Mahadevi : Naya Mulyankan
Author:
Ganpatichandra GuptPublisher:
Rajkamal Prakashan SamuhLanguage:
HindiCategory:
General-non-fiction0 Ratings
Price: ₹ 280
₹
350
Unavailable
प्रस्तुत पुस्तक में कवयित्री महादेवी के व्यक्तित्व, दर्शन, जीवन-दर्शन, काव्य-दर्शन, युग-बोध आदि का पहली बार गम्भीरता से विवेचन-विश्लेषण हुआ है। साथ ही महादेवी के काव्य के विभिन्न पक्षों पर भी गम्भीरता से विचार किया गया है। कवयित्री महादेवी के जीवनवृत्त एवं व्यक्तित्व, काव्य-दर्शन, दार्शनिक मान्यताएँ, जीवन-दर्शन, युग- बोध, छायावाद और महादेवी, रहस्यवाद और महादेवी काव्य में वेदना (दुःखवाद), काव्य में प्रकृति, काव्य का शैली पक्ष, काव्य रूप : गीति काव्य का मूल्यांकन, सौन्दर्यशास्त्रीय दृष्टि से, काव्यशास्त्रीय दृष्टि से, वैज्ञानिक दृष्टि से आदि कतिपय महत्त्वपूर्ण बिन्दुओं का संकेत पुस्तक में मिलता है। वस्तुत: महादेवी काव्य पर लिखा गया एक सर्वश्रेष्ठ आलोचनात्मक एवं गवेशणात्मक ग्रन्थ है जिसमें महादेवी काव्य के सभी पक्षों पर पूरी गम्भीरता से विचार किया गया है।
ISBN: MahadeviNayaMulyankanHardCover
Pages: 348
Avg Reading Time: 12 hrs
Age: 18+
Country of Origin: India
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- Description: 2024 च्या लोकसभा निवडणुकीत कोणताही राजकीय पक्ष स्पष्टपणे जिंकला नाही आणि कोणाचा पूर्ण पराभवदेखील झाला नाही. हे नेमके झाले तरी कसे आणि मग जिंकले तरी कोण? अर्थातच, भारतीय मतदार जिंकले. कोट्यवधी मतदारांनी चारशे जागांचे स्वप्न पाहणाऱ्या सत्ताधारी पक्षाला ‘आस्ते कदम` चा इशारा दिला, तर आधीच्या दोन निवडणुकांमध्ये हतोत्साही झालेल्या विरोधकांना मतदारांनी नवी उमेद व उर्जा दिली. या समतोल जनादेशातून मतदार जिंकले हा निष्कर्ष, हे अनुमान किंवा विधान भाबडेपणातून केले आहे का? अर्थातच नाही. खंडप्राय भारतातील या लोकसभा निवडणूक निकालाचा लघुत्तम साधारण विभाज्य म्हणजे लसावि सांगतो की, मोठा निर्णायक राष्ट्रीय मुद्दा निवडणुकीत नसल्यामुळे देशातील 28 राज्ये व 8 केंद्रशासित प्रदेश मिळून छत्तीस प्रांतांमध्ये स्थानिक समीकरणेच प्रभावी ठरली. सोबतच, राज्यघटना बदलण्याची भीती, शेतकरी व तरुण मतदारांमधील नाराजी, गरिबी व महागाई अशा जगण्यामरण्याच्या मुद्द्यांवर लोकांनी सत्ताधाऱ्याांच्या विरोधात मतदान केले. या मतदानाचे, निकालाचे हे तर्कशास्त्र, संख्याशास्त्राच्या आधारे विश्लेषण सांगते की, ही लढाई निवडणूक जिंकण्याचे तंत्र आणि लोक यांच्यात झाली. निवडणूक जिंकण्याचे तंत्र बदलले, सुधारले तरी लोकांचे पाय जमिनीवरच आहेत. लोकशाहीचा उत्सव असे ज्याचे वर्णन केले जाते त्या देशाच्या अठराव्या सार्वत्रिक निवडणुकीत मतदारांनी दिलेल्या संदेशाचा सार हा की, आम्हाला गृहीत धरू नका. हा देश, हे प्रजासत्ताक आमचे आहे. - श्रीमंत माने
Ghulami Ke 12 Saal
- Author Name:
Solomon Northup
- Book Type:

- Description: ऐसे भी बहुत से मालिक हैं, जिनमें इंसानियत है और निश्चित रूप से इसकी उलट प्रवृत्ति वाले मालिक हैं ही। ऐसे ग़ुलाम हो सकते हैं, जिनके तन पर कपड़ा हो, पेट में भरपेट भोजन हो और वे ख़ुश भी हों लेकिन यह भी पक्की बात है कि ऐसे भी फटे-हाल दास हैं, जिनके तन पर सिर्फ़ लंगोट है और पेट में सिर्फ़ भूख! मैं इस बात का गवाह हूँ कि वह व्यवस्था क्रूर, अत्याचारी और बर्बर है, जो इस प्रकार की अमानवीयता और विषमता को बरदाश्त करती है। लोग ग़रीब-ग़ुरबों के जीवन पर लंबी-लंबी झूठी और सच्ची कथाएँ बाँच सकते हैं और अज्ञानता के आनंद पर चतुराई से डींगे हाँक सकते हैं, चक्के वाली कुर्सी पर बैठकर ग़ुलामों के जीवन के आनंद पर बड़ी बेशर्मी से भाषण दे सकते हैं। लेकिन वे दूसरी कहानियाँ वापस लेकर आएंगे, जब उन्हें ग़ुलामों के साथ खेत में भेज दो, केबिन में उनके साथ सोने को कहो, भूसे पर बैठकर उनके साथ खाना खाने को कहो और ग़ुलामों के साथ कोड़े की मार और लात सहने को कहो। उन्हें बेचारे ग़ुलामों के दिल को जानने दो, उनके सीने में छिपे विचारों को जानने दो, वे विचार जो इस डर से नहीं व्यक्त किए जाते हैं कि कहीं गोरा सुन न ले। रात की ख़ामोश रातों में उनके साथ, उनके पास बैठ कर तो देखो, उनके साथ जीवन, आज़ादी, ख़ुशी आदि के बारे में भरोसेमंद माहौल में उनसे बात करके तो देखो, आप पाएँगे, हर सौ में से निन्यान्नवे में अपनी परिस्थिति को समझने की भरपूर समझदारी है। वह भी आपकी ही तरह अपने सीने में स्वतंत्रता से प्रेम के जुनून को वर्षों से बिल्कुल आपकी ही तरह संभाल के रखा हुआ है। --
Hind Swaraj : Ek Anusheelan
- Author Name:
Tridip Suhrud
- Book Type:

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Description:
‘हिन्द स्वराज : एक अनुशीलन’ न्योता है गांधी के बीज ग्रन्थ ‘हिन्द स्वराज’ को बाँचने का।
1909 में गांधी ने जो इबारत तैयार की, उसको अक्षरश: मानकर नहीं, किन्तु उसकी प्रवाहिता को पहचानकर, उसके भाव-प्रभाव पहचानकर पढ़ने का न्योता है।
त्रिदीप सुहृद ने गांधी को अपनी हार्दिकता में सहज रूप से सम्मिलित किया है। यही कारण है कि उनका यह अनुशीलन ‘हिन्द स्वराज’ के मर्म तक पहुँचता है। विचार-पद्धति और भाषा-शैली को देखते हुए यह पुस्तक ‘गांधी वाणी’ का रचनात्मक विस्तार है। सुप्रसिद्ध इतिहास-मर्मज्ञ सुधीर चन्द्र के अनुसार, त्रिदीप सुहृद के गांधी ज़िन्दा हैं, विकासमान हैं। हमसे मुख़ातिब हैं। फिर भी त्रिदीप सुहृद त्रिदीप सुहृद हैं, गांधी नहीं हैं। हमें न्योता दे रहे हैं अपने साथ गांधी के बीज-ग्रन्थ ‘हिन्द स्वराज’ को बाँचने का। इस विश्वास के साथ कि एक बार हमने उनका न्योता मान लिया तो निश्चय ही देर-सबेर हम सीधे गांधी से ही बात करने लगेंगे। शुरू करेंगे वह सिलसिला ख़ुद हिन्द स्वराज पढ़कर।’
आज के संकीर्ण व कंटकाकीर्ण होते जा रहे समय में त्रिदीप सुहृद की इस पुस्तक से चेतना की चिनगारी उद्बुद्ध होगी, यह विश्वास है।
Ye Jo Hai Zindagi
- Author Name:
Oprah Winfrey
- Book Type:

- Description: मनुष्य के दिल-दिमाग का बारीक अध्ययन कर जीवन जीने के व्यावहारिक सूत्र बताने और सकारात्मक सोच विकसित करने में दक्ष विश्वप्रसिद्ध व्यक्तित्व ओपरा विनफ्रे की यह पुस्तक पठनीयता से भरपूर है। सालों से उन्होंने सर्वाधिक रेटिंग वाले अपने बहुचर्चित टॉक शो के जरिए इतिहास रचा है, अपना स्वयं का टेलीविजन नेटवर्क शुरू किया है, और देश की पहली अफ्रीकी-अमेरिकी अरबपति बनी हैं। उन्हें हॉर्वर्ड यूनिवर्सिटी से मानद उपाधि और प्रेसीडेंशियल मेडल फॉर फ्रीडम से सम्मानित किया जा चुका है। अपने सारे अनुभवों से उन्होंने जीवन के सबक चुने हैं, जो उन्होंने चौदह सालों से ‘ओ-ओपरा मैग्जीन’ के लोकप्रिय स्तंभ ‘वॉट आय नो फॉर श्योर’ में प्रस्तुत किए हैं और जो हर माह पाठक को प्रेरित और आनंदित करते हैं। अब पहली बार इन वैचारिक रत्नों का पुनर्लेखन, अद्यतन संग्रह करके एक पुस्तक में पेश किया गया है, जिसमें ओपरा विनफे्र ने अपने आंतरिक उद्गार प्रकट किए हैं। प्रसन्नता, लचक, संवाद, आभार, संभावना, विस्मय, स्पष्टता और शक्ति के भावों के रूप में संगठित ये लेख दुनिया की सर्वाधिक असाधारण औरत के दिल और दिमाग की दुर्लभ, सशक्त और आंतरिक झलक प्रस्तुत करते हैं। साथ ही पाठकों को सर्वोत्तम बनने में मार्गदर्शक की भूमिका भी निभाते हैं। ‘ये जो है जिंदगी...’ में ओपरा विनफ्रे निर्भीक, मर्मस्पर्शी, प्रेरक और बार-बार परिहासपूर्ण शब्दों का इस्तेमाल करती हैं, जो सत्य की ऐसी जगमगाहट देते हैं कि पाठक उन्हें बार-बार पढ़ना चाहते हैं। प्रस्तुत हैं भारत की किसी भी भाषा में जिंदगी का सार बतानेवाले ओपरा विनफ्रे के उद्गार।
Beeswin Shatabdi Mein Darshanshastra
- Author Name:
Suman Gupta
- Book Type:

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Description:
‘दर्शनशास्त्र : पूर्व और पश्चिम’ शृंखला की इस सातवीं पुस्तक में डॉ. सुमन गुप्ता ने समकालीन दार्शनिक चिन्तन की दो मुख्य प्रवृत्तियों—भाषिक दर्शनशास्त्र और अस्तित्ववाद—का मार्क्सवादी दृष्टि से अध्ययन किया है। इन दोनों विचारधाराओं को उनके सही सामाजिक-ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य में रखते हुए, डॉ. गुप्ता ने इनकी प्रचलित व्याख्याओं पर प्रश्नचिह्न लगाया है। उनका तर्क है कि गूढ़ पारिभाषिक शब्दावली के आवरण में इन विचारधाराओं की अमूर्त तत्त्वमीमांसी प्रणाली पर भी प्रश्नचिह्न लगाया है, जो एक सही विश्व-दृष्टि प्रस्तुत करने के स्थान पर यथार्थ को विरूपित करती है। भाषिक दर्शनशास्त्रियों और अस्तित्ववादियों के दृष्टिकोण के विपरीत, डॉ. सुमन गुप्ता ने एक ऐसा दृष्टिकोण अपनाया है, जो न केवल इन चिन्तनधाराओं के विविध पक्षों का एकीकरण करता है बल्कि उनके सामाजिक यथार्थ की जड़ों में भी जाता है। सुमन गुप्ता ने स्पष्ट रूप से दर्शाया है कि भाषिक दर्शनशास्त्रियों और अस्तित्ववादियों द्वारा प्रतिपादित मनुष्य की संकल्पना मनुष्य को एक ऐसे अमूर्त रूप में चित्रित करती है जो अपने सामाजिक क्रियाकलाप से अपना या अपने चारों ओर की दुनिया का रूपान्तरण करने में असमर्थ है।
डॉ. गुप्ता ने समकालीन दर्शन की इन दोनों प्रवृत्तियों की न केवल समीक्षा प्रस्तुत की है, बल्कि वह विश्व-दृष्टि भी सामने रखी है जिसे वे सही मानती हैं।
सुमन गुप्ता ने भाषिक दर्शनशास्त्र और अस्तित्ववाद का विवेचन साधारण कुशलता से किया है लेकिन उनकी पद्धति निस्सन्देह विवादमूलक है, जिसके फलस्वरूप यह पुस्तक दर्शनशास्त्र के प्रति एक नई दृष्टि विकसित करने में सहायक होगी और जो पाठक दर्शनशास्त्र की सार्थकता को जीवन की यथार्थ समस्याओं से जोड़कर देखना चाहते हैं, उनके लिए यह निश्चय ही रोचक और पठनीय सिद्ध होगी।
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