Those Fifteen Days
Author:
Prashant PolePublisher:
Prabhat PrakashanLanguage:
EnglishCategory:
Historical-fiction0 Ratings
Price: ₹ 200
₹
250
Unavailable
The future of every character, every person during those 15 days was different...very different...! in thinking, in working style, in behaviour, and in everything...!
Those fifteen days taught us alot...
We saw Nehru ready to unfurl the Union Jack in India at the behest of Mountbatten. On the same day and at the same time when Gandhiji was telling the refugees in Lahore, if Lahore is falling to death, you should face death with a smile, the chief of Rashtriya Swayamsevak Sangh—Guruji was giving the mantra of ‘getting inspiration from King Dahir, unite and live with courage’ just 800 miles away from Gandhiji, at Hyderabad (Sindh).
At a time when Congress president’s wife Sucheta Kripalani was telling Sindhi women in Karachi that ‘Muslim goons tease you because of your make-up and low-cut blouses’, Mavashi Kelkar of Rashtra Sevika Samiti, was trying to make Hindu women empowered and strong while becoming cultured, at Karachi. While the Hindu workers of the Congress were trying to flee from Punjab and Sindh to India, the RSS Swayamsevaks were risking their lives to protect the Hindus and Sikhs and bring them safely to India.
This book describes the happenings in 15 days, before India got the Independence, in an interesting manner.
ISBN: 9789355213082
Pages: 184
Avg Reading Time: 6 hrs
Age: 18+
Country of Origin: India
Recommended For You
Khanzada
- Author Name:
Bhagwandas Morwal
- Book Type:

- Description: ‘काला पहाड़’ और ‘रेत’ जैसे उपन्यासों द्वारा भगवानदास मोरवाल ने हिंदी में एक ऐसे लेखक की छवि बनाई है जो अपनी कथा-वीथियाँ समाज, देश और संस्कृति के तथ्यात्मक भूगोल के बीच से निकालता है। आम तौर पर वे ऐसे विषयों को चुनते हैं जिन्हें सिर्फ कल्पना के सहारे कहानी नहीं बनाया जा सकता, उनका गारा-माटी श्रमसाध्य शोध और खोजबीन से तैयार होता है। मेवात उनके लेखकीय और नागरिक सरोकारों का केंद्र रहा है. अपनी इस मिट्टी की संस्कृति, इतिहास और उसके समाजार्थिक पक्षों पर उन्होंने बार-बार निगाह डाली है। ‘खानजादा’ उपन्यास इसकी अगली कड़ी है। यह महत्वपूर्ण इसलिए है कि यह उन अदृश्य तथ्यों की निर्ममता से पड़ताल करता है जो हमारी आज की राष्ट्रीय चिंताओं से सीधे जुड़े हुए हैं। भारत में तुगलक, सादात, लोदी और मुगलों द्वारा चौदहवीं सदी के मध्य से मेवातियों पर किए गए अत्याचारों और देहली के निकट मेवात में मची तबाही की दस्तावेजी प्रस्तुति करते हुए यह उपन्यास मेवातियों की उन शौर्य-गाथाओं को भी सामने लाता है जिनका इतिहास में बहुत उल्लेख नहीं हुआ है। प्रसंगवश इसमें हमें कुछ ऐसे उद्घाटनकारी सूत्र भी मिलते हैं जो इतिहास की तोड़-मरोड़ से त्रस्त हमारे वर्तमान को भी कुछ राहत दे सकते हैं। मसलन बाबर और उसका भारत आना। हिन्दू अस्मिता का उस वक्त के मुस्लिम आक्रान्ताओं से क्या रिश्ता बनता था, धर्म-परिवर्तन की प्रकृति और उद्देश्य क्या थे और इस प्रक्रिया से वह भारत कैसे बना जिसे गंगा-जमुनी तहजीब कहा गया, इसके भी कुछ संकेत इस उपन्यास में मिलते हैं।
Clarinda (Rare Book Series)
- Author Name:
A. Madhaviah +1
- Rating:
- Book Type:

- Description: Clarinda written in English is a novel set in the mid-18th century. The story is based on a historical figure, a real Clarinda, the widow of a Maratha Brahmin, who had been one of the King's servants in Tanjore, and after her husband's death became theconcubine of an English oficer of the name Lyttleton. She asked Rev. Schwartz to baptize her when he visited Palayamkottai. He refused, however, because of her 'irregular union'. Some years laterm after her husband's death, she was accepted into the chruch. From these bare facts, Madhaviah creates a fictionlized early life of Clarinda as she grows up in the principality of Tanjore. The imagined story of this unusual woman, who gradually takes control of her life, gives Madhaviah the opportunity to work out some of his favourite themes: woman's education, the question of sati and widow re-marriage and the encounter between Hinduism and Christianity. The cross cultural, inter-religious relationship which is at the heart of the novel is unusual and profoundly interesting.
Vaijayantipura Kadamba Mayooravarmana Maha Charite
- Author Name:
Santoshkumar Mehandale
- Rating:
- Book Type:

- Description: DESCRIPTION AWAITED
Main
- Author Name:
Bimal Mitra
- Book Type:

- Description: विमल मित्र का यह प्रयोगधर्मी उपन्यास ‘मैं’ हमारे समय के राजनीतिक एवं सामाजिक यथार्थ को परत-दर-परत सामने लाता है। स्वतंत्रता-पूर्व और पश्चात् की स्थितियों के जो चित्र इस कृति में मौजूद हैं, वे अपने आपमें ऐतिहासिक तथ्य हैं। इसमें एक तरफ़ दिगम्बर व नुटु का जीवन-संघर्ष है तो दूसरी ओर ज्योतिर्मय सेन का अन्तर्द्वन्द्व। यह अन्तर्द्वन्द्व साधारण जन का अन्तर्द्वन्द्व भी है जो सही व ग़लत के बीच अक्सर अनिर्णय का शिकार होकर यथास्थितिवादी बना रहता है। दो पुरुष और एक इतर प्राणी को केन्द्र मानकर चलती इसकी कथा अपने परिवेश से असंपृक्त नहीं रहती। इसमें एक ओर मानवीय प्रेम, अस्मिता तथा स्वतंत्रता का संघर्ष है तो दूसरी ओर व्यवस्था का निरंकुश अमानवीय चरित्र उद्घाटित होता है। कुल मिलाकर तीन प्राणियों को केन्द्र मानकर चलने के बावजूद यह कृति आत्मकथात्मक न होकर बीसवीं शताब्दी के भारत की महागाथा है। विविध आयामी यथार्थ चरित्रों के माध्यम से विमल मित्र एक ऐसा संसार रचते हैं, जिसमें प्रेम और वितृष्णा एक साथ उत्पन्न होते हैं।
Chhatrapati Sambhaji Maharaj
- Author Name:
Dr. Ismail Pathan
- Book Type:

- Description: डॉ. पठाण यांच्या संभाजी चरित्राचे वैशिष्ट्य काय? या प्रश्नाचे उत्तर शोधण्याचा जेव्हा आम्ही प्रयत्न केला तेव्हा आमच्या लक्षात आले की, एका धर्मनिरपेक्षवादी मुस्लीम लेखकाने लिहिलेले हे महाराष्ट्रातील पहिले संभाजी चरित्र आहे. आज समाजातील काही विशिष्ट गट संभाजी महाराजांनी दिलेल्या लढ्यास हिंदू विरुद्ध मुस्लीम असा रंग देऊन तो धार्मिक लढा होता, असे भासवून या राजास ‘धर्मवीर' म्हणून घोषित करीतअसताना या ग्रंथाने या घोषणेला छेद दिला आहे. औरंगजेबाने सुरु केलेले हे युद्ध खऱ्या अर्थाने साम्राज्यवादी होते व त्याला विरोध करून त्याच्याशी लढणाऱ्या मराठ्यांचे युद्ध हे त्याच अर्थाने स्वातंत्र्यवादी होते. इथे हिंदू विरुद्ध मुस्लीम असा धर्माचा काही प्रश्नच निर्माण होत नाही, हे ऐतिहासिक सत्य डॉ. पठाण यांच्या या ग्रंथातून दृग्गोचर होते आहे आणि हेच सत्यकथन या ग्रंथाचे यश आहे असे आम्हांस वाटते. - डॉ. जयसिंगराव पवार ज्येष्ठ इतिहासकार Chhatrapati Sambhaji Maharaj | Dr. Ismail Pathan छत्रपती संभाजी महाराज । डॉ. इस्माईल पठाण
Tejo Tungabhadra: Tributaries of Time
- Author Name:
Maithreyi Karnoor +1
- Book Type:

- Description: Tejo Tungabhadra narrates the story of two rivers on different continents whose souls are interconnected through history. On the banks of the river Tejo in Lisbon, Bella, a young Jewish refugee, and her family face daily threats to their lives and dignity from a deeply antisemitic society. Gabriel, her lover, sails to India with General Albuquerque's fleet, seeking wealth and a secure future. Meanwhile, on the banks of the Tungabhadra in the Vijayanagara Empire, the young couple Hampamma and Keshava find themselves caught in a storm of religious violence and the harsh cycle of tradition. The two stories come together in Goa with the power and energy of meeting rivers. Set in the late 15th and early 16th centuries, Tejo Tungabhadra is a grand saga of love, ambition, greed, and a lively passion for life amid the turbulent waves of history.
Massacre At Midnight
- Author Name:
Chaudhary Kaushal Kishor Thakur
- Book Type:

- Description: Massacre at Midnight is a fascinating tale of medieval intrigue and revenge in the best traditions of ‘magic realism’ with a touch of the divine. Set in the Mughal era, the story opens with the covetous Nawaab of Waariaul locking horns with the principled estate owner of Singhwaar over the possession of LaaDlii and Pyaare, a famed pair of hunting dogs. The Nawaab enlists the support of the Mughal army under false pretences, portraying Singhwaar’s Thaakur as a seditious renegade. The family is massacred to the last man, and Singhwaar is laid waste. The widow gives birth to a male heir in a fugue, abandoning the infant in the wilderness. The child is miraculously saved by the benevolent goddess Vana-Durgaa and becomes her favourite. When he comes of age, Destiny takes him to the imperial court at Delhi for a showdown with his father’s murderer, witnessed by the Great Mughal himself. Mainly based on folklore, ‘Massacre at Midnight’ is replete with enchanting old-world belief in miracles, spirits protecting family fortunes and poetic justice for the unjust, as well as glimpses of life in medieval Mithilaa.
Treta
- Author Name:
Ashish Prakash
- Rating:
- Book Type:

- Description: त्रेतायुग की अनसुनी कहानियां त्रेता युग द्वापर से पहले क्यों आया, क्या है वाल्मीकि रामायण और तुलसी के मानस में अन्तर, कैसे हैं लक्ष्मण राम से भी अधिक महान योद्धा, कैसे शत्रुघ्न सा भाई मिलना मुश्किल है, क्या है हनुमान जी की अष्टसिद्धियां। इस तरह के अनेक प्रश्नों का उत्तर ले के आ गई है आशीष प्रकाश की किताब "त्रेता"।
Mandavi
- Author Name:
Asha Prabhat
- Book Type:

- Description: ‘मांडवी’ रामकथा की स्त्री-चरित्रों को लेकर संवेदनशील रही आशा प्रभात की लेखनी का नया पड़ाव है। इससे पहले वह ‘मैं जनकनन्दिनी’ और ‘उर्मिला’ लिख चुकी हैं। ‘मांडवी’ भरत की पत्नी थीं जिनके विषय में न तो रामकथा में बहुत विस्तार से कुछ आता है, न ही बाद के विद्वानों-साहित्यकारों ने उन पर कुछ ख़ास ध्यान दिया, जबकि राम-वनवास के दौरान उन्होंने सम्भवतः लक्ष्मण की पत्नी उर्मिला से भी ज़्यादा पीड़ा का वहन किया होगा। आशा प्रभात एक सजग लेखिका के रूप में यह ठीक ही प्रश्न उठाती हैं कि रामायण के पुरुष-पात्र जहाँ इतने पराक्रमी, प्रज्ञावान और गुणवान थे, तो फिर स्त्री-पात्र क्या इतने संवेदनहीन और प्रज्ञाशून्य थे कि उनकी मनस्थिति का विस्तृत चित्रण करना कवियों की अनिवार्य नहीं लगा। इसी से प्रेरित होकर उन्होंने सीता और उर्मिला के बाद अब मांडवी को अपना विषय बनाया जो दुर्भाग्य से उस कैकेयी की बहू भी थी जिसके चलते राम को वनवास हुआ और उनसे जुड़े तमाम पात्रों, ख़ासकर स्त्रियों को इतना कुछ झेलना पड़ा। यह उपन्यास एक पौराणिक चरित्र की भावभूमि का अन्वेषण करते हुए स्त्री-मात्र की व्यथा को समझने का प्रयत्न करता है, और रामकथा के महत्त्वपूर्ण लेकिन उपेक्षित चरित्र को, उसके पूरे व्यक्तित्व के साथ रेखांकित करता है।
Chakka Jaam
- Author Name:
Gautam Choubey
- Rating:
- Book Type:

- Description: ‘चक्का जाम’ की क़िस्सागोई बहा ले जाती है। देवानन्द दूबे की इस दुनिया में बंगाली माई का चमत्कार भी है और आज़ाद भारत में बचे एंग्लो-इंडियन समुदाय की त्रासदी भी; हवा में उड़ते संन्यासी भी हैं और छात्र-आन्दोलन को संरक्षण देती गृहिणियाँ भी। यह उपन्यास एक बड़े देश की बड़ी घटनाओं में उलझे इनसान के छोटे सपनों की कहानी है। यहाँ व्यक्तिगत आदर्श पारिवारिक, ऐतिहासिक और राजनैतिक आदर्शों की छाया से दूर, खुले आकाश में आज़ाद खिलने को बेचैन है। यह मासूम बेचैनी इस उपन्यास में कुछ इस तरह उभरती है कि पात्र, घटनाएँ और उनकी बोली-बानी पाठकों के दिल-दिमाग में हमेशा के लिए दर्ज हो जाती हैं।
Bhagat Singh Ko Fansi : Vol. 1
- Author Name:
Malvender Jit Singh Waraich +1
- Book Type:

- Description: भगत सिंह को फाँसी-1 यह कैसे हुआ कि मामूली हथियारों से लैस कुछ नौजवानों को ब्रिटिश साम्राज्य के खिलाफ युद्ध छेड़ने का दोषी पाया गया, जिसके चलते उन्हें उम्रकैद और फाँसी की सजा हुई! ‘युद्ध’, जो उन्होंने लड़ा हालाँकि ‘‘यह युद्ध उपनिवेशवादियों व पूँजीपतियों के विरुद्ध लड़ा गया।’’ और जो ‘‘ न ही यह हमारे साथ शुरू हुआ और न ही यह हमारे जीवन के साथ खत्म होगा।’’ और, मात्र 30 महीने की उल्लेखनीय अवधि में 8-9 सितम्बर 1928 को ‘हिन्दुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिक एसोसिएशन’ की स्थापना के साथ शुरू होकर, यह सम्पन्न हो गया। विश्वास से भरपूर भगत सिंह के शब्द थे, कि ‘‘मैं अपने देश के करोड़ों लोगों की ‘इंकलाब जिंदाबाद’ की हुंकार सुन पा रहा हूँ। काल-कोठरी की मोटी दीवारो के पीछे बैठे हुए भी मुझे कहै कि यह नारा हमारे स्वतंत्राता संघर्ष को प्रेरणा देता रहेगा।’’ इस पुस्तक में प्रस्तुत है इसका प्रथमद्रष्टया विवरण।
Indira Gandhi ka samajwad
- Author Name:
Hiranand Acharya
- Book Type:

- Description: History
Mazzini Charitra
- Author Name:
Vinayak Damodar Savarkar
- Book Type:

- Description: नहीं-नहीं, राष्ट्र कभी मरते नहीं । ईश्वर पीड़ितों का रक्षक है । उसने मनुष्य को स्वाधीनता में साँस लेने के लिए उत्पन्न किया है । यदि तुम ठान लो तो समझो, देश स्वतंत्र हो ही गया । इससे अधिक प्रोत्साहक राष्ट्रमंत्र अन्य कौन सा है? एक बार मनुष्य ने ठान लिया कि मैं स्वाधीनता, स्वदेश और मानवता का परम भक्त हूँ फिर उसे स्वाधीनता, स्वदेश और मानवता के लिए लड़ना ही होगा, निरंतर आजीवन लड़ना होगा ।'' '' मेरी इटली की जनसंख्या दो करोड़ है । यदि इन दो करोड़ लोगों ने मन में निश्चय किया तो विदेशियों के वे पचहत्तर हजार सिपाही उन्हें दबा थोड़े सकते हैं! दो करोड़ लोग और उनका सहायक ईश्वर! ऐसी स्थिति में इटली पलक झपकते ही विदेशी सत्ता को चूर-चूर कर देगी । '' - जोसेफ मैझिनी उपर्युक्त कथन 22 जून, 1805 को इटली में जनमे महान् क्रांतिकारी जोसेफ मैझिनी के हैं, जिन्होंने अपनी प्रखर देशभक्ति से इटली के स्वाधीनता आंदोलन को अनुप्राणित किया । प्रस्तुत पुस्तक ऐसे महान् राष्ट्रभक्त का भारत के महान् क्रांतिकारी स्वातव्यवीर विनायक दामोदर सावरकर द्वारा रचित जीवन-चरित्र है । इसमें इटली के स्वातंत्र्यवीर, देशभक्त मैझिनी का आत्मचरित्र और कुछ राजनीतिक लेख संकलित हैं । इन लेखों ने दो करोड़ लोगों में चेतना भर दी । इन लेखों से यूरोपीय सिंहासन उलट-पुलट हो गए । इन लेखों से इटली स्वतंत्र हुआ । इन लेखों में सभी पराधीन देशों को स्वतंत्र करने की शक्ति ठूस-ठूसकर भरी हुई है । मैझिनी के तत्त्व केवल इटली के लिए ही लागू नहीं होते, इटली केवल निमित्त बना है । राजनीति-शास्त्र के ये महत् सत्य उस महात्मा ने अखिल मानव-जाति के लिए प्रकट किए हैं । इस स्वतंत्रता-सुधा का मिष्टान्न सभी संतप्त भूमिकाओं की ओर मुड़ गया है ।
Chhaava छावा Sambhaji Maharaj | Son of Chhatrapati Shivaji Maharaj | Saga of Bravery An Invincible King of India | Great Warrior Chhava
- Author Name:
Medha Deshmukh Bhaskaran
- Book Type:

- Description: संभाजी महाराज की नजर महादजी की ओर जाती है। यह सही बातें कहने और करने का समय है। अभी वे जो करेंगे, वह उनके देश की नियति बदल देगा। वे मराठी में कहते हैं, ""महादजी, आबा साहिब ने हर सैनिक के जीवन का सम्मान किया। वे चाहते थे कि हम बेवजह शहादत से बचें और जीवित रहें, ताकि हम स्वराज के लिए, मराठा राष्ट्र के लिए एक और लड़ाई लड़ सकें, लेकिन उन्होंने कभी भी मराठा राष्ट्र के बदले में जीवन को गले नहीं लगाया होता। संभाजी महाराज फर्श पर एक ढेर की तरह गिर जाते हैं। वे जानते हैं कि कुछ ही दिनों में उनकी आँखें निकाल ली जाएँगी। लेकिन औरंगजेब बस इतना ही कर सकता है। संभाजी महाराज मराठों के दिलों में एक आग जला जाएँगे और वे दावानल में बदल जाएँगे, जो औरंगजेब के सपनों को जलाकर राख कर देंगे। युद्ध चलता रहेगा लेकिन वह कभी दक्कन नहीं जीत पाएगा। - इसी पुस्तक से छत्रपति शिवाजी महाराज के उतने ही प्रतापी पुत्र संभाजी महाराज के शौर्य और पराक्रम की यशोगाथा बताती अनुपम कृति। आक्रांताओं के दाँत खट्टे कर मराठा स्वाभिमान को जाग्रत् करने में संभाजी महाराज के योगदान को रेखांकित करनेवाली कृति। हर भारतीय के राष्ट्रभाव को जाग्रत् करनेवाली पठनीय कृति ।
Awadheshwari
- Author Name:
Shankar Mokashi Punekar
- Book Type:

- Description: Awadheshwari, released in 1987, received the Sahitya Akademi Award (the National Academy of Letters, India) in 1988. This well-researched political novel set in Vedic times paints a vivid picture of the social and political ethos of the era. It specifically focuses on the concept of NiYoga, a prevalent practice of legal adultery where an infertile husband permits his wife to conceive with another man. Through various plots and subplots, the novel illustrates the circumstances leading to the practice's decline. It stands out as one of the best creative fictions in Kannada literature.
Singh Senapati
- Author Name:
Rahul Sankrityayan
- Book Type:

- Description: राहुल सांकृत्यायन के ऐतिहासिक उपन्यासों में ‘सिंह सेनापति’ का विशेष स्थान है। इसमें उस वैशाली की ढाई हजार साल पूर्व की ऐतिहासिक गाथा को लिपिबद्ध किया गया है, जिसे गणतंत्र की जननी माना जाता है। इस उपन्यास में राहुल दिखलाते है कि गणतांत्रिक अथवा प्रजातांत्रिक शासन व्यवस्था से भारत का परिचय हजारों साल पहले हो चुका था। वैशाली के निवासियों ने, आज से ढाई हजार वर्ष पूर्व अपने लिए गणतांत्रिक व्यवस्था का आविष्कार कर लिया था और उसको सफलतापूर्वक संचालित किया था। ऐतिहासिक तथ्यों के जरिये वे इस कथा को न सिर्फ जीवन्तता बल्कि प्रामाणिकता भी प्रदान करते हैं। उपन्यास की कथा युद्ध और प्रेम का आधार लेकर आगे बढ़ती है, जिसमें तत्कालीन युग और जीवन को सूक्ष्मता से चित्रित किया गया है। साथ ही उस समय के सामाजिक-सांस्कृतिक-नैतिक मूल्यबोधों के बीच स्त्रियों की आजादी, बराबरी, भाई-चारा आदि को विशेष रूप से रेखांकित किया गया है। परिणामत: यह कृति अपने ऐतिहासिक परिधि को लाँघकर सार्वकालिक प्रासंगिकता प्राप्त कर लेती है।
Draupadi
- Author Name:
Yarlagadda Lakshmi Prasad +1
- Rating:
- Book Type:

- Description: Draupadi, originally written in Telugu, was first serialised in Andhra Jyoti before it came out in book form. The novel presented in a unique style, is not just an account of the different incidents occur around Draupadi but these incidents have been fused together into a fascinating story. The narrative process and the structural method of description used by Lakshmi Prasad fully engage the reader.
Jab Jyoti Jagi
- Author Name:
Sukhdev Raj
- Book Type:

- Description: भारतीय स्वाधीनता-आन्दोलन में बिना किसी प्रकार की सुयश-प्राप्ति की कामना किए हँसते-हँसते फाँसी के तख़्ते पर झूल जानेवाले मृत्युंजयी वीरों के बलिदान का सर्वाधिक महत्त्व रहा है। उन वीरों को जितनी प्रतिष्ठा और सम्मान प्राप्त होना चाहिए था, उसकी उपेक्षा एवं अवहेलना सत्ता-लोलुप स्वार्थियों ने सदैव ही की है। यदि उन वीरों की नि:स्वार्थ मातृ-भूमि-सेवा का अनुकरण किया गया होता तो भारतीय जनता आज स्वर्ग-सुख का उपभोग निस्सन्देह करती होती। पराधीनता के समय जो भी क्रान्तिकारी साहित्य उपलब्ध था उसे भारतीय युवक बड़े उत्साह से पढ़ते थे; इसीलिए तत्कालीन युवकों में देश के प्रति नि:स्वार्थ सेवा की सच्ची लगन थी। आज भारतीय जनता, विशेषतः युवकों में सुषुप्त त्याग और सेवा की भावना को जाग्रत करने के लिए उन क्रान्तिकारी वीरों के इतिहास के पठन-पाठन की अत्यधिक आवश्यकता है। भारतीय क्रान्तिकारियों के सम्बन्ध में अभी तक बहुत कम लिखा गया है। इन क्रान्तिकारियों के सम्बन्ध में पुस्तक लिखने का कार्य अत्यन्त कठिन है क्योंकि सभी क्रान्तिकारी अपने कार्य-कलापों को एकदम गुप्त रखते थे, उनके निकटतम सहयोगी भी उनकी बहुत सी बातों से अपरिचित रहते थे। प्रस्तुत पुस्तक अमर शहीद स्व. चन्द्रशेखर आज़ाद और भगवतीचरण बोहरा के अत्यन्त विश्वासपात्र, क्रान्तिकारी आन्दोलन में निरन्तर कार्य करनेवाले भाई सुखदेव राज जी ने लिखी है। अस्तु, पुस्तक की उपादेयता निर्विवाद है।
Mati Mati Arkati
- Author Name:
Ashwini Kumar Pankaj
- Book Type:

- Description: ब्रिटिश उपनिवेश द्वारा भारत से बाहर ले जाए गए मज़दूरों को तत्कालीन कम्पनियाँ और उनके एजेंट दो नामों से पुकारते थे। दक्षिण भारत, बिहार और प. उत्तर प्रदेश के ग़ैर-आदिवासी मज़दूरों को 'कुली' और झारखंड के सदान और आदिवासियों को 'हिल कुली', 'धांगर' और 'कोल' कहा जाता था। ये और कोई नहीं ग्रेटर झारखंड की उरांव, मुंडा, संताल, खड़िया और सदान जातियाँ थीं। ब्रिटिश संसद और ब्रिटिश उपनिवेशों में मौजूद दस्तावेज़ों में झारखंड के आदिवासियों के आप्रवासन के ठोस प्रमाण उपलब्ध हैं। कालान्तर में मॉरीशस, गयाना, फ़िजी, सूरीनाम, टुबैगो सहित अन्य कैरीबियन तथा लैटिन अमेरिकी और अफ़्रीकी देशों में लगभग डेढ़ सदी पहले ले जाए गए ग़ैर-आदिवासी गिरमिटिया मज़दूरों ने बेशक लम्बे संघर्ष के बाद इन देशों को भोजपुरी बना दिया है और वहाँ के नीति-नियन्ताओं में शामिल हो गए हैं। लेकिन सवाल है कि वे हज़ारों झारखंडी जो सबसे पहले वहाँ पहुँचे थे, कहाँ चले गए? कैसे और कब वे गिरमिटिया कुलियों की नवनिर्मित भोजपुरी दुनिया से ग़ायब हो गए? ऐसा क्यों हुआ कि गिरमिटिया कुली ख़ुद तो आज़ादी पा गए लेकिन उनकी आज़ादी हिल कुलियों को चुपचाप गड़प कर गई। एक कुली की आज़ादी कैसे दूसरे कुली के ख़ात्मे का सबब बनी? क्या थोड़े आर्थिक संसाधन जुटते ही उनमें बहुसंख्यक धार्मिक और नस्ली वर्चस्व का विषधर दोबारा जाग गया और वहाँ उस अनजान धरती पर फिर से ब्राह्मण, क्षत्रिय, भूमिहार और वैश्य पैदा हो गए? सो भी इतनी समझदारी के साथ कि 'शूद्र' को नई सामाजिक संरचना में जन्मने ही नहीं दिया? इस उपन्यास का मूल प्रश्न यही है। कोन्ता और कुन्ती की इस कहानी को कहने के पीछे लेखक का उद्देश्य पूरब और पश्चिम दोनों के ग़ैर-आदिवासी समाजों में मौजूद नस्ली और ब्राह्मणवादी चरित्र को उजागर करना है जिसे विकसित सभ्यताओं की बौद्धिक दार्शनिकता के ज़रिए अनदेखा किया जाता रहा है।
The Life and Death of Sambhaji
- Author Name:
Medha Deshmukh Bhaskaran
- Book Type:

- Description: It begins to dawn on nine-year-old Sambhaji that his father has fled from Mughal emperor Aurangzeb and left him behind. He now has to find his way home with the help of strangers... Under the shadow of a renowned father, Sambhaji is thrown into the Maratha-Mughal conflict from a young age. His mistakes cost him dearly, and when his father suddenly dies and he becomes the chhatrapati, it's like inheriting a crown of thorns. Over the next nine years, he fights a constant battle-internally, as palace intrigues threaten his life, and externally, as Aurangzeb advances into the Deccan with his army. Even Shivaji had never faced such outright Mughal aggression. Can he protect the Maratha nation and Swaraj, his father's dream? Will he prove himself a worthy son in life and death? Though history has often been unkind to Sambhaji, it cannot deny that he inspired a generation of Maratha warriors who ultimately ended Aurangzeb's jihad.
Customer Reviews
Be the first to write a review...
0 out of 5
Book