Zindagi Ki Kitab (A To Z)
Author:
Kalpana KaushikPublisher:
Prabhat PrakashanLanguage:
HindiCategory:
General-non-fiction0 Ratings
Price: ₹ 160
₹
200
Available
पस्तुत पुस्तक में उदीयमान लेखिका के 26 ललित निबंध हैं, जो विभिन्न मानवीय मनोभावों/प्रवृत्तियों पर आधारित हैं। लेखिका ने अपने निबंधों को अंग्रेजी वर्णमाला की ध्वनि के अनुसार अपने लेखों को संयोजित किया है। भरोसा, चतुराई, धैर्य, इच्छाशक्ति, उत्साह, वचनबाध्यता, जुझारूपन, ईमानदारी, करुणा, मंथन, जिंदादिली, संस्कार आदि गुण जहाँ मनुष्य का निर्माण करते हैं, वहीं आशा, हँसी-मजाक, लालसा, जिज्ञासा, उत्साह उसके दैनंदिन व्यवहार का अभिन्न अंग हैं।
लेखिका ने शुष्क एवं क्लिष्ट विषयों को रोचक रूप में प्रस्तुत किया और इसके लिए रोचक संस्मरणों की सहायता ली है, ताकि विषय स्पष्ट हो सके और बोझिलता कम हो।
जिंदगी में जिंदादिली और खुशी का मार्ग दिखानेवाली एक पठनीय पुस्तक।
ISBN: 9789390900152
Pages: 160
Avg Reading Time: 5 hrs
Age: 18+
Country of Origin: India
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- Description: यह हमारे समय पर की गयी टिप्पणी है कि जो लोग सत्ता के क़रीब हैं, वे भी सत्य बोलने से डरने लगे हैं... सत्ता के गलियारों में पैठे लोगों की आलोचना के प्रति बढ़ती असहिष्णुता के बावजूद, प्रभाकर सत्ता को आईना दिखाते हैं। यह हमारे संविधान में निहित मूल्यों के बचाव के प्रति उनकी आस्था का गवाह है। -संजय बारू द एक्सिडेंटल प्राइम मिनिस्टर के लेखक भारत को और ज़्यादा परकालाओं की ज़रूरत है, लेकिन ऐसा होना बहुत कठिन है। उनके नज़रिये से सहमत होना अपने आप में कोई ख़ास बात नहीं है। ख़ास बात यह है कि यथास्थिति को चुनौती देने के उनके (और दूसरों के भी) अधिकार को स्वीकार किया जाए। -द वीक सुस्पष्ट और सुबोध शैली में लिखे गए इन आलेखों के विषय भी व्यापक हैं—भाजपा की जनसंख्या-राजनीति से लेकर हिजाब बनाम भगवा स्कार्फ़ तक और कृषि क़ानूनों से लेकर लखीमपुर खीरी तक... यह कहने में मुझे कोई हिचक नहीं कि यह किताब उन सबको पढ़नी चाहिए जिनमें सत्ता के सामने सच कहने का साहस है। -अविजित पाठक, द ट्रिब्यून इस किताब में प्रभाकर ने जिन विषयों को लिखने के लिए चुना अनूठापन उनमें नहीं है... अनूठापन आँकड़ों और सांख्यिकी पर उनकी पकड़ में है। ...उससे भी अहम है आँकड़ों की उनकी व्याख्या जिसे वे हिन्दुत्व की बड़ी परियोजना की रौशनी में करते हैं जिसमें उनका अनुभव दिखाई देता है। —सफ़वत ज़रगर स्क्रॉल.इन
Upyogi Vastuon Ke Aavishkar
- Author Name:
Laxman Prasad +1
- Book Type:

- Description: कल्पना कीजिए कि हमारे पास साबुन न होता, शौचालय का फ्लश न होता, कपड़े न होते, बिजली न होती, थर्मामीटर न होता तो हमें कितनी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता । हम अपने दैनिक जीवन में अनेक छोटी-बड़ी चीजों का उपयोग करते हैं । देखने में इन अत्यंत साधारण वस्तुओं के पीछे अनेक आविष्कारकों का परिश्रम छिपा है, जिन्होंने पिछले सैकड़ों-हजारों वर्षों में इन्हें तैयार किया और हमारे उपयोग लायक बनाया । आविष्कारों की यह प्रक्रिया हजारों वर्षों से चल रही है और भविष्य में भी चलती ही रहेगी ।प्रस्तुत पुस्तक के लेखन के दौरान लेखक द्वय ने अनेक पुस्तकों व प्रामाणिक स्रोतों से सामग्री जुटाई है और तथ्यों को हू-ब-हू प्रस्तुत किया है । इसमें विश्व के महान् युग- प्रवर्तक आविष्कारकों के जीवन-पहलुओं को तो उजागर किया ही गया है, साथ ही उनके आविष्कार की प्रक्रिया को भी सरल और सुबोध भाषा में वर्णित किया गया है । हमें विश्वास है, यह पुस्तक पाठकों को पसंद आएगी और उनके बुद्धि-विकास तथा ज्ञान-कोष को बढ़ाने में उपयोगी सिद्ध होगी ।
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