Marm Mudra
(0)
Author:
Mahavir JondhalePublisher:
Manovikas Prakashan LLPLanguage:
MarathiCategory:
General-non-fiction₹
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ज्येष्ठ पत्रकार महावीर जोंधळे यांनी ‘मर्म मुद्रा' या सार्थ शीर्षकाच्या नव्या ग्रंथाची भेट वाचकांपुढे ठेवली आहे. स्वातंत्र्योत्तर काळात राजकीय चळवळच नव्हे; तर वंचित, दलित, अल्पसंख्य, शेतमजूर, धरणग्रस्त, पीडित वर्गाच्या मागण्या आणि त्यासाठी त्यांनी उभारलेल्या लढ्यात प्रत्यक्ष स्वत: आणि लेखणीद्वारेही जोंधळे यांनी स्वत:चा सहभाग नोंदवला आहे. अंधश्रद्धा, जातिभेद आदी समस्यांनी अद्यापही पुरोगामी समजल्या जाणाऱ्या महाराष्ट्रात ठाण मांडले आहे. पत्रकारितेच्या क्षेत्रात लेखणीचा पराक्रम करणारे बहुसंख्य भाष्यकार निवृत्तीनंतर नि:संकोच मौनीबाबांचे धोरण अवलंबतात. म्हणूनच अपवादात्मक पत्रकार वगळता बहुसंख्य पत्रकारांनी सावधपणे पत्रकारितेच्या आद्य कर्तव्यपूर्तीच्या भूमिकेकडे पाठ फिरवली आहे. विचारवंतांना आणि साक्षेपी वाचकांना सभोवतालचे सार्वजनिक वास्तवाचे दर्शन खरेतर संवेदनशील आणि पत्रकारितेच्या नैतिक मूल्यांची जाण ठेवून घडवणे अपेक्षित असते. महावीर जोंधळे यांनी आदर्श पत्रकारितेचा धर्म सांभाळूनच स्वत:ची लेखणी आजवर झिजवली आहे. बॅ. नाथ पै, बाबा आढाव, कवयित्री शांता शेळके, प्रा. एम. एच. देसर्डा, नामदेव ढसाळ, शिल्पकार भाऊ साठे आदींची उद्बोधक शब्दचित्रे या पुस्तकात महावीर जोंधळे यांनी वाचकांपुढे ठेवली आहेत. ती निश्चितच सर्वांसाठी प्रेरणादायक ठरणारी आहेत, म्हणूनच ती वाचायला हवीत. एकनाथ बागूल Marm Mudra | Mahavir Jondhale मर्म मुद्रा । महावीर जोंधळे
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ज्येष्ठ पत्रकार महावीर जोंधळे यांनी ‘मर्म मुद्रा' या सार्थ शीर्षकाच्या नव्या ग्रंथाची भेट वाचकांपुढे ठेवली आहे. स्वातंत्र्योत्तर काळात राजकीय चळवळच नव्हे; तर वंचित, दलित, अल्पसंख्य, शेतमजूर, धरणग्रस्त, पीडित वर्गाच्या मागण्या आणि त्यासाठी त्यांनी उभारलेल्या लढ्यात प्रत्यक्ष स्वत: आणि लेखणीद्वारेही जोंधळे यांनी स्वत:चा सहभाग नोंदवला आहे. अंधश्रद्धा, जातिभेद आदी समस्यांनी अद्यापही पुरोगामी समजल्या जाणाऱ्या महाराष्ट्रात ठाण मांडले आहे. पत्रकारितेच्या क्षेत्रात लेखणीचा पराक्रम करणारे बहुसंख्य भाष्यकार निवृत्तीनंतर नि:संकोच मौनीबाबांचे धोरण अवलंबतात. म्हणूनच अपवादात्मक पत्रकार वगळता बहुसंख्य पत्रकारांनी सावधपणे पत्रकारितेच्या आद्य कर्तव्यपूर्तीच्या भूमिकेकडे पाठ फिरवली आहे. विचारवंतांना आणि साक्षेपी वाचकांना सभोवतालचे सार्वजनिक वास्तवाचे दर्शन खरेतर संवेदनशील आणि पत्रकारितेच्या नैतिक मूल्यांची जाण ठेवून घडवणे अपेक्षित असते. महावीर जोंधळे यांनी आदर्श पत्रकारितेचा धर्म सांभाळूनच स्वत:ची लेखणी आजवर झिजवली आहे. बॅ. नाथ पै, बाबा आढाव, कवयित्री शांता शेळके, प्रा. एम. एच. देसर्डा, नामदेव ढसाळ, शिल्पकार भाऊ साठे आदींची उद्बोधक शब्दचित्रे या पुस्तकात महावीर जोंधळे यांनी वाचकांपुढे ठेवली आहेत. ती निश्चितच सर्वांसाठी प्रेरणादायक ठरणारी आहेत, म्हणूनच ती वाचायला हवीत. एकनाथ बागूल Marm Mudra | Mahavir Jondhale मर्म मुद्रा । महावीर जोंधळे
Book Details
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ISBN9789363747418
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Pages172
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Avg Reading Time6 hrs
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Age18-100 yrs
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Country of OriginIndia
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- Description: कुटुंबाचा गाडा प्रगतीकडे न्यायचा असेल, तर घरातल्या प्रत्येक महिलेकडे आर्थिक शहाणपण असलं पाहिजे. ती आर्थिक साक्षर झाली पाहिजे. म्हणजेच आर्थिक शिस्तीबरोबरच हाती येणाऱ्या पैशाचं व्यवस्थापन करण्याची शास्त्रशुद्ध कला तिच्याकडे असायला हवी. ती अंगी बाणायची असेल तर अनिल पाटील लिखित ‘चला, करोडपती होऊया' हे पुस्तक प्रत्येक महिलेनं वाचलंच पाहिजे. हे पुस्तक महिलांना आर्थिकदृष्ट्या साक्षर तर बनवतंच पण त्याचबरोबरीनं अर्थसाक्षर झालेल्या महिलांना श्रीमंतीची वाटही दाखवतं. मुलांच्या शिक्षणपासून वृद्धापकाळातील आधारापर्यंतचं आर्थिक नियोजन कसं करावं आणि हाती येणारा पैसा कसा वाढवला जाऊ शकतो याची शास्त्रशुद्ध परंतु सहज समजेल अशा सोप्या पद्धतीने माहिती देणारं हे पुस्तक आपल्या संग्रही असायलाच हवं. विभाग पहिला : आर्थिक शहाणपण आणि स्त्रिया 1. पैशांचं जग 2. पैशांच्या जगाची माहिती करून घेताना... 3. पैशांचा प्रवाह आणि आर्थिक व्यवहार 4. आर्थिक शहाणपण का हवं? 5. मुलांच्या शिक्षणाचं नियोजन कसं कराल? 6. कुटुंबाचं आर्थिक नियोजन कसं करायचं ? विभाग दुसरा : करोडपती बनताना... 7. गुंतवणुकीविषयी जाणून घेताना... 8. गुतवणूक करताना... 9. शेअर मार्केट, म्युच्युअल फंड : श्रीमंतीचा हमरस्ता 10. परतावा आणि व्याजाचं गणित 11. मृत्युपत्र वेळीच लिहायला हवं
I Gaze, Therefore I Am
- Author Name:
Subramoniam Rangaswami
- Rating:
- Book Type:

- Description: We live in a visual age. I Gaze, Therefore I Am is a book on medical gaze first described by Michel Foucault, French philosopher and historian of ideas. The journey the medical gaze has taken from its archaic beginnings to our era of digital culture has been noteworthy. In this book, Rangaswami takes us through this historic journey, blending stories from the history of science and medicine with a rich collection of tales from scriptures and legends as well as iconic episodes from his personal experience, stirring them in his unique style with a wide range of topics for academic discussions. This book is a compelling narrative of the shifting optics of gaze, especially medical gaze, poised in our age of human transition from Homo visualis to Homo virtualis.
Amir Khusro : Vyaktittva, Chintan Aur Sampoorna Hindavi Kalam
- Author Name:
Zakir Hussain Zakir
- Book Type:

- Description: अमीर ख़ुसरो जिन्हें दो बड़ी सभ्यताओं के सम्मिलन का प्रतिनिधि व्यक्तित्व कहा जाता है; और चौदहवीं सदी में रचा गया जिनका कलाम आज भी अपनी जगह कायम है, वे एक बड़े कवि तो थे ही, राजनीतिज्ञ, संगीतकार और भाषाविद भी थे। ‘अमीर ख़ुसरो : व्यक्तित्व, चिन्तन और सम्पूर्ण हिन्दवी कलाम’ पुस्तक उनके व्यक्तित्व और कृतित्व की लगभग सम्पूर्ण प्रस्तुति है। पुस्तक दो खंडों में विभक्त है। पहले खंड में खुसरो की भाषा और उनकी हिन्दवी रचनाओं पर शोधपरक विवेचना के साथ उनकी रचना ‘ख़ालिक़ बारी’ और उससे जुड़े विवादों पर विचार, तसव्वुफ़ की उनकी धारणा और उनके व्यक्तित्व में तसव्वुफ़ की भूमिका पर केन्द्रित शोध के अलावा जिन सुल्तानों और सूबेदारों के आश्रय में वे रहे उनकी जानकारी भी विस्तारपूर्वक दी गई है। अमीर ख़ुसरों ने अपने जीवनकाल में बारह युद्ध-अभियानों में भाग लिया था, इस खंड में उनकी चर्चा भी ऐतिहासिक संदर्भों के साथ की गई है। एक संगीत-सृजक के रूप में उन्होंने जहाँ नए रागों की रचना की, वहीं नए संगीत वाद्यों का भी आविष्कार किया। एक विस्तृत आलेख इस विषय पर भी इसी खंड में शामिल है। किताब के दूसरे हिस्से में उनके अब तक उपलब्ध हिन्दवी काव्य को प्रस्तुत किया गया है। उनकी पहेलियों, कहमुकरियों, दोहों, कविताओं, गीतों, कव्वालियों, ग़ज़लों और ‘ख़ालिक़ बारी’ को यहाँ आप एक साथ देख सकते हैं। कहने की जरूरत नहीं कि अमीर खुसरो के साथ यह पुस्तक उनके समय, तत्कालीन इतिहास और उस दौर की सांस्कृतिक विशेषताओं पर भी प्रकाश डालती है।
Shiksha Ke Madhyam Se Rashtra-Nirman
- Author Name:
Ramesh Pokhriyal 'Nishank'
- Book Type:

- Description: हमारे प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने जिस 'न्यू इंडिया' की कल्पना की है, उसकी आधारशिला के रूप में भारत को एक ऐसी शिक्षा नीति की आवश्यकता थी, जो तेजी से बदलते समाज और गतिशील दुनिया की चुनौतियों को अवसरों में बदल सके और खुशहाल भारत का निर्माण कर सके। गहन अध्ययन-मनन और चिंतन के उपरांत तैयार की गई नई शिक्षा नीति-2020 पूर्णतया भारत-केंद्रित होने के साथ गुणवत्तापरक, नवाचारयुक्त, व्यावहारिक, प्रौद्योगिकीयुक्त, अंतरराष्ट्रीय, वैज्ञानिक और कौशलयुक्त है । कुल मिलाकर नई शिक्षा नीति NEP-2020 130 करोड़ से अधिक भारतीयों की आकांक्षाओं का प्रतिबिंब है। नई शिक्षा नीति-2020 ने भारतीय परंपरागत ज्ञान, संस्कृति, भाषाओं, परंपराओं और मानवीय मूल्यों के विकास पर विशेष जोर दिया है और इस नीति में स्पष्ट है कि शिक्षा केवल शिक्षकों और पुस्तकों से प्राप्त ज्ञान एवं जानकारी के बारे में नहीं है। यह उन मूल्यों, क्षमताओं और व्यवहार को विकसित करने के बारे में है, जो एक स्थिर समाज बनाने के लिए शांति, न्याय और समावेशिता के गुण विकसित करते हैं। निश्चित रूप से भारत को शिक्षा के आकर्षक केंद्र के रूप में स्थापित कर नई शिक्षा नीति भारत के विश्वगुरु बनने का मार्ग प्रशस्त करेगी।
Ped Aur Parchhai
- Author Name:
Udyan Vajpeyi +1
- Book Type:

- Description: प्रसिद्ध कवि और लेखक उदयन वाजपेयी के लघु निबंध और भज्जू श्याम के चित्र इस पुस्तक का निर्माण करते हैं। उदयन वाजपेई के निबंध कल्पनाशील और चतुराई से गढ़े गए हैं। वह परिभाषाओं से निपटता नहीं है बल्कि वह किसी चीज़ को देखने के वैकल्पिक तरीकों पर विचार करता है। इस प्रकार वह वस्तु को उसकी प्रचलित परिभाषाओं से मुक्त कर देता है। भज्जू श्याम के चित्र सोच-समझकर बनाए गए और विस्तृत हैं। उनके सूक्ष्म विवरणों का आनंद लेने के लिए उन्हें ध्यानपूर्वक, बारीकी से देखें। Age group 9-12 years
Chetna Hero
- Author Name:
Mission Chetna
- Book Type:

- Description: चेतना इस संसार में भलाई को पहचानने, उसकी सहारना करने और उसे आगे बढ़ानेवाला एक अभियान है। 'भलाई का प्रसार' करने और तमाम लोगों को जीवन में भलाई पर चलने की प्रेरणा देने के अपने मिशन पर खरा उतरते हुए, चेतना भारत भर में उन पुरुषों और महिलाओं की पहचान और उनका सम्मान हि] है, जो धारा के खिलाफ जाने और अन्य व्यक्तियों तथा परिवारों तक पहुँचने का पर्याप्त साहस रखते हैं। ये पुरुष और स्त्रियाँ चेतना के नायक- नायिकाएँ हैं--चेतना हीरो हैं। “चेतना हीरो' की जीवंत कहानियाँ दूसरों को भी कुछ ऐसा ही करने की, उसमें सहयोग करने की प्रेरणा दे सकती हैं--यही सोच इस चेतना हीरो की कॉफी टेबल बुक का आधार है। चेतना हीरो ऐसे भले लोग हैं, जिन्होंने कर्म के जरिए बोलने का फैसला किया है। उनमें से किसी ने भी बड़े पैमाने पर सुनियोजित और अच्छे-खासे पैसों के साथ भलाई के अपने काम शुरू नहीं किए। वे जिन लोगों के संपर्क में वे आए, उनकी मदद के लिए उन्होंने चुपचाप उनकी तकलीफों को कम किया और फिर किसी एक की तकलीफ दूर करने के बाद वे रुके नहीं। वे खुद से लगातार पूछते रहे, “मैं और क्या कर सकता हूँ समाज के लिए?” और 'किसे इस तरह की मदद चाहिए ?' इस तरह के सवालों के जवाब ने उनको चेतना हीरो में बदल दिया, जो वे आज हैं। 'चेतना हीरो : कॉफी टेबल बुक ' ऐसे ही कुछ असाधारण व्यक्तियों की सराहना है, जिन्होंने पशु देखभाल, शिक्षा, पर्यावरण देखभाल, भूख, सामाजिक जिम्मेदारी, दिव्यांगों और महिलाओं के सशकतीकरण में अपने प्रयासों से करोड़ों लोगों के जीवन को प्रभावित किया है। चेतना की यह पहल उन सभी हीरो को एक मंच पर लेकर आती है। नेटवर्क बनाने और एक-दूसरे से जुड़ने के कारण इन हीरो को यह सुनिश्चित करने में मदद मिली है कि उनके कार्यों का सामूहिक प्रभाव दयालुता और देखभाल के व्यक्तिगत कार्यों की तुलना में कई गुना व्यापक हो। आशा है कि कॉफी टेबल बुक आपके जीवन में भी 'भलाई के प्रसार' का एक दीपक जलाएगी। ...
Vigyan Jantantra Aur Islam
- Author Name:
Humayun Kabeer
- Book Type:

-
Description:
संसार का इस्लाम से परिचय करानेवाले पैग़म्बर मोहम्मद माने जाते हैं। उनका पूरा जीवन सत्य, निष्ठा का सही पैमाना रहा है। उन्होंने जीवन को तर्कों के आधार पर जीने की सलाह दी। उनका मानना था कि धर्म प्राधिकार पर आधारित न होकर तर्क पर आधारित हो। ‘विज्ञान, जनतंत्र और इस्लाम’ में इन्हीं बिन्दुओं पर विमर्श है।
इस्लाम ने श्रद्धाजनित चमत्कारों का निषेध किया, एकेश्वरवाद पर ज़ोर उसके वैज्ञानिक दृष्टिकोण का आधार है। मनुष्य–मनुष्य में कोई भेद इस्लाम में नहीं है। सामान्य रूप से यह उसके लोकतांत्रिक मिज़ाज की भी बुनियाद है। जनतंत्र की अवधारणा, मनुष्य के अधिकार, कल्याणराज्य, स्वाधीनता, प्राधिकार और कल्पना, दर्शनशास्त्र का अध्ययन, भारत में शिक्षा की समस्याएँ तथा महात्मा गांधी के विचार–व्यवहार का सम्यक् आकलन प्रसिद्ध चिन्तक तथा राजनेता हुमायूँ कबीर ने इस पुस्तक में किया है।
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