Amir Khusro : Vyaktittva, Chintan Aur Sampoorna Hindavi Kalam
(0)
Author:
Zakir Hussain ZakirPublisher:
Rajkamal Prakashan SamuhLanguage:
HindiCategory:
General-non-fiction₹
450
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अमीर ख़ुसरो जिन्हें दो बड़ी सभ्यताओं के सम्मिलन का प्रतिनिधि व्यक्तित्व कहा जाता है; और चौदहवीं सदी में रचा गया जिनका कलाम आज भी अपनी जगह कायम है, वे एक बड़े कवि तो थे ही, राजनीतिज्ञ, संगीतकार और भाषाविद भी थे। ‘अमीर ख़ुसरो : व्यक्तित्व, चिन्तन और सम्पूर्ण हिन्दवी कलाम’ पुस्तक उनके व्यक्तित्व और कृतित्व की लगभग सम्पूर्ण प्रस्तुति है। पुस्तक दो खंडों में विभक्त है। पहले खंड में खुसरो की भाषा और उनकी हिन्दवी रचनाओं पर शोधपरक विवेचना के साथ उनकी रचना ‘ख़ालिक़ बारी’ और उससे जुड़े विवादों पर विचार, तसव्वुफ़ की उनकी धारणा और उनके व्यक्तित्व में तसव्वुफ़ की भूमिका पर केन्द्रित शोध के अलावा जिन सुल्तानों और सूबेदारों के आश्रय में वे रहे उनकी जानकारी भी विस्तारपूर्वक दी गई है। अमीर ख़ुसरों ने अपने जीवनकाल में बारह युद्ध-अभियानों में भाग लिया था, इस खंड में उनकी चर्चा भी ऐतिहासिक संदर्भों के साथ की गई है। एक संगीत-सृजक के रूप में उन्होंने जहाँ नए रागों की रचना की, वहीं नए संगीत वाद्यों का भी आविष्कार किया। एक विस्तृत आलेख इस विषय पर भी इसी खंड में शामिल है। किताब के दूसरे हिस्से में उनके अब तक उपलब्ध हिन्दवी काव्य को प्रस्तुत किया गया है। उनकी पहेलियों, कहमुकरियों, दोहों, कविताओं, गीतों, कव्वालियों, ग़ज़लों और ‘ख़ालिक़ बारी’ को यहाँ आप एक साथ देख सकते हैं। कहने की जरूरत नहीं कि अमीर खुसरो के साथ यह पुस्तक उनके समय, तत्कालीन इतिहास और उस दौर की सांस्कृतिक विशेषताओं पर भी प्रकाश डालती है।
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अमीर ख़ुसरो जिन्हें दो बड़ी सभ्यताओं के सम्मिलन का प्रतिनिधि व्यक्तित्व कहा जाता है; और चौदहवीं सदी में रचा गया जिनका कलाम आज भी अपनी जगह कायम है, वे एक बड़े कवि तो थे ही, राजनीतिज्ञ, संगीतकार और भाषाविद भी थे।
‘अमीर ख़ुसरो : व्यक्तित्व, चिन्तन और सम्पूर्ण हिन्दवी कलाम’ पुस्तक उनके व्यक्तित्व और कृतित्व की लगभग सम्पूर्ण प्रस्तुति है। पुस्तक दो खंडों में विभक्त है। पहले खंड में खुसरो की भाषा और उनकी हिन्दवी रचनाओं पर शोधपरक विवेचना के साथ उनकी रचना ‘ख़ालिक़ बारी’ और उससे जुड़े विवादों पर विचार, तसव्वुफ़ की उनकी धारणा और उनके व्यक्तित्व में तसव्वुफ़ की भूमिका पर केन्द्रित शोध के अलावा जिन सुल्तानों और सूबेदारों के आश्रय में वे रहे उनकी जानकारी भी विस्तारपूर्वक दी गई है।
अमीर ख़ुसरों ने अपने जीवनकाल में बारह युद्ध-अभियानों में भाग लिया था, इस खंड में उनकी चर्चा भी ऐतिहासिक संदर्भों के साथ की गई है। एक संगीत-सृजक के रूप में उन्होंने जहाँ नए रागों की रचना की, वहीं नए संगीत वाद्यों का भी आविष्कार किया। एक विस्तृत आलेख इस विषय पर भी इसी खंड में शामिल है।
किताब के दूसरे हिस्से में उनके अब तक उपलब्ध हिन्दवी काव्य को प्रस्तुत किया गया है। उनकी पहेलियों, कहमुकरियों, दोहों, कविताओं, गीतों, कव्वालियों, ग़ज़लों और ‘ख़ालिक़ बारी’ को यहाँ आप एक साथ देख सकते हैं।
कहने की जरूरत नहीं कि अमीर खुसरो के साथ यह पुस्तक उनके समय, तत्कालीन इतिहास और उस दौर की सांस्कृतिक विशेषताओं पर भी प्रकाश डालती है।
Book Details
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ISBN9789348157041
-
Pages368
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Avg Reading Time12 hrs
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Age18+ yrs
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Country of OriginIndia
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- Description: प्रो. देवेंद्र स्वरूप—इतिहासकार, पत्रकार, अध्यापक, चिंतक, लेखक—72 वर्ष के सार्वजनिक जीवन में हजारों लोगों से संपर्क; सभी से आत्मीय संबंध पर उनमें से कुछ से अधिक प्रभावित। उनके द्वारा लिखे गए कुछ संस्मरणों में किसी व्यक्ति पर ही नहीं, वरन् तात्कालिक परिस्थितियों एवं कालखंड पर भी टिप्पणी होती हैं। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की व्यक्तित्व-निर्माण की पद्धति की झलक और इस निर्माणशाला से निकले लोगों द्वारा खड़े किए गए कुछ प्रकल्पों की जानकारी। सामाजिक एवं राष्ट्रीय कार्यों में जीवन खपाने वाली कुछ विभूतियों का परिचय। पठनीय ग्रंथ।
Yeh Ram Kaun Hai?
- Author Name:
Neerja Madhav
- Book Type:

- Description: एक तरफ एक विशाल भारतीय जन-समुदाय अयोध्या, काशी और मथुरा के मंदिरों को लेकर भावुक है, दूसरी तरफ सत्ताधारी वोट बटोरने के चक्कर में इन मंदिरों पर हुए बर्बर आक्रमण और ऐतिहासिक सत्य को सत्य कहने में भी हिचकिचा रहे हैं तथा अल्पसंख्यक हितों की रक्षा के नाम पर एक चोट को सहला-सहला कर कैंसर में बदल देना चाहते हैं। पड़ोसी देशों में पुनरुद्धार या विकास के नाम पर धड़ाधड़ राम, कृष्ण एवं शिव मंदिरों को ढहाया जा रहा है। शीतला माता मंदिर या ढाकेश्वरी माता के मंदिरों का स्थानांतरण किया गया है। ऐसा नहीं कि ये हमले आज ही हो रहें हैं। दरअसल इन हमलों का इतिहास हजारों वर्ष पुराना है। ईश्वर, अल्लाह और गॉड को एक ही परम सत्ता के भिन्न-भिन्न नाम माननेवाला हिंदू अपनी उदारता और विश्वास की व्यापकता के कारण बहुदेववादी भी है, मूर्तिपूजक भी है और साथ ही परम सत्ता की मनोरम अभिव्यक्ति प्रकृति को भी उसी का एक रूप मान पूजता है। यह हिंदू आचार-विचार की व्यापकता है। कण-कण में व्याप्त एक अव्यक्त सत्ता।... मंत्रों और ऋचाओं की ऊर्जा से संपूरित मंदिर और मंदिर क्षेत्र ध्वस्तीकरण अथवा आक्रमण की बारंबारता के बिंदु बने।’’ —इसी संग्रह से ललित निबंधों के माध्यम से जन-जन के हृदय में बसे राम को देखने, जानने और अनुभव करने का एक सर्वथा अनूठा प्रयोग है यह पुस्तक, जो हर आयु वर्ग के पाठकों को समान रूप से रुचिकर लगेगी।
1000 Computer-Internet Prashnottari
- Author Name:
Vinay Bhushan
- Book Type:

- Description: "15 फरवरी, 1946 को ' एनियाक ' नामक कंप्यूटर दुनिया के सामने पहली बार आया था । तब से लेकर आज तक हमारे जीवन में कंप्यूटर का महत्व बढ़ता ही जा रहा है । इसके आकर्षण से क्या बच्चे, क्या बड़े-कोई नहीं बच पा रहा है । गणना करनी हो, गीत-संगीत सुनना हो, गप करना हो या फिर शोध करना हो, सबके लिए अपनी सेवाएँ देने हेतु सदैव तत्पर रहता है कंप्यूटर । इस पुस्तक में 1000 प्रश्नों के माध्यम से कंप्यूटर से संबंधित अनेक जानकारियाँ दी गई हैं । कंप्यूटर का आविष्कार, कंप्यूटर की पीढ़ियाँ, डिजिटल कंप्यूटरों का वर्गीकरण, कंप्यूटर : एक परिचय, सेकेंडरी मेमोरी, इनपुट/आउटपुट उपकरण, इंटरफेस, सॉफ्टवेअर, ऑपरेटिंग सिस्टम, डाटा संचार (कम्यूनिकेशन), कंप्यूटर नेटवर्क व्यवस्था, कंप्यूटर वाइरस एवं सुरक्षा प्रबंधन, सुपर कंप्यूटर, इंटरनेट, ई-मेल, एफ.टी.पी. और टेलनेट, कंप्यूटर और भारत तथा कंप्यूटर और कैरियर जैसे अध्यायों के द्वारा इस पुस्तक में कंप्यूटर की दुनिया की रोचक व रोमांचक यात्रा कराई गई है । यह पुस्तक कंप्यूटर के क्षेत्र से संबंध रखनेवालों, छात्रों, इंजीनियरों, शोधार्थियों तथा प्रतियोगी परीक्षाओं में बैठनेवाले प्रतियोगियों के लिए अत्यंत उपयोगी है । "
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