Born A Crime
Author:
Aabha Patwardhan, Trevor NoahPublisher:
Manovikas Prakashan LLPLanguage:
MarathiCategory:
General-non-fiction0 Ratings
Price: ₹ 288
₹
360
Available
भिन्न वंशाच्या-वर्गाच्या स्त्री-पुरुषांमध्ये घडणाऱ्या शरीर-संबंधांवर प्रतिबंध
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अशा परिस्थितीत एका आग्रही, व्यवस्थेला फाट्यावर मारणाऱ्या कृष्णवर्णीय
तरुणीने आपल्या युरोपियन गोऱ्या प्रियकरासोबत एक निर्णय घेतला...
मुलाला जन्म देण्याचा आणि ते मूल एकटीने वाढवायचा. तिने जाणतेपणी,
ठरवून हा गुन्हा केला आणि त्यातून ‘ट्रेवर नोआ' जन्माला आला. अशा परिस्थितीत
वाढतानाचे ट्रेवर नोआचे अनुभव आणि असं मूल पदरी असताना, त्याला
वाढवतानाची त्याच्या आईची उडणारी त्रेधातिरपिट याची भेदक, मजेशीर,
स्पष्ट कथा म्हणजे ‘बॉर्न अ क्राइम' हे हृदयस्पर्शी आत्मचरित्र होय. मुख्य
म्हणजे दक्षिण आफ्रिकेतलं वातावरण कितीही क्रूर असलं तरी या दोघांच्या
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समज अधिक गहिरी होते. म्हणूनच हे आत्मचरित्र प्रत्येकाने वाचलंच पाहिजे...
Born A Crime | Trevor Noah Translated By : Aabha Patwardhan
बॉर्न अ क्राइम | ट्रेवर नोआ | अनुवाद : आभा पटवर्धन
ISBN: 9788196774806
Pages: 288
Avg Reading Time: 10 hrs
Age: 18+
Country of Origin: India
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- Description: संविधान निर्मात्री सभा को स्पष्ट था कि यदि हिंदू समाज और देश चाहता है कि देश का प्रत्येक नागरिक सामाजिक, धार्मिक, आर्थिक व शैक्षणिक विकास करे तो इन अनुसूचित जातियों के लिए विशेष विकासपरक प्रावधान करने होंगे और इसी विकास की आकांक्षा में संविधान में अनुसूचित जातियों के लिए राजनैतिक, नौकरियों इत्यादि क्षेत्रों में आरक्षण की व्यवस्था की गई। प्रस्तुत लघु पुस्तक में उन परिस्थितियों की संक्षेप में चर्चा की गई है, जिसने हमारे संविधान निर्माताओं को आरक्षण व्यवस्था को लागू करने के लिए प्रेरित किया। इसी प्रकार पुस्तक में अभागे अछूतों (जो आज दलित या अनुसूचित जातियाँ कहलाते हैं) के प्रति अमानवीय परंपराओं व भेदभावपूर्ण नीतियों की चर्चा की गई है, जिसके चलते समाज का एक बड़ा हिस्सा गर्त में चला गया था। पुस्तक को इस प्रकार प्रस्तुत किया गया है कि समाज के सभी वर्गों (कर्मचारी, अधिकारी, प्रमाण-पत्र प्रार्थी व अन्य सभी) को दिल्ली की अनुसूचित जातियों के बारे में सही मूलभूत जानकारी मिले, जिससे आरक्षण नीति के औचित्य एवं इसे सही ढंग से लागू करने व समाज को समझने में मदद मिले। ऐसी अनेकों जातियाँ हैं, जिनसे हम अनभिज्ञ हैं। विश्वास है कि इस पुस्तक से इन जातियों के बारे में यह अनभिज्ञता दूर होगी।
Gyanyog
- Author Name:
Swami Vivekanand
- Book Type:

- Description: ‘ज्ञानयोग’ में स्वामी विवेकानन्द के वेदान्त पर दिए गए विश्लेषणपरक भाषणों को संकलित किया गया है। इनमें कुछ भाषण लंदन में, कुछ अमेरिका में और कुछ अत्यत्र दिए गए थे। उनका मानना था कि व्यक्तिगत और सामाजिक जीवन में वेदान्त निर्णायक रूप में उपयोगी साबित हो सकता है; कि वह मनुष्य के अब तक किए गए चिन्तन का उच्चतम फल है, संसार की समस्त विचार-सरणियों को अन्ततः उसी में विलीन होना है। अत्यन्त सरल और सुगम भाषा में दिए गए इन वक्तव्यों में उन्होंने माया क्या है, मनुष्य का वास्तविक स्वरूप क्या है, माया और ईश्वर की अवधारणा का विकास किस प्रकार हुआ, संसार क्या है, आत्मा का स्वभाव क्या है, अमरत्व क्या है, आदि विषयों पर विचार किया है। विवेकानन्द के चिन्तन की विशेषता ये है कि दर्शन के गूढ़ प्रश्नों पर वे जो भी विचार करते हैं, उसे हमारे भौतिक और वर्तमान जीवन से जोड़ते हुए, उसकी रोशनी में व्याख्यायित करते हुए करते हैं, यह विशेषता इन आलेखों और वक्तव्यों में भी दृष्टिगोचर होती है।
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