Amrapali
Author:
GayathrirajPublisher:
Sahitya Loka PublicationsLanguage:
KannadaCategory:
Historical-fiction1 Ratings
Price: ₹ 276.25
₹
325
Available
ಲೇಖಕಿ ಗಾಯತ್ರಿ ರಾಜ್ ಅವರ ಆಮ್ರಪಾಲಿ-ಎಂಬುದು ಐತಿಹಾಸಿಕ ಕಾದಂಬರಿ. ವೈಶಾಲಿನಗರದ ಅತ್ಯಂತ ಸುಂದರ ಯುವತಿ ಆಮ್ರಪಾಲಿ ವೈಶಾಲಿನಗರದ ರಾಜ ಮನುದೇವ ಆಕೆಯನ್ನು ಕಾಮುಕ ಕಣ್ಣಿನಿಂದ ನೋಡಿ ವರಿಸಲು ಹಾತೊರೆಯುತ್ತಾನೆ. ಆಮ್ರಪಾಲಿಯ ಪ್ರೇಮಿ ಪುಷ್ಪಕುಮಾರರನ್ನು ಮದುವೆಯಾದ ದಿನವೇ ಕೊಲ್ಲಿಸುತ್ತಾನೆ. ಆದರೂ, ಆತನ ಪ್ರಯತ್ನ ಕೈಗೊಡಲಿಲ್ಲ ನಗರದ ವಧುವನ್ನಾಗಿಸಲು ಸಂಚು ಹೂಡುತ್ತಾನೆ. ಈ ಮಧ್ಯೆ, ಮಗದ ರಾಜ್ಯದ ಅರಸ ಬಿಂಬಸಾರನು ವಿಣೆ ಕಲಿಸುವ ನೆಪದಲ್ಲಿ ವೇಷ ಮರೆಸಿಕೊಂಡು ಆಮ್ರಪಾಲಿ ಹತ್ತಿರ ಇರುತ್ತಾನೆ. ಅವರ ಮಧ್ಯೆ ಪ್ರೇಮಾಂಕುರವಾಗಿ ಮಗು ಸಹ ಜನಿಸುತ್ತದೆ. ಆದರೆ, ಆಮ್ರಪಾಲಿ, ಮಗದ ರಾಜ್ಯಕ್ಕೆ ತೆರಳು ನಿರಾಕರಿಸುತ್ತಾಳೆ. ಇದನ್ನು ತಂದೆಗೆ ಮಾಡಿದ ಅವಮಾನ ಎಂದು ತಿಳಿದ ಬಿಂಬಸಾರನ ಮಗನು ವೈಶಾಲಿ ರಾಜ್ಯದ ಮೇಲೆ ದಂಡೆತ್ತಿ ನಾಶಪಡಿಸುತ್ತಾನೆ. ಆ ಮಗನೂ (ಅಜಾತಶತ್ರು) ಸಹ ಆಮ್ರಪಾಲಿಯ ಮೇಲೆ ಮನಸು ಮಾಡುತ್ತಾನೆ. ಆದರೆ, ಆಮ್ರಪಾಲಿ ಒಪ್ಪುವುದಿಲ್ಲ. ಕೊನೆಗೆ ಬುದ್ಧನ ಶಿಷ್ಯೆಯಾಗಿ ಹೊರಟು ಹೋಗುತ್ತಾಳೆ ಎಂಬುದು ಆಮ್ರಪಾಲಿಯ ಕಥೆ. ಈ ಅಂಶವನ್ನೇ ಸಾಹಿತ್ಯವಾಗಿಸಿದ ಕಾದಂಬರಿ ಇದು.
ISBN: sahityalokaamarpali
Pages: 248
Avg Reading Time: 8 hrs
Age: 18+
Country of Origin: India
Recommended For You
Gods, Guns And Missionaries
- Author Name:
Manu S Pillai
- Rating:
- Book Type:

- Description: When European missionaries first arrived in India in the sixteenth century, they entered a world both fascinating and bewildering. Hinduism, as they saw it, was a pagan mess: the worship of devils and monsters by a people who burned women alive, performed outlandish rites and fed children to crocodiles. But soon it became clear that Hindu ‘idolatry’ was far more complex than white men’s stereotypes allowed, and Hindus had little desire to convert. But then, European power began to grow in India, and under colonial rule, missionaries assumed a forbidding appearance. During the British Raj, Western frames of thinking gained ascendancy and Hindus felt pressed to reimagine their religion. This was both to fortify it against Christian attacks and to resist foreign rule. It is this encounter which has, in good measure, inspired modern Hinduism’s present shape. Indeed, Hindus subverted some of the missionaries’ own tools and strategies in the process, triggering the birth of Hindu nationalism, now so dominant in the country. In Gods, Guns and Missionaries, Manu S. Pillai takes us through these remarkable dynamics. With an arresting cast of characters—maharajahs, poets, gun-wielding revolutionaries, politicians, polemicists, philosophers and clergymen—this book is ambitious in its scope and provocative in its position. Lucid and exhaustive, it is, at once, a political history, a review of Hindu culture and a study of the social forces that prepared the ground for Hindu nationalism. Turning away from simplistic ideas on religious evolution and European imperialism, the past as it appears here is more complicated—and infinitely richer—than popular narratives allow.
Sampradayikta Ka Zahar
- Author Name:
Ranjit
- Book Type:

- Description: इस पुस्तक में महात्मा गाँधी, जवाहर लाल नेहरू, मौलाना अब्दुल कलाम आज़ाद, आचार्य नरेन्द्रदेव, जयप्रकाश नारायण, डॉ. भीमराव आंबेडकर, डॉ. राममनोहर लोहिया, शहीदे आज़म भगतसिंह, किशन पटनायक, गणेशशंकर विद्यार्थी, प्रेमचन्द, कमलेश्वर, राजेन्द्र यादव, मस्तराम कपूर, विभूति नारायण, पुरुषोत्तम अग्रवाल, असगर अली इंजीनियर, राजकिशोर, डॉ. रमेन्द्र, डॉ. राम पुनियानी, तस्लीमा नसरीन, मधु किश्वर, इरफ़ान इंजीनियर आदि के लेख संकलित हैं। स्पष्ट है कि इसमें स्वाधीनता से पूर्व और स्वाधीनता के बाद के भारत में साम्प्रदायिकता की समस्या के बदलते हुए रूपों और फैलते हुए आयामों पर, भारतीय मनीषा ने जो भी कुछ सोचा है, एक प्रकार से उसका निचोड़ आ गया है। हिन्दी में शायद ही कोई और ऐसी पुस्तक हो, जिसमें इतने व्यापक फ़लक पर इस समस्या को रखकर देखा गया है। अन्त में देवी प्रसाद मिश्र की कविता के द्वारा हमारे सबसे बड़े अल्पसंख्यक वर्ग को, हमारे आम नज़रिये की रौशनी में, मर्मस्पर्शी, प्रस्तुति ने, सोने में सुहागे का काम किया है। अपने विषय की एक अपरिहार्य पुस्तक।
Debku ek Prem Katha
- Author Name:
Murari Sharma
- Book Type:

- Description: देबकू-जिंदू की यह प्रेम कहानी आज से महज सौ साल पहले की है। जैसा कि उपन्यासकार मुरारी शर्मा ने उपन्यास की पृष्ठभूमि स्पष्ट करते हुए लिखा है कि यह अनूठी प्रेम कहानी प्रथम विश्वयुद्ध के आस-पास की कहानी है। मण्डी रियासत के मुख्यालय से महज बीस-बाईस किलोमीटर की दूरी पर स्थित नगरोटा गाँव से शुरू हुई यह प्रेम गाथा मण्डी नगर में सिमट कर रह गई। इस उपन्यास की विशेषता यह है कि इस प्रेमगाथा में वर्णित स्थानों व भवनों के अवशेषों से लेखक रूबरू हुआ है। बहुत से ऐसे व्यक्तियों से सम्पर्क साधने में सफल रहा है जो देबकू-जिंदू की इस प्रेम कहानी के तथ्यों की प्रामाणिकता को तस्दीक करते हैं। मुरारी शर्मा एक स्थापित वरिष्ठ कथाकार हैं, कहानी बुनने की कला में सिद्धहस्त। इन्होंने उपन्यास की पाठकीय रोचकता में कोई कमी नहीं आने दी है। सहज और सरल पात्रानुकूल भाषा-शैली उपन्यास की जीवंतता को बढ़ाने में कोई कसर नहीं छोड़ती। निश्चय ही लोक में प्रचलित एक अनूठी प्रेमकथा पर आधारित यह उपन्यास हिंदी साहित्य के लिए एक बड़ी उपलब्धि है। —विजय विशाल
Chhaha Swarnim Pristha
- Author Name:
Vinayak Damodar Savarkar
- Book Type:

- Description: भारतीय वाड.मय में सावरकर साहित्य का महत्त्वपूर्ण स्थान है। मातृभूमि की स्वतंत्रता के लिए प्राण हथेली पर रखकर जूझनेवाले महान् क्रांतिकारी; जातिभेद, अस्पृश्यता, अंधश्रद्धा जैसी सामाजिक बुराइयों को समूल नष्ट करने का आग्रह रखनेवाले स्वातंत्र्यवीर सावरकर ने इस ग्रंथ में भारतीय इतिहास पर विहंगम दृष्टि डाली है। विद्वानों में सावरकर लिखित इतिहास जितना प्रामाणिक और निष्पक्ष माना गया है उतना अन्य लेखकों का नहीं। प्रस्तुत ग्रंथ ‘छह स्वर्णिम पृष्ठ’ में हिंदू राष्ट्र के इतिहास का प्रथम स्वर्णिम पृष्ठ है यवन-विजेता सम्राट् चंद्रगुप्त की राजमुद्रा से अंकित पृष्ठ, यवनांतक सम्राट् पुष्यमित्र की राजमुद्रा से अंकित पृष्ठ भारतीय इतिहास का द्वितीय स्वर्णिम पृष्ठ, सम्राट् विक्रमादित्य की राजमुद्रा से अंकित पृष्ठ इतिहास का तृतीय स्वर्णिम पृष्ठ है। हूणांतक राजा यशोधर्मा के पराक्रम से उद्दीप्त पृष्ठ इतिहास का चतुर्थ स्वर्णिम पृष्ठ, मुसलिम शासकों के साथ निरंतर चलते संघर्ष और उसमें मराठों द्वारा मुसलिम सत्ता के अंत को हिंदू इतिहास का पंचम स्वर्णिम पृष्ठ कह सकते हैं और अंतिम स्वर्णिम पृष्ठ है अंग्रेजी सत्ता को उखाड़कर स्वातंत्र्य प्राप्त करना। विश्वास है, क्रांतिवीर सावरकर के पूर्व ग्रंथों की भाँति इस ग्रंथ का भी भरपूर स्वागत होगा। सुधी पाठक भारतीय इतिहास का सम्यक् रूप में अध्ययन कर इतिहास के अनेक अनछुए पहलुओं और घटनाओं से परिचित होंगे।
Shukmaya Hangma
- Author Name:
Shobha Limboo
- Book Type:

- Description: ‘शुकमाया हाङमा’ लिम्बू आदिवासी समुदाय की एक सशक्त, स्वाभिमानी स्त्री की सच्ची कहानी पर आधारित उपन्यास है। शुकमाया के जीवन का आरम्भ नैसर्गिक सुषमा से परिपूर्ण और पारम्परिक जीवनशैली की प्रधानता वाले परिवेश में होता है। लेकिन विवाह के बाद वह ख़ुद को न केवल नई जगह और नए परिवेश में पाती है, बल्कि उसका जीवन भी नई चुनौतियों से घिर जाता है। बर्मा युद्ध का छिड़ना शुकमाया के लिए एक प्रचंड आघात साबित होता है जिसमें उसे अपने पति, पुत्र और श्वसुर को खो देना पड़ता है। वस्तुत: बर्मा युद्ध को पृष्ठभूमि बनाकर रची गई यह कृति उस युद्ध के दौरान विस्थापित हुए लोगों की पीड़ा और क्षत-विक्षत मन की कहानी को भी पूरी मार्मिकता से सामने लाती है। विपरीत-से-विपरीत परिस्थितियों में शुकमाया जिस दृढ़ता से खड़ी रहती है और जीवन को सँभालती चलती है, वह अपनी परवर्ती पीढ़ी के लिए प्रेरक और स्मरणीय बन जाती है। जिस आदिवासी समुदाय और जिस ऐतिहासिक पृष्ठभूमि का अंकन इस उपन्यास में किया गया है वह हिन्दी पाठकों के लिए अपेक्षाकृत कम जाना-सुना है। इस तरह देखें तो यह उपन्यास हिन्दी साहित्य में एक नया अध्याय जोड़ता है।
Mandavi
- Author Name:
Asha Prabhat
- Book Type:

- Description: ‘मांडवी’ रामकथा की स्त्री-चरित्रों को लेकर संवेदनशील रही आशा प्रभात की लेखनी का नया पड़ाव है। इससे पहले वह ‘मैं जनकनन्दिनी’ और ‘उर्मिला’ लिख चुकी हैं। ‘मांडवी’ भरत की पत्नी थीं जिनके विषय में न तो रामकथा में बहुत विस्तार से कुछ आता है, न ही बाद के विद्वानों-साहित्यकारों ने उन पर कुछ ख़ास ध्यान दिया, जबकि राम-वनवास के दौरान उन्होंने सम्भवतः लक्ष्मण की पत्नी उर्मिला से भी ज़्यादा पीड़ा का वहन किया होगा। आशा प्रभात एक सजग लेखिका के रूप में यह ठीक ही प्रश्न उठाती हैं कि रामायण के पुरुष-पात्र जहाँ इतने पराक्रमी, प्रज्ञावान और गुणवान थे, तो फिर स्त्री-पात्र क्या इतने संवेदनहीन और प्रज्ञाशून्य थे कि उनकी मनस्थिति का विस्तृत चित्रण करना कवियों की अनिवार्य नहीं लगा। इसी से प्रेरित होकर उन्होंने सीता और उर्मिला के बाद अब मांडवी को अपना विषय बनाया जो दुर्भाग्य से उस कैकेयी की बहू भी थी जिसके चलते राम को वनवास हुआ और उनसे जुड़े तमाम पात्रों, ख़ासकर स्त्रियों को इतना कुछ झेलना पड़ा। यह उपन्यास एक पौराणिक चरित्र की भावभूमि का अन्वेषण करते हुए स्त्री-मात्र की व्यथा को समझने का प्रयत्न करता है, और रामकथा के महत्त्वपूर्ण लेकिन उपेक्षित चरित्र को, उसके पूरे व्यक्तित्व के साथ रेखांकित करता है।
Darwin Justice
- Author Name:
Praveen Kumar
- Book Type:

- Description: "किसी को उम्र के 16वें मोड़ पर चाहना, इस सृष्टि का सबसे खूबसूरत एहसास है।" हमारे पूर्वजों के साथ ज़मीन के बंटवारे में अन्याय हुआ है। एक आदमी के पास मरने के बाद शव दफनाने तक की जगह नहीं है और एक आदमी के पास इतनी जमीनें हैं कि उसे पता ही नहीं है कि उसके पास कितनी जमीनें है। हमें ज़मीन चाहिए। सबको जीने का हक़ है... भूखे मरने से अच्छा है... संघर्ष करो। उनकी जमीनें छीनो! जहाँ लड़ाई अस्तित्व बचाने की हो, वहाँ युद्ध का कोई नियम नहीं होता। कल जब इतिहास के पन्ने सवाल करेंगे तो जवाब होगा कि हाँ, हमने बच्चों को मारा। इसलिए मारा कि कल ये बच्चे बड़े होकर नक्सल बनते। हाँ, हमने औरतों को मारा क्योंकि वे औरतें नक्सल पैदा करती थीं और जवान तो नक्सल थे ही। इन्हें तो हर हाल में मारना ही था हमें। बिहार के इतिहास को बुद्ध, महावीर के शांति सन्देशों के अलावा सामाजिक संरचना में ' डार्विन जस्टिस की थ्योरी को समझाना था। सामाजिक संरचना में सदियों से चला आ रहा असंतुलन, संतुलित होने के नाम पर रक्त रंजित होने जा रहा था। तैयारियाँ शुरू हो गईं। लोग दूर दराज़ से आने लगे। जिन्हें अपने खेतों से लाल झंडे हटवाने थे, वे मनचाहा योगदान देने को तैयार थे। अनय और चश्मिश की कहानी काल के किसी कार्यक्रम का हिस्सा है। किसी इंसान के बहाने इंसानियत को कलंकित करना है। उसे 'कार्ल मार्क्स' के अंदर 'डार्विन के सिद्धान्त' को समझाना है। उसे समझाना है कि 'न्यूटन का सिद्धान्त' सिर्फ़ भौतिकी विज्ञान की किताबों में ही नहीं बल्कि सामाजिक संरचना के अंदर भी घुसा है। उसे समझाना है कि 'लिंकन' के जिस प्रजातंत्र का हम दम्भ भरते हैं, वहाँ भी 'डार्विन की थ्योरी' चुपचाप अपना काम करती रहती है।
Jara Yaad Unhen Bhi Kar Lo
- Author Name:
Chiranjeev Sinha
- Book Type:

- Description: साधारणतया भारतीय स्वतंत्रता संग्राम का कालखंड 1857 से 1947 तक माना जाता है, लेकिन विदेशी शासन का सबल प्रतिरोध इससे 332 वर्ष पहले सन् 1525 में ही प्रारंभ हो गया था, जब कर्नाटक के उलल्लाल नगर की रानी अब्बका चौटा, जो अग्निबाण चलानेवाली भारतवर्ष की अंतिम योद्धा थी, ने बढ़ते पुर्तगाली आधिपत्य को घुटने टेकने पर मजबूर कर दिया था। इस संग्रह में 1525 से 1947 अर्थात् लगभग सवा चार सौ वर्षों तक अनवरत प्रवहमान रहे विश्व के सर्वाधिक लंबे समय तक चले स्वतंत्रता संग्राम का वर्णन किया गया है। सबसे कम आयु में माँ भारती के लिए बलिदान होनेवाले ओडिशा के 12 वर्षीय बाजीराव राठउत के अमर बलिदान को पढ़कर भला कौन किशोर और युवा रोमांचित नहीं होगा! दुर्गा भाभी तमाम बंदिशों को धता बताते हुए किस चतुराई से भगत सिंह को अंग्रेजों की नाक के नीचे से लाहौर से कलकत्ता निकाल ले गईं, यह आज भी मिशन शक्ति की प्रेरणा है। तात्या टोपे की बिटिया मैना देवी ने जनरल आउट्रम के सामने झुकने की जगह जिंदा आग में जलना स्वीकार किया और अजीजन बाई ने यह दिखाया कि समाज का हर तबका चाहे वह तवायफ ही क्यों न हो, देश की आजादी के लिए मर-मिटने को तैयार रहता है। भारतवर्ष के ऐसे ही 75 वीरों और वीरांगनाओं का दाँतों तले उँगली दबाने सदृश अनछुआ वर्णन जो इन अनजाने क्रांतिवीरों के प्रति स्वाभाविक श्रद्धा और सम्मान सृजित करेगा ।
Indira Gandhi ka samajwad
- Author Name:
Hiranand Acharya
- Book Type:

- Description: History
Draupadi
- Author Name:
Yarlagadda Lakshmi Prasad +1
- Rating:
- Book Type:

- Description: Draupadi, originally written in Telugu, was first serialised in Andhra Jyoti before it came out in book form. The novel presented in a unique style, is not just an account of the different incidents occur around Draupadi but these incidents have been fused together into a fascinating story. The narrative process and the structural method of description used by Lakshmi Prasad fully engage the reader.
Revenge And Reconciliation : Understanding South Asian History
- Author Name:
Rajmohan Gandhi
- Rating:
- Book Type:

- Description: In this remarkable study, well-known biographer Rajmohan Gandhi, underscoring the prominence in the Mahabharata of the revenge impulse, follows its trajectory in South Asian history. Side by side, he traces the role played by reconcilers up to present times, beginning with the Buddha, Mahavira and Asoka. His explanation of the 1947 division of India identifies the role of the 1857 Rebellion in shaping Gandhi’s thinking and strategy, and reflects on the wounds of Partition. The survey of post-Independence India, Pakistan, Bangladesh and Sri Lanka also touches upon the tragic bereavements of six of their women leaders.
Umeda- Ek yuddha Nartaki
- Author Name:
Akash Mathur
- Rating:
- Book Type:

- Description: इतिहास पर लिखना बहुत मुश्किल होता है, और विशेषकर उस इतिहास पर लिखना, जिसके बारे में कहीं कोई विशेष जानकारी नहीं मिलती हो। आकाश माथुर ने एक ऐसा ही विषय उठा लिया। कुँवर चैन सिंह की जगह उन्हीं के साथ शहीद हुई नर्तकी उमेदा की कहानी लिखना। नर्तकी का नाम तक कहीं नहीं मिलता, बस एक टूटी-फूटी समाधि है, जो सीहोर में कुँवर चैन सिंह की छतरी के पास बनी हुई है। समाधि भी धीरे-धीरे टूट रही है, या यूँ कहें कि तोड़ी जा रही है। और कुछ समय में वहाँ समाधि का नामो-निशान तक नहीं मिलेगा। लेकिन अब कम से कम यह तो है कि आकाश ने उसकी कहानी को सुरक्षित कर दिया है। प्रशंसा करनी होगी आकाश की कि उसने एक ऐसी शहीद नर्तकी की कहानी लिखी, जिसके बारे में कहीं एक शब्द भी नहीं लिखा गया है। इस उपन्यास को पढ़ते हुए यह विश्वास करना मुश्किल होता है कि कुछ बहुत छोटे-छोटे सूत्रों से ही इस पूरे उपन्यास को लिख दिया गया है और उमेदा की कहानी रच दी गई है। आकाश ने बहुत मेहनत की है इस उपन्यास पर। इन दिनों जब शोध कर के लिखने की परंपरा ही समाप्त होती जा रही है, ऐसे में यह उपन्यास इसलिए भी महत्त्वपूर्ण है क्योंकि इसके लेखक ने न केवल किताबों की यात्रा की है, बल्कि उन स्थानों की भी यात्रा की, जहाँ-जहाँ इस उपन्यास को लेकर उसे सूत्र मिल सकते थे। जाने किस-किस से मुलाक़ात की, उन सब से, जिनके पास से कोई छोटी से छोटी भी जानकारी मिल सकती थी। यह मेहनत, यह श्रम और यह शोध इस उपन्यास को पढ़ते समय शब्द दर शब्द महसूस होता है। उपन्यास बहुत रोचक बना है, जिसको पढ़ते समय कभी भी पठनीयता की कमी महसूस नहीं होती है। आकाश का यह पहला उपन्यास है, उम्मीद करता हूँ कि आगे और भी उपन्यास आकाश की लेखनी से सामने आएँगे। मेरी शुभकामनाएँ। - पंकज सुबीर
Hasanpur Ke Ram
- Author Name:
Dr. Parshuram Gupt
- Book Type:

- Description: अंतर्वस्तु यह उपन्यास एक ऐसे राजवंश से संबंधित है, जो सम्राट् पृथ्वीराज चौहान केवंशज रहे। पानीपत की पहली लड़ाई के दौरान परिस्थितिवश उन्हें इसलाम स्वीकार करना पड़ा, लेकिन सगोत्रियों तथा अपने पूर्वजों के संस्कारों पर उनकी आस्था यथावत् बनी रही; ठीक वैसे ही, जैसे इंडोनेशिया के निवासी पंथ बदलने के बाद भी अपने पूर्वजों की संस्कृति पर आज भी आस्था रखते हैं। रामकथा लगभग संपूर्ण एशिया की आस्था का केंद्र रही है और आज भी इसमें इस पूरे क्षेत्र को एकता केसूत्र में पिरोने की अद्भुत क्षमता है। अयोध्या में भव्य राम-मंदिर के निर्माण ने इस आस्था को और अधिक बलवती किया है। ‘पंथ बदलने पर भी हम अपनी संस्कृति से बँधे रहते हैं’ यह भाव इस ऐतिहासिक उपन्यासका प्राण-तत्त्व है। यह ऐतिहासिक उपन्यास अपने तरीके से भारतीय संस्कृति की जिजीविषा की अनूठी कहानी एक अनूठे अंदाज में प्रस्तुत करता है। यह कहानी खंड-खंड से प्रचंड शक्ति बनने की कहानी है। यह अंधकार को चीरकर प्रकाश का नया सूरज उगाने की कहानी है। यह अनेक रोचक ऐतिहासिक तथ्यों का उद्घाटन भी करता है, जो भारतीय इतिहास को नए दृष्टिकोण से देखने का कुतूहल पैदा करता है। यह अनेक उलझी हुई समस्याओं के समाधान के रास्ते भी सुझाता है।
Edwina Aur Nehru
- Author Name:
Catherine Clement
- Rating:
- Book Type:

- Description: ‘नेहरू और एडविना’ के चरित्रों को केन्द्र में रखकर लिखा गया यह ऐतिहासिक उपन्यास तथ्य और कल्पना के अद्भुत मेल से रचा गया है। जो घटित हुआ वह तो सत्य है ही, लेकिन जो घटित नहीं हुआ, वह भी इसलिए एक हद तक सच्चा है क्योंकि उसका घटित होना काफ़ी हद तक सम्भव था। फ़्रांसीसी पाठकों को ध्यान में रखकर लिखी गई यह प्रेम कहानी भारतीय जनमानस को भी उसी रूप में उद्वेलित करेगी, इसमें सन्देह नहीं। भारत के इतिहास में बीसवीं शताब्दी की सबसे महत्त्वपूर्ण घटना 1947 का राजनीतिक विभाजन है। यह उपन्यास, इस घटना के अभिकर्ता तमाम महत्त्वपूर्ण पात्रों के भीतर झाँककर इसके कारणों और प्रभावों की दास्तान कहने का प्रयास करता है, और इस तरह दृश्य के अदृश्य सूत्रों का उद्घाटन करता है। सार्वजनिक के भीतर जो कुछ निजी है, वही उसका अन्त:सूत्र भी है, और अपनी मर्मस्पर्शिता में कहीं अधिक प्रभावी भी। इन्हीं अन्त:सूत्रों को उनकी मार्मिक संवेदनीयता के साथ ग्रहण कर इस उपन्यास का कथात्मक ताना-बाना बुना गया है। घटनाएँ प्राय: जानी-सुनी हैं—एक अर्थ में पूर्व परिचित। यही स्थिति पात्रों की है—जाने-माने, साहसी, प्रतापी, योद्धाओं का एक पूरा संसार। पर इन सबने मिलकर जो इतिहास रचा उसमें कौन, कहाँ, कितना टूटा-जुड़ा, बना-बिगड़ा, वह घटनाओं का नहीं संवेदनाओं का इतिहास है । एक बिन्दु ऐसा होता है जो बाहर और भीतर के तनाव का सन्धि-स्थल रचता है, जहाँ अक्सर जो बहुत अन्तरंग है, निजी है उसके अतिक्रमण की अनन्त साधना से बहिरंग की रचना होती है । इसी बिन्दु को पकड़ने की कोशिश है इस उपन्यास में। समय के दो महत्त्वपूर्ण पात्रों की केन्द्रीयता से उठकर समय को फिर से रचने की उसकी घटनात्मकता में नहीं, मार्मिकता में।
Bhagat Singh Ko Fansi : Vol. 2
- Author Name:
Rajwanti Mann +1
- Book Type:

- Description: यह पुस्तक ‘भगत सिंह को फांसी-1’ का ही दूसरा भाग है। इसमें लाहौर साज़िश केस के दौरान हुई 457 गवाहियों में से महत्त्वपूर्ण गवाहियों के तो पूर्ण विवरण दिए गए हैं, जबकि शेष गवाहियों के तथ्य-सार दिए गए हैं। शहीद सुखदेव ने इस दस्तावेज़ का बारीकी से अध्ययन किया था और उनके द्वारा अंकित की गई टिप्पणियों का उल्लेख सम्बन्धित गवाहियों के ब्योरे में किया गया है। यहाँ यह कहना भी प्रासंगिक है कि इस ऐतिहासिक दस्तावेज़ को पहली बार प्रकाशित किया जा रहा है, जिसके द्वारा पाठकों को अनेक विचित्र तथ्य जानने का अवसर प्राप्त होगा। ज़िक्र योग्य है कि ये गवाहियाँ विशेष ट्रिब्यूनल के समक्ष 5 मई, 1930 से 26 अगस्त, 1930 तक हुई थीं जबकि इससे पूर्व 10 जुलाई, 1929 से 3 मई, 1930 तक मुक़दमा विशेष मजिस्ट्रेट की अदालत में चला था।
The Life and Death of Sambhaji
- Author Name:
Medha Deshmukh Bhaskaran
- Book Type:

- Description: It begins to dawn on nine-year-old Sambhaji that his father has fled from Mughal emperor Aurangzeb and left him behind. He now has to find his way home with the help of strangers... Under the shadow of a renowned father, Sambhaji is thrown into the Maratha-Mughal conflict from a young age. His mistakes cost him dearly, and when his father suddenly dies and he becomes the chhatrapati, it's like inheriting a crown of thorns. Over the next nine years, he fights a constant battle-internally, as palace intrigues threaten his life, and externally, as Aurangzeb advances into the Deccan with his army. Even Shivaji had never faced such outright Mughal aggression. Can he protect the Maratha nation and Swaraj, his father's dream? Will he prove himself a worthy son in life and death? Though history has often been unkind to Sambhaji, it cannot deny that he inspired a generation of Maratha warriors who ultimately ended Aurangzeb's jihad.
Bhagat Singh Ko Fansi : Vol. 1
- Author Name:
Malvender Jit Singh Waraich +1
- Book Type:

- Description: भगत सिंह को फाँसी-1 यह कैसे हुआ कि मामूली हथियारों से लैस कुछ नौजवानों को ब्रिटिश साम्राज्य के खिलाफ युद्ध छेड़ने का दोषी पाया गया, जिसके चलते उन्हें उम्रकैद और फाँसी की सजा हुई! ‘युद्ध’, जो उन्होंने लड़ा हालाँकि ‘‘यह युद्ध उपनिवेशवादियों व पूँजीपतियों के विरुद्ध लड़ा गया।’’ और जो ‘‘ न ही यह हमारे साथ शुरू हुआ और न ही यह हमारे जीवन के साथ खत्म होगा।’’ और, मात्र 30 महीने की उल्लेखनीय अवधि में 8-9 सितम्बर 1928 को ‘हिन्दुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिक एसोसिएशन’ की स्थापना के साथ शुरू होकर, यह सम्पन्न हो गया। विश्वास से भरपूर भगत सिंह के शब्द थे, कि ‘‘मैं अपने देश के करोड़ों लोगों की ‘इंकलाब जिंदाबाद’ की हुंकार सुन पा रहा हूँ। काल-कोठरी की मोटी दीवारो के पीछे बैठे हुए भी मुझे कहै कि यह नारा हमारे स्वतंत्राता संघर्ष को प्रेरणा देता रहेगा।’’ इस पुस्तक में प्रस्तुत है इसका प्रथमद्रष्टया विवरण।
Chhatrapati Sambhaji Maharaj
- Author Name:
Dr. Ismail Pathan
- Book Type:

- Description: डॉ. पठाण यांच्या संभाजी चरित्राचे वैशिष्ट्य काय? या प्रश्नाचे उत्तर शोधण्याचा जेव्हा आम्ही प्रयत्न केला तेव्हा आमच्या लक्षात आले की, एका धर्मनिरपेक्षवादी मुस्लीम लेखकाने लिहिलेले हे महाराष्ट्रातील पहिले संभाजी चरित्र आहे. आज समाजातील काही विशिष्ट गट संभाजी महाराजांनी दिलेल्या लढ्यास हिंदू विरुद्ध मुस्लीम असा रंग देऊन तो धार्मिक लढा होता, असे भासवून या राजास ‘धर्मवीर' म्हणून घोषित करीतअसताना या ग्रंथाने या घोषणेला छेद दिला आहे. औरंगजेबाने सुरु केलेले हे युद्ध खऱ्या अर्थाने साम्राज्यवादी होते व त्याला विरोध करून त्याच्याशी लढणाऱ्या मराठ्यांचे युद्ध हे त्याच अर्थाने स्वातंत्र्यवादी होते. इथे हिंदू विरुद्ध मुस्लीम असा धर्माचा काही प्रश्नच निर्माण होत नाही, हे ऐतिहासिक सत्य डॉ. पठाण यांच्या या ग्रंथातून दृग्गोचर होते आहे आणि हेच सत्यकथन या ग्रंथाचे यश आहे असे आम्हांस वाटते. - डॉ. जयसिंगराव पवार ज्येष्ठ इतिहासकार Chhatrapati Sambhaji Maharaj | Dr. Ismail Pathan छत्रपती संभाजी महाराज । डॉ. इस्माईल पठाण
Jab Jyoti Jagi
- Author Name:
Sukhdev Raj
- Book Type:

- Description: भारतीय स्वाधीनता-आन्दोलन में बिना किसी प्रकार की सुयश-प्राप्ति की कामना किए हँसते-हँसते फाँसी के तख़्ते पर झूल जानेवाले मृत्युंजयी वीरों के बलिदान का सर्वाधिक महत्त्व रहा है। उन वीरों को जितनी प्रतिष्ठा और सम्मान प्राप्त होना चाहिए था, उसकी उपेक्षा एवं अवहेलना सत्ता-लोलुप स्वार्थियों ने सदैव ही की है। यदि उन वीरों की नि:स्वार्थ मातृ-भूमि-सेवा का अनुकरण किया गया होता तो भारतीय जनता आज स्वर्ग-सुख का उपभोग निस्सन्देह करती होती। पराधीनता के समय जो भी क्रान्तिकारी साहित्य उपलब्ध था उसे भारतीय युवक बड़े उत्साह से पढ़ते थे; इसीलिए तत्कालीन युवकों में देश के प्रति नि:स्वार्थ सेवा की सच्ची लगन थी। आज भारतीय जनता, विशेषतः युवकों में सुषुप्त त्याग और सेवा की भावना को जाग्रत करने के लिए उन क्रान्तिकारी वीरों के इतिहास के पठन-पाठन की अत्यधिक आवश्यकता है। भारतीय क्रान्तिकारियों के सम्बन्ध में अभी तक बहुत कम लिखा गया है। इन क्रान्तिकारियों के सम्बन्ध में पुस्तक लिखने का कार्य अत्यन्त कठिन है क्योंकि सभी क्रान्तिकारी अपने कार्य-कलापों को एकदम गुप्त रखते थे, उनके निकटतम सहयोगी भी उनकी बहुत सी बातों से अपरिचित रहते थे। प्रस्तुत पुस्तक अमर शहीद स्व. चन्द्रशेखर आज़ाद और भगवतीचरण बोहरा के अत्यन्त विश्वासपात्र, क्रान्तिकारी आन्दोलन में निरन्तर कार्य करनेवाले भाई सुखदेव राज जी ने लिखी है। अस्तु, पुस्तक की उपादेयता निर्विवाद है।
An Account of the Maithil Marriage
- Author Name:
Pt. Bhavnath Jha
- Book Type:

- Description: Maharajadhiraja Rameshwar Singh (16 January 1860 – 3 July 1929) was the 21st ruler of the Khandawala dynasty of Darbhanga in the Mithila region from 1898 till his death. On the one hand, he was a scholar of Indian scriptures and worshiper of divine powers, on the other hand, he was proficient in the English language and an efficient administrator. As the president of Bharat Dharma Mahamandal, he propagated Sanatan Dharma all over India and strengthened it socially and religiously. For the promotion of education in Mithila as well as social political awakening, he established a press and started a newspaper Mithila Mihir. Many important books were published under his supervision. Maharaj Rameshwar Singh established many factories for economic development and played an important role in the establishment of Kashi Hindu University. The ruins of the grand palace of Rajnagar in the present Madhubani district and many grand temples in that complex remind us of his glory. He was made a Knight Commander of the Order of the Indian Empire (KCIE) and was promoted to a Knight Grand Commander (GCIE) and a Knight Commander of the Order of the British Empire, Civil Division (KBE).
Customer Reviews
Be the first to write a review...
5 out of 5
Book