मरणीय बन जाती है। जिस आदिवासी समुदाय और जिस ऐतिहासिक पृष्ठभूमि का अंकन इस उपन्यास में किया गया है वह हिन्दी पाठकों के लिए अपेक्षाकृत कम जाना-सुना है। इस तरह देखें तो यह उपन्यास हिन्दी साहित्य में एक नया अध्याय जोड़ता है।
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