Soordas
Author:
Nandkishore NavalPublisher:
Rajkamal Prakashan SamuhLanguage:
HindiCategory:
General-non-fiction0 Ratings
Price: ₹ 396
₹
495
Available
तुलसीदास पर पुस्तक लिखने के बाद हिन्दी के जाने-पहचाने ही नहीं, माने हुए आलोचक डॉ. नवल ने अन्तःप्रेरणा से सूरदास के पदों पर यह आस्वादनपरक पुस्तक लिखी है, जिसमें आवश्यक स्थानों पर अत्यन्त संक्षिप्त आलोचनात्मक टिप्पणियाँ भी हैं। उन्होंने कृष्ण और राधा की संकल्पना तथा वैष्णव भक्ति के उद्भव और विकास पर भी काफ़ी शोध किया, लेकिन पुस्तक की पठनीयता बरकरार रखने के लिए उससे प्राप्त तथ्यों का संकेत भूमिका में ही करके आगे बढ़ गए हैं।
आचार्य रामचन्द्र शुक्ल द्वारा सम्पादित ‘भ्रमरगीत सार’ की भूमिका उनकी आलोचना का उत्तमांश है, जिसमें उनकी शास्त्रज्ञता और रसज्ञता दोनों का अद्भुत सम्मिश्रण हुआ है। लेकिन यह भी सही है कि उनकी लोकमंगल और कर्म-सौन्दर्य की कसौटी, जो उन्होंने ‘रामचरितमानस’ से प्राप्त की थी, सूर के लिए अपर्याप्त है। कारण यह कि उक्त दोनों ही शब्द बहुत व्यापक हैं, जिनका अभिलषित अर्थ ही आचार्य ने लिया है। तुलसी मूलतः प्रबन्धात्मक कवि थे और क्लासिकी, जबकि सूर आद्यन्त गीतात्मक और स्वच्छन्द, इसलिए पहले महाकवि के निकष पर दूसरे महाकवि को चढ़ाकर दूसरे के साथ न्याय नहीं किया जा सकता। डॉ. नवल प्रगीतात्मकता के सम्बन्ध में एडोर्नो की इस उक्ति के क़ायल हैं कि ‘प्रगीत-काव्य इतिहास की ‘दार्शनिक धूपघड़ी’ है।’ इस कारण उसकी छाया को उस तरह नहीं पकड़ा जा सकता, जिस तरह इतिवृत्तात्मक शैली में लिखनेवाले किसी कवि की कविता में हम यथार्थ को ठोस रूप में पकड़ लेते हैं। दूसरी बात यह कि उन्होंने सूर की कविता से सीधा साक्षात्कार किया है।
ISBN: 9788126723959
Pages: 103
Avg Reading Time: 3 hrs
Age: 18+
Country of Origin: India
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- Description: उपन्यास सम्राट कहे जानेवाले प्रेमचन्द हमारी भाषा के कालजयी रचनाकार हैं और इनकी रचनाओं को क्लासिक का दर्जा प्राप्त है। जीवन में जनवादी, साहित्य में यथार्थवादी प्रेमचन्द ने जीवन को जैसा देखा वैसा ही उसे चित्रित किया। उन्होंने उपन्यासों के अतिरिक्त कहानियाँ, नाटक और लेख भी लिखे। उनकी रचनाओं में एक व्यावहारिक ढंग का समाजवाद हमें दिखाई पड़ता है। भारतीय पुनर्जागरण के महान लेखकों में वे ही ऐसे हैं, जो अपने सामाजिक निष्कर्षों में क्रान्तिकारी या वैज्ञानिक समाजवाद के सबसे समीप हैं। यह पुस्तक एक विशेष दृष्टि से तैयार की गई है। विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रेमचन्द की रचनाओं से सम्बन्धित गम्भीर, विचारोत्तेजक व अमूल्य सामग्रियों को इस उम्मीद के साथ एक जगह सुलभ कराया गया है कि पाठकों, अध्यापकों व शोधार्थियों को प्रेमचन्द के अध्ययन में विशेष सहायता मिलेगी। इसमें प्रेमचन्द के नारी-विषयक विचार, उनके पात्रों के चारित्रिक विकास, औपन्यासिक-कला के शिल्प-विधान, भाषा-शैली सम्बन्धी प्रयोगों के अध्ययन के अतिरिक्त प्रेमचन्द और तारा शंकर, प्रेमचन्द का नाट्य व कथा साहित्य तथा समस्यामूलक उपन्यास और प्रेमचन्द जैसे विषयों पर भी गम्भीरतापूर्वक विचार किया गया है। आशा है कि प्रेमचन्द अध्येताओं के लिए यह पुस्तक उपयोगी व विचारोत्तेजक सिद्ध होगी।
Kosi Ke Vat Vriksh
- Author Name:
Pushya Mitra
- Rating:
- Book Type:

- Description: कोसी के वट वृक्ष उन बुजुर्गो की कहानी है जो 2008 के कुसहा त्रासदी के बाद न केवल तनकर खड़े हुए बल्कि दूसरों को भी संरक्षण भरी छांव दी । घुमंतु पत्रकार और लेखक पुष्य मित्र की यह किताब आपके अंदर बुढ़ापे को लेकर जमी सभी पुर्वाग्रहों को तोड़ने का काम करेगी । इस किताब के अंदर आपको बुजुर्गो के हौसले और हिम्मत की वो कहानी मिलेगी जो न केवल प्रेरक है बल्कि प्रेरणादाई भी है।
Maa Ka Dard Kya Vo Samjhta Hai
- Author Name:
Arun Shourie
- Book Type:

- Description: एक किताब उन सबके लिए, जिन्हें कष्ट और नुकसान से जूझना पड़ा। यदि ईश्वर है, जो सबकुछ जानता है, सर्वशक्तिमान है और करुणामय भी है, तो चारों तरफ इतना असहनीय दुःख क्यों? हमारे धार्मिक शास्त्रों में कष्ट पर सफाई में क्या कहा गया है? क्या वह सफाई जाँच में टिक पाती है? क्या हमारा अनुभव इस बात को स्वीकार करता है कि ईश्वर है? या फिर दो शैतान— समय और संयोग उन सबका कारण है, जिनसे हमें गुजरना पड़ता है? दुःख और कष्ट का अनुभव कर चुके अरुण शौरी ने शास्त्रों की अग्नि-परीक्षा ली और फिर हमें बताया कि क्यों अंततः उनका झुकाव बुद्ध की शिक्षा की ओर हुआ। उनकी शिक्षा में हमारे दैनिक जीवन के लिए कौन से संदेश हैं?
Khelatoon Vyakaran
- Author Name:
Renu Dandekar
- Book Type:

- Description: आपण बोलतो ती भाषा म्हणजेच व्याकरण. भाषेपासून व्याकरण वेगळं काढता येत नाही. लहान मूल ऐकून ऐकून बोलायला शिकतं तेव्हा ते व्याकरणासह त्याच्या त्याच्या बोलीभाषेत बोलत असतं. मात्र प्रत्यक्ष शिक्षण प्रक्रियेत व्याकरण हे भाषेपासून वेगळं काढून शिकवलं जातं आणि तिथेच मुलांच्या मनात भाषा विषयाबद्दलची एक अढी तयार होते. कारण नियम आणि व्याख्या यामध्ये मुलं अडकतात. परिणामी व्याकरणासह भाषा शिकणं ही कंटाळवाणी प्रक्रिया बनते. हे टाळायचं असेल, तर मनोरंजक अशा भाषिक खेळातून मुलांना व्याकरणाचे धडे दिले पाहिजेत. हाच दृष्टिकोन बाळगत रेणू दांडेकर यांनी ‘खेळातून व्याकरण' या पुस्तकाची रचना केली आहे. कोणताही नियम अथवा व्याख्या न सांगता विविध प्रकारच्या भाषिक खेळांमधून व्याकरणाचे धडे गिरवायला लावणारं हे पुस्तक आपल्या मुलांची मराठी भाषा अधिक समृद्ध करायला नक्कीच मदत करेल. तेव्हा शिक्षक, पालक आणि मुलं या सर्वांनीच खेळातून व्याकरण शिकवणारं पुस्तक आपल्या संग्रही ठेवायलाच हवं. Khelatoon Vyakaran | Renu Dandekar खेळातून व्याकरण | रेणू दांडेकर
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