Buddha Aani Tyancha Dhamm
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DR. B.R. AmbedkarPublisher:
Manovikas Prakashan LLPLanguage:
MarathiCategory:
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डॉ. बाबासाहेब आंबेडकरांचे रामायण-महाभारत हे ग्रंथ वाचून समाधान झाले नाही तेव्हा ते बुद्धांकडे वळले. बौद्ध धर्म हा एकमेव असा धर्म आहे की, विज्ञानाने जागृत झालेला समाज तो सहर्ष स्वीकारील. मानवासाठी कल्याणकारी असणाऱ्या या धर्मात उच्च-नीच, श्रेष्ठ-कनिष्ठ, स्त्री-पुरुष, स्पृश्य-अस्पृश्य असा कोणताही भेद नाही. समानता हेच तत्त्व या धम्मात व्यापून आहे. ‘बहुजन हिताय, बहुजन सुखाय' हे या धम्माचं मध्यवर्ती सूत्र आहे. हे तत्त्वज्ञान त्यांनी ‘बुद्ध आणि त्यांचा धम्म' या ग्रंथातून विस्तृतपणे मांडलेले आहे. गौतम बुद्धांच्या जीवन आणि तत्त्वज्ञानावर, समाजातील मौलिक प्रश्नांवर विवेचन करणारा हा एकमेवाद्वितीय ग्रंथ होय. सबंध मानवास समृद्ध जीवन जगण्याचा मार्ग दाखवणारा हा एक प्रमाण ग्रंथ म्हणता येईल.डॉ. बाबासाहेब आंबेडकरांनी लिहिलेला हा अखेरचा ग्रंथ असून त्यांच्या सर्व ग्रंथांत या ग्रंथाला सर्वाधिक महत्त्व आहे. त्यांची भूमिका धर्मचिकित्सकाची होती. तर्काला पटेल ते स्वीकारायचं आणि न पटेल ते नाकारण्याचं धम्मात दिलेलं स्वातंत्र्य घेऊनच ‘बुद्ध आणि त्यांचा धम्म' हा ग्रंथ त्यांनी लिहिला.मूळ इंग्रजीत असणारा हा ग्रंथ मराठी, हिंदी, गुजराती, तेलुगू, तमिळ, कन्नड, पंजाबी आदी भाषांत अनुवादित झालेला आहे. या ग्रंथावर ‘अ जर्नी ऑफ सम्यक बुद्ध' हा चित्रपटसुद्धा प्रदर्शित झालेला आहे.गौतम बुद्ध आणि डॉ. बाबासाहेब आंबेडकरांवर ज्यांची प्रगाढ निष्ठा आहे त्यांच्यासाठी आणि विद्यार्थी, ज्ञानसाधक, अभ्यासक आदींना प्रस्तुत ग्रंथ नक्कीच अत्यंत उपयुक्त ठरेल. Buddha Aani Tyancha Dhamm | Bharatratna Dr. Babasaheb Ambedkar बुद्ध आणि त्यांचा धम्म | भारतरत्न डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर
Read moreAbout the Book
डॉ. बाबासाहेब आंबेडकरांचे रामायण-महाभारत हे ग्रंथ वाचून समाधान झाले नाही तेव्हा ते बुद्धांकडे वळले. बौद्ध धर्म हा एकमेव असा धर्म आहे की, विज्ञानाने जागृत झालेला समाज तो सहर्ष स्वीकारील. मानवासाठी कल्याणकारी असणाऱ्या या धर्मात उच्च-नीच, श्रेष्ठ-कनिष्ठ, स्त्री-पुरुष, स्पृश्य-अस्पृश्य असा कोणताही भेद नाही. समानता हेच तत्त्व या धम्मात व्यापून आहे. ‘बहुजन हिताय, बहुजन सुखाय' हे या धम्माचं मध्यवर्ती सूत्र आहे. हे तत्त्वज्ञान त्यांनी ‘बुद्ध आणि त्यांचा धम्म' या ग्रंथातून विस्तृतपणे मांडलेले आहे. गौतम बुद्धांच्या जीवन आणि तत्त्वज्ञानावर, समाजातील मौलिक प्रश्नांवर विवेचन करणारा हा एकमेवाद्वितीय ग्रंथ होय. सबंध मानवास समृद्ध जीवन जगण्याचा मार्ग दाखवणारा हा एक प्रमाण ग्रंथ म्हणता येईल.डॉ. बाबासाहेब आंबेडकरांनी लिहिलेला हा अखेरचा ग्रंथ असून त्यांच्या सर्व ग्रंथांत या ग्रंथाला सर्वाधिक महत्त्व आहे. त्यांची भूमिका धर्मचिकित्सकाची होती. तर्काला पटेल ते स्वीकारायचं आणि न पटेल ते नाकारण्याचं धम्मात दिलेलं स्वातंत्र्य घेऊनच ‘बुद्ध आणि त्यांचा धम्म' हा ग्रंथ त्यांनी लिहिला.मूळ इंग्रजीत असणारा हा ग्रंथ मराठी, हिंदी, गुजराती, तेलुगू, तमिळ, कन्नड, पंजाबी आदी भाषांत अनुवादित झालेला आहे. या ग्रंथावर ‘अ जर्नी ऑफ सम्यक बुद्ध' हा चित्रपटसुद्धा प्रदर्शित झालेला आहे.गौतम बुद्ध आणि डॉ. बाबासाहेब आंबेडकरांवर ज्यांची प्रगाढ निष्ठा आहे त्यांच्यासाठी आणि विद्यार्थी, ज्ञानसाधक, अभ्यासक आदींना प्रस्तुत ग्रंथ नक्कीच अत्यंत उपयुक्त ठरेल. Buddha Aani Tyancha Dhamm | Bharatratna Dr. Babasaheb Ambedkar बुद्ध आणि त्यांचा धम्म | भारतरत्न डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर
Book Details
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ISBN9788196774813
-
Pages480
-
Avg Reading Time16 hrs
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Age18-100 yrs
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Country of OriginIndia
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- Description: "यात्रा-वृत्तांत साहित्य की बड़ी जीवंत विधा है, जिसमें पहाड़ों की गूँज, नदियों की कल-कल और पक्षियों की मीठी चह-चह की तरह जीवन और जीवन-रस छलछलाता नजर आता है। इनमें हमारा समय है तो मानव-आस्था की सुदीर्घ परंपरा भी। यात्रा-वृत्तांत एक तरह से कालदेवता की अभ्यर्थना भी हैं, जो पल में हमें कल से आज और आज से कल तक हजारों वर्षों की यात्रा कराके एकदम ताजा एवं पुनर्नवा बना देते हैं। प्रस्तुत यात्रा पुस्तक में दर्शनीय तीर्थस्थलों की प्रामाणिक जानकारी दी गई है, जिससे वे सभी सुरम्य यात्रा-स्थल अपनी पूरी प्राकृतिक सुंदरता, भव्यता और ऐतिहासिक गौरव के साथ पाठक की स्मृति में बसने की ताकत रखते हैं। प्रस्तुत पुस्तक ‘नगरी-नगरी, द्वारे-द्वारे’ के यात्रा-वृत्तांतों की सबसे बड़ी विशेषता है कि ये मन को बाँध लेते हैं। पाठक इन्हें पढ़ना शुरू करे तो पूरा पढ़े बिना रह नहीं सकता है। पाठक को लगता है, वह इन्हें पढ़ नहीं रहा, बल्कि चलचित्र की भाँति देख रहा है; लेखक के साथ-साथ यात्रा कर रहा है। विभिन्न साहित्यिक पत्रिकाओं में पाठकों का अपार प्यार-दुलार पाने के बाद अब ये यात्रा-संस्मरण पुस्तक रूप में पुनः पाठकों के सामने उपस्थित हैं। पत्र-पत्रिकाओं के पाठकों से इतर पाठक-बंधु भी अब इनका रसास्वादन सहजता से कर सकेंगे। पाठकों के हृदय में उतरकर अपना स्थान बना लेनेवाले यात्रा-संस्मरणों की रोचक, पठनीय-मननीय पुस्तक।
Kuchh Bola gaya, Kuchh Likha Gaya
- Author Name:
Subhah Mishra
- Book Type:

- Description: इस पुस्तक में संगृहीत निबंध दरअसल पारंपरिक निबंधों की संरचना से विद्रोह करते हैं, खासकर ललित निबंधों की मृतप्राय देह से प्रेत जगाने की कोशिश तो ये बिल्कुल ही नहीं हैं। इन निबंधों के सहारे न सिर्फ हमारे समाज, संस्कृति और पूरे समय की पड़ताल की जितनी कोशिश है, उतनी ही उसे नए संदर्भों में देखने-परखने की ललक भी है। इस पुस्तक के अधिकांश निबंध आज के जीवन-यथार्थ को उसके समूचे अर्थ-संदर्भों में प्रकट करते हैं। साथ ही समय की जटिलता और उसकी व्याख्या की अनिवार्यता में संवाद की स्थिति भी निर्मित करने का ये विवेकपूर्ण साहस और प्रयास हैं। 1947 से लेकर आज तक सत्ता और उसके सलाहकारों की भूमिका में उतरे उतावले बुद्धिजीवियों ने इन सबको अप्रासंगिक घोषित करने के लिए भाषा के खिलवाड़ से संस्कृति को सत्ता का हिस्सा बनाने के लिए बहुत ही श्रम के साथ नए मुहावरे गढ़े। ये निबंध इन चालाकियों को भी अनावृत करते हैं। इन निबंधों को पढ़ना अपने समय से संवाद है। —भालचंद्र जोशी
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