Ink, Saffron & Freedom
(0)
Author:
Kedar Nath GuptaPublisher:
Prabhat PrakashanLanguage:
EnglishCategory:
General-non-fiction₹
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How does one capture a lifetime of memories, a city's soul, and the tides of history in mere words? In Ink, Saffron & Freedom, veteran journalist Kedar Nath Gupta takes readers on a spellbinding journey through his life and times, offering a deeply personal yet panoramic view of Bharat's transformation in the last hundred years. From the vibrant fairs of Garhmukteshwar to the hallowed halls of journalism, from the communal riots of 1946 to the corridors of power, the 94-year old author has lived through some of Bharat's most defining moments. As a young boy, he witnessed the upheavals of Partition. As a journalist, he reported on the country's changing political landscape, rubbing shoulders with leaders and ideologues who shaped modern Bharat. And, as a devoted Swayamsevak, he remained steadfast in his vision of 'Akhand Bharat. Rich with nostalgia, wit, and historical insight, this memoir of a Dilliwala is not just an autobiography-it is a love letter to the city where he was born, to journalism which is his passion, and to a life lived with conviction. Gupta's storytelling is both evocative and unflinching, blending personal anecdotes with incisive commentary on Bharat's socio-political evolution. For those who long to understand our country beyond its monuments, who cherish the ideals of fearless journalism, or who seek an intimate account of a life intertwined with history, this book is an unmissable read. As Gupta himself writes, This is as much my story as it is the story of my city, my country, and my times. Turn the pages and step into the world of resilience, nostalgia, and undying passion for the truth
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How does one capture a lifetime of memories, a city's soul, and the tides of history in mere words? In Ink, Saffron & Freedom, veteran journalist Kedar Nath Gupta takes readers on a spellbinding journey through his life and times, offering a deeply personal yet panoramic view of Bharat's transformation in the last hundred years.
From the vibrant fairs of Garhmukteshwar to the hallowed halls of journalism, from the communal riots of 1946 to the corridors of power, the 94-year old author has lived through some of Bharat's most defining moments. As a young boy, he witnessed the upheavals of Partition. As a journalist, he reported on the country's changing political landscape, rubbing shoulders with leaders and ideologues who shaped modern Bharat. And, as a devoted Swayamsevak, he remained steadfast in his vision of 'Akhand Bharat.
Rich with nostalgia, wit, and historical insight, this memoir of a Dilliwala is not just an autobiography-it is a love letter to the city where he was born, to journalism which is his passion, and to a life lived with conviction. Gupta's storytelling is both evocative and unflinching, blending personal anecdotes with incisive commentary on Bharat's socio-political evolution.
For those who long to understand our country beyond its monuments, who cherish the ideals of fearless journalism, or who seek an intimate account of a life intertwined with history, this book is an unmissable read.
As Gupta himself writes, This is as much my story as it is the story of my city, my country, and my times.
Turn the pages and step into the world of resilience, nostalgia, and undying passion for the truth
Book Details
-
ISBN9789355627995
-
Pages336
-
Avg Reading Time11 hrs
-
Age18+ yrs
-
Country of OriginIndia
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- Description: भारतीय लष्करी दलांमधील शौर्याच्या सत्यकथा एल.ओ.सी.च्या पलीकडे जाऊन सप्टेंबर 2016मध्ये पाकिस्तानी अतिरेक्यांच्या ठाण्यांवरच्या यशस्वी हल्ल्याचे नेतृत्व करणारे मेजर, 11 दिवसांत 10 अतिरेक्यांना ठार मारणारा सैनिक, कुठल्याही क्षणी युद्ध सुरू होणार्या भूमीवरून शेकडो लोकांची सुटका करण्यासाठी, भयावह वातावरणातल्या बंदरावर जहाज घेऊन जाणारे नौदलातले अधिकारी आणि रक्तबंबाळ स्थितीतही जळतं जेट विमान चालवणारा हवाई दलाचा पायलट! ह्या सगळ्यांच्या शौर्याचा कस लावणार्या घटनांचं हे कथन! काही त्यात प्रत्यक्ष सहभागी असणार्यांनी दिलेल्या माहितीवर आधारित, तर काही त्यांच्याबरोबरच्या मोहिमेत त्यांना अखेरपर्यंत साथ देणार्या इतरांनी सांगितलेल्या माहितीवर आधारलेल्या, अशा ह्या कथा! ‘इंडियाज मोस्ट फिअरलेस’ हे पुस्तक असामान्य शौर्य आणि कमालीची निर्भयता, ह्यांचं दर्शन वाचकांना घडवतं. अत्यंत विपरीत परिस्थितीत आणि गंभीर आव्हानं समोर असतानाही, भारताच्या ह्या शूरवीरांनी ज्या धाडसाने त्यांच्यावर मात केली आहे, त्याच्या खिळवून ठेवणार्या हकिगती लेखकांनी ह्यात पुस्तकातून वाचकांपुढे ठेवल्या आहेत. India's Most Fearless - Shiv Aroor, Rahul Singh इंडियाज मोस्ट फिअरलेस - शिव अरूर, राहुल सिंग
Coronakaal Ki Sachchi Kahaniyan
- Author Name:
Ramesh Pokhriyal 'Nishank'
- Book Type:

- Description: "चारों तरफ खौफ छा गया। कुछ लोग तो दुबककर कमरों में लिहाफ के अंदर घुस गए, कुछ निडर प्रकार के लोग मोबाइल कैमरे से छिपकर वीडियो बनाने का प्रयास करने लगे। एंबुलेंस से बाहर उतरे लोग इधर-उधर के घरों का जायजा ले ही रहे थे कि पीछे से सायरन बजाती हुई पुलिस की एक जिप्सी भी आ धमकी। जिप्सी से भी उसी प्रकार के पारदर्शी आवरण में खाकी वर्दीधारी लोग उतरे और सामने के गेट की कॉल बैल दबाई। ‘अरे मिसेज दत्ता के घर?’, हर परिवार के लोग आपस में कानाफूसी करने लगे। ‘कौन बीमार हुआ होगा?’ ‘कौन होना है? वही होगी, अकेले वही तो है इस घर में!’ लोग खौफ में थे। एक-दूसरे को फोन कॉल करके पूछ रहे थे किंतु बाहर निकलकर पुलिस से या एंबुलेंस वालों से पूछने की किसी को हिम्मत न हो पा रही थी। कोरोना का खौफ इस कदर था कि मानो अगर उन्होंने थोड़ा सा भी दरवाजा खोला तो झिर्री के रास्ते ही कोरोना उनके घर के अंदर भी घुस जाएगा। —इसी कहानी संग्रह से देश, समाज और अपने इर्द-गिर्द घटनेवाली घटनाओं पर पैनी नजर रखनेवाले कथाकार रमेश पोखरियाल ‘निशंक’ ने कोरोनाकाल में घटित अनेक मार्मिक घटनाओं को अपनी कहानियों में पिरोकर कोरोना जैसी महामारी से उपजे हालातों के मध्य मानव, मानवता, मानव मूल्यों और मानवीय संवेदनाओं का गहन विश्लेषण किया है। विपरीत परिस्थितियों, कठिनाइयों और संघर्षों के बीच ये कहानियाँ मन-मस्तिष्क को धैर्य, साहस और सुकून का बोध कराती हैं। "
Cyber Kathayein : Digital Suraksha Ki Raah
- Author Name:
Sushil Kumar
- Book Type:

- Description: साइबर-जगत यानी इंटरनेट ने बहुत सारी सहूलियतें दी हैं तो कई खतरे भी खड़े किये हैं। आए दिन लोगों के साइबर-अपराधियों से ठगे जाने की खबरें सुनने-देखने में आती हैं। और, उन अपराधियों की तरकीबें अक्सर इतनी अप्रत्याशित और अकल्पनीय होती हैं कि हैरत में डाल देती हैं। ऐसे में ‘साइबर कथाएँ : डिजिटल सुरक्षा की राह’ बतलाती है कि साइबर अपराध का शिकार बनने से कैसे बचा जा सकता है। इसके लेखक ने साइबर अपराध से सम्बन्धित प्रभाग का सात वर्ष तक नेतृत्व किया है और यह किताब उस दौरान प्राप्त अनुभवों और किए गये काम पर आधारित है। वे विभिन्न मंचों पर साइबर-सुरक्षा और साइबर-अपराध सम्बन्धी जागरूकता पर लगातार व्याख्यान और अनुभव साझा करते हैं। इस किताब में उन्होंने साइबर-अपराध के तौर-तरीकों के बारे में किस्सों के माध्यम से बताया है और उनसे बचने और मुकाबला करने के टिप्स भी दिये हैं। आज के डिजिटल हेराफेरी के दौर में एक आवश्यक किताब!
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