Asha
(0)
Author:
Sayali Paranjape, Devdutt PattanaikPublisher:
Manovikas Prakashan LLPLanguage:
MarathiCategory:
General-non-fiction₹
170
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Available
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आयुष्यात सकारात्मकता कशी शोधायची हे सांगत आहेत पुराणांचे प्रख्यात अभ्यासक.आयुष्यातून आशेचं अस्तित्वच नाहीसं झाल्यासारखं वाटतंय? सगळं जग ओसाड आणि निर्दय झाल्यासारखं वाटतंय? कोविडच्या संकटात आपल्यापैकी अनेकांनी कुटुंबातल्या व्यक्ती, मित्र, सहकारी गमावले. या विध्वंसक हानीतून बाहेर कसं येणार? अवतीभवती सर्वत्र क्रोधाचं आणि हिंसक वातावरण आहे. चहूबाजूंनी दररोज वाईट बातम्या येताहेत. कधी ढासळणाऱ्या अर्थव्यवस्थेच्या, तर कधी हवामान बदलाच्या. कुठेतरी पळून जावंसं वाटतंय? पैशाची, कुटुंबाची आणि भवितव्याची चिंता सतावतेय? अशा संक्रमण काळात आपल्याला भावनांवर नियंत्रण मिळवण्यात आणि काळोखातून प्रकाशाकडे जाण्याची वाट शोधण्यात मदत करणारं हे पुस्तक. आपल्या महाकाव्यांमधल्या कथा आणि हिंदू, बौद्ध, जैन, इस्लाम धर्मांतल्या संकल्पना यांचा वापर करून आयुष्याकडे बघण्याची नवीन दृष्टी लेखक आपल्याला या पुस्तकातून देतात. इतकंच नाहीतर नैराश्यामध्ये आशेचा अंकुर शोधण्यासाठी सुसज्ज करतात. चालना आणि उत्तेजन देणारी ही ‘आशा' आपला दृष्टिकोन बदलून टाकेल आणि पुन्हा एकदा मार्ग शोधण्यात मदत करेल. Asha | Devdutt Pattanaik Translated By : Sayalee Paranjpe आशा | देवदत्त पट्टनायक अनुवाद : सायली परांजप
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आयुष्यात सकारात्मकता कशी शोधायची हे सांगत आहेत पुराणांचे प्रख्यात अभ्यासक.आयुष्यातून आशेचं अस्तित्वच नाहीसं झाल्यासारखं वाटतंय? सगळं जग ओसाड आणि निर्दय झाल्यासारखं वाटतंय? कोविडच्या संकटात आपल्यापैकी अनेकांनी कुटुंबातल्या व्यक्ती, मित्र, सहकारी गमावले. या विध्वंसक हानीतून बाहेर कसं येणार? अवतीभवती सर्वत्र क्रोधाचं आणि हिंसक वातावरण आहे. चहूबाजूंनी दररोज वाईट बातम्या येताहेत. कधी ढासळणाऱ्या अर्थव्यवस्थेच्या, तर कधी हवामान बदलाच्या. कुठेतरी पळून जावंसं वाटतंय? पैशाची, कुटुंबाची आणि भवितव्याची चिंता सतावतेय? अशा संक्रमण काळात आपल्याला भावनांवर नियंत्रण मिळवण्यात आणि काळोखातून प्रकाशाकडे जाण्याची वाट शोधण्यात मदत करणारं हे पुस्तक. आपल्या महाकाव्यांमधल्या कथा आणि हिंदू, बौद्ध, जैन, इस्लाम धर्मांतल्या संकल्पना यांचा वापर करून आयुष्याकडे बघण्याची नवीन दृष्टी लेखक आपल्याला या पुस्तकातून देतात. इतकंच नाहीतर नैराश्यामध्ये आशेचा अंकुर शोधण्यासाठी सुसज्ज करतात. चालना आणि उत्तेजन देणारी ही ‘आशा' आपला दृष्टिकोन बदलून टाकेल आणि पुन्हा एकदा मार्ग शोधण्यात मदत करेल.
Asha | Devdutt Pattanaik
Translated By : Sayalee Paranjpe
आशा | देवदत्त पट्टनायक
अनुवाद : सायली परांजप
Book Details
-
ISBN9789396493707
-
Pages128
-
Avg Reading Time4 hrs
-
Age18+ yrs
-
Country of OriginIndia
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- Description: अमृत मंथन से कल्पतरु वृक्ष उत्पन्न हुआ जिसे इंद्र अपने साथ स्वर्ग ले आए, क्योंकि कल्पतरु सभी कामनाओं को पूर्ण कर सकता है। जहाँ कामनाएँ पूर्ण होती हैं, वही स्वर्ग है; और उसे पाने के लिए अनंत काल से संघर्ष चल रहा है। देवता और दानव आपस में युद्धरत हैं स्वर्ग पर अधिकार पाने के लिए; और पृथ्वी पर मनुष्य कोशिश में लगा है कि उसकी कामनाएँ कैसे पूर्ण होंगी? कल्पतरु की सबको चाह है। इसके मिलने के बाद गालिब की तरह कहना नहीं पड़ेगा कि हजारों ख्वाहिशें ऐसी...क्योंकि ख्वाहिशें-कामनाएँ पूरी हो रही हैं। वैसे भी, इंद्र इंद्रियजनित सुखों की पराकाष्ठा को निरूपित करते हैं; इसलिए उन्हें हमेशा ही तप से खतरा रहा है। इंद्र की तरह आपने भी यही समझा है कि योग और भोग एक साथ नहीं रह सकते हैं। परंतु शक्ति इस नियम का अपवाद हैं। उन्होंने योगी शिव से विवाह कर उन्हें गृहस्थ बनाया है, सकल जगत् की कामनापूर्ति का उत्तरदायित्व लिया है, और फिर वही शक्ति क्षुधा, कामना रूप में हर प्राणी में स्थित है। इसलिए कल्पतरु खास है। वह विश्वास दिलाता है कि जो माँगोगे, वही मिलेगा। यह विश्वास पुरुषार्थ को जीवंत, सक्रिय कर देता है। जीवन पूर्ण लगने लगता है। ॐ पूर्णमदः पूर्णमिदं पूर्णात् पूर्णमुदच्यते। पूर्णस्य पूर्णमादाय पूर्णमेवावशिष्यते॥ आओ, साकार करें उपनिषद् की यह शांति प्रार्थना कल्पतरु के सान्निध्य में।
Anubhootiyon Ka Ghanatva
- Author Name:
Yogendra Mohan
- Book Type:

- Description: जंगल-जंगल ढूँढ़ रहा है मृग अपनी कस्तूरी कितना मुश्किल है तय करना खुद से खुद की दूरी। भीतर शून्य बाहर शून्य शून्य चारों ओर है मैं नहीं हूँ मुझमें फिर भी मैं-मैं का शोर है। मौत का बेरहम इतिहास बदल सकते हो पाप का पुण्य में विश्वास बदल सकते हो अपनी बाँहों पे भरोसा अगर हो जाए तो धरा तो धरा है, आकाश बदल सकते हो। अब डूबने का भी क्या डर प्रभु! जब नाव भी तेरी नदी भी तेरी लहरें भी तेरी और मैं भी तेरा। समय को शान पर चढ़ बुद्धि कुंदन की भाँति चमक उठती है विवेक जाग्रतू होने लगता है विवेक-बुद्धि का संयोग और प्रयोग ही सफल जीवन का रहस्य है। सब भूल सहज भाव अपनाएँ साक्षी भाव में खो जाएँ प्रतिज्ञा करना छोड़ें आडंबरों से ऊपर उठ मन को कर्म से जोड़ें। जीवन स्वयं उत्सव बन जाएगा स्वर्ग बन जाएगा। --इसी संग्रह से
The Riligion Of The Forest
- Author Name:
Rabindranath Thakur
- Rating:
- Book Type:

- Description: We stand before this great world. The truth of the life depends upon our attitude of mind toward it - an attitude which is formed by our habit of dealing with is according to the special circumstance of our surroundings and our temperaments. It guides our attempts to establish relations with the universe either by conquest or by union, either through the cultivation of power or through that of sympathy. And thus, in our realization of the truth of existence, we put our emphasis either upon the principle of unity.
Afganistan - Samrajyanchi Dafanbhumi
- Author Name:
Sachin Diwan
- Book Type:

- Description: व्यक्ती किंवा राष्ट्राच्या जीवनप्रवासात जशी उमेद देणारी आदर्श उदाहरणे आवश्यक असतात, तसेच काय करू नये हे सांगणारे, धोक्याची सूचना देणारे दाखलेही गरजेचे असतात. दुर्दैवाने आज अफगाणिस्तान हा देश धोक्याची सूचना देणाऱ्या दाखल्याच्या रूपात जगासमोर उभा आहे. भौगोलिक साधनसंपत्ती, पूर्वापार जागतिक व्यापारी मार्गांवर असलेले मोक्याचे स्थान, स्वाभिमानी आणि लढाऊ लोक अशा अनेक जमेच्या बाजू असूनही अफगाणिस्तान आज ओळखला जातो तो एक ‘फेल्ड स्टेट' म्हणून. पराकोटीचा आणि विधीनिषेधशून्य धर्माभिमान, त्याला मिळालेली हिंसेची जोड, आधुनिक जगाकडे फिरवलेली पाठ आणि परकीय शक्तींचा हस्तक्षेप यातून हा प्राचीन देश आणि समाज देशोधडीला लागला आहे. ही आपल्यासह अन्य देशांसाठीही धोक्याची घंटा ठरू शकते. त्यासाठीच अफगाणिस्तानची वाटचाल समजून घेणे निकडीचे ठरते.हा प्रवास संघर्षमय असला तरी रंजक आणि उद्बोधक आहे. साम्राज्यवादाच्या सुरुवातीच्या काळात महाशक्तींमध्ये खेळल्या गेलेल्या ‘द ग्रेट गेम'पासून अगदी आतापर्यंतच्या भू-राजकीय संघर्षाची किनार त्याला आहे. जग जिंकायला निघालेल्या अलेक्झांडरपासून सातासमुद्रांवर हुकूमत गाजवणाऱ्या ब्रिटनपर्यंत आणि सोविएत युनियनपासून अमेरिकेपर्यंत सर्व महासत्तांनी आजवर या भूमीत मारच खाल्ला आहे. त्यासाठीच अफगाणिस्तान ‘साम्राज्यांची दफनभूमी' म्हणून ओळखले जाते. अनेक रोमहर्षक प्रसंग आणि पात्रांनी ही कहाणी सजली आहे. त्यात भारताचेही हितसंबंध गुंतले असल्याने या कहाणीला वेगळे महत्त्व लाभले आहे. कवी इक्बाल यांनी शतकभरापूर्वी अफगाणिस्तानचे वर्णन ‘आशिया खंडाचे हृदय' असे केले होते. तेथे शांतता असेल तर आशियात शांतता असेल, तेथे संघर्ष असेल तर संपूर्ण आशियात संघर्ष असेल, असे इक्बाल यांनी म्हटले होते. आजही ते वर्णन अफगाणिस्तानला लागू पडते. त्या भळभळत्या हृदयाची स्पंदने टिपण्याचा प्रयत्न म्हणजे हा ग्रंथ होय! Afganistan : Samrajyanchi Dafanbhumi |Sachin Diwan अफगाणिस्तान : ‘साम्राज्यांची दफनभूमी'! | सचिन दिवाण
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