Shirdi Sai Baba : Divya Mahima
(0)
Author:
Ganpatichandra Gupt, Ganpati Chandra GuptaPublisher:
Rajkamal Prakashan SamuhLanguage:
HindiCategory:
Biographies-and-autobiographies₹
90
₹ 72 (20% off)
Available
Ships within 48 Hours
Free Shipping in India on orders above Rs. 1100
‘शिरडी साईं बाबा दिव्य महिमा’ प्रस्तुत पुस्तक की रचना भगवान श्रीशिरडी साईं बाबा की प्रेरणा से हुई है। इसमें लेखक ने शिरडी साईं बाबा के व्यक्तित्व की दिव्यता का बोध विभिन्न संस्मरणों एवं अनुभवों के माध्यम से प्रस्तुत करने का सफल प्रयास किया है। इसका लक्ष्य शिरडी साईं के व्यक्तित्व, चरित एवं दर्शन का बौद्धिक विश्लेषण करने का नहीं था, अपितु उनसे सम्बन्धित भक्तों के अनुभवों को यथार्थ रूप में प्रस्तुत करके पाठकों को भक्ति-रस का आस्वाद प्रदान करने का रहा है। शुरू में लेखक ने अपने उन अनुभवों को प्रस्तुत किया है, जिनसे उनका शिरडी साईं बाबा के प्रति विश्वास दृढ़ हुआ। बाबा के जीवन-चरित की एक रूपरेखा संक्षेप में प्रस्तुत की गई है।</p> <p>कई भक्तों के संस्मरण प्रस्तुत किए गए हैं जो कि शिरडी साईं बाबा के समकालीन थे और जिन्हें बाबा के निकट सम्पर्क में आने का सौभाग्य प्राप्त हुआ। ऐसे भक्तों के भी अनुभव प्रस्तुत किए गए हैं जिन्होंने बाबा के देह-त्याग के अनन्तर भी उनकी कृपा से विभिन्न कष्टों से मुक्ति या अपने किसी लक्ष्य में सफलता प्राप्त की। इन अनुभवों से स्पष्ट है कि बाबा आज भी पूर्ण शक्ति से कार्यरत हैं तथा वे भक्तों की प्रार्थनाओं का उत्तर देते हैं।</p> <p>पुस्तक के अन्त में बाबा की एक शिष्या शिवम्माताई के द्वारा वर्णित अनुभव प्रस्तुत किए गए हैं। शिवम्माताई ने अपनी युवावस्था में ही बाबा से दीक्षा ग्रहण करके उनकी आराधना में लग गई थीं। उन्होंने उस समय की घटनाओं का आँखों-देखा हाल वर्णित किया है जिससे बाबा के सम्बन्ध में नई जानकारी मिलती है। बाबा की शिक्षाओं और उनके दिव्यत्व पर भी प्रकाश डाला गया है।
Read moreDon’t Miss Out
Pick a membership and see exactly what it gets you
- 15 Free Deliveries
- 1 Free Book up to ₹500 MRP
- 0% off every book, every time
Subscribed already? Continue to your
benefits Login
You pay ₹1,499/Year
You will be auto-charged ₹1,499 every year. Cancel auto-charge anytime.
Benefits with Rachnaye Connoisseur
1 Free Physical Book up to ₹500 MRP
Personal Recommendations
15 Free Deliveries Per Year
Format:
Piracy Free
Express Delivery
Secure Payment
About the Book
‘शिरडी साईं बाबा दिव्य महिमा’ प्रस्तुत पुस्तक की रचना भगवान श्रीशिरडी साईं बाबा की प्रेरणा से हुई है। इसमें लेखक ने शिरडी साईं बाबा के व्यक्तित्व की दिव्यता का बोध विभिन्न संस्मरणों एवं अनुभवों के माध्यम से प्रस्तुत करने का सफल प्रयास किया है। इसका लक्ष्य शिरडी साईं के व्यक्तित्व, चरित एवं दर्शन का बौद्धिक विश्लेषण करने का नहीं था, अपितु उनसे सम्बन्धित भक्तों के अनुभवों को यथार्थ रूप में प्रस्तुत करके पाठकों को भक्ति-रस का आस्वाद प्रदान करने का रहा है। शुरू में लेखक ने अपने उन अनुभवों को प्रस्तुत किया है, जिनसे उनका शिरडी साईं बाबा के प्रति विश्वास दृढ़ हुआ। बाबा के जीवन-चरित की एक रूपरेखा संक्षेप में प्रस्तुत की गई है।</p>
<p>कई भक्तों के संस्मरण प्रस्तुत किए गए हैं जो कि शिरडी साईं बाबा के समकालीन थे और जिन्हें बाबा के निकट सम्पर्क में आने का सौभाग्य प्राप्त हुआ। ऐसे भक्तों के भी अनुभव प्रस्तुत किए गए हैं जिन्होंने बाबा के देह-त्याग के अनन्तर भी उनकी कृपा से विभिन्न कष्टों से मुक्ति या अपने किसी लक्ष्य में सफलता प्राप्त की। इन अनुभवों से स्पष्ट है कि बाबा आज भी पूर्ण शक्ति से कार्यरत हैं तथा वे भक्तों की प्रार्थनाओं का उत्तर देते हैं।</p>
<p>पुस्तक के अन्त में बाबा की एक शिष्या शिवम्माताई के द्वारा वर्णित अनुभव प्रस्तुत किए गए हैं। शिवम्माताई ने अपनी युवावस्था में ही बाबा से दीक्षा ग्रहण करके उनकी आराधना में लग गई थीं। उन्होंने उस समय की घटनाओं का आँखों-देखा हाल वर्णित किया है जिससे बाबा के सम्बन्ध में नई जानकारी मिलती है। बाबा की शिक्षाओं और उनके दिव्यत्व पर भी प्रकाश डाला गया है।
Book Details
-
ISBN9788180312410
-
Pages131
-
Avg Reading Time4 hrs
-
Age18+ yrs
-
Country of OriginIndia
Recommended For You
Shri Satya Sai Baba : Vyaktitva Evam Sandesh
- Author Name:
Ganpatichandra Gupt +1
- Book Type:

- Description:
आन्ध्र प्रदेश के एक गाँव पुट्टापर्ती में 23 नवम्बर, 1926 को श्रीसत्य साईं ने जन्म लिया। इसके कुछ घंटों के बाद ही अगले दिन महर्षि अरविन्द ने अपनी दिव्य चेतना के बल पर घोषित किया कि दिव्य शक्ति धरती पर अवतरित हो गई है, वह समस्त मानवता का नेतृत्व करती हुई उसे विकास की उच्चतर मंज़िल तक ले जाएगी। अस्तु, 24 नवम्बर को अरविन्द आश्रम में ‘सिद्धि दिवस’ के रूप में मनाया जाता है।
क्या दिव्य सत्ता का यह अवतरण सत्य साईं के अवतरण की घटना का पर्याय है या और कुछ?
20 अक्टूबर, 1940 को सत्य ने विद्यालय से लौटकर अपना बस्ता फेंकते हुए घर वालों से कहा—‘मैं जा रहा हूँ। मेरे भक्त मुझे पुकार रहे हैं...अब मुझे समझाने-बुझाने का प्रयास छोड़ दो। माया हट गई है...याद रखो, मैं अब ‘साईं बाबा’ हूँ।’ 21 वर्ष की आयु में सत्य साईं ने अपने बड़े भाई के पत्र के उत्तर में लिखा—‘मेरे सामने एक महान कार्य है। मानव जाति को आनन्द प्रदान करके उसे विकसित करना। मेरा यह संकल्प है कि जो भी पथ-भ्रष्ट हैं, उन्हें सच्चाई के पथ पर लाकर उनका उद्धार कराना।...’‘भगवान सत्य साईं बाबा हमारी पीढ़ी के वरदान हैं। जहाँ वे चरण रखते हैं, वही भूमि पवित्र हो जाती है। जहाँ वे बैठते हैं, वहाँ दिव्य मन्दिर बन जाते हैं।...वस्तुतः ईश्वर की परम शक्ति का ही एक रूप मानवीय अवतार के रूप में प्रकट है।’
—वी.आर. कृष्ण अय्यर, भूतपूर्व न्यायाधीश, सुप्रीम कोर्ट
‘मैं उनसे मिला, उन्हें देखा और नतमस्तक हो गया।’
—कन्हैयालाल माणिकलाल मुंशी; भूतपूर्व राज्यपाल, उत्तर प्रदेश
Bhartiya Evam Paschatya Kavya Siddant
- Author Name:
Ganpatichandra Gupt +1
- Book Type:

- Description:
डॉ. गणपतिचन्द्र गुप्त के भारतीय एवं पाश्चात्य काव्य-सिद्धान्तों से सम्बन्धित मौलिक एवं विचारपूर्ण निबन्ध इस पुस्तक में संकलित हैं। पुस्तक को सर्वांगीण बनाने के लिए कुछ नए निबन्ध इसमें जोड़ दिए गए हैं। डॉ. गुप्त की पुस्तकें छात्रों और अध्यापकों में सर्वाधिक प्रचलित हैं और शैक्षिक जगत् में उन्हें प्रचुर सम्मान प्राप्त है। इसका स्पष्ट कारण उनकी भाषा-शैली और विषय पर गहरी पकड़ है। गम्भीर विषयों के मूल सिद्धान्तों की स्पष्ट समझ के अभाव में अभिव्यक्त उलझावपूर्ण और अस्पष्ट हो जाना सहज है। भारतीय और पाश्चात्य सिद्धान्तों की स्पष्ट समझ के लिए डॉ. गुप्त की प्रस्तुत पुस्तक बेजोड़ है, क्योंकि काव्य-सिद्धान्तों की मूल पुस्तकों के गहन अध्ययन-मनन के बाद लेखक ने उन्हें आत्मसात् कर इन निबन्धों की रचना की है। यही कारण है कि जिन युक्तियों का आश्रय लेखक ने ग्रहण किया है, वे उनकी अपनी हैं। निश्चय ही काव्य-सिद्धान्तों में रुचि रखनेवालों के लिए यह एक अन्यतम ग्रन्थ है।
Sahityik Nibandh
- Author Name:
Ganpatichandra Gupt +1
- Book Type:

- Description:
साहित्य का आकर्षण शक्ति सिद्धान्त, साहित्य की विकास प्रक्रिया का सिद्धान्त, बौद्धिक रस, शृंगार रस सम्बन्धी नई स्थापनाएँ, रस-निष्पत्ति, साधारणीकरण एवं साहित्य की आस्वादन प्रक्रिया सम्बन्धी नए निष्कर्ष, हिन्दी साहित्य के इतिहास का काल विभाजन एवं काव्य-परम्पराओं का नया वर्गीकरण व नामकरण, हिन्दी साहित्य की विभिन्न काव्यधाराओं का उद्दाम स्रोत एवं प्रेरणा स्रोत के सम्बन्ध में नई स्थापनाएँ, हिन्दी साहित्य के विभिन्न युगों एवं परम्पराओं की विभिन्न प्रवृत्तियों के सम्बन्ध में नए निष्कर्ष, विभिन्न कवियों, लेखकों एवं रचनाओं के विवेचन विश्लेषण एवं मूल्यांकन से उपलब्ध नूतन निष्कर्ष इत्यादि कतिपय नए विचारों, नूतन स्थापनाओं एवं मौलिक सिद्धान्तों का उल्लेख प्रस्तुत पुस्तक में किया गया है।
यह भी एक कटु सत्य है कि अभी तक हिन्दी जगत में पूर्व परम्परा से प्राप्त या विदेशों से आयातित विचारों एवं सिद्धान्तों को ही अधिक महत्त्व दिया जाता है—स्वयं हिन्दी के आचार्यों द्वारा प्रतिपादित मौलिक सिद्धान्तों की प्राय: उपेक्षा की जाती है। विदेशी शासन की दासता के कारण हम लोगों में जिस आत्महीनता एवं लघुता का भाव विकसित हुआ था, उससे अभी तक हम पूरी तरह मुक्त नहीं हो पाए हैं। विश्वास है नई पीढ़ी के अध्ययन से इस आत्महीनता की भावना से मुक्त होकर स्वतंत्र एवं मौलिक चिन्तन का सम्यक् मूल्यांकन कर सकने में समर्थ होंगे।
प्रस्तुत संस्करण में नाटक, उपन्यास, कहानी आदि के विकास से सम्बन्धित निबन्धों में नव प्रकाशित रचनाओं का भी विवेचन करते हुए उन्हें अद्यतन रूप देने की चेष्टा की गई है।
Mahadevi : Naya Mulyankan
- Author Name:
Ganpatichandra Gupt +1
- Book Type:

- Description:
प्रस्तुत पुस्तक में कवयित्री महादेवी के व्यक्तित्व, दर्शन, जीवन-दर्शन, काव्य-दर्शन, युग-बोध आदि का पहली बार गम्भीरता से विवेचन-विश्लेषण हुआ है। साथ ही महादेवी के काव्य के विभिन्न पक्षों पर भी गम्भीरता से विचार किया गया है। कवयित्री महादेवी के जीवनवृत्त एवं व्यक्तित्व, काव्य-दर्शन, दार्शनिक मान्यताएँ, जीवन-दर्शन, युग- बोध, छायावाद और महादेवी, रहस्यवाद और महादेवी काव्य में वेदना (दुःखवाद), काव्य में प्रकृति, काव्य का शैली पक्ष, काव्य रूप : गीति काव्य का मूल्यांकन, सौन्दर्यशास्त्रीय दृष्टि से, काव्यशास्त्रीय दृष्टि से, वैज्ञानिक दृष्टि से आदि कतिपय महत्त्वपूर्ण बिन्दुओं का संकेत पुस्तक में मिलता है। वस्तुत: महादेवी काव्य पर लिखा गया एक सर्वश्रेष्ठ आलोचनात्मक एवं गवेशणात्मक ग्रन्थ है जिसमें महादेवी काव्य के सभी पक्षों पर पूरी गम्भीरता से विचार किया गया है।
Hindi Sahitya Ka Vaigyanik Itihas : Vols. 1-2
- Author Name:
Ganpati Chandra Gupta
- Book Type:

- Description:
हिन्दी साहित्य के इतिहास-लेखन की दीर्घ-परम्परा में आचार्य रामचन्द्र शुक्ल का कार्य उसका वह मध्यवर्ती प्रकाश-स्तम्भ है, जिसके समक्ष सभी पूर्ववर्ती प्रयास आभा-शून्य प्रतीत होते हैं। इस समय तक हिन्दी साहित्य के इतिहास का जो ढाँचा, रूप-रेखा, काल-विभाजन एवं वर्गीकरण प्रचलित है, वह बहुत कुछ आचार्य शुक्ल के द्वारा ही प्रस्तुत एवं प्रतिष्ठित है। इतिहास-लेखन के अनन्तर हिन्दी साहित्य के क्षेत्र में पर्याप्त अनुसन्धान-कार्य हुआ है जिससे नई सामग्री, नए तथ्य और नए निष्कर्ष प्रकाश में आए हैं जो आचार्य शुक्ल के वर्गीकरण-विश्लेषण आदि के सर्वथा प्रतिकूल पड़ते हैं। आचार्य शुक्ल एवं उनके अनुयायी वीरगाथा काल, भक्तिकाल एवं रीतिकाल—तीन अलग-अलग काल कहते हैं, वे एक ही काल के साथ-साथ बहनेवाली तीन धाराएँ हैं। इतिहास का सम्बन्ध अतीत की व्याख्या से है तथा प्रत्येक व्याख्या के मूल में व्याख्याता का दृष्टिकोण अनुस्यूत रहता है। प्रस्तुत इतिहास में प्रयुक्त दृष्टिकोण को ‘वैज्ञानिक दृष्टिकोण’ की संज्ञा दी जा सकती है। इन दृष्टिकोण के अनुसार किसी पुष्ट सिद्धान्त या प्रतिष्ठित नियम के आधार पर वस्तु की तथ्यपरक, सर्वांगीण एवं बौद्धिक व्याख्या सुस्पष्ट शैली में प्रस्तुत करने का प्रयास किया जाता है। अस्तु, दृष्टिकोण, आधारभूत सिद्धान्त, काल-विभाजन, नई परम्पराओं के उद्घाटन तथा उद्गम-स्रोतों व प्रवृत्तियों की व्याख्या की दृष्टि से इस इतिहास में शताधिक नए निष्कर्ष प्रस्तुत हुए हैं।
Aamne-Saamne
- Author Name:
Namvar Singh +2
- Book Type:

- Description:
नामवर सिंह अब हमारे बीच नहीं है, लेकिन उनका बोला-बताया अब भी ऐसा बहुत कुछ है जो सामने आना बाकी है। लम्बे समय तक उन्होंने व्यवस्थित ढंग से कुछ नहीं लिखा था; व्याख्यानों और वक्तव्यों के रूप में ही उन्होंने आलोचना के नए-नए पैमाने तोड़े और बनाए। युवाओं, वरिष्ठों, छात्रों-पत्रकारों और समकालीन रचनाकारों को दिए साक्षात्कारों में भी उन्होंने सदैव एक उत्तरदायी आलेचकीय चेतना को अभिव्यक्ति दी। उनकी आश्चर्यजनक स्मृति, वैचारिक स्पष्टता और आस्वादपरक समीक्षा के चलते व्याख्यानों की तरह उनके साक्षात्कार भी सदैव चर्चित रहे। इस पुस्तक में उनके ऐसे साक्षात्कारों को संकलित किया गया है जो अब तक किसी और पुस्तक में नहीं आए थे। कई वरिष्ठ और कनिष्ठ रचनाकारों और सम्पादकों के साथ हुए ये वार्तालाप उनकी आलोचना-दृष्टि, समकालीन रचनात्मकता पर उनके विचारों और सरोकारों को रेखांकित करते हैं। इनमें से कुछ साक्षात्कार इसलिए और भी दिलचस्प है कि इनमें उन्होंने किसी एक ही रचनाकार या कृति पर केन्द्रित प्रश्नों पर अपने विचार व्यक्त किए हैं। मसलन स्वयं प्रकाश, त्रिलोचन, काशीनाथ सिंह का ‘काशी का अस्सी’ आदि पर केन्द्रित बातचीत। साक्षात्कारकर्ताओं में भी अलग-अलग पीढ़ियों के लोग हैं; जिन्होंने अपने-अपने ढंग से उनसे अपनी जिज्ञासाओं पर विचार-विनिमय किया है।
Mera Pariwar
- Author Name:
Mahadevi Verma
- Book Type:

- Description:
प्रस्तुत पुस्तक में महादेवी वर्मा जी ने कुछ विशिष्ट मानवेतर प्राणियों के प्रति अपनी जिस सहज, सौहाद्र और एकांत आत्मीयता की अभिव्यंजना का जो अपूर्व कला-कौशल अपने इन चित्रों में व्यक्त किया है, वह केवल उनकी अपनी ही कला की विशिष्टता की दृष्टि से नहीं वरन् संसार-साहित्य की इस कोटि की कला के समग्र क्षेत्र में भी बेमिसाल और बेजोड़ हैं। ये कृतियाँ मानवीय भावज्ञता, संवेदना और कलात्मक प्रतिभा के अपूर्व निदर्शन की दृष्टि से शाब्दिक अर्थ में अपूर्व ओर अद्भुत कलात्मक चमत्कार के नमूने हैं।
Chaitanya Mahaprabhu
- Author Name:
Amritlal Nagar
- Book Type:

- Description:
चैतन्य महाप्रभु का आविर्भाव वैष्णव धर्म के विकास में एक चमत्कारी घटना है। एक गहरे आवेश और भावनात्मकता के साथ सारे जनसामान्य तक वैष्णव धर्म को पहुँचाने का काम पहले बंगाल में और बाद में सम्पूर्ण देश में, चैतन्य महाप्रभु ने किया। मधुर भाव की नाम–संकीर्तन पद्धति चैतन्य की देन है। इसी के साथ वैष्णव धर्म ने एक नए युग में प्रवेश किया। प्रस्तुत पुस्तक में पहली बार चैतन्य के व्यक्तित्व के इस योगदान को सम्पूर्णता के साथ उजागर किया गया है।
लेकिन इस पुस्तक का उद्देश्य मात्र इतना ही नहीं है। विद्वान लेखक ने चैतन्य के व्यक्तित्व को तत्कालीन राजनैतिक परिस्थितियों में भी रखकर देखा है। अपने समय के इतिहास में चैतन्य का व्यक्तित्व एक चुनौती की तरह उभरा और पराजित हिन्दू जाति को एक नई आस्था और नए आलोक से संयुक्त करने का काम भी चैतन्य ने किया।
उपन्यासकार नागर जी की लेखनी से प्रस्तुत चैतन्य की यह जीवनी पढ़ने पर एक उपन्यास का मज़ा तो देती है, साथ ही वैष्णव धर्म के उदार पथ के विकास में उनका महत्त्वपूर्ण और अद्वितीय योगदान भी सामने लाती है।
Khamosh Logon Ki Or Se By Dalai Lama
- Author Name:
Dalai Lama
- Book Type:

- Description:
परम पूज्य दलाई लामा – खामोश लोगों की ओर से यह पुस्तक परम पूज्य दलाई लामा की आत्मकथात्मक कृति Voice for the Voiceless का हिंदी अनुवाद है। इसमें उन्होंने तिब्बत और तिब्बती लोगों के अधिकारों की रक्षा के लिए चीन के विरुद्ध अपने सात दशकों के शांतिपूर्ण संघर्ष को आत्मीयता से वर्णित किया है। पुस्तक में उन प्रश्नों के उत्तर दिए गए हैं जो चीन द्वारा तिब्बत और तिब्बतीयों को लेकर खड़े किए जाते हैं- और जो पाठकों के मन में भी स्वाभाविक रूप से उठते हैं। इसके साथ ही, अगली दलाई लामा की घोषणा और उससे जुड़ी जटिलताओं पर भी विस्तार से चर्चा की गई है, जो वर्तमान में चीन और अंतरराष्ट्रीय समुदाय में गंभीर बहस का विषय बना हुआ है। इसकी भाषा और शैली प पू दलाई लामा के व्यक्तित्व की तरह ही सहज और सरल है।
Boskiyana
- Author Name:
Gulzar +1
- Book Type:

- Description:
गुलज़ार से बातें...'माचिस' के, 'हू-तू' के, 'ख़ुशबू', 'मीरा' और 'आँधी' के बहुरंगी लेकिन सादा गुलज़ार से बातें...फ़िल्मों में अहसास को एक किरदार की तरह उतारनेवाले और गीतों-नज़्मों में ज़िंदगी के जटिल सीधेपन को अपनी विलक्षण उपमाओं और बिम्बों में खोलनेवाले गुलज़ार से उनकी फ़िल्मों, उनकी शायरी, उनकी कहानियों और उस मुअम्मे के बारे में बातें जिसे गुलज़ार कहा जाता है। उनके रहन-सहन, उनके घर, उनकी पसंद-नापसंद और वे इस दुनिया को कैसे देखते हैं और कैसे देखना चाहते हैं, इस पर बातें...यह बातों का एक लम्बा सिलसिला है जो एक मुलायम आबोहवा में हमें समूचे गुलज़ार से रू-ब-रू कराता है। यशवंत व्यास गुलज़ार-तत्त्व के अन्वेषी रहे हैं। वे उस लय को पकड़ पाते हैं जिसमें गुलज़ार रहते और रचते हैं। इस लम्बी बातचीत से आप उनके ही शब्दों में कहें तो 'गुलज़ार से नहाकर' निकलते हैं।
Jeete Jee Allahabad
- Author Name:
Mamta Kaliya +1
- Book Type:

- Description:
जीते जी इलाहाबाद सिर्फ संस्मरणात्मक कृति नहीं है, एक यात्रा है जिसमें हमें अनेक उन लोगों के शब्दचित्र मिलते हैं जिनके बिना आधुनिक हिंदी साहित्य का इतिहास नहीं लिखा जा सकता और जो उस समय के इलाहाबाद के मन-प्राण होते थे।
Shri Rambhakt : Shaktipunj Hanuman
- Author Name:
Jairam Mishra +1
- Book Type:

- Description:
‘मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम’ ने कहा है—लोक पर जब कोई विपत्ति आती है तब वह त्राण पाने के लिए मेरी अभ्यर्थना करता है परन्तु जब मुझ पर कोई संकट आता है तब मैं उसके निवारणार्थ पवनपुत्र का स्मरण करता हूँ। अवतार श्रीराम का यह कथन हनुमानजी के महान व्यक्तित्व का बहुत सुन्दर प्रकाशन कर देता है। श्रीराम का कितना अनुग्रह है उन पर कि वे अपने लौकिक जीवन के संकटमोचन के श्रेय का सौभाग्य सदैव उन्हीं को प्रदान करते हैं और कैसे शक्तिपुंज हैं हनुमान कि जो श्रीराम तक के कष्ट का तत्काल निवारण कर सकते हैं। भगवान श्रीराम के प्रति अपनी अपूर्व, अद्भुत, अप्रतिम, एकान्त भक्ति के कारण अन्य की इसी प्रकार की भक्ति का आलम्बन बन जानेवाला हनुमान जैसा कोई अन्य उदाहरण विश्व में नहीं। यही कारण है कि संस्कृत से लेकर समस्त मध्यकालीन और आधुनिक भारतीय भाषाओं में श्री हनुमान में परम पावन चरित्र का गान किया गया है और उनके मन्दिर भारतवर्ष के प्रत्येक कोने में पाए जाते हैं। इस पुस्तक की रचना में ‘वाल्मीकीय रामायण’, ‘अध्यात्म रामायण’ तथा ‘आनन्द रामायण’ से विशेष सहायता ली गई है। ‘स्कंदपुराण’, ‘पद्मपुराण’ आदि एवं ‘महाभारत’ (वनपर्व) भी रचना में सहायक सिद्ध हुए हैं। गोस्वामी तुलसीदास की कृतियों—‘रामचरितमानस’, ‘विनयपत्रिका’, ‘गीतावली’, ‘कवितावली’ एवं ‘कम्बन’ रचित ‘कम्ब रामायण’ (तमिल रचना) से भी यत्र-तत्र सहायता ग्रहण की गई है। इनके अतिरिक्त श्री सुदर्शन सिंह ‘चक्र’ रचित ‘आंजनेय' कल्याण पत्रिका के ‘हनुमानांक’ (1975 ई.) तथा डॉ. गोविन्दचन्द्र राय की पुस्तक ‘हनुमान के देवत्व और मूर्ति का विकास’ आदि से भी यथावसर सामग्री प्राप्त की गई है।
Joothan-2
- Author Name:
Omprakash Valmiki
- Book Type:

- Description:
जूठन’ ओमप्रकाश वाल्मीकि की आत्मकथा है। इसका पहला भाग बरसों पहले प्रकाशित होकर, आज हिन्दी दलित साहित्य और खासकर आत्मकथाओं की शृंखला में एक विशेष स्थान प्राप्त कर चुका है। वाल्मीकि जी अब हमारे बीच नहीं हैं, अपने जीवन-काल में उन्होंने 'जूठन’ के बाद साहित्य, समाज और संवेदना के दायरों में एक लम्बी यात्रा पूरी की। कई कथात्मक और आलोचनात्मक कृतियों के साथ उनके काव्य-संग्रह भी आए। 'जूठन’ का यह दूसरा भाग उनके उसी दौर का आख्यान है। आत्मकथा के इस दूसरे भाग की शुरुआत उन्होंने देहरादून की आर्डिनेंस फैक्ट्री में अपनी नियुक्ति से की है। नई जगह पर अपनी पहचान को लेकर आई समस्याओं के साथ-साथ यहाँ मजदूरों के साथ जुड़ी अपनी गतिविधियों का जिक्र करते हुए उन्होंने अपनी साहित्यिक सक्रियता का भी विस्तार से उल्लेख किया है। सहज, प्रवाहपूर्ण और आत्मीय भाषा में लिखी गई यह पुस्तक देहरादून से जबलपुर और वहाँ से पुन: देहरादून की यात्रा करती हुई शिमला उच्च अध्ययन संस्थान और फिर उनके अस्वस्थ होने तक जाती है। दलित साहित्य के वर्तमान परिदृश्य में 'जूठन’ के इस दूसरे भाग को पढ़ना एक अलग अनुभव है।
Tumhare Naam : Jan Nisar Akhtar ko Safia Akhtar ke khat
- Author Name:
Safia Akhtar
- Book Type:

- Description:
जाँ निसार अख़्तर और उनकी शरीके-हयात सफ़िया अख़्तर को साथ रहने का मौक़ा बहुत कम मिला। उस ज़माने में जब औरतों के लिए घर से बाहर जाकर काम करना बहुत आम बात नहीं थी, वे स्कूल में अपनी नौकरी करती रहीं और न सिर्फ़ अपनी और अपने बच्चों, बल्कि मुम्बई की फ़िल्म इंडस्ट्री में अपनी ज़मीन तलाश रहे जाँ निसार साहब के लिए भी सम्बल जुटाती रहीं।
ये ख़त उन्होंने इसी संघर्ष के दौरान लिखे, लेकिन ये ख़त सिर्फ़ उनके हाल-अहवाल की सूचना-भर नहीं देते, बल्कि वे एक बड़े सृजक की क़लम से उतरे शाहकार की तरह हमारे सामने आते हैं। ज़िन्दगी उन्हें कुछ और वक़्त देती तो निश्चय ही वे साहित्य की दुनिया को कुछ बड़ा देकर जातीं। इन ख़तों में उनकी मुहब्बत और हिम्मत के साथ-साथ उनकी और बेशक जाँ निसार अख़्तर की ज़िन्दगी खुलती जाती है, साथ ही उनका अपना दौर भी अपने तमाम स्याह-सफ़ेद के साथ रौशन होता जाता है। ये ख़त प्यार और हौसले से भरे एक दिल की अक़्क़ासी करते हैं। ये जादू की तरह असर करते हैं; इनका बेहद ताक़तवर और सधा हुआ ‘प्रोज़’ कहीं आपको रुकने नहीं देता, और इनकी तुर्श मिठास में डूबे-डूबे बारहा आपकी आँखें भर आती हैं।
उनके निधन के बाद जाँ निसार साहब ने उनके इन ख़तों को दो जिल्दों में प्रकाशित कराया—’हर्फ़े-आश्ना’ और ‘ज़ेरे-लब’। इस किताब में इन दोनों जिल्दों में संकलित ख़तों को दे दिया गया है।
Tumhare Naam : Jan Nisar Akhtar ko Safia Akhtar ke khat
Safia Akhtar
20% off₹ 199
₹ 159.2
Available
Yugon Ka Yatri : Nagarjun Ki Jeewani
- Author Name:
Taranand Viyogi
- Book Type:

- Description:
मिथिला के बन्द समाज से बाहर निकलकर नागार्जुन ने अपनी तमाम रचनाओं और सहज सुलभ व्यक्तित्व से एक ऐसा जागरण किया जिसकी आज पहले से कहीं ज़्यादा ज़रूरत है। वे सच्चे अर्थों में क्लैसिकल मॉडर्न थे। तारानन्द वियोगी की यह जीवनी पाठक को नागार्जुन के अन्त:करण में प्रवेश कराने में सक्षम है। उनके घने साहचर्य में जो रहे हैं, वे इसे पढ़कर बाबा की उपस्थिति फिर से अपने भीतर महसूस करेंगे। अपनी सशक्त लेखनी से तारानन्द ने बाबा नागार्जुन को पुनर्जीवित कर दिया है। यहाँ तथ्य और सत्य का सन्तुलित समन्वय है। बाबा से जुड़े शताधिक जनों के अनुभव उन्होंने बड़ी सहृदयता से अन्तर्ग्रथित किए हैं। बाबा नागार्जुन को संसार से विदा हुए बीस वर्ष से ज़्यादा हुए। इस बीच हिन्दी-मैथिली की जो तरुण पीढ़ी आई है, वह भी इस कृति से बाबा नागार्जुन का सम्पूर्ण साक्षात्कार कर सकेगी। बाबा के बारे में एक जगह लेखक ने लिखा है, 'स्मृति, दृष्टान्त और अनुभव का ज़खीरा था उनके पास।' तारानन्द की इस जीवनी में भी ये तीनों बातें आद्यन्त मौजूद हैं। बाबा के जीवन-सृजन पर यह बहुत रचनात्मक, ऐतिहासिक महत्त्व का कार्य सम्पन्न हो सका है। मैं इतना ही कहूँगा कि बाबा की ऐसी प्रामाणिक जीवनी मैं भी नहीं लिख पाता। ‘युगों का यात्री' हिन्दी की कुछ सुप्रसिद्ध जीवनियों की शृंखला की अद्यतन सशक्त कड़ी है। —वाचस्पति, वाराणसी (दशकों तक नागार्जुन के क़रीब रहे अध्येता समीक्षक)
Sutradhar
- Author Name:
Sanjeev
- Book Type:

- Description:
अपनी रचनात्मक ज़मीन और लेखकीय दायित्व की तलाश करते हुए एक ईमानदार लेखक प्रायः स्वयं को भी रचने की कोशिश करता है। अनुपस्थित रहकर भी वह उसमें उपस्थित रहता है; और सहज ही उस देश-काल को लाँघ जाता है जो उसे आकार देता रहा है। समकालीन कथाकारों में संजीव की मौजूदगी को कुछ इसी तरह देखा जाता है। आकस्मिक नहीं कि हिन्दी की यथार्थवादी कथा-परम्परा को उन्होंने लगातार आगे बढ़ाया है। ‘सूत्रधार’ संजीव का नया उपन्यास है, और उनकी शोधपरक कथा-यात्रा में नितान्त चुनौतीपूर्ण भी। केन्द्र में हैं भोजपुरी गीत-संगीत और लोकनाट्य के अनूठे सूत्रधार भिखारी ठाकुर। वही भिखारी ठाकुर, जिन्हें महापंडित राहुल सांकृत्यायन ने ‘भोजपुरी का शेक्सपियर’ कहा था और उनके अभिनन्दनकर्ताओं ने भारतेन्दु हरिश्चन्द्र। लेकिन भिखारी ठाकुर क्या सिर्फ़ यही थे? निश्चय ही नहीं, क्योंकि कोई भी एक बड़ा किसी दूसरे बड़े के समकक्ष नहीं हो सकता। और यों भी भिखारी का बड़प्पन उनके सहज सामान्य होने में निहित था, जिसे इस उपन्यास में संजीव ने उन्हीं के आत्मद्वन्द्व से गुज़रते हुए चित्रित किया है। दूसरे शब्दों में, यह एक ऐसी धूपछाँही कथा-यात्रा है, जिसे हम भिखारी जैसे लीजेंडरी लोक कलाकार और उनके संगी-साथियों के अन्तर्बाह्य संघर्ष को महसूस करते हुए करते हैं। काल्पनिक अतिरेक की यहाँ कोई गुंजाइश नहीं। न कोई ज़रूरत। ज़रूरत है तो तथ्यों के बावजूद रचनात्मकता को लगातार साधे रखने की, और संजीव को इसमें महारत हासिल है। यही कारण है कि ‘सूत्रधार’ की शक्ल में उतरे भिखारी ठाकुर भोजपुरी समाज में रचे-बसे लोकराग और लोकचेतना को व्यक्त ही नहीं करते, उद्दीप्त भी करते हैं। उनकी लोकरंजकता भी गहरे मूल्यबोध से सम्बलित है; और उसमें न सिर्फ़ उनकी, बल्कि हमारे समाज और इतिहास की बहुविध विडम्बनाएँ भी समाई हुई हैं। अपने तमाम तरह के शिखरारोहण के बावजूद भिखारी अगर अन्त तक भिखारी ही बने रहते हैं तो यह यथार्थ आज भी हमारे सामने एक बड़े सवाल की तरह मौजूद है। कहने की आवश्यकता नहीं कि देश, काल, पात्र की जीवित-जाग्रत् पृष्ठभूमि पर रचा गया यह जीवनीपरक उपन्यास आज के दलित-विमर्श को भी एक नई ज़मीन देता है। तथ्यों से बँधे रहकर भी संजीव ने एक बड़े कलाकार से उसी के अनुरूप रससिक्त और आत्मीय संवाद किया है। —रामकुमार कृषक
Bageshwar Dham Sarkar: Pt. Dheerendra Krishna Shastri Ki Adbhut Yatra
- Author Name:
Sachin Choudhary
- Book Type:

- Description:
“बागेश्वर धाम सरकार – पं. धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री की अद्भुत यात्रा” सिर्फ एक किताब नहीं, बल्कि एक आध्यात्मिक यात्रा है—एक युवा साधक से लेकर राष्ट्र की आस्था के केंद्र बन चुके पं. धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री तक की प्रेरणादायी गाथा। इस पुस्तक में लेखक सचिन चौधरी ने न सिर्फ बागेश्वर धाम सरकार से अपनी पहली मुलाकात, बल्कि पिछले चार वर्षों में उनके साथ हुए अनुभवों, संवादों और आत्मीय क्षणों को सच्चाई और श्रद्धा के साथ शब्दों में पिरोया है। किताब में वर्णित है कि कैसे एक सामान्य से गाँव गढ़ा से शुरू होकर, बाबा का तेज, ज्ञान और दिव्य दृष्टि लोगों के जीवन में चमत्कारिक परिवर्तन लेकर आए। यह पुस्तक इस बात की साक्षी है कि कैसे बुंदेलखंड की धरती से निकला एक युवा आज करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था और विश्वास का प्रतीक बन गया है। बागेश्वर धाम सरकार की महिमा, श्रद्धालुओं की अडिग भक्ति, खजुराहो जैसे क्षेत्रों पर इसका सामाजिक-आर्थिक प्रभाव, और बाबा के अनदेखे पहलुओं को उजागर करती यह पुस्तक—हर उस व्यक्ति के लिए पठनीय है जो आस्था, अध्यात्म और आत्मबल की शक्ति को समझना चाहता है।
Main Barbad Hona Chahti Hoon
- Author Name:
Malika Amar Shaikh +1
- Book Type:

- Description:
मलिका अमर शेख उस समय मात्र उन्नीस बरस की थीं जब वे मराठी के युग-प्रवर्तक कवि नामदेव ढसाल के साथ विवाह-बन्धन में बँध गईं। लेकिन जल्द ही यह शादी टूट गई। दलित पैंथर्स के सह-संस्थापक नामदेव न तो एक पति के रूप में, न पिता के रूप में, और न ही एक पुरुष के रूप में वैसे निकले जैसी उम्मीद मलिका ने की थी। यह मुख्यतः उस विवाह की कहानी है, जिसमें हम उस स्त्री से मिलते हैं जो एक पुरुष-संसार में अपनी जगह ढूँढ़ने की कोशिश में है। लेकिन यह कहानी मराठी दलित आन्दोलन के अन्तर्विरोधों, मुम्बई शहर, उसके कवियों और एक्टिविस्टों की कहानी भी है। मूल रूप से मराठी में प्रकाशित यह आत्मकथा छपते ही एक सनसनी बन गई थी। व्यक्तिगत बनाम राजनीतिक, वाम विचारधारा बनाम दलित आन्दोलन और अपने पति के प्रति प्रेम और घृणा के बीच फँसी एक स्त्री की यह आत्मकथा कई मायनों में एक दस्तावेज़ की हैसियत रखती है।
Yogigatha, Yogi Adityanath Ki Jivangatha
- Author Name:
Shantanu Gupta
- Book Type:

- Description:
यह जीवनी आपको अपने चार खंडों में योगी आदित्यनाथ के जीवन के चार पहलुओं से होकर ले जाती है। पुस्तक का आरंभ योगी के उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री के वर्तमान रूप, 2017 की उत्तर प्रदेश की चुनावी राजनीति, यू.पी. का सी.एम. चुने जाने के तथ्यों और पंचम तल (यू.पी. के सीएम का दफ्तर) से होता है। दूसरा खंड आपको योगी आदित्यनाथ के पाँच बार के सांसद के रूप में लंबे कार्यकाल, चुनावी जीत, संसद् में उनकी कुशल भागीदारी, उनके तथाकथित विवादित भाषणों की सच्चाई, लव-जिहाद की उनकी सोच के पीछे का तर्क, घर वापसी, हिंदू युवा वाहिनी और भाजपा के साथ उनके संबंध से परिचित कराता है। तीसरे खंड में लेखक अपने पाठकों को गोरखनाथ मठ के महंत अवेद्यनाथ, योगी आदित्यनाथ, उनकी कठोर यौगिक दिनचर्या, नाथ पंथ के गुरुओं और कई दशकों से मठ की सामाजिक-राजनीतिक सक्रियता से होकर ले जाते हैं। आखिरी खंड में लेखक अपने पाठकों को उत्तराखंड के इलाके में पले अजय सिंह बिष्ट के बचपन से जुड़ी कुछ बेहद दिलचस्प और उनके अपनों के मुँह से कही बातों के साथ छोड़ देते हैं, जो गायों, खेतों, पहाड़ों, नदियों के बीच पला-बढ़ा और आगे चलकर एक सांसद और मुख्यमंत्री बना।
Karpuri Thakur
- Author Name:
Dr. Ranjana Kumari +1
- Book Type:

- Description:
जननायक कर्पूरी ठाकुर की ख्याति मुख्यमंत्री के रूप में कम और 'विपक्ष के प्राण' के रूप में ज्यादा थी। समाजवादी धारा के अग्रणी नेता के रूप में कर्पूरीजी भारतीय राजनीति में प्रतिष्ठित रहे हैं। संसदीय मर्यादा और विधाओं के भरपूर पालन तथा संसदीय व्यवस्था में कर्पूरीजी की अटूट आस्था थी। बिहार विधानसभा तथा लोकसभा में उनकी भागीदारी अत्यन्त उच्चकोटि की रही है। इस पुस्तक में विभिन्न संसदीय विधाओं, राज्यपाल के अभिभाषण, प्रश्नकाल, ध्यानाकर्षण प्रस्ताव, बजट, वाद-विवाद, लोक महत्त्व के विषयों, प्रस्तावों तथा अविश्वास प्रस्ताव आदि में नेता विपक्षी दल के रूप में कर्पूरीजी की भागीदारी का निरूपण किया गया है। इसके अतिरिक्त विभिन्न संसदीय विधाओं के सैद्धान्तिक पक्ष का अनुशीलन करते हुए उन सिद्धान्तों की कसौटी पर कर्पूरीजी की भूमिका का परीक्षण किया गया है। कर्पूरीजी की सदन के अन्दर नेता विपक्षी दल के रूप में निभाई गई भूमिका का विस्तृत विवरण देनेवाली यह पुस्तक भारतीय राजनीति के कुछ महत्त्वपूर्ण बिन्दुओं की सूचना भी देती है।
Customer Reviews
Be the first to write a review...
0 out of 5
Book