Nastikasobat Gandhi
(0)
Author:
G. Ramchandra Rao, Vijay TambePublisher:
Manovikas Prakashan LLPLanguage:
MarathiCategory:
General-non-fiction₹
180
₹ 144 (20% off)
Available
Ships within 48 Hours
Free Shipping in India on orders above Rs. 1100
काळ आहे 1944-1948.आंध्रप्रदेशात गांधी विचारांचा कार्यक्रम राबविणारे नास्तिकवादी कार्यकर्ते गोरा आणि महात्मा गांधी यांच्यामध्ये चर्चा होतात. विषय आहे : आस्तिकता आणि नास्तिकतादोन परस्पर विरोधी मताची माणसे एकमेकांशी चर्चा करत आहेत. परस्परांना तपासून बघत आहेत. मात्र या चर्चेत खंडनमंडन किंवा वादावादीचा खणखणाट नाही. चर्चेच्या ओघात दोघेही एकमेकाला समजून घेतात आणि दोघांमधील नाते अधिकाधिक दृढ होत जाते.गांधीजींच्या निधनानंतर तीन वर्षांनी गोरांनी या आठवणी लिहिल्या आणि तत्कालीन गांधीवादी विचारवंत किशोरीलाल मश्रुवाला यांनी प्रस्तावनेत या आगळ्यावेगळ्या संबंधाची वैचारिक उकल केली.सत्तर वर्षांपूर्वी इंग्रजीत प्रकाशित झालेल्या ‘An atheist with Gandhi' या पुस्तकाचा हा मराठी अनुवाद. सोबत ज्येष्ठ अभ्यासक किशोर बेडकिहाळ यांनी ‘पुस्तकासंबंधी' या प्रदीर्घ टिपणात या पुस्तकाचे आजच्या संदर्भात महत्त्व विशद केले आहे. Nastikasobat Gandhi | Gora (G. Ramchandra Rao)Translated By : Vijay Tambe नास्तिकासोबत गांधी | गोरा (जी. रामचंद्र राव)अनुवाद : विजय तांबे
Read moreAbout the Book
काळ आहे 1944-1948.आंध्रप्रदेशात गांधी विचारांचा कार्यक्रम राबविणारे नास्तिकवादी कार्यकर्ते गोरा आणि महात्मा गांधी यांच्यामध्ये चर्चा होतात.
विषय आहे : आस्तिकता आणि नास्तिकतादोन परस्पर विरोधी मताची माणसे एकमेकांशी चर्चा करत आहेत. परस्परांना तपासून बघत आहेत.
मात्र या चर्चेत खंडनमंडन किंवा वादावादीचा खणखणाट नाही. चर्चेच्या ओघात दोघेही एकमेकाला समजून घेतात आणि दोघांमधील नाते अधिकाधिक
दृढ होत जाते.गांधीजींच्या निधनानंतर तीन वर्षांनी गोरांनी या आठवणी लिहिल्या आणि तत्कालीन गांधीवादी विचारवंत किशोरीलाल मश्रुवाला
यांनी प्रस्तावनेत या आगळ्यावेगळ्या संबंधाची वैचारिक उकल केली.सत्तर वर्षांपूर्वी इंग्रजीत प्रकाशित झालेल्या ‘An atheist with Gandhi' या पुस्तकाचा
हा मराठी अनुवाद. सोबत ज्येष्ठ अभ्यासक किशोर बेडकिहाळ यांनी ‘पुस्तकासंबंधी' या प्रदीर्घ टिपणात या पुस्तकाचे आजच्या संदर्भात महत्त्व विशद केले आहे.
Nastikasobat Gandhi | Gora (G. Ramchandra Rao)Translated By : Vijay Tambe
नास्तिकासोबत गांधी | गोरा (जी. रामचंद्र राव)अनुवाद : विजय तांबे
Book Details
-
ISBN9789391547936
-
Pages116
-
Avg Reading Time4 hrs
-
Age18+ yrs
-
Country of OriginIndia
Recommended For You
Ye Jo Hai Zindagi
- Author Name:
Oprah Winfrey
- Book Type:

- Description:
मनुष्य के दिल-दिमाग का बारीक अध्ययन कर जीवन जीने के व्यावहारिक सूत्र बताने और सकारात्मक सोच विकसित करने में दक्ष विश्वप्रसिद्ध व्यक्तित्व ओपरा विनफ्रे की यह पुस्तक पठनीयता से भरपूर है। सालों से उन्होंने सर्वाधिक रेटिंग वाले अपने बहुचर्चित टॉक शो के जरिए इतिहास रचा है, अपना स्वयं का टेलीविजन नेटवर्क शुरू किया है, और देश की पहली अफ्रीकी-अमेरिकी अरबपति बनी हैं। उन्हें हॉर्वर्ड यूनिवर्सिटी से मानद उपाधि और प्रेसीडेंशियल मेडल फॉर फ्रीडम से सम्मानित किया जा चुका है। अपने सारे अनुभवों से उन्होंने जीवन के सबक चुने हैं, जो उन्होंने चौदह सालों से ‘ओ-ओपरा मैग्जीन’ के लोकप्रिय स्तंभ ‘वॉट आय नो फॉर श्योर’ में प्रस्तुत किए हैं और जो हर माह पाठक को प्रेरित और आनंदित करते हैं। अब पहली बार इन वैचारिक रत्नों का पुनर्लेखन, अद्यतन संग्रह करके एक पुस्तक में पेश किया गया है, जिसमें ओपरा विनफे्र ने अपने आंतरिक उद्गार प्रकट किए हैं। प्रसन्नता, लचक, संवाद, आभार, संभावना, विस्मय, स्पष्टता और शक्ति के भावों के रूप में संगठित ये लेख दुनिया की सर्वाधिक असाधारण औरत के दिल और दिमाग की दुर्लभ, सशक्त और आंतरिक झलक प्रस्तुत करते हैं। साथ ही पाठकों को सर्वोत्तम बनने में मार्गदर्शक की भूमिका भी निभाते हैं। ‘ये जो है जिंदगी...’ में ओपरा विनफ्रे निर्भीक, मर्मस्पर्शी, प्रेरक और बार-बार परिहासपूर्ण शब्दों का इस्तेमाल करती हैं, जो सत्य की ऐसी जगमगाहट देते हैं कि पाठक उन्हें बार-बार पढ़ना चाहते हैं। प्रस्तुत हैं भारत की किसी भी भाषा में जिंदगी का सार बतानेवाले ओपरा विनफ्रे के उद्गार।
Chetna Hero English
- Author Name:
Mission Chetna
- Book Type:

- Description:
Chetna is a movement to recognise, appreciate and support goodness in the world. Living up to its mission of ‘Spreading Goodness’ and with the aim of inspiring many to follow goodness in life, the Chetna honours men and women across India, who are brave enough to go against the flow and reach out to help other individuals and families in need. These men and women are recognised as Chetna Heroes. Chetna Heroes are those people who have chosen to speak up through their deeds. None of them began their activities for social good as a broad-based, well-planned and well-funded programme. They simply responded to silent cries for help of people they came into contact with and they did not stop after answering the first cry. These Chetna Heroes continued to ask themselves—“What more can I do?”, “Who else needs this type of assistance?” The answers to these questions shaped their lives into the stories of inspiration that they are today. Chetna is presenting this Coffee Table Book—CHETNA HEROES—To appreciate applaud the dedication and selfless service of these great human beings. We believe that the stories of ‘Chetna Heroes’ will inspire many to follow suit, in embracing and supporting goodness. This very thought is the basis of publishing this Coffee Table Book.
Deshbhakta aani Andhabhakta
- Author Name:
Satish Kamat +1
- Book Type:

- Description:
भारतीय समाजात अनुदार प्रवृत्तींचे प्रस्थ 1970 आणि नंतरच्या दशकांत वाढत गेले. मार्क्सवादी-लेनिनवाद्यांना भारतीय राज्यघटना कधीच पचनी पडली नाही; कारण तिने कोणा एका पक्षाचा (म्हणजे त्यांच्या पक्षाचा!) विशेषाधिकार मान्य केला नाही. तशीच ती हिंदू कट्टरवाद्यांनाही पचली नाही; कारण तिने कोणा विशिष्ट धर्माला (म्हणजे त्यांच्या धर्माला!) विशेषाधिकार दिले नाहीत. देशाला स्वातंत्र्य मिळाल्यापासूनच, धार्मिक अतिरेक्यांनी आणि डाव्या क्रांतिकारकांनी बळाचा वापर करून त्यांच्या पोथिनिष्ठा लादण्याचे वारंवार प्रयत्न केले. अलीकडच्या दशकांत लोकशाही कार्यपध्दतीला तिसरा धोका समोर येऊ लागला आहे. हा आहे भ्रष्टाचाराचा आणि व्यक्ती, घराणी आणि जातगटांच्या मार्फत सार्वजनिक संस्था आणि राजकीय पक्ष यांच्यावर ताबा मिळवत, घटनात्मक केंद्र पोखरून दुर्बळ होण्याचा... जिद्द हरवल्यामुळे वा संधिसाधूपणामुळे काही लेखक व बुध्दिजीवींनी काँग्रेसची खुशमस्करी सुरू केली. या लाचारीचा उद्वेग आल्याने इतर काहींनी भारतीय जनता पक्षाची कास धरली, पर्यायाने हिंदू धर्माधिष्ठित राष्ट्राच्या उद्दिष्टावर आपली मोहोर उठविली. बुध्दिजीवींचा तिसरा गट अपराधी भावनेपोटी वा निव्वळ मूर्खपणातून, मध्य भारतातील जंगल व डोंगराळ प्रदेशांत आपला प्रभाव वाढविण्याच्या प्रयत्नात असलेल्या क्रांतिकारी माओवाद्यांचा समर्थक बनला... वास्तव्य दिल्लीत नाही, तर बंगलोरमध्ये असल्यामुळे असेल कदाचित, मी राजकीय पक्षांपासून माझे स्वातंत्र्य अबाधित ठेवू शकलो. काँग्रेस, संघ परिवार आणि संसदीय डावे यांच्याविषयीच्या माझ्या मतभेदाच्या मुद्यांची चर्चा या पुस्तकातील निवडक निबंधांत केली आहे... मी माओवाद्यांचाही टीकाकार आहे; कारण सभ्यता आणि लोकशाही यांना काँग्रेसी भ्रष्टाचार आणि संघ परिवाराची असहिष्णुता यांपासून जेवढा धोका आहे, तेवढाच माओवाद्यांपासूनही आहे, असे मी मानतो. Deshbhakta aani Andhabhakta : Ramchandra Guha, Translated by Satish Kamat देशभक्त आणि अंधभक्त : रामचंद्र गुहा, अनुवाद : सतीश कामत
1000 Computer-Internet Prashnottari
- Author Name:
Vinay Bhushan
- Book Type:

- Description:
"15 फरवरी, 1946 को ' एनियाक ' नामक कंप्यूटर दुनिया के सामने पहली बार आया था । तब से लेकर आज तक हमारे जीवन में कंप्यूटर का महत्व बढ़ता ही जा रहा है । इसके आकर्षण से क्या बच्चे, क्या बड़े-कोई नहीं बच पा रहा है । गणना करनी हो, गीत-संगीत सुनना हो, गप करना हो या फिर शोध करना हो, सबके लिए अपनी सेवाएँ देने हेतु सदैव तत्पर रहता है कंप्यूटर । इस पुस्तक में 1000 प्रश्नों के माध्यम से कंप्यूटर से संबंधित अनेक जानकारियाँ दी गई हैं । कंप्यूटर का आविष्कार, कंप्यूटर की पीढ़ियाँ, डिजिटल कंप्यूटरों का वर्गीकरण, कंप्यूटर : एक परिचय, सेकेंडरी मेमोरी, इनपुट/आउटपुट उपकरण, इंटरफेस, सॉफ्टवेअर, ऑपरेटिंग सिस्टम, डाटा संचार (कम्यूनिकेशन), कंप्यूटर नेटवर्क व्यवस्था, कंप्यूटर वाइरस एवं सुरक्षा प्रबंधन, सुपर कंप्यूटर, इंटरनेट, ई-मेल, एफ.टी.पी. और टेलनेट, कंप्यूटर और भारत तथा कंप्यूटर और कैरियर जैसे अध्यायों के द्वारा इस पुस्तक में कंप्यूटर की दुनिया की रोचक व रोमांचक यात्रा कराई गई है । यह पुस्तक कंप्यूटर के क्षेत्र से संबंध रखनेवालों, छात्रों, इंजीनियरों, शोधार्थियों तथा प्रतियोगी परीक्षाओं में बैठनेवाले प्रतियोगियों के लिए अत्यंत उपयोगी है । "
Vishamta : Ek Punarvivechan
- Author Name:
Amartya Sen
- Book Type:

- Description:
नोबेल पुरस्कार विजेता अर्थशास्त्री प्रोफेसर अमर्त्य सेन की एक दार्शनिक रचना है—‘विषमता’। उनकी कई एक विश्व-प्रसिद्ध पुस्तकों के बीच इस रचना का शुमार उनकी सोच की कुंजी के बतौर होता है। निस्संदेह यह प्रोफेसर सेन की कुछ सर्वाधिक कठिन पुस्तकों में से भी एक है। कठिन यह इस अर्थ में नहीं है कि कोई लंबी-चौड़ी उलझी हुई लफ़्फ़ाज़ी इसमें की गई है, बल्कि इस अर्थ में कि स्वतंत्रता, समानता, विविधता आदि अवधारणाओं का प्रयोग यहाँ इतने व्यापक संदर्भों में हुआ है कि उनका आदी होने में किसी को भी काफी मेहनत करनी पड़ेगी।
समानता और स्वतंत्रता के बीच का विवाद इस सदी का एक महत्त्वपूर्ण दार्शनिक विवाद रहा है। शीतयुद्ध के चार दशकों ने तो इसे विश्व राजनीति के केंद्रीय विवाद का ही रूप दे दिया था। इस पुस्तक में प्रोफेसर सेन इस विवाद की तह में जाते हैं। समानतावादियों और स्वतंत्रतावादियों के मतों का विश्लेषण करते हुए प्रोफेसर सेन यह सिद्ध करते हैं कि इन दोनों के बीच विवाद दरअसल इस बात पर है ही नहीं कि मनुष्यों के बीच समानता होनी चाहिए या नहीं। विवाद तो इस बात पर है कि मनुष्यों के बीच समानता किस चीज की होनी चाहिए।
इस केंद्रीय प्रश्न ‘समानता किस चीज की?’ का जवाब खोजने के क्रम में प्रोफेसर सेन मनुष्यों के बीच मौजूद भारी विविधताओं को केंद्र में रखते हैं। अपंग व्यक्ति, गर्भवती स्त्री, कालाजार प्रभावित इलाकों में रहनेवाले आदिवासी या स्वेच्छया सारी सुख-सुविधाओं का त्याग कर जनता की सेवा करनेवाले सामाजिक कार्यकर्ता–सभी उनकी नजर में रहते हैं और मनुष्य की किसी भी गढ़ी-गढ़ाई परिभाषा से वे ठोस रूपाकार वाले मनुष्यों का कुछ खास भला होते नहीं देखते। उनका केंद्रीकरण आमतौर पर भिन्न-भिन्न लक्ष्यों के लिए प्रयास करने की मानवीय स्वतंत्रता पर और खासतौर पर विविध मूल्यों को अर्जित करने की अलग-अलग व्यक्तियों के सामर्थ्य पर है।
स्वतंत्रता और समानता को लेकर आपके विचार चाहे जो भी हों और प्रोफेसर सेन के विचारों से उनकी कोई संगति बैठती हो या न बैठती हो पर इसमें कोई संदेह नहीं कि इस विश्लेषण से गुजरने के बाद आपकी सोच का दायरा पहले से बढ़ चुका होगा।
Dalit-Vimarsh Aur Hindi Sahitya
- Author Name:
Deepak Kumar Pandey
- Book Type:

- Description:
हिन्दी में दलित रचनाकारों की रचनाएँ लगभग तभी से मिलती हैं, जब से हिन्दी साहित्य का आरम्भ होता है। सिद्धों-नाथों की बानियों से लेकर सन्त साहित्य तक दलित रचनाकारों द्वारा रचित विपुल साहित्य हिन्दी की अमूल्य सम्पदा है। आधुनिक युग में समता, न्याय और सामाजिक सम्मान के लिए अम्बेडकरवादी वैचारिक प्रेरणा से लिखे गए सामाजिक बदलाव के साहित्य को ‘दलित साहित्य’ की संज्ञा प्राप्त हुई। सचेत अम्बेडकरवादी प्रेरणा का साहित्य हिन्दी से पहले ही मराठी आदि अन्य भारतीय भाषाओं में लिखा गया। पिछली सदी में 1980 के दशक से हिन्दी का दलित लेखन परिमाण और गुणवता, दोनों ही स्तरों पर अपनी सुस्पष्ट स्वतंत्र पहचान बनाता है। दलित साहित्य अखिल भारतीय परिघटना है। हिन्दी में पिछले चार दशक से सक्रिय दलित रचनाकारों की अनेक पीढ़ियों के प्रतिनिधि स्वरों से रचा गया यह संकलन वक़्त की माँग है।
Stree : Lamba Safar
- Author Name:
Mrinal Pande
- Book Type:

- Description:
मैं इस बारे में ज़्यादा जिरह नहीं करना चाहती कि स्त्री-मुक्ति का विचार हमें किस दिशा में ले जाएगा, लेकिन मुझे हमेशा लगता रहा है, कि अपनी जिस संस्कृति के सन्दर्भ में मैं स्त्री-मुक्ति की चर्चा करना और उसके स्थायी आधारों को चीन्हना चाहती हूँ, उसमें पहला चिन्तन भाषा पर किया गया था। जब दो शब्दों का संस्कृत में समास होता है, तो अक्सर अर्थ में अन्तर आ जाता है। इसलिए स्त्री, जो हमारे मध्यकालीन समाज में प्रायः मुक्ति के उलट बन्धन, और बुद्धि के उलट कुटिल त्रिया-चरित्र का पर्याय मानी गई, मुक्ति से जुड़कर, उन कई पुराने सन्दर्भों से भी मुक्त होगी, यह दिखने लगता है। अब बन्धन बनकर महाठगिनी माया की तरह दुनिया को नचानेवाली स्त्री जब मुक्ति की बात करे, तो जिन जड़मतियों ने अभी तक उसे पिछले साठ वर्षों के लोकतांत्रिक राज-समाज की अनिवार्य अर्द्धांगिनी नहीं माना है, उनको ख़लिश महसूस होगी। उनके लिए स्त्री की पितृसत्ता राज-समाज परम्परा पर निर्भरता कोई समस्या नहीं, इसलिए इस परम्परा पर उठाए उसके सवाल भी सवाल नहीं, एक उद्धत अहंकार का ही प्रमाण हैं। इस पुस्तक के लेखों का मर्म और उनकी दिशा समझने के लिए पहले यह मानना होगा कि एक जीवित परम्परा को समझने के लिए सिर्फ़ मूल स्थापनाओं की नजीर नाकाफ़ी होती है, जब तक हमारी आँखों के आगे जो घट रहा है, उस पूरे कार्य-व्यापार पर हम ख़ुद तटस्थ निर्ममता से चिन्तन नहीं करते, तब तक वैचारिक शृंखला आगे नहीं बढ़ सकती।
Cinema Ka Ishq
- Author Name:
Pitras Bukhari
- Book Type:

- Description:
पितरस बुख़ारी का पूरा नाम पीर सैयद अहमद शाह बुख़ारी है। आपका ताल्लुक़ पाकिस्तान के पेशावर से हैं। शुरूआती तालीम पाकिस्तान ही में पायी और एम.ए. करने के बाद इंग्लिस्तान की कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी से अंग्रेजी साहित्य में डिग्री हासिल की। लाहौर में बतौर उस्ताद आपकी ख़िदमात रहीं और कई बरस तक ऑल इंडिया रेडियो में अलग-अलग ओहदों पर रहे। 1952 में यूनाइटेड नेशन्स में नुमाइन्दे चुने गए, जहाँ 1954 तक रहे। पितरस के लिखे मज़ामीन ज़माने भर में मशहूर हैं मगर इस किताब में मुन्तख़ब 11 मज़ामीन का एक अलग मक़ाम है। आपका लिखा हुआ मिज़ाह उर्दू अदब में बेशक़ीमती सरमाया है। यही वजह है कि आपके इन्तेक़ाल के अगले ही रोज़ न्यूयॉर्क टाईम्स (6 दिसम्बर 1958) ने अपने इदारिया में उनको याद करते हुए 'सिटिज़न सिटिज़न ऑफ वर्ल्ड' कहा। 2013 में पाकिस्तानी हुक़ूमत के ज़रिए आपको मुल्क का दूसरा सबसे बड़ा सिटिज़न अवॉर्ड 'हिलाल-ए-इम्तियाज़' भी दिया गया। शुऐब शाहिद का तआल्लुक़ बुनियादी तौर पर उत्तर प्रदेश के बुलन्दशहर से है। इस वक़्त आपकी शिनाख़्त मुल्क के एक मशहूर बुक कवर डिज़ाइनर के तौर पर होती है। दुनिया की कई मशहूर किताबों पर बतौर आर्टिस्ट काम करने के सबब आपकी अदबी दुनिया में एक ख़ास मक़बूलियत है। मुल्कगीर और बैनुलअक़्वामी सतह पर कई अवार्ड्स के साथ आपका नाम रहा है। आपके लिखे मज़ामीन, ख़ुतूत और बिलख़ुसूस उर्दू मिज़ाह से मुताल्लिक मज़ामीन हिन्दुस्तान और पाकिस्तान के बहुत से रिसालों में अक्सर शाया होते हैं और आप अवाम-ए-ख़ास-ओ-आम में अपने मुन्फ़रद अन्दाज़ के लिए काफ़ी मकबूल हैं। इन दिनों क्लासिकल उर्दू अदब को देवनागरी रस्मुल-ख़त में लाने का तारीख़ी काम अंजाम दे रहे हैं।
Antriksh Prashnottary
- Author Name:
Kali Shankar
- Book Type:

- Description:
अनजाने अंतरिक्ष को जानने के लिए सामान्य मानव के मस्तिष्क में अनेक रोचक और कुतूहलपूर्ण प्रश्न उभरते रहे हैं तथा वह अंतरिक्ष के विषय में अधिकाधिक जानकारी पाने की प्रबल इच्छा रखता है । प्रस्तुत पुस्तक में अंतरिक्ष के विभिन्न विषयों- अंतरिक्ष स्टेशन, तारकीय / क्षुद्र ग्रहीय '' पुच्छल तारा अभियान, अंतरिक्ष परिवहन स्पेस शटल, अंतरिक्ष में प्रमोचन की प्रक्रिया, अंतरिक्ष के रिकॉर्ड, अंतरिक्ष दूरबीनें, कृत्रिम उपग्रह, स्पेस वॉक, अंतरिक्ष परिघटनाओं तथा अंतरिक्ष चयन और प्रशिक्षण का रोचक वर्णन किया गया है । आज अंतरिक्ष अन्वेषण के क्षेत्र में हो रहे विभिन्न अनुसंधानों -स्पेस एलीवेटर ( अंतरिक्ष परिवहन का भविष्य का सबसे सस्ता साधन), भूकंपों के पूर्वानुमान में उपग्रहों की भूमिका और सौर ऊर्जा उपग्रहों के बारे में भी रोचक व ज्ञानप्रद जानकारी दी गई है । अंतरिक्ष के दुर्लभ और रोमांचक आँकड़ों को 23 परिशिष्टों के माध्यम से स्पष्ट किया गया है । यह पुस्तक अंतरिक्ष विषय के जिज्ञासु पाठकों के कुतूहलपूर्ण प्रश्नों का समाधान करने में समर्थ सिद्ध होगी, ऐसा विश्वास है ।
Hindi Sahitya Ke Nirmata SADAL MISHRA
- Author Name:
Ashok Priyadarshi
- Book Type:

- Description:
हिंदी के प्रथम गद्यकार सदल मिश्र का जन्म 1767 (अनुमानित) में आरा (बिहार) में हुआ था। फोर्ट विलियम कॉलेज, कलकत्ता में भाषा मुंशी के पद पर रहते हुए सदल मिश्र ने जॉर्ज गिलक्रिस्ट के कहने पर 'नासिकेतोपाख्यान' व 'रामचरित' लिखा। उन्होंने हिंदी को खड़ी बोली बनाया, जिसमें संस्कृत का प्रभाव कम था। सदल मिश्र ने हिंदी-परशियन शब्दकोश भी बनाया। उनकी मुख्य कृतियाँ हैं—'नासिकेतोपाख्यान' या 'चंद्रावती' (1803), 'रामचरित' (1806), 'फूलन्ह के बिछोने', 'सोनम के थंभ', 'चहुँदसि', 'बरते थे', 'बाजने लगा', 'काँदती हैं', 'गाँछों'।
Sone Ki Sikdi : Roop Ki Nathiya
- Author Name:
Rashmi Vajpeyi
- Book Type:

- Description:
संताल आदिवासी समुदाय झारखंड की आबादी का एक मुख्य हिस्सा है। यहाँ के तेजी से बदलते सामाजिक आर्थिक और सांस्कृतिक परिदृश्य में संताल लोगों की भूमिका महत्त्वपूर्ण होती जा रही है। संताल परगना के प्रमण्डलीय मुख्यालय दुमका को झारखण्ड की उप-राजधानी का दर्जा दिया गया है जो इसकी महत्ता को स्वतः उजागर करता है। आज की बदली हुई स्थिति में संताल आदिवासियों के सामाजिक-सांस्कृतिक जीवन के विभिन्न पहलुओं पर गहन शोध एवं अध्ययन की आवश्यकता प्रबल होती जा रही है। संताल आदिवासियों के बीच अलग-अलग मौसम त्योहार और अवसरों के लिए अलग-अलग गीतों के विधान हैं। दोङ अर्थात् विवाह गीतों के अतिरिक्त सोहराय दुरूमजाक् बाहा लांगड़े रिजां मतवार डान्टा और कराम संताल परगना के प्रमुख लोकगीत हैं। बापला अर्थात् विवाह संताल आदिवासियों के लिए मात्र एक रस्म ही नहीं वरन् एक वृहत् सामाजिक उत्सव की तरह है जिसका वे पूरा-पूरा आनन्द उठाते हैं। इसके हर विधि-विधान में मार्मिक गीतों का समावेश है। इन गीतों में जहाँ आपको आदिवासी जीवन की सहजता सरलता उत्फुल्लता तथा नैसर्गिकता आदि की झलक मिलेगी वहीं उनके जीवन-दर्शन सामाजिक सोच और मान्यता जिजीविषा तथा अदम्य आतंरिक शक्ति से भी अनायास साक्षात्कार हो जाएगा। परम्परागत संताली जीवन विविधतापूर्ण है जिसकी एक झलक प्रस्तुत करने की दिशा में हमने यह प्रयास किया है।
Ras Aakhetak
- Author Name:
Kuber Nath Rai
- Book Type:

- Description:
कुबेरनाथ राय के निबंधों में उनके सांस्कृतिक ज्ञान की प्रतिच्छवि भरपूर रहती है और बड़ा विस्मय होता है कि अंग्रेजी के अध्यापक को भारतीय संस्कृति के विभिन्न आयामों का और प्राचीन भारतीय साहित्य का इतना गहरा मर्म क्या केवल निजी साधना के बल पर मिला। —विद्यानिवास मिश्र हिंदी की ललित निबंध परंपरा के निष्ठ प्रतिनिधि थे कुबेरनाथ राय। उन्होंने आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी के फक्कड़ अंदाज और खुलेपन के बदले अपनी निजी शास्त्री किस्म की रसज्ञता की राह चुनी थी। उन्होंने जो भी लिखा, वह गहरी आस्था और निष्ठा से लिखा। सांस्कृतिक समयबोध उनमें प्रभूत ज्ञान और अंततः प्रज्ञा से जुड़ा पुष्ट हुआ। —प्रभाकर श्रोत्रिय कुबेरनाथ राय निबंध साहित्य, विशेषकर ललित निबंध के कीर्तिमान हैं। उन्होंने इस विधा की आचार्य हजारीप्रसाद द्विवेदी की परंपरा को अपनी गौरवशाली सृजन-शृंखला से प्रतिष्ठित किया है। इनके निबंधों में गंभीर पांडित्य, चिंतन, अन्वेषण और विश्लेषण के साथ भावावेश की अजस्र ऊर्जा लक्षित होती है। इनकी ऊँचाइयों को छानते हुए भी वे गाँव की जमीन से निरंतर जुड़े होते हैं, यह उनकी अन्यतम विशेषता है। ग्राम-संस्कृति के माध्यम से बृहत्तर भारतीय संस्कृति की खोज वाली विचार प्रवण दृष्टि कुबेरनाथ राय में है, वह अन्यत्र दुर्लभ है। खेत-खलिहान की आत्मीयता, ग्राम-संस्कृति के सूक्ष्म रस-गंधों की पहचान, वर्तमान विकृति के भीतर से आदिम सांस्कृतिक स्रोतों का अन्वेषण और सबको वैदिक जीवन से जोड़ते हुए अप्रतिहत जीवन के प्रवाह रूप में उपस्थित करना लेखक की अद्भुत प्रतिभा का प्रमाण है। —विवेकी राय
Baleshwar Agarwal Jeevan Yatra
- Author Name:
Ramashankar Kushwaha
- Book Type:

- Description:
एक व्यक्ति जीवन में क्या और कितना कर सकता है, इसके लिए बालेश्वर अग्रवाल एक श्रेष्ठ उदाहरण हैं । पत्रकारिता में रहे तो एक पत्रकार की तरह सोचते और कार्य करते रहे। सक्रियता और सतर्कता में कोई कमी नहीं । हर चीज पर निगाह होती | हमेशा अपने को पृष्ठभूमि में रखते और साथियों को आगे बढ़ाते। इस पुस्तक में उनकी सुदीर्घ जीवन यात्रा में पत्रकारित और समाज-सेवा के उपलब्ध समस्त विवरण आ गए हैं। अंतरराष्ट्रीय सहयोग परिषद् का जिम्मा मिला तो देश और प्रवासी समाज को जोड़ने में जुट गए। दुनिया में प्रवासियों को लेकर होनेवाली सभी तरह की गतिविधियों और जरूरतों पर उनकी नजर रहती | उनके सामने क्या कठिनाइयाँ आती हैं और उन्हें दूर करने में वे क्या कर सकते हैं, इसके लिए प्रयासरत रहे । प्रवासी-जगत् बहुत बड़ा है और आज वह भारतवर्ष का पूरी दुनिया में प्रतिनिधित्व करता है। उनके माध्यम से भारतीय संस्कृति और जीवन-शैली सर्वत्र पहुँचती है। बालेश्वर इसके लिए प्रवासी समाज की नई पीढ़ी को जोड़ने का भरपूर प्रयास करते रहे। बालेश्वर अग्रवाल राष्ट्र-साधक थे | वह कुछ भी करते तो भारत देश और उसको संस्कृति उनके ध्यान में रहती । उनका लेखन इसका उदहारण है। दुनिया में जो भी हो रहा था, उसमें भारतीय और भारत कहाँ है और उसे किस तरह अपने को स्थापित करना है, यह उनके विचार के केंद्र में था। पर उनकी निगाह में भारतीयता सदैव सर्वोच्च रही ।
MAIN TAGORE BOL RAHA HOON
- Author Name:
Ed. Anil Kumar Mishra , Manish Kumar
- Book Type:

- Description:
भारतीय नवजागरण में अनेक लोगों ने अपने-अपने स्तर पर श्रेष्ठ योगदान दिया। ऐसे ही अनन्य महापुरुषों की पंक्ति में एक नाम रवींद्रनाथ टैगोर का भी है। यह संभवतः एक विलक्षण व महत्त्वपूर्ण नाम है, क्योंकि इसी व्यक्ति ने भारतीय, विशेषकर बँगला साहित्य को विश्व के सामने प्रस्तुत किया। उनके अद्भुत लेखन तथा कल्पना-शक्ति ने ही उन्हें ‘विश्व पुरुष’ के रूप में पहचान दी। वे भारतीय संस्कृति एवं शिक्षा-पद्धति के पर्याय पुरुष माने जाते हैं। उन्होंने स्वतंत्रता पूर्व भारत में शिक्षा और साहित्य का गौरव बढ़ाया। उनका नाम विश्व साहित्य में एक अलग पहचान रखता है, क्योंकि वे भारतीय साहित्य-जगत् तथा एशिया के प्रथम नोबेल पुरस्कार विजेता थे, जो उन्हें उनके कालजयी काव्य ‘गीतांजलि’ के लिए दिया गया। उल्लेखनीय है कि उन्होंने भारत के राष्ट्रगान ‘जन-गण-मन’ के साथ-साथ बांग्लादेश के राष्ट्रगान ‘आमार सोनार बांग्ला’ की रचना भी की। इसलिए विश्व में उन्हें ‘कविगुरु’ और ‘गुरुदेव’ जैसे आदरणीय उपनामों से संबोधित किया गया। प्रस्तुत पुस्तक में गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर के नाना विषयों पर प्रकट विचारों और उनकी सोच को वर्णित किया गया है। टैगोर को संपूर्ण रूप में जानने-समझने में सहायक एक उपयोगी पुस्तक।
Ganit Aur Vigyan Ke 100 Siddhant
- Author Name:
Rajesh Kumar Thakur
- Book Type:

- Description:
"गणित और विज्ञान दोनों ही बड़े रोचक विषय हैं, पर प्राय: देखा गया है कि इनको लेकर छात्रों तथा सामान्य जन को भी मन में डर रहता है। पर थोड़ा परिश्रम करके इनमें हम दक्षता प्राप्त कर सकते हैं और इन्हें अपना मित्र बना सकते हैं। प्रस्तुत पुस्तक ‘गणित और विज्ञान के 100 सिद्धांत’ गणित और विज्ञान के महत्त्वपूर्ण तथ्यों को संक्षेप में पाठकों के सम्मुख प्रस्तुत करने का एक प्रयास है। इस पुस्तक को लिखते समय यह ध्यान रखा गया है कि विषयवस्तु संक्षिप्त हो, पर सारगर्भित हो, जिससे सुधी पाठक गणित व विज्ञान के सभी महत्त्वपूर्ण सिद्धांतों को पढ़ते हुए आत्मसात् कर पाएँ। जहाँ तक संभव बन पड़ा, चित्र व सरल वाक्यों का प्रयोग किया गया है, जिससे कि विज्ञान और गणित की जटिलता का बोझ पाठकों के मस्तिष्क पर न पड़े। "
Bhrasth Satyam Jagat Mithya
- Author Name:
Sanjay Jhala
- Book Type:

- Description:
Bhrasth Satyam Jagat Mithya
Lekhak Ka Samay
- Author Name:
Sangeeta Gupta
- Book Type:

- Description:
Lekhak Ka Samay is a compilation of interviews she conducted with eminent women writers.
Mathematics Wizard Srinivasa Ramanujan
- Author Name:
Narendra Govil +1
- Book Type:

- Description:
Mathematics Wizard Srinivasa Ramanujan The book depicts the interesting story of a mysterious Indian mathematician, Srinivasa Ramanujan, with no college education, whose mathematics in a series of letters to a Cambridge Mathematician, G.H. Hardy, shook the entire mathematics community. It is an exciting journey of a poor, self-taught and god-gifted mathematician who by the age of 31 became the youngest Fellow of Royal Society of London. Even after almost 100 years of his death at the age of 32, his results mysteriously find applications in modern world such as in the study of black holes, quantum gravity, cryptography and many others. Ramanujan’s life story and work has inspired numerous people and generations of mathematicians around the globe and continue to excite even today. We hope that the book will reach the current generation and generate interest in mathematics.
Asarkari Prashasan : Nayi Soch, Nayi Drishti
- Author Name:
Bharat Lal Meena
- Book Type:

- Description:
स्वतंत्रता के बाद से ही सरकारें शासन में जन-सहभागिता पर जोर देती रही हैं। परंतु परिणाम आशाजनक नहीं रहे हैं। इस संबंध में भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारी श्री भरतलाल मीणा द्वारा किए गए प्रयोग एक मिसाल हैं। उन्होंने कर्नाटक में सहायक आयुक्त के रूप में अपनी पहली नियुक्ति के दौरान रायचूर जिले में स्थित लिंगसुगुर तहसील में कष्टसाध्य पेयजल की समस्या का समाधान जनता के साथ मिलकर किया। उन्होंने विभिन्न सरकारी विभागों में सूचना तकनीक का बेहतर उपयोग किया। श्री भरतलाल मीणा की जिजीविषा ही रही कि आज राज्य में जन-सहभागिता ने एक आंदोलन का रूप ले लिया है। उनके द्वारा विभिन्न विभागों में क्रांतिकारी पहल की गई, जिनका इस पुस्तक में समावेश किया गया है। लगभग तीन दशक पूर्व श्री मीणा द्वारा प्रशासन में जिन नए प्रयोगों की शुरुआत की गई थी, आज केंद्र और राज्य की सरकारें उन्हीं प्रयोगों को लागू कर रही हैं, जैसे स्मार्ट सिटी, प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण, सॉयल हेल्थ कार्ड, सोशल ऑडिट, बायोमेट्रिक अटेंडेंस, आदि। सरकारी सेवा में लगे अधिकारियों को इस पुस्तक से अनेक प्रशासनिक समस्याओं के समाधान का मार्ग मिल सकता है। पुस्तक की एक और विशेषता यह है कि श्री मीणा ने प्रशासनिक अधिकारियों को ‘मैं’ की भावना से ऊपर उठकर ‘हम’ की भावना से काम करने की बात कही है। यह प्रशासनिक अधिकारी की सफलता का एक सशक्त और समझदारी का मार्ग है। यह पुस्तक उन लोगों के लिए भी उपयोगी है, जो प्रबंधन में कुछ कर दिखाना चाहते हैं।
Bhartiya Sanskriti Aur Sex
- Author Name:
Geetesh Sharma
- Book Type:

- Description:
जहाँ तक 'हिन्दू संस्कृति' का प्रश्न है, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के पुरोधाओं ने जिस रूप में इसकी व्याख्या की, पहले भी लिखा जा चुका है कि वह बहुत ही संकुचित और विकृत व्याख्या है, जो लोगों में इस संस्कृति के प्रति एक भ्रम पैदा करती है। जिन विद्वानों ने वास्तविकता पर आधारित तथ्यपरक व्याख्या की, उनको यह कहकर सिरे से ख़ारिज कर दिया गया कि उन पर पश्चिम के विद्वानों का प्रभाव है और वे एकांगी दृष्टि से संस्कृति को देखते हैं। जबकि सच्चाई यह है कि वेदों से प्रारम्भ कर भारतीय संस्कृति का समग्र रूप मनुष्य की समस्त जीवन-शैली के अच्छे-बुरे पक्ष को ज़ाहिर करता है, जो समय के अनुसार बदलती रही है। हमारे देश में एक प्रचलन यह भी रहा है कि हम प्राचीन धार्मिक ग्रन्थों पर तिलक-चंदन चढ़ाते हैं, उनकी पूजा करते हैं, पर उन्हें पढ़ते नहीं हैं। पढ़ते तो संस्कृति के नाम पर जो दुष्प्रचार किया जाता रहा है, वह सम्भव नहीं था।
Customer Reviews
Be the first to write a review...
0 out of 5
Book