Dalit, Alpsankhyak Sashaktikaran
Author:
Santosh BhartiyaPublisher:
Rajkamal Prakashan SamuhLanguage:
HindiCategory:
General-non-fiction0 Ratings
Price: ₹ 800
₹
1000
Unavailable
भारत से लेकर सम्पूर्ण विश्व के शक्तिहीन, दबे-कुचले, सामाजिक रूप से पिछड़े और सताए हुए<br />लोग और उनके समूह जब आपस में मिलकर शक्ति-सम्पन्न होने का संकल्प लें, तो इसे बड़े बदलाव के भावी संकेत<br />के रूप में लिया जाना चाहिए। इतिहास बनने की शुरुआत ऐसे ही होती है। जो इसकी अगुआई करते हैं, उन्हें<br />इतिहास अपने सिर-माथे बैठाता है, क्योंकि अगर वे आगे नहीं बढ़ते तो यात्रा अपने अन्तिम चरण पर पहुँचती ही<br />नहीं। दलित, अल्पसंख्यक सशक्तीकरण की यात्रा शुरू हो चुकी है। इस यात्रा का ध्येय है शक्तिहीन, दबे-कुचले, और<br />सामाजिक रूप से भेदभाव के शिकार दलितों और अल्पसंख्यकों को शक्ति-सम्पन्न करना व उनके सामाजिक आधार<br />को मज़बूत करते हुए उन्हें नेतृत्व के लिए तैयार करना।<br />पुस्तक का महत्त्वपूर्ण अंश है डॉ. मनमोहन सिंह का कथन। भारत के पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह ने शक्तिहीनों<br />को शक्ति-सम्पन्न बनाने तथा दलित, अल्पसंख्यक सशक्तीकरण के प्रयास को अपना पूरा समर्थन देने की घोषणा की।<br />भारत के पूर्व प्रधानमंत्री श्री विश्वनाथ प्रताप सिंह ने साफ़ कहा कि अब सहूलियत देने से काम नहीं चलेगा, वंचितों<br />को शिरकत भी देनी होगी। बाबा साहेब अम्बेडकर ने ग़रीबों, दलितों, अल्पसंख्यकों के सशक्तीकरण की लड़ाई को<br />वैज्ञानिक विचार का आधार दिया तथा उसे हथियार बनाया। उसी कड़ी में यह एक प्रयास है ताकि आज दलित,<br />अल्पसंख्यक सशक्तीकरण के लिए लड़नेवाले लोग न केवल अपना वैचारिक आधार मज़बूत कर सकें, बल्कि उसे<br />हथियार के रूप में भी इस्तेमाल कर सकें।<br />यह पुस्तक उन सबके लिए उपयोगी होगी जो ग़रीबों और वंचितों की लड़ाई में या तो शामिल होना चाहते हैं या<br />उन्हें सहयोग देना चाहते हैं। राजनीति और समाजशास्त्र के विद्यार्थियों के लिए यह पुस्तक भारत के परिवर्तन की इस<br />लड़ाई को समझने का आधार बनेगी।
ISBN: 9788126715985
Pages: 448
Avg Reading Time: 15 hrs
Age: 18+
Country of Origin: India
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- Description: काम करणं म्हणजे काय? कामाचे तास किती असावेत? यांत्रिकीकरणामुळे कामातला संपलेला आनंद परत मिळवता येईल का? अशा प्रश्नांचा वेध घेत असेंब्ली लाईन्स, एच.आर. पीटर ड्रकर यांचा उदय, व्यवस्थापन आणि प्रशिक्षण, टाटा गु्रपचं सामाजिक कार्य, कर्मचार्यांचं मूल्यमापन, टोयोटोची नॉलेज मॅनेजमेंट, कॅनन प्रिंटरचं बिअर कॅनवरून सुचलेलं डिझाईन, फेसबुकचा निवडप्रक्रियेतला शिरकाव, स्टीव्ह जॉब्जच्या भन्नाट मुलाखती, वर्कप्लेसमधले ताणतणाव, वर्क-लाईफ बॅलन्स, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, हायपरलूप, 3डी प्रिंटिंग - हे सर्व मराठीत एकत्रितपणे प्रथमच या पुस्तकातून येत आहे! Corporatekallol कॉर्पोरेटकल्लोळ
Sabhi Ke Liye Manvadhikar
- Author Name:
Pratapmal Devpura
- Book Type:

- Description: जन्म से ही प्रत्येक मानव के कुछ अधिकार हैं। ‘सभी के लिए मानवाधिकार’ पुस्तक में मानवाधिकारों के विभिन्न पक्षों को सरल भाषा में समझाया गया है जिन्हें पढ़कर बच्चे और नवसाक्षर भी मानवाधिकारों को समझ सकते हैं। पुस्तक में पाठक को बच्चों के अधिकार, लैंगिक समानता, महिला समानता का अधिकार, महिलाओं के आर्थिक अधिकार, सामाजिक न्याय एवं मानवाधिकार और पुलिस जैसे विषयों के प्रति जागरूक करने का प्रयास किया गया है।
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