Bhintiaadacha Cheen
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Author:
Shreeram KuntePublisher:
Manovikas Prakashan LLPLanguage:
MarathiCategory:
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भारताशी चीन शत्रुत्वाने का वागतो? चीनकेंद्रित जगाचे धोके काय असतील? चीनच्या नाकावर टिच्चून भारत महासत्ता होईल का? असे अनेक प्रश्न आपल्याला पडलेले असतात. या प्रश्नांची उत्तरं शोधण्यासाठी चीनचा इतिहास, कम्युनिस्ट पक्षाची अमानवी धोरणं, त्यातून चीनने घेतलेली झेप, इतिहास आणि वर्तमानाबद्दलच्या भानातून तयार झालेलं चीनचं परराष्ट्र धोरण, चीनचा भारताला असणारा धोका या सर्व अंगांनी श्रीराम कुंटे यांनी सखोल अभ्यास केला. त्यातून ‘भिंतींआडचा चीन` जन्माला आलं आहे. महासत्ता होऊ घातलेल्या चीनमधल्या साम्राज्यशाहीच्या इतिहासापासून ते आजच्या उत्तुंग प्रगतीपर्यंतचा आढावा घेत लेखकाने या पुस्तकातून चीनची कुंडली मांडली आहे. भारताच्या संदर्भात चीन समजून घ्यायचा असेल, तर चिनी राजघराण्यांचा इतिहास, स्थित्यंतराची चाळीस वर्षं, जगाला चकित करणारा काळ आणि भारतासमोरील चिनी आव्हानं या चार भागांत विभागलेलं हे पुस्तक आपल्या जवळ असायलाच हवं. चीनची ओळख करून देणाऱ्या पुस्तकाची मराठीत कमी होती. श्रीराम कुंटे यांच्या ‘भिंतींआडचा चीन`मुळे ही उणीव भरून काढण्यास मदत होईल. या निमित्ताने आंतरराष्ट्रीय विषयांवर प्रबंधी-प्राध्यापकीपणा टाळून जनसामान्यांसाठी लिहिणारा एक नवा लेखक कुंटे यांच्या रूपाने मराठीत समोर येताना दिसतोय. गिरीश कुबेर (संपादक, दै. लोकसत्ता व लेखक) एका संतुलित राष्ट्रवादी दृष्टिकोनातून, तसेच बहुविद्याशाखीय जाणकारीतून लिहिलेले हे पुस्तक आपल्या निकटतम स्पर्धकाला समजून घेण्यासाठीच्या प्रवासातील अत्यावश्यक वाचन ठरणार आहे. रवि आमले (ज्येष्ठ पत्रकार व लेखक) महत्त्वाकांक्षी चीनशी स्पर्धा करण्यास आसुसलेल्या भारतीयांना स्वतःच्या व चीनच्या मर्मस्थळांची जाणीव हे पुस्तक कळात-नकळत करवून देते. प्रा. परिमल माया सुधाकर (चीनचे अभ्यासक व लेखक)
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भारताशी चीन शत्रुत्वाने का वागतो? चीनकेंद्रित जगाचे धोके काय
असतील? चीनच्या नाकावर टिच्चून भारत महासत्ता होईल का?
असे अनेक प्रश्न आपल्याला पडलेले असतात.
या प्रश्नांची उत्तरं शोधण्यासाठी चीनचा इतिहास, कम्युनिस्ट
पक्षाची अमानवी धोरणं, त्यातून चीनने घेतलेली झेप, इतिहास
आणि वर्तमानाबद्दलच्या भानातून तयार झालेलं चीनचं परराष्ट्र धोरण,
चीनचा भारताला असणारा धोका या सर्व अंगांनी श्रीराम कुंटे यांनी
सखोल अभ्यास केला. त्यातून ‘भिंतींआडचा चीन` जन्माला आलं आहे.
महासत्ता होऊ घातलेल्या चीनमधल्या साम्राज्यशाहीच्या इतिहासापासून
ते आजच्या उत्तुंग प्रगतीपर्यंतचा आढावा घेत लेखकाने या पुस्तकातून
चीनची कुंडली मांडली आहे. भारताच्या संदर्भात चीन समजून घ्यायचा
असेल, तर चिनी राजघराण्यांचा इतिहास, स्थित्यंतराची चाळीस वर्षं, जगाला
चकित करणारा काळ आणि भारतासमोरील चिनी आव्हानं या चार भागांत
विभागलेलं हे पुस्तक आपल्या जवळ असायलाच हवं.
चीनची ओळख करून देणाऱ्या पुस्तकाची मराठीत कमी होती. श्रीराम कुंटे
यांच्या ‘भिंतींआडचा चीन`मुळे ही उणीव भरून काढण्यास मदत होईल.
या निमित्ताने आंतरराष्ट्रीय विषयांवर प्रबंधी-प्राध्यापकीपणा टाळून जनसामान्यांसाठी
लिहिणारा एक नवा लेखक कुंटे यांच्या रूपाने मराठीत समोर येताना दिसतोय.
गिरीश कुबेर (संपादक, दै. लोकसत्ता व लेखक)
एका संतुलित राष्ट्रवादी दृष्टिकोनातून, तसेच बहुविद्याशाखीय जाणकारीतून
लिहिलेले हे पुस्तक आपल्या निकटतम स्पर्धकाला समजून घेण्यासाठीच्या
प्रवासातील अत्यावश्यक वाचन ठरणार आहे.
रवि आमले (ज्येष्ठ पत्रकार व लेखक)
महत्त्वाकांक्षी चीनशी स्पर्धा करण्यास आसुसलेल्या भारतीयांना स्वतःच्या व
चीनच्या मर्मस्थळांची जाणीव हे पुस्तक कळात-नकळत करवून देते.
प्रा. परिमल माया सुधाकर (चीनचे अभ्यासक व लेखक)
Book Details
-
ISBN9789363742758
-
Pages364
-
Avg Reading Time12 hrs
-
Age18+ yrs
-
Country of OriginIndia
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- Description: सतराव्या शतकातील धर्मश्रद्ध वातावरणात छत्रपती शिवाजी महाराजांनी दख्खनमध्ये स्वबळावर हिंदवी स्वराज्य स्थापन केले. अर्थात शिवरायांचा सर्वधर्मसमभावाचा विचार त्यांच्या या हिंदवी स्वराज्याचा मूलाधार होता. खरं तर छत्रपती शिवाजी महाराजांची हिंदू धर्मावर निष्ठा होती. ते धर्माभिमानीही होते, तरीही ते धार्मिक स्वातंत्र्याचे पुरस्कर्ते होते. त्यांनी नेहमीच सहिष्णुतेचे धोरण अवलंबले आणि आपल्या राज्यात सर्व जातिधर्मांच्या लोकांना आश्रय दिला. इतकंच नाही, तर कोणत्याही स्वरूपात धर्मभेद, जातीभेद न करता महाराजांनी शूर, पराक्रमी आणि एकनिष्ठ लोक आपल्याभोवती गोळा केले. त्यांनी कायमच हिंदू आणि मुस्लीम धर्माबद्दल उदार आणि पुरोगामी दृष्टिकोन बाळगला. स्वराज्यातील सर्व धर्मांच्या बांधवांना सन्मान देत सामाजिक सलोखा निर्माण करत सर्वार्थाने हिंदवी स्वराज्य बळकट केले. जगभरात सर्वांनीच गौरविलेल्या शिवरायांच्या या सहिष्णू धार्मिक धोरणाची प्राचार्य डॉ. इस्माईल पठाण यांनी आपल्या या ग्रंथात साधार, तपशीलवार चर्चा केली असून समाजस्वास्थ्याच्या दृष्टिकोनातून ती मार्गदर्शक ठरणारी अशी आहे. वाचक त्याचं दमदार स्वागत करतील अशी आशा. Shivrayanchi Dharmniti | Dr. Ismail Pathan शिवरायांची धर्मनीती | डॉ. इस्माईल पठाण
Sanlap
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Bhagwandas Morwal
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- Description: अपनी साफ़गोई, कथा-विषयों की विविधता और अपनी रचनाओं के लिए श्रम-साध्य शोध और उद्यमिता के लिए सुपरिचित कथाकार भगवानदास मोरवाल इस पुस्तक में उन मुद्दों पर बात कर रहे हैं, जिनका ताल्लुक उनके लेखन, उनकी पुस्तकों, और पात्रों के अलावा हमारे समय, समाज और हिन्दी साहित्य के परिदृश्य से भी है। इस पुस्तक में उनके साक्षात्कार संकलित हैं। ये साक्षात्कार न सिर्फ़ उनके बारे में बताते हैं, बल्कि इन प्रश्नोत्तरों के माध्यम से भारतीय समाज के विरोधाभासों, उसकी बेचैनियों और बतौर एक नागरिक लेखक की ज़िम्मेदारियों पर भी रौशनी डालते हैं। ‘काला पहाड़’ जैसे चर्चित उपन्यास से हिन्दी क्षितिज पर उभरे मोरवाल यहाँ इसके अलावा अन्य उपन्यासों की रचना-प्रक्रिया और उनके साथ जुड़े अपने सरोकारों को भी रेखांकित करते हैं। अपने समाज और ख़ासतौर पर, मेवात क्षेत्र की सामाजिक, सांस्कृतिक और भावनात्मक बनावट से उनका गहरा परिचय रहा है, जो उनके कई उपन्यासों में भी प्रकट हुआ है, यहाँ इस बारे में वे और विस्तार से बात करते हैं; समाज और साहित्य के विभिन्न मुद्दों पर उनकी बेलाग अभिव्यक्ति तो इन साक्षात्कारों का आकर्षण है ही।
Tanashahi Se Lokshahi
- Author Name:
Gene Sharp
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- Description: ‘फ़्रॉम डिक्टेटरशिप टू डेमोक्रेसी’ को मूल रूप से 1993 में अहिंसक संघर्ष के मार्गदर्शन के लिए लिखा गया था। चोरी-चोरी, चुपके-चुपके यह पुस्तक दुनिया-भर के तमाम राजनीतिक असन्तुष्टों के हाथों में पहुँच गई। बाद में इसका तीस से अधिक भाषाओं में अनुवाद किया गया। यह छोटी-सी पुस्तिका इक्कीसवीं सदी के अहिंसावादी क्रान्तिकारियों के लिए ‘कैसे-करें’ की पथप्रदर्शक बन गई है। अहिंसक विरोध प्रदर्शन और रक्तहीन क्रान्ति के सुझाव और व्यावहारिक नियम बतानेवाली यह किताब क्रान्ति या बदलाव के झूठे सपने या कोई अकल्पनीय रास्ते नहीं बताती बल्कि लोगों को परिवर्तन के वास्तविक पहलू से परिचय कराती है।
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