AIIMS Mein Ek Jung Ladte Huye
Author:
Ramesh Pokhriyal 'Nishank'Publisher:
Prabhat PrakashanLanguage:
HindiCategory:
General-non-fiction0 Ratings
Price: ₹ 320
₹
400
Available
कोरोना
‘‘हार कहाँ मानी है मैंने
रार कहाँ ठानी है
संघर्षों की गाथाएँ गायी है मैंने
मुझे आज भी गानी है।
मैं तो अपने पथ-संघर्षों का
पालन करते आया हूँ।
फिर कैसे पीछे हट जाऊँ मैं
सौगंध धरा की खाया हूँ।
क्यों आए तुम कोरोना मुझ तक
अब तुमको तो बैरंग जाना है
पूछ सको तो पूछो मुझको
मैंने मन में क्या ठाना है।
तुम्हें पता है मैं संघर्षों का
दीप जलाने आया हूँ।
फिर कैसे पीछे हट जाऊँ मैं
सौगंध धरा की खाया हूँ।
हार कहाँ मानी है मैंने
रार कहाँ ठानी है।
मैं तिल-तिल जल
मिटा तिमिर को
आशाओं को बोऊँगा,
नहीं आज तक सोया हूँ
अब कहाँ मैं सोऊँगा!
देखो, इस घनघोर तिमिर में,
मैं जीवन-दीप जलाया हूँ।
फिर कैसे पीछे हट जाऊँ मैं
सौगंध धरा की खाया हूँ।
हार कहाँ मानी है मैंने
रार कहाँ ठानी है
संघर्षों की गाथाएँ गायी
मुझे आज भी गानी है।’’
—रमेश पोखरियाल ‘निशंक’
6 मई, 2021, दिल्ली, एम्स
कक्ष-704, प्रातः 7:00 बजे
ISBN: 9789390923861
Pages: 184
Avg Reading Time: 6 hrs
Age: 18+
Country of Origin: India
Recommended For You
Atma Nirbhar Bharat : Vol. 1
- Author Name:
M. Veerappa Moily
- Book Type:

-
Description:
कन्नड़ के विख्यात लेखक, राजनेता, और सक्षम अर्थशास्त्राी वीरप्पा मोइली की यह पुस्तक भारत के सामाजिक और आर्थिक विकास पर केन्द्रित उनकी पुस्तक-श्ाृंखला का पहला खंड है। अंग्रेजी में ‘अनलेशिंग इंडिया’ शीर्षक से प्रकाशित इस श्ाृंखला के प्रस्तुत खंड में भारतीय कृषि-व्यवस्था का सूक्ष्म और विस्तृत विश्लेषण किया गया है।
भारत का सबसे बड़ा आर्थिक क्षेत्रा होने के नाते, कृषि का हमारे सामाजिक तथा आर्थिक विकास पर निर्णायक प्रभाव पड़ता है। यह पुस्तक कृषि क्षेत्रा में उत्पादकता, स्थिरता और विकास के कुछ नए पैमाने निर्धारित करती है, और इस क्षेत्रा की सीमाओं तथा सम्भावनाओं का सम्यक् आकलन करते हुए ऐसा समग्र एजेंडा पेश करती है जिससे भारतीय कृषि-तंत्रा की उत्पादकता को अभूतपूर्व ढंग से बढ़ाया जा सकता है। इस पुस्तक में जिस भारत की कल्पना की गई है, वह विश्व में कृषि-महाशक्ति के रूप में प्रतिष्ठा प्राप्त करते हुए पूरी दुनिया के खाद्य-संकट को हल करने में और इस तरह संसार के सामने उदारीकरण की एक नई गाथा पेश करने में समर्थ होगा।
Ghar Ka Bhedi
- Author Name:
Salman Akhtar
- Book Type:

- Description: डॉक्टर सलमान अख़्तर के दादा मुज़्तर ख़ैराबादी, मामू मजाज़ लखनवी, वालिद जाँ निसार अख़्तर और भाई जावेद अख़्तर पर लिखे ये लेख साहित्यिक दुनिया में एक विशिष्ट स्थान रखते हैं। ‘घर का भेदी’ उर्दू शायरी की सोच-समझ और आलोचना की ऐसी पहली किताब है जिसमें लेखक ख़ुद अपने ख़ानदान के मशहूर और लोकप्रिय शोअरा के कलाम का विवेचन करता है और साथ ही उनके साहित्यिक ख़ज़ाने की तुलना तत्कालीन सम्माननीय शोअरा के साहित्य से भी करता है। बात की गहराई और बढ़ जाती है जब हमको ये पता चलता है कि इस किताब का लेखक न सिर्फ़ ख़ुद एक विश्वसनीय शायर और साहित्यकार है बल्कि अन्तरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त एक मनोवैज्ञानिक भी है। नतीजे के तौर पर ‘घर का भेदी’ किताब हमें कला के प्रतीकों और बिंबों से भी परिचित कराती है और उसमें निहित व्यक्तिगत पीड़ा और द्वंद्व से भी।
Hindutva Ka Mohini Mantra
- Author Name:
Badri Narayan
- Book Type:

-
Description:
भारत के वर्तमान सामाजिक-राजनीतिक परिदृश्य में दलित एक बड़ी चुनावी ताक़त के रूप में उभरकर आए हैं और लगभग सभी राजनीतिक दलों के लिए यह अनिवार्य हो गया है कि वे उन्हें अपने पाले में लाने की कोशिश करें।
‘हिन्दुत्व का मोहिनी मंत्र’ पुस्तक हिन्दुत्ववादी शक्तियों द्वारा दलितों को अपनी तरफ़ खींचने की मोहक रणनीतियों का विखंडन दिखाती है कि कैसे ये ताक़तें दलित जातियों के लोकप्रिय मिथकों, स्मृतियों और किंवदन्तियों को खोजकर उनकी हिन्दुत्ववादी व्याख्या करती हैं। उत्तर प्रदेश और बिहार में किए गए मौलिक शोध पर आधारित इस पुस्तक में बताया गया है कि दलित नायकों को मुस्लिम आक्रान्ताओं के विरुद्ध लडऩेवाले योद्धाओं के रूप में प्रस्तुत करते हुए हिन्दुत्ववादी शक्तियाँ उन्हें हिन्दू धर्म और संस्कृति के रक्षकों के रूप में पुनर्व्याख्यायित करती हैं, या फिर उन्हें राम का अवतार बताकर दलित मिथकों को एक बड़े और एकीकृत हिन्दू महावृत्तान्त से जोड़ने का प्रयास करती हैं। लेखक ने पुस्तक में उत्तर भारत के ग्रामीण समाज में ‘पॉपुलर’ की संरचना और उसमें पिरोए गए साम्प्रदायिक तत्त्वों को भी समझने की कोशिश की है। सबसे दिलचस्प तथ्य पुस्तक में यह निकलकर आता है कि दलितों के अतीत की हिन्दुत्ववादी पुनर्व्याख्या को दलित समुदाय एक शक्तिशाली पूँजी के रूप में लेते हैं जिसे वे एक तरफ़ ऊपरी जातियों में अपनी स्वीकार्यता बढ़ाने और दूसरी तरफ़ सवर्ण प्रभुत्व को क्षीण करने के लिए साथ-साथ इस्तेमाल करते हैं। इतिहास, राजनीति, नृतत्त्वशास्त्र और दलित अध्ययन में रुचि रखनेवाले छात्रों, शोधार्थियों और राजनीतिक कार्यकर्ताओं के लिए समान रूप से उपयोगी पुस्तक।
Bhartiya Sanskriti Aur Hindutva
- Author Name:
Geetesh Sharma
- Book Type:

-
Description:
गीतेश शर्मा जिन्हें हम उनकी अत्यन्त लोकप्रिय पुस्तक ‘धर्म के नाम पर’ के लिए जानते हैं, देश के उन कुछेक चिन्तकों में थे जिन्हें धर्म और ईश्वर की समाज तथा मनुष्य-विरोधी अवधारणाओं पर ख़ामोश रहना कभी स्वीकार नहीं हुआ। आज जब मुख्यधारा के प्रगतिशील चिन्तन ने सर्वधर्म समभाव के नाम पर हर तरह के धार्मिक अनाचार से आँखें फेर ली हैं, और यही प्रगतिशील का प्रमुख लक्षण हो गया है। गीतेश जी का लेखन हमारे लिए मार्गदर्शन की तरह है।
उन्हें यह देखकर अफ़सोस होता था कि हिन्दू कट्टरपन्थ का खुला विरोध करनेवाले लोग भी इस्लाम तथा अन्य धर्मों की धार्मिक-सामाजिक जड़ता पर एकदम चुप हो जाते हैं, और इस घातक तुष्टीकरण को धर्मनिरपेक्षता कहते हैं; लेकिन वह हिन्दुत्ववादियों के इस प्रचार से भी सहमत नहीं कि भारत के मुसलमानों ने अपने देश और समाज के लिए कुछ नहीं किया, कि वे भारतीयता को स्वीकार नहीं करते। तमाम तरह के सुधारवादी आन्दोलनों से गुज़रते हुए हिन्दू धर्म ने एक उदार स्थिति हासिल की है, यह वे मानते थे; लेकिन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ जैसे संगठनों के चलते हिन्दू धर्म जिस कट्टरता की ओर बढ़ रहा है, वह ख़तरा भी उनकी निगाह में था। भारतीय संस्कृति की विराट धारा की आन्तरिक जिजीविषा की पहचान उन्हें थी; लेकिन बाज़ार, धर्म, अन्धविश्वास और आर्थिक पिछड़ेपन के घालमेल से बनी गन्दी नाली की मौज़ूदगी भी उन्हें साफ़ दिखाई देती थी।
वे दरअसल तर्क की प्रतिष्ठा चाहते थे, वे चाहते थे कि कोई भी धर्म, कोई भी ईश्वर, कोई भी सम्प्रदाय सवाल करने की उस मूल मानवीय शक्ति ऊपर न हो जिसके बल पर मनुष्य जाति वहाँ पहुँची है जहाँ आज वह है।
इस पुस्तक में उनके समय-समय पर लिखे आलेख संकलित हैं। गीतेश जी बहुत ज़्यादा और लगातार लिखनेवाले लेखकों में नहीं थे। जो भी उन्होंने लिखा वह भीतर के गहरे दबाव पर लिखा। इसलिए भी ये आलेख और ज़्यादा पठनीय हो जाते हैं और इसलिए भी कि इनमें जो चिन्ताएँ ज़ाहिर हुई हैं, वे आज की राजनैतिक-सामाजिक स्थितियों में निर्णायक अहमियत रखती हैं।
Bhintiaadacha Cheen
- Author Name:
Shreeram Kunte
- Book Type:

- Description: भारताशी चीन शत्रुत्वाने का वागतो? चीनकेंद्रित जगाचे धोके काय असतील? चीनच्या नाकावर टिच्चून भारत महासत्ता होईल का? असे अनेक प्रश्न आपल्याला पडलेले असतात. या प्रश्नांची उत्तरं शोधण्यासाठी चीनचा इतिहास, कम्युनिस्ट पक्षाची अमानवी धोरणं, त्यातून चीनने घेतलेली झेप, इतिहास आणि वर्तमानाबद्दलच्या भानातून तयार झालेलं चीनचं परराष्ट्र धोरण, चीनचा भारताला असणारा धोका या सर्व अंगांनी श्रीराम कुंटे यांनी सखोल अभ्यास केला. त्यातून ‘भिंतींआडचा चीन` जन्माला आलं आहे. महासत्ता होऊ घातलेल्या चीनमधल्या साम्राज्यशाहीच्या इतिहासापासून ते आजच्या उत्तुंग प्रगतीपर्यंतचा आढावा घेत लेखकाने या पुस्तकातून चीनची कुंडली मांडली आहे. भारताच्या संदर्भात चीन समजून घ्यायचा असेल, तर चिनी राजघराण्यांचा इतिहास, स्थित्यंतराची चाळीस वर्षं, जगाला चकित करणारा काळ आणि भारतासमोरील चिनी आव्हानं या चार भागांत विभागलेलं हे पुस्तक आपल्या जवळ असायलाच हवं. चीनची ओळख करून देणाऱ्या पुस्तकाची मराठीत कमी होती. श्रीराम कुंटे यांच्या ‘भिंतींआडचा चीन`मुळे ही उणीव भरून काढण्यास मदत होईल. या निमित्ताने आंतरराष्ट्रीय विषयांवर प्रबंधी-प्राध्यापकीपणा टाळून जनसामान्यांसाठी लिहिणारा एक नवा लेखक कुंटे यांच्या रूपाने मराठीत समोर येताना दिसतोय. गिरीश कुबेर (संपादक, दै. लोकसत्ता व लेखक) एका संतुलित राष्ट्रवादी दृष्टिकोनातून, तसेच बहुविद्याशाखीय जाणकारीतून लिहिलेले हे पुस्तक आपल्या निकटतम स्पर्धकाला समजून घेण्यासाठीच्या प्रवासातील अत्यावश्यक वाचन ठरणार आहे. रवि आमले (ज्येष्ठ पत्रकार व लेखक) महत्त्वाकांक्षी चीनशी स्पर्धा करण्यास आसुसलेल्या भारतीयांना स्वतःच्या व चीनच्या मर्मस्थळांची जाणीव हे पुस्तक कळात-नकळत करवून देते. प्रा. परिमल माया सुधाकर (चीनचे अभ्यासक व लेखक)
Sangh Samjun Ghetana
- Author Name:
Dattaprasad Dabholkar
- Rating:
- Book Type:

- Description: भर वर्षांच्या अथक, एकाकी, समर्पित, कष्टप्रद, काही काळ यातनामय वाटचालीनंतर संघ आज निर्विवादपणे सत्तेत केंद्रस्थानी उभा आहे. संघाने स्पष्टपणे सांगितलंय आमचा फक्त एककलमी कार्यक्रम आहे, ‘हिंदूंचाच हिंदूस्थान' म्हणजे हे हिंदूराष्ट्र आहे. भारत हे संघराज्य नाही ते एक राष्ट्र आहे आणि हा देश एकाधिकारशाही मानतो. भारतरत्न बाबासाहेब आंबेडकर राज्यघटना बनवत असताना ऑरगनायर्झरने त्याला कडवा विरोध केलाय. या देशाची घटना मनुस्मृतीवर आधारित हवी म्हणून सांगितले. राजकारण करताना ‘वारांगनेव नृपनिती अनेकरूपा' हा मंत्र बरोबर ठेवा आणि मुखवटे घालून राजकारणात वाटचाल करा. हा आदेश संघाने राजकारणात पाठवलेल्या स्वयंसेवकांना दिलाय. पुरोगामी परिवर्तनवादी चळवळ ‘मुंगेरीलाल के हसीन सपने' म्हणून त्याकडे उपेक्षेने खरंतर उपहासाने पाहत उभी होती. आज ही चळवळ भांबावलेल्या खरंतर भेदरलेल्या अवस्थेत आहे. त्यामुळे खरी गरज आहे, यातून बाहेर येवून संघाची शक्तिस्थाने आणि मर्मस्थाने जाणून घेण्याची व पुरोगामी परिवर्तनवादी चळवळीने केलेले ‘हिमालयीन ब्लंडर' समजावून घेत रणनीती ठरविण्याची.या व अशा प्रश्नांचा मागोवा घेत अस्वस्थ मनस्थितीत गेल्या दहा वर्षात दत्तप्रसाद दाभोळकर यांनी लिहिलेल्या काही प्रमुख लेखांचे हे संकलन. आज आपणासमोर असलेल्या धार्मिक, सामाजिक, सांस्कृतिक राजकारणाचा चक्रव्यूह समजावून घेण्यासाठी हे पुस्तक वाचले आणि संग्रहीपण ठेवले पाहिजे. Sangh Samjun Ghetana | Dattaprasad Dabholkar संघ समजून घेताना | दत्तप्रसाद दाभोळकर
Tum Pahle Kyon Nahi Aaye
- Author Name:
Kailash Satyarthi
- Book Type:

-
Description:
तुम पहले क्यों नहीं आए में दर्ज हर कहानी अँधेरों पर रौशनी की, निराशा पर आशा की, अन्याय पर न्याय की, क्रूरता पर करुणा की और हैवानियत पर इंसानियत की जीत का भरोसा दिलाती है। लेकिन इस जीत का रास्ता बहुत लम्बा, टेढ़ा-मेढ़ा और ऊबड़-खाबड़ रहा है। उस पर मिली पीड़ा, आशंका, डर, अविश्वास, अनिश्चितता, ख़तरों और हमलों के बीच इन कहानियों के नायक और मैं, वर्षों तक साथ-साथ चले हैं। इसीलिए ये एक सहयात्री की बेचैनी, उत्तेजना, कसमसाहट, झुँझलाहट और क्रोध के अलावा आशा, सपनों और संकल्प की अभिव्यक्ति भी हैं।
पुस्तक में ऐसी बारह सच्ची कहानियाँ हैं जिनसे बच्चों की दासता और उत्पीड़न के अलग-अलग प्रकारों और विभिन्न इलाक़ों तथा काम-धंधों में होने वाले शोषण के तौर-तरीक़ों को समझा जा सकता है। जैसे; पत्थर व अभ्रक की खदानें, ईंट-भट्ठे, क़ालीन कारख़ाने, सर्कस, खेतिहर मज़दूरी, जबरिया भिखमंगी, बाल विवाह, दुर्व्यापार (ट्रैफ़िकिंग), यौन उत्पीड़न, घरेलू बाल मज़दूरी और नरबलि आदि। हमारे समाज के अँधेरे कोनों पर रोशनी डालती ये कहानियाँ एक तरफ हमें उन खतरों से आगाह करती है जिनसे भारत समेत दुनियाभर में लाखों बच्चे आज भी जूझ रहे हैं। दूसरी तरफ धूल से उठे फूलों की ये कहानियाँ यह भी बतलाती हैं कि हमारी एक छोटी-सी सकारात्मक पहल भी बच्चों को गुमनामी से बाहर निकालने में कितना महत्त्वपूर्ण हो सकती है, नोबेल पुरस्कार विजेता की कलम से निकली ये कहानियाँ आपको और अधिक मानवीय बनाती हैं, और ज़्यादा ज़िम्मेदार बनाती है।
Aadivasi Kaun
- Author Name:
Ramanika Gupta
- Book Type:

- Description: आज अगर सबसे बड़ा ख़तरा आदिवासी जमात को है, तो वह है उसकी पहचान मिटने का। इक्कीसवीं सदी में उसकी पहचान मिटाने की साज़िश एक योजनाबद्ध तरीक़े से रची जा रही है। किसी भी जमात, जाति, नस्ल या कबीले अथवा देश को मिटाना हो तो उसकी पहचान मिटाने का काम सबसे पहले शुरू किया जाता है। ‘आदिवासी’ की पहचान और नाम छीनकर उसे ‘वनवासी’ घोषित किया जा रहा है ताकि वह यह बात भूल जाए कि वह इस देश का मूल निवासी यानी आदिवासी है—वह भूल जाए अपनी संस्कृति, भाषा और अपना मूल धर्म ‘सरना’। यह पुस्तक आदिवासियों के जीवन के कई ऐसे अनछुए पहलुओं को हमारे सामने लाती है जिनसे अभी तक हम अपरिचित थे। स्वयं आदिवासियों द्वारा क़लमबद्ध किए गए विचारों को यहाँ दिया गया है। आदिवासियों की दशा में परिवर्तन कैसे हो, उनकी शिक्षा कैसी हो व किस प्रकार उनके जीवन से जुड़ी सभी समस्याओं का निदान किया जाए, जैसे सवालों को भी यहाँ उठाया गया है। आदिवासियों के अस्तित्व की बानगी प्रस्तुत करती यह पुस्तक सभी के लिए महत्त्वपूर्ण है।
Lokayat
- Author Name:
Deviprasad Chattopadhyay
- Book Type:

- Description: यह पुस्तक प्राचीन भारतीय भौतिकवाद की मार्क्सवादी व्याख्या प्रस्तुत करती है। पाश्चात्य व्याख्याताओं ने भारतीय दर्शन के इस सशक्त पक्ष की प्रायः उपेक्षा की है। उनकी उपनिवेशवादी इतिहास-दृष्टि इस बात को बराबर रेखांकित करती रही है कि भारतीय दर्शन की मूल चेतना पारलौकिक और आध्यात्मिक है। उसमें जीवन तथा जगत के यथार्थ को महत्त्वहीन माना गया है अथवा उसकी उपेक्षा की गई है। देवीप्रसाद चट्टोपाध्याय ने प्राचीन ग्रन्थों, पुरातात्त्विक और नृतत्त्वशास्त्रीय प्रमाणों और ऐतिहासिक साक्ष्यों के आधार पर इस बात का खंडन किया है। उनका कहना है कि प्राचीन भारत में लौकिकवाद और अलौकिकवाद, दोनों ही मौजूद थे। राजसत्ता के उदय के बाद शासक वर्ग ने लौकिक चिन्तन को अपने स्वार्थ के लिए नेपथ्य में डाल दिया तथा पारलौकिक चिन्तन को बढ़ावा दिया और भारतीय चिन्तन की एकमात्र धारा के रूप में उसे प्रतिष्ठा दिलाई। इसलिए प्राचीन भारत के लौकिक चिन्तन को समझे बिना हमारी इतिहास-दृष्टि हमेशा धुँधली रहेगी। यह पुस्तक इतिहास, दर्शन, भारतीय साहित्य और संस्कृति में दिलचस्पी रखनेवाले जिज्ञासुओं के लिए समान रूप से उपयोगी है। इस पुस्तक का विश्व की सभी प्रमुख भाषाओं में अनुवाद हो चुका है।
Chala, Karodpati Houya
- Author Name:
Anil Bhaidas Patil
- Book Type:

- Description: कुटुंबाचा गाडा प्रगतीकडे न्यायचा असेल, तर घरातल्या प्रत्येक महिलेकडे आर्थिक शहाणपण असलं पाहिजे. ती आर्थिक साक्षर झाली पाहिजे. म्हणजेच आर्थिक शिस्तीबरोबरच हाती येणाऱ्या पैशाचं व्यवस्थापन करण्याची शास्त्रशुद्ध कला तिच्याकडे असायला हवी. ती अंगी बाणायची असेल तर अनिल पाटील लिखित ‘चला, करोडपती होऊया' हे पुस्तक प्रत्येक महिलेनं वाचलंच पाहिजे. हे पुस्तक महिलांना आर्थिकदृष्ट्या साक्षर तर बनवतंच पण त्याचबरोबरीनं अर्थसाक्षर झालेल्या महिलांना श्रीमंतीची वाटही दाखवतं. मुलांच्या शिक्षणपासून वृद्धापकाळातील आधारापर्यंतचं आर्थिक नियोजन कसं करावं आणि हाती येणारा पैसा कसा वाढवला जाऊ शकतो याची शास्त्रशुद्ध परंतु सहज समजेल अशा सोप्या पद्धतीने माहिती देणारं हे पुस्तक आपल्या संग्रही असायलाच हवं. विभाग पहिला : आर्थिक शहाणपण आणि स्त्रिया 1. पैशांचं जग 2. पैशांच्या जगाची माहिती करून घेताना... 3. पैशांचा प्रवाह आणि आर्थिक व्यवहार 4. आर्थिक शहाणपण का हवं? 5. मुलांच्या शिक्षणाचं नियोजन कसं कराल? 6. कुटुंबाचं आर्थिक नियोजन कसं करायचं ? विभाग दुसरा : करोडपती बनताना... 7. गुंतवणुकीविषयी जाणून घेताना... 8. गुतवणूक करताना... 9. शेअर मार्केट, म्युच्युअल फंड : श्रीमंतीचा हमरस्ता 10. परतावा आणि व्याजाचं गणित 11. मृत्युपत्र वेळीच लिहायला हवं
Rahul-Chintan
- Author Name:
Gunakar Muley
- Book Type:

-
Description:
विज्ञान के साथ-साथ साहित्य, पुरातत्त्व-इतिहास एवं संस्कृति पर गुणाकर मुळे की महत्त्वपूर्ण लेखमालाएँ और पुस्तकें पहले प्रकाशित हो चुकी हैं। वस्तुतः राहुल पर उनकी पुस्तकें उसी सिलसिले की अगली कड़ी हैं, क्योंकि राहुल पर लिखना महज़ एक साहित्यकार के बारे में और उसके साहित्य पर लिखना नहीं है। एक साहित्यकार होने के अलावा राहुल ने समाज, राजनीति, इतिहास-पुरातत्त्व, धर्म और संस्कृति पर गहन चिन्तन किया था। इन विषयों पर उनके मौलिक विचार थे, जिन्हें समझे और उद्घाटित किए बिना राहुल के वास्तविक महत्त्व को नहीं समझा जा सकता। गुणाकर मुले ने इस काम को बड़ी निष्ठा और वैज्ञानिक सूझबूझ के साथ सम्पन्न किया है, जिसका ज्वलन्त उदाहरण यह पुस्तक है।
इस पुस्तक में गुणाकर जी ने राहुल के बहुआयामी व्यक्तित्व का विशद एवं विराट चित्र उपस्थित किया है और अन्त में ‘राहुल-साहित्य : एक परिचय’ शीर्षक के अन्तर्गत राहुल की लगभग सभी कृतियों का संक्षिप्त परिचय दे दिया है, जिससे राहुल साहित्य के बारे में आज भी जो भ्रामक बातें लिखी और प्रचारित की जा रही हैं, उनका निराकरण होता है।
Kavya Kavi-Karm : Sattarottari Hindi Kavita
- Author Name:
A. M. Murlidharn
- Book Type:

- Description: डॉ. मुरलीधरन की यह पुस्तक जहाँ एक ओर खड़ी बोली में लिखी कविताओं का संक्षिप्त परन्तु सुचिंतित इतिहास है वहीं सत्तर के बाद की कविताओं का गम्भीर विवेचन भी है। कविता और कवि-कर्म की सारगर्भित परिभाषा के साथ ही साथ सत्तर के दशक की कविता के कुल और शील का व्यापक विवरण भी इसमें है। यह कार्य एक अभाव की पूर्ति करता है। साठोत्तरी कविता के अवशेषों का उल्लेख करते हुए लेखक ने सत्तर के दशक के मोहभंगजन्य खीज, आक्रोश, विक्षोभ, विसंगति, संत्रास, अराजकता, राजनैतिक परिवर्तन की आकांक्षा और उलटफेर की आवश्यकता की प्रतीति को सप्रमाण रेखांकित किया है। इस पुस्तक की प्रमुख विशेषता है कि इसमें वैदुषिक दृष्टि से उपलब्ध सभी कवियों की कृतियों को विश्लेषण के लिए चुना गया है, जिसके कारण इस मूल्यांकन का महत्त्व बढ़ गया है। यह पहली पुस्तक है जिसमें हिन्दी-काव्य साहित्य को राष्ट्रीय दृष्टि से विवेचित किया गया है। विचारधाराओं के दबाव और संगठनों के नज़रिए से मुक्त होकर किया गया सटीक विश्लेषण इसे छात्रों के लिए ही नहीं अध्यापकों के लिए भी उपयोगी बनाता है। डॉ. मुरलीधरन के गहन अध्ययन और तत्त्वदर्शी दृष्टि का प्रमाण तो पुस्तक है ही। इससे भी महत्त्वपूर्ण है इसके ज़रिए उन सूक्ष्म अन्तरों और कमियों की ओर संकेत जो पीढ़ियों, दशकों के अन्तराल में मिलते हैं। इसमें कवियों की विशेषताओं और कृतियों की गुणवत्ता तथा अन्तर्वस्तु को स्पष्टता के साथ रेखांकित किया गया है। कविताओं को रचनाकार की आयु के तर्क से नहीं समकालीनता और रचनात्मकता के आधार पर परीक्षित करने के कारण पुस्तक का महत्त्व बढ़ गया है। छठें, सातवें और आठवें दशक की सामान्यताओं, अनुरूपताओं और विरुद्धताओं को अत्यन्त सावधानी से इसमें परिभाषित किया गया है। पुस्तक विद्वानों, छात्रों और शोधकर्ताओं के लिए निश्चय ही उपयोगी है।
Antriksh Prashnottary
- Author Name:
Kali Shankar
- Book Type:

- Description: अनजाने अंतरिक्ष को जानने के लिए सामान्य मानव के मस्तिष्क में अनेक रोचक और कुतूहलपूर्ण प्रश्न उभरते रहे हैं तथा वह अंतरिक्ष के विषय में अधिकाधिक जानकारी पाने की प्रबल इच्छा रखता है । प्रस्तुत पुस्तक में अंतरिक्ष के विभिन्न विषयों- अंतरिक्ष स्टेशन, तारकीय / क्षुद्र ग्रहीय '' पुच्छल तारा अभियान, अंतरिक्ष परिवहन स्पेस शटल, अंतरिक्ष में प्रमोचन की प्रक्रिया, अंतरिक्ष के रिकॉर्ड, अंतरिक्ष दूरबीनें, कृत्रिम उपग्रह, स्पेस वॉक, अंतरिक्ष परिघटनाओं तथा अंतरिक्ष चयन और प्रशिक्षण का रोचक वर्णन किया गया है । आज अंतरिक्ष अन्वेषण के क्षेत्र में हो रहे विभिन्न अनुसंधानों -स्पेस एलीवेटर ( अंतरिक्ष परिवहन का भविष्य का सबसे सस्ता साधन), भूकंपों के पूर्वानुमान में उपग्रहों की भूमिका और सौर ऊर्जा उपग्रहों के बारे में भी रोचक व ज्ञानप्रद जानकारी दी गई है । अंतरिक्ष के दुर्लभ और रोमांचक आँकड़ों को 23 परिशिष्टों के माध्यम से स्पष्ट किया गया है । यह पुस्तक अंतरिक्ष विषय के जिज्ञासु पाठकों के कुतूहलपूर्ण प्रश्नों का समाधान करने में समर्थ सिद्ध होगी, ऐसा विश्वास है ।
The Shaurya Unbound
- Author Name:
Nitu +1
- Book Type:

- Description: The lead Internal Security Fore of the country, the central Reserve Police Force holds the proud distinction of being the highest decorated Central Armed Police Force of the country. 'The Shaurya, Unbeaten', Chronicles the stories of the C.R.P.F brave hearts with indomitable courage, grit and determination in the face of adversity.
Lachhami Jaggar
- Author Name:
Harihar Vaishnav
- Book Type:

-
Description:
‘लछमी जगार’ की कथा की भाव-भूमि का सम्बन्ध धान उत्पादन-प्रक्रिया के विस्तारित प्रसंग से है, अत: इसका गठन उसी के अनुरूप है। पाठक इस तथ्य की स्वत: पड़ताल के लिए आमंत्रित हैं। निम्न प्रतीकों की जानकारी जो हल्बी भाषी समुदाय के लिए तो स्पष्ट है, किन्तु उनसे इतर पाठकों के लिए इस कथा के सामान्य परिदृश्य को समझने हेतु आवश्यक जान पड़ती है : मेंग का अर्थ वर्षा है तो माहालखी हैं धान और इक्कीस रानियाँ हैं विभिन्न दलहनी-तिलहनी और अन्य मोटे अनाज। इसी तरह गोपपुर है खेत। इस कथा के नायक नरायन राजा की तुलना सूर्य से की जा सकती है जबकि माहादेव (शिव) को बीज-पुरुष के रूप में देखना चाहिए।
यहाँ यह जानना भी आवश्यक होगा कि दण्डकारण्य का पठार धान उत्पादक पूर्व एवं गौण अन्न उत्पादक पश्चिम की सीमा पर स्थित है। गौण अन्न का उत्पादन पहाड़ी भूमि पर तो किया जा सकता है, किन्तु धान के उत्पादन के लिए सम एवं सिंचित भू-भाग का होना आवश्यक है। इसलिए धान उत्पादन ने अपने-आपको मुख्य भूमि में स्थापित किया, जबकि गौण अन्न गाँव की सीमा पर चले गए। नरायन राजा का विवाह पहले गौण खाद्यान्नों (इक्कीस रानियों) के साथ हुआ और उसके बाद धान (माहालखी) के साथ। मिथकीय दृष्टि से यह कथा इस क्षेत्र का जनपदीय इतिहास सिद्ध होती है। और जैसे ही हम कथा के इस बिन्दु को आत्मसात् कर लेते हैं, वैसे ही इस कथा में आए पत्नी-पीड़क प्रसंगों और धान की मिंजाई के प्रसंग के बीच के अन्तर्सम्बन्धों को भी पकड़ने में सफल हो सकते हैं।
इस महाकाव्य का आयोजन बस्तर की महिलाओं के लिए एक पवित्र अनुष्ठान है। वस्तुत: ‘लछमी जगार’ चर्चा की नहीं अपितु महसूस करने की चीज़ है। यह महसूसना इसके भीतर के विभिन्न संस्कारों और उनसे जुड़े विश्वास, जो विभिन्न संस्कारों में सन्निहित भिन्न-भिन्न भूमिकाओं में देखे जा सकते हैं, के साथ एकात्म होकर सहभागी होने में है। कथा में वर्णित कुछ एक घटनाओं का सजीव चित्रण उनकी अभिनय प्रस्तुति के साथ किया जाता है, जिनकी मुख्य भूमिकाओं में स्वयं आयोजक ही होते हैं। इन अनुष्ठानों/संस्कारों को मुख्य एवं गौण, दो श्रेणियों में बाँटकर देखा जा सकता है। भिमा-विवाह (अध्याय 16), आम-विवाह (अध्याय 21) एवं माहालखी का विवाह। (अध्याय 32) इस महाकाव्य की प्रमुख घटनाएँ हैं जो विपुल जन-समुदाय को आकर्षित करती हैं।
Metamorphosis
- Author Name:
Franz Kafta
- Book Type:

- Description: This Books doesn’t have a description
Bhrasth Satyam Jagat Mithya
- Author Name:
Sanjay Jhala
- Book Type:

- Description: Bhrasth Satyam Jagat Mithya
Reporting India (Hindi Translation of Reporting India)
- Author Name:
Prem Prakash
- Book Type:

- Description: रिपोर्टिंग इंडिया' भारतीय पत्रकारिता जगत् में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभानेवाले, प्रेम प्रकाश के जीवन और समय का एक रोचक वर्णन है। एक फोटोग्राफर, फिल्म कैमरामैन और स्तंभकार के रूप में प्रकाश ने अपने लंबे और शानदार कैरियर के दौरान देश-विदेश की प्रमुख घटनाओं को कवर किया और इस दौरान प्राकृतिक आपदाओं, युद्धों, सैन्य तख्तापलट और उग्रवाद के गवाह भी बने। यह पुस्तक प्रकाश के बेमिसाल काम की सराहना करती है, जिसमें उनके व्यक्तिगत और व्यावसायिक जीवन की विस्तृत जानकारी दी गई है। साथ ही उनकी ओर से कवर की गई सबसे प्रभावशाली खबरों की यादें भी ताजा करती है, जिनमें 1962 के भारत-चीन युद्ध से लेकर पाकिस्तान के खिलाफ 1965 और 1971 के युद्ध और आपातकाल से लेकर इंदिरा गांधी की हत्या तक शामिल हैं । साथ ही, लाल बहादुर शास्त्री की दुर्भाग्यपूर्ण ताशकंद यात्रा से लेकर बॉग्लादेश की मुक्ति और जवाहरलाल नेहरू के निधन से लेकर नरेंद्र मोदी के उत्थान तक की खबरें शामिल हैं। पढ़ने में बेहद दिलचस्प यह पुस्तक भारतीय इतिहास के कुछ निर्णायक क्षणों को जीवंत बना देती है।
Khelatoon Vyakaran
- Author Name:
Renu Dandekar
- Book Type:

- Description: आपण बोलतो ती भाषा म्हणजेच व्याकरण. भाषेपासून व्याकरण वेगळं काढता येत नाही. लहान मूल ऐकून ऐकून बोलायला शिकतं तेव्हा ते व्याकरणासह त्याच्या त्याच्या बोलीभाषेत बोलत असतं. मात्र प्रत्यक्ष शिक्षण प्रक्रियेत व्याकरण हे भाषेपासून वेगळं काढून शिकवलं जातं आणि तिथेच मुलांच्या मनात भाषा विषयाबद्दलची एक अढी तयार होते. कारण नियम आणि व्याख्या यामध्ये मुलं अडकतात. परिणामी व्याकरणासह भाषा शिकणं ही कंटाळवाणी प्रक्रिया बनते. हे टाळायचं असेल, तर मनोरंजक अशा भाषिक खेळातून मुलांना व्याकरणाचे धडे दिले पाहिजेत. हाच दृष्टिकोन बाळगत रेणू दांडेकर यांनी ‘खेळातून व्याकरण' या पुस्तकाची रचना केली आहे. कोणताही नियम अथवा व्याख्या न सांगता विविध प्रकारच्या भाषिक खेळांमधून व्याकरणाचे धडे गिरवायला लावणारं हे पुस्तक आपल्या मुलांची मराठी भाषा अधिक समृद्ध करायला नक्कीच मदत करेल. तेव्हा शिक्षक, पालक आणि मुलं या सर्वांनीच खेळातून व्याकरण शिकवणारं पुस्तक आपल्या संग्रही ठेवायलाच हवं. Khelatoon Vyakaran | Renu Dandekar खेळातून व्याकरण | रेणू दांडेकर
Amrutara Santana - Award Winning Novel
- Author Name:
Gopinath Mohanty +3
- Rating:
- Book Type:

- Description: Amrutara Santana is about the Kandhas or Kondhs, who number at least a million, spreadthrough at least a dozen districts. Mohanthy's unromanticised portrait of tribal society raises profound question on change. Do new roads really bring "development", or degradation of culture and community as they allow exploiters and denigrators of Adivasi culture to pour in?
Customer Reviews
Be the first to write a review...
0 out of 5
Book