Gully Gully
(0)
₹
499
₹ 409.18 (18% off)
Unavailable
Ships within 48 Hours
Free Shipping in India on orders above Rs. 1100
For all but the final day of six electric weeks during the winter of 2023, India’s campaign at a home World Cup blazed and sparkled, warming the soul of a cricket-crazed nation. As Rohit Sharma’s dominant side took their show on the road, from one delirious city to another hysterical town, stretching from the sunburnt coast of Chennai to the frozen mountains of Dharamshala, the greatest cricket team to not win a World Cup edition unified a vast and diverse country in their shade of blue. Gully Gully reveals not only what cricket means to India, but also what Indians mean to cricket by capturing the best and the worst of us, along with the grit and the grime of the land. This book is as much about a fabulous team brimming with legends as it is about the game’s other, oft-forgotten heroes: nameless and faceless Indian fans, emerging from numerous gullies.
Read moreAbout the Book
For all but the final day of six electric weeks during the winter of 2023, India’s campaign at a home World Cup blazed and sparkled, warming the soul of a cricket-crazed nation. As Rohit Sharma’s dominant side took their show on the road, from one delirious city to another hysterical town, stretching from the sunburnt coast of Chennai to the frozen mountains of Dharamshala, the greatest cricket team to not win a World Cup edition unified a vast and diverse country in their shade of blue.
Gully Gully reveals not only what cricket means to India, but also what Indians mean to cricket by capturing the best and the worst of us, along with the grit and the grime of the land. This book is as much about a fabulous team brimming with legends as it is about the game’s other, oft-forgotten heroes: nameless and faceless Indian fans, emerging from numerous gullies.
Book Details
-
ISBN9780143466468
-
Pages344
-
Avg Reading Time11 hrs
-
Age18+ yrs
-
Country of OriginIndia
Recommended For You
Rahul-Chintan
- Author Name:
Gunakar Muley
- Book Type:

-
Description:
विज्ञान के साथ-साथ साहित्य, पुरातत्त्व-इतिहास एवं संस्कृति पर गुणाकर मुळे की महत्त्वपूर्ण लेखमालाएँ और पुस्तकें पहले प्रकाशित हो चुकी हैं। वस्तुतः राहुल पर उनकी पुस्तकें उसी सिलसिले की अगली कड़ी हैं, क्योंकि राहुल पर लिखना महज़ एक साहित्यकार के बारे में और उसके साहित्य पर लिखना नहीं है। एक साहित्यकार होने के अलावा राहुल ने समाज, राजनीति, इतिहास-पुरातत्त्व, धर्म और संस्कृति पर गहन चिन्तन किया था। इन विषयों पर उनके मौलिक विचार थे, जिन्हें समझे और उद्घाटित किए बिना राहुल के वास्तविक महत्त्व को नहीं समझा जा सकता। गुणाकर मुले ने इस काम को बड़ी निष्ठा और वैज्ञानिक सूझबूझ के साथ सम्पन्न किया है, जिसका ज्वलन्त उदाहरण यह पुस्तक है।
इस पुस्तक में गुणाकर जी ने राहुल के बहुआयामी व्यक्तित्व का विशद एवं विराट चित्र उपस्थित किया है और अन्त में ‘राहुल-साहित्य : एक परिचय’ शीर्षक के अन्तर्गत राहुल की लगभग सभी कृतियों का संक्षिप्त परिचय दे दिया है, जिससे राहुल साहित्य के बारे में आज भी जो भ्रामक बातें लिखी और प्रचारित की जा रही हैं, उनका निराकरण होता है।
Prajanan-Tantra Tatha Daivee Bhawna
- Author Name:
Tapi Dharma Rao
- Book Type:

-
Description:
स्व. धर्माराव जी की तीन रचनाएँ ‘पेल्लिदानि पुट्टुपूर्वोत्तरालु’, सन् 1960 (विवाह-संस्कार : स्वरूप एवं विकास), ‘देवालयालमीद बूतु बोम्मल्य ऐंदुकु’, सन् 1936 (देवालयों पर मिथुन-मूर्तियाँ क्यों?) तथा ‘इनप कच्चडालु’, सन् 1940 (लोहे की कमरपेटियाँ) तेलगू-जगत में प्रसिद्ध हैं। इन रचनाओं में प्रस्तुत किए गए विषयों में बीते युगों की सच्चाइयाँ हैं। इतिहास में इन सच्चाइयों का महत्त्व कम नहीं है। तीनों रचनाओं के विषय यौन-नैतिकता से सम्बन्धित हैं। इन रचनाओं में समाज मनोविज्ञान का विश्लेषण हुआ है।
लेखक ने इन पुस्तकों द्वारा अतीत के एक महत्त्वपूर्ण चित्र को हमारे सामने रखने का प्रयत्न किया है। एक समय में देवालयों में मिथुन-पूजा की जाती थी, कहने का मतलब यह कदापि नहीं कि आज भी देवालयों को उसी रूप में देखें। लेखक का उद्देश्य देवालय के उस आरम्भिक रूप तथा एक ऐतिहासिक सत्य की जानकारी देना है। आधुनिक देवालय दैवी-भक्ति तथा आध्यात्मिक चिन्तन के साथ जुड़े हुए हैं। आज देवालय जिस रूप में हैं, उसी रूप में रहें। आज हमें आध्यात्मिक चिन्तन की सख़्त ज़रूरत है।
पुस्तक साधारण पाठक हों या विज्ञ पाठक, दोनों पर समान प्रभाव डालती है। जिज्ञासु पाठक इस प्रश्नचिह्न का उत्तर ढूँढ़़ने का प्रयास भी करते हैं। इस रचना में सारी दुनिया की सभ्यताओं की यौन-नैतिकता का चित्रण हमें मिलता है। देवालय तथा प्रजनन-तंत्रों के बीच घनिष्ठ सम्बन्ध है। जब यह सम्बन्ध टूट जाएगा तब देवालयों का महत्त्व कम हो जाएगा। देवालय केवल प्राचीन अवशेषों के रूप में रह जाएँगे। प्रजनन-तंत्रों के साथ दैवी भावना जुड़ी हुई है। देवालयों में मिथुन-मूर्तियाँ रखने के पीछे मिथुन-पूजा की भावना झलकती है। लेखक ने ऐसे कई उदाहरण देकर यह सिद्ध करने का प्रयत्न किया है कि पूजा के कई उपकरण स्त्री-पुरुष गुप्तांगों के ही प्रतीक हैं। देवालयों का निर्माण क्यों हुआ? इनमें मिथुन-मूर्तियाँ क्यों रखी जाती हैं? लिंग-पूजा का महत्त्व क्या है? पुरुष तथा स्त्री देवदासियों की आवश्यकता क्यों पड़ी? वीर्य-शक्ति का अर्पण कैसे होता है? फिनीशिया, बेबिलोनिया, अस्सीरिया, अमेरिका, न्यूगिनी आदि देशों की कई प्रथाओं में मिथुन-पूजा की भावना क्यों झलक पड़ती है? पंडा शब्द का अर्थ क्या है? पंडाओं का देवालयों के साथ किस प्रकार का सम्बन्ध है? आन्ध्र के कुछ त्योहारों में तथा श्राद्ध में बनाए जानेवाले कुछ व्यंजनों के आकारों के पीछे की भावना क्या है? कुछ उत्सवों में लोग स्त्री-पुरुष गुप्तांगों से सम्बन्धित अश्लील गालियाँ क्यों देते हैं? मंत्रपूत सम्भोग क्या है? क्यों किया जाता है? अश्वमेध यज्ञ, काम-दहन, चोली-त्योहार आदि क्यों मनाए जाते हैं? समाजशास्त्र की दृष्टि से तथा स्त्री-पुरुषों के मनोविज्ञान की दृष्टि से इनका महत्त्व क्या है? आदि विषयों का प्रमाण सहित विश्लेषण यहाँ किया गया है और इन प्रश्नों का समाधान सामाजिक मनोविज्ञान की दृष्टि से प्रस्तुत किया गया है।
जिज्ञासु पाठकों के लिए ‘देवालयों पर मिथुन-मूर्तियाँ क्यों?’ एक महत्त्वपूर्ण जानकारी देनेवाली रचना है।
Nagari-Nagari,Dware-Dware
- Author Name:
Prempal Sharma
- Book Type:

- Description: "यात्रा-वृत्तांत साहित्य की बड़ी जीवंत विधा है, जिसमें पहाड़ों की गूँज, नदियों की कल-कल और पक्षियों की मीठी चह-चह की तरह जीवन और जीवन-रस छलछलाता नजर आता है। इनमें हमारा समय है तो मानव-आस्था की सुदीर्घ परंपरा भी। यात्रा-वृत्तांत एक तरह से कालदेवता की अभ्यर्थना भी हैं, जो पल में हमें कल से आज और आज से कल तक हजारों वर्षों की यात्रा कराके एकदम ताजा एवं पुनर्नवा बना देते हैं। प्रस्तुत यात्रा पुस्तक में दर्शनीय तीर्थस्थलों की प्रामाणिक जानकारी दी गई है, जिससे वे सभी सुरम्य यात्रा-स्थल अपनी पूरी प्राकृतिक सुंदरता, भव्यता और ऐतिहासिक गौरव के साथ पाठक की स्मृति में बसने की ताकत रखते हैं। प्रस्तुत पुस्तक ‘नगरी-नगरी, द्वारे-द्वारे’ के यात्रा-वृत्तांतों की सबसे बड़ी विशेषता है कि ये मन को बाँध लेते हैं। पाठक इन्हें पढ़ना शुरू करे तो पूरा पढ़े बिना रह नहीं सकता है। पाठक को लगता है, वह इन्हें पढ़ नहीं रहा, बल्कि चलचित्र की भाँति देख रहा है; लेखक के साथ-साथ यात्रा कर रहा है। विभिन्न साहित्यिक पत्रिकाओं में पाठकों का अपार प्यार-दुलार पाने के बाद अब ये यात्रा-संस्मरण पुस्तक रूप में पुनः पाठकों के सामने उपस्थित हैं। पत्र-पत्रिकाओं के पाठकों से इतर पाठक-बंधु भी अब इनका रसास्वादन सहजता से कर सकेंगे। पाठकों के हृदय में उतरकर अपना स्थान बना लेनेवाले यात्रा-संस्मरणों की रोचक, पठनीय-मननीय पुस्तक।
Ha Desh Amacha Aahe
- Author Name:
Shrimant Mane
- Book Type:

- Description: 2024 च्या लोकसभा निवडणुकीत कोणताही राजकीय पक्ष स्पष्टपणे जिंकला नाही आणि कोणाचा पूर्ण पराभवदेखील झाला नाही. हे नेमके झाले तरी कसे आणि मग जिंकले तरी कोण? अर्थातच, भारतीय मतदार जिंकले. कोट्यवधी मतदारांनी चारशे जागांचे स्वप्न पाहणाऱ्या सत्ताधारी पक्षाला ‘आस्ते कदम` चा इशारा दिला, तर आधीच्या दोन निवडणुकांमध्ये हतोत्साही झालेल्या विरोधकांना मतदारांनी नवी उमेद व उर्जा दिली. या समतोल जनादेशातून मतदार जिंकले हा निष्कर्ष, हे अनुमान किंवा विधान भाबडेपणातून केले आहे का? अर्थातच नाही. खंडप्राय भारतातील या लोकसभा निवडणूक निकालाचा लघुत्तम साधारण विभाज्य म्हणजे लसावि सांगतो की, मोठा निर्णायक राष्ट्रीय मुद्दा निवडणुकीत नसल्यामुळे देशातील 28 राज्ये व 8 केंद्रशासित प्रदेश मिळून छत्तीस प्रांतांमध्ये स्थानिक समीकरणेच प्रभावी ठरली. सोबतच, राज्यघटना बदलण्याची भीती, शेतकरी व तरुण मतदारांमधील नाराजी, गरिबी व महागाई अशा जगण्यामरण्याच्या मुद्द्यांवर लोकांनी सत्ताधाऱ्याांच्या विरोधात मतदान केले. या मतदानाचे, निकालाचे हे तर्कशास्त्र, संख्याशास्त्राच्या आधारे विश्लेषण सांगते की, ही लढाई निवडणूक जिंकण्याचे तंत्र आणि लोक यांच्यात झाली. निवडणूक जिंकण्याचे तंत्र बदलले, सुधारले तरी लोकांचे पाय जमिनीवरच आहेत. लोकशाहीचा उत्सव असे ज्याचे वर्णन केले जाते त्या देशाच्या अठराव्या सार्वत्रिक निवडणुकीत मतदारांनी दिलेल्या संदेशाचा सार हा की, आम्हाला गृहीत धरू नका. हा देश, हे प्रजासत्ताक आमचे आहे. - श्रीमंत माने
Devnagari Jagat Ki Drishya Sanskriti
- Author Name:
Sadan Jha
- Book Type:

-
Description:
“हिन्दी में सभ्यता-समीक्षा कम ही होती है और यह कहा जा सकता है कि यह हिन्दी में विचार और आलोचना की जो परम्परा रही है उससे विपथ होने जैसा है। इधर तो सारा समय हिन्दी में, जैसे कि अन्यत्र भी, देखने-दिखाने में ही बीतता है। इसके बावजूद अभी तक देवनागरी जगत में जो दृश्य संस्कृति विकसित हुई है उसका कोई सुचिन्तित अध्ययन नहीं हुआ है। सदन झा की यह पुस्तक इस सन्दर्भ में पहली ही है : उसमें समझ और जतन से, वैचारिक सघनता और खुलेपन से इस दृश्य संस्कृति के विभिन्न रूपों पर विचार किया गया है। निश्चय ही यह हिन्दी में चालू मानसिकता से अलग कुछ करने का ज़रूरी जोख़िम उठाने जैसा है। हम रज़ा पुस्तक माला में यह पुस्तक सहर्ष प्रस्तुत कर रहे हैं।”
—अशोक वाजपेयी
Vigyan Jantantra Aur Islam
- Author Name:
Humayun Kabeer
- Book Type:

-
Description:
संसार का इस्लाम से परिचय करानेवाले पैग़म्बर मोहम्मद माने जाते हैं। उनका पूरा जीवन सत्य, निष्ठा का सही पैमाना रहा है। उन्होंने जीवन को तर्कों के आधार पर जीने की सलाह दी। उनका मानना था कि धर्म प्राधिकार पर आधारित न होकर तर्क पर आधारित हो। ‘विज्ञान, जनतंत्र और इस्लाम’ में इन्हीं बिन्दुओं पर विमर्श है।
इस्लाम ने श्रद्धाजनित चमत्कारों का निषेध किया, एकेश्वरवाद पर ज़ोर उसके वैज्ञानिक दृष्टिकोण का आधार है। मनुष्य–मनुष्य में कोई भेद इस्लाम में नहीं है। सामान्य रूप से यह उसके लोकतांत्रिक मिज़ाज की भी बुनियाद है। जनतंत्र की अवधारणा, मनुष्य के अधिकार, कल्याणराज्य, स्वाधीनता, प्राधिकार और कल्पना, दर्शनशास्त्र का अध्ययन, भारत में शिक्षा की समस्याएँ तथा महात्मा गांधी के विचार–व्यवहार का सम्यक् आकलन प्रसिद्ध चिन्तक तथा राजनेता हुमायूँ कबीर ने इस पुस्तक में किया है।
Naksaliyon Ke Beech Mere Beete Dinon Ki Romanchak Gatha
- Author Name:
Alpa Shah
- Book Type:

- Description: 2010 में जब भारत सरकार देश के नक्सल प्रभावित इलाकों में नक्सल विरोधी अभियानों में तेजी ला रही थी, तो उस समय अल्पा शाह गुरिल्ला प्लाटून केसाथ उन्हीं इलाकों की 250 किलोमीटर लंबे सात रातों के सफर पर निकलीं। एक मानव विज्ञानी केरूप में वह समझना चाहती थीं कि एक नए भारत के उदय की पृष्ठभूम में, क्यों देश के गरीबों ने विश्व के सबसे बड़े लोकतंत्र से मुँह मोड़कर क्रांतिकारी विचारधारा के साथ एकजुटता दिखाई? गहरे हरे रंग की छापामारा वर्दी पहने, पुरुष के वेश में अल्पा प्लाटून में एकमात्र महिला और एकमात्र ऐसी इनसान थीं जिसके पास बंदूक नहीं थी। कष्टों से भरी उनकी इस यात्रा ने यह खुलासा किया कि क्यों विभिन्न पृष्ठभूमियों केलोग, दुनिया को बदलने के लिए हथियार उठाकर एक साथ इकट्ठा हो गए थे; और साथ ही किन वजहों से फिर उनमें बिखराव हुआ? अल्पा शाह सालों के शोध के साथ ही नक्सलियों के गढ़ में आदिवासी समुदायों के साथ, उनके रोजमर्रा के जीवन में इतना घुलमिल गई थीं कि उनकी पुस्तक ‘नक्सलियों के बीच मेरे बीते दिनों की रोमांचक गाथा’ में वह गइराई और घनिष्ठता साफ नजर आती है और पुस्तक एक थ्रिलर की तरह हमारी आँखों के सामने से गुजरती है। इसी गहन अध्ययन और शोध से पुस्तक में आदिवासी जीवन और उसका संघर्ष जीवंत हो उठता है। यह कृति समकालीन भारत के बीचोबीच आर्थिक वृद्धि, बढ़ती असमानता, विस्थापन और संघर्ष का प्रतिबिंम्ब प्रस्तुत करती है।
Bhentvarta Aur Press Conference
- Author Name:
Nand Kishore Tirkha
- Book Type:

- Description: घटना से अधिक व्यक्ति की महत्ता एक सच्चाई है। बयान की मौलिकता और गुणवत्ता से अधिक महत्ता बयान देनेवाले की होती है। किसी विषय पर साधारण व्यक्ति द्वारा किया गया महत्त्वपूर्ण बयान समाचार नहीं बन सकता, परन्तु उसी विषय पर दिया गया किसी विशिष्ट व्यक्ति का बहुत ही मामूली-सा बयान समाचार हो जाता है। इन सच्चाइयों के चलते समाचार क्ष्रेत्र में काम करनेवाले सभी लोगों के लिए महत्त्वपूर्ण और विशिष्ट व्यक्तियों से भेंटवार्ता और उनकी प्रेस कॉन्फ्रेंसों में शामिल होना उनके कर्तव्य का भी अनिवार्य हिस्सा है। भेंटवार्ता लेना और प्रेस कॉन्फ्रेंस में शामिल होकर सही सवाल करना ऐसी कलाएँ हैं जो समाचार क्षेत्र के व्यक्ति की एक अलग पहचान बनाती हैं। इन कठिन कलाओं में महारत हासिल करने के लिए डॉ. नन्दकिशोर त्रिखा की यह पुस्तक नए पत्रकारों को भेंटवार्ता में प्रवीणता प्राप्त करने तथा पुराने पत्रकारों के लिए अपनी कला माँजने में उपयोगी साबित हो चुकी है एक अत्यन्त महत्त्वपूर्ण पुस्तक।
Kuchh Musafir Sath The
- Author Name:
Rajendra Rao
- Book Type:

- Description: इन दिनों हिंदी साहित्य में कथेतर गद्य को महत्त्व की दृष्टि से देखे जाने की प्रवृत्ति जोर पकड़ रही है और उसमें पाठकों की रुचि निरंतर अनुभव की जा रही है। कुछ अभिनव प्रयोग भी किए जा रहे हैं। वरिष्ठ कथाकार राजेंद्र राव ने संस्मरण, स्मृति-लेख और रेखाचित्र जैसी विधाओं की त्रिवेणी को कथात्मक संस्मरण के रूप में प्रस्तुत करकेकथा और कथेतर के बीच की फाँक को न्यूनतम करने का एक सफल रचनात्मक प्रयास किया है, जो कथात्मक संस्मरणों के इसअत्यंत पठनीय संकलन में द्रष्टव्य है। इनके बारे में लेखक का कहना है, स्मृति जैसे रंग-बिरंगे फलों से लदा वृक्ष है। इनमें कुछ मीठे हैं, कुछ खट्टे और कुछ कड़वे भी, मगर बेस्वाद कोई नहीं है। इनमें से कुछ को स्वाद की तीव्रता के क्रम से हम यादों में सँजोए रखते हैं कहानियों के रूप में। हर याद रह गए चेहरे के पीछे एक या एक से अधिक कहानी/कहानियाँ होती हैं। स्मृति-पटल पर गहरे खुदे व्यक्तियों के ये रेखाचित्र/संस्मरण न होकर उनकी कहानियाँ हैं। साप्ताहिक हिंदुस्तान और धर्मयुग में प्रकाशित राजेंद्र राव की धारावाहिक कथा-शृंखलाएँ ‘सूली ऊपर सेज पिया की’, ‘कोयला भई न राख’ और ‘हम विषपायी जनम के’ अत्यंत चर्चित और लोकप्रिय रही हैं। विश्वास है, कथात्मक संस्मरणों के इस सिलसिले का भी भरपूर स्वागत होगा।
Ikigai: इकिगाई
- Author Name:
Raj Goswami
- Book Type:

- Description: This book does not have any description.
Aao Model Banayen
- Author Name:
Shyam Sunder Sharma
- Book Type:

- Description: "आमतौर पर बच्चे विज्ञान को कठिन विषय समझते हैं। वे समझते हैं कि विज्ञान में बहुत पढ़ना पड़ता है, प्रयोग करने पड़ते हैं और कई बार घर या स्कूल से बाहर—बगीचों, जंगलों आदि में—घूमना पड़ता है। पर न तो विज्ञान के प्रयोग हमेशा बहुत कठिन होते हैं और न ही सब प्रयोगों को करने से पहले बहुत अध्ययन कर जरूरत होती है। प्रयोग करने के लिए कई बार मॉडलों की जरूरत होती है। ये मॉडल सरल यंत्र होते हैं और इन्हें आसानी से बनाया जा सकता है (वैसे इनको बनाना भी अपनेआप में बहुत रोचक प्रयोग होते हैं)। इन्हें तुम उन चीजों से बना सकते हो जो आसानी से बाजार में मिल जाती हैं और जिनकी लागत भी ज्यादा नहीं होती। "
1000 Veer Savarkar Prashnottari | Revolutionaries And Pioneer Of Hindutva
- Author Name:
Anita Gaur
- Book Type:

- Description: यह धरा मेरी यह गगन मेरा, इसके वास्ते शरीर का कण-कण मेरा' - इन पंक्तियों को चरितार्थ करने वाले क्रांतिकारियों के आराध्य देव स्वातंत्र्य-वीर विनायक दामोदर सावरकर भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के अग्रिम पंक्ति के सेनानी और प्रखर राष्ट्रवादी नेता थे। वे न केवल स्वाधीनता संग्राम के एक तेजस्वी सेनानी थे अपितु महान् क्रांतिकारी, चिंतक, सिद्धहस्त लेखक, कवि, ओजस्वी वक्ता तथा दूरदर्शी राजनेता भी थे। वे एक ऐसे इतिहासकार भी हैं, जिन्होंने हिंदू राष्ट्र की विजय के इतिहास को प्रामाणिक ढंग से लिपिबद्ध किया है। उन्होंने 1857 के प्रथम स्वतंत्रता समर का सनसनीखेज व खोजपूर्ण इतिहास लिखकर ब्रिटिश शासन को हिलाकर रख दिया था। अप्रितम क्रांतिकारी, दृढ़ राजनेता, समर्पित समाज-सुधारक, दार्शनिक, दृष्टा, महान् कवि और महान् इतिहासकार आदि अनेकोनेक गुणों के धनी वीर सावरकर हर भारतीय की श्रद्धा के केंद्रबिंदु हैं। उनका संघर्ष, त्याग, उन्हें मिली यातनाएँ और तिरस्कार की करुणगाथा हमें उद्वेलित करती है, राष्ट्रभाव जगाती है।
Hindi Nibandh
- Author Name:
Vinod Tiwari
- Book Type:

- Description: यूजीसी (नेट/जेआरएफ) पाठ्यक्रम पर आधारित हिंदी निबंधों का संग्रह|
Toofano Ke Beech
- Author Name:
Rangeya Raghav
- Book Type:

- Description: ‘तूफानों के बीच’ रांगेय राघव का मार्मिक रिपोर्ताज है। अपनी विशिष्ट वर्णन शैली और व्यापक मानवीय सरोकारों के चलते यह रचना अत्यन्त हृदयग्राही सिद्ध हुई है। रांगेय राघव ने पुस्तक की भूमिका में लिखा है, ‘बंगाल का अकाल मानवता के इतिहास का बहुत बड़ा कलंक है। शायद क्लियोपेट्रा भी धन के वैभव और साम्राज्य की लिप्सा में अपने ग़ुलामों को इतना भीषण दुख नहीं दे सकीं, जितना आज एक साम्राज्य और अपने ही देश के पूँजीवाद ने बंगाल के करोड़ों आदमी, औरतों और बच्चों को भूखा मारकर दिया है। आगरे के सैकड़ों मनुष्यों ने दान नहीं, अपना कर्तव्य समझकर एक मेडिकल जत्था बंगाल भेजा था। जनता के इन प्रतिनिधियों को बंगाल की जनता ने ही नहीं, वरन् मंत्रिमंडल के सदस्यों तक ने धन्यवाद दिया था। किन्तु मैं जनता से स्फूर्ति पाकर यह सब लिख सका हूँ। मैंने यह सब आँखों-देखा लिखा है।’ एक पठनीय और संग्रहणीय पुस्तक।
Shikshan Aani Shanti
- Author Name:
Jane Sahi +1
- Book Type:

- Description: शाळा ही काही समाजाबाहेर, एखाद्या पोकळीत असणारी गोष्ट नाही. ती समाजातून येते आणि पुन्हा समाजापर्यंतच वाहत जाते. शाळा काही फक्त जीवनाची तयारी नव्हे; ती समाजाच्या सामाजिक, आर्थिक वास्तवाचा अविभाज्य भाग असते. सध्या समाजात एकंदरीतच जे ताण आहेत आणि दडपणं आहेत त्यांनाच शाळांनाही तोंड द्यावं लागत आहे. उदाहरणार्थ, स्पर्धा आणि व्यापारीकरणाच्या वरवंट्याखाली भरडलं जाणं. शाळा ज्या प्रकारे वाढलेल्या दिसतात, तो काही योगायोग नाही; तो समाज, त्याची मूल्यं, त्याच्या अपेक्षा आणि गरजा यांचा तर्कशुद्ध विस्तार किंवा प्रतिबिंब आहे. आपल्या सध्याच्या समाजातली हिंसा, भेदभाव आणि अन्याय यांनीच विविध प्रकारच्या शाळांमधली उतरंडीची व्यवस्था निर्माण केली, अभ्यासक्रमाचे तपशील ठरवले आणि शिक्षणाच्या पद्धती आणि मूल्यमापनाच्या पद्धती ठरवल्या. थोडं नकारात्मक अर्थानं आणि एका दृष्टिकोनातून पाहिलं पण त्या शाळा जीवनापासून अलिप्त नाहीत तर अन्याय आणि असमानता या कठोर वास्तवांचा भाग आहेत. Shikshan Aani Shanti : Jane Sahi , Shobha Bhagwat शिक्षण आणि शांती : जेन साही, शोभा भागवत
Vishwa Patal Par Hindi
- Author Name:
Dr. Surya Prasad Dixit
- Book Type:

-
Description:
हिन्दी भारत की एक राष्ट्रीय भाषा है, संघ की राजभाषा है और एक विश्वभाषा भी है। समस्त संसार में वह आज करोड़ों लोगों द्वारा समझी जाती है। उसकी व्याप्ति लगभग डेढ़ सौ देशों में है। वह लगभग एक दर्जन देशों में जनभाषा के रूप में प्रचलित है। इन देशों को तीन कोटियों में विभाजित करना तर्कसंगत होगा—(1) भारत के पड़ोसी राष्ट्र, (2) भारतवंशी राष्ट्र, (3) आप्रवासी-बहुल राष्ट्र।
‘विश्व पटल पर हिन्दी’ का दूसरा महत्त्वपूर्ण पक्ष है, विश्वबोध। हिन्दी का सम्बन्ध संस्कृत, पालि और भारतीय भाषाओं के अतिरिक्त अरबी, फ़ारसी, पस्तो, तुर्की, अंग्रेज़ी, फ़्रेंच, स्पेनिश, डच, पुर्तगाली, इटैलिक आदि कई भाषाओं से है। इस भाषा ने हज़ारों शब्दों का आदान-प्रदान किया है। हिन्दी-सेवियों ने सैकड़ों विश्वविख्यात ग्रन्थों के अनुवाद किए हैं। दर्जनों विश्व विभूतियों पर ग्रन्थ लिखे हैं। कई यात्रा-संस्मरण लिखे हैं तथा विश्व की घटनाओं पर अपनी प्रतिक्रियाएँ व्यक्त की हैं। हिन्दी ने अनेक विश्वस्तरीय विचारधाराओं को आत्मसात् किया है तथा देश-देशान्तर तक अपनी ‘भारत विद्या’ का निर्यात भी किया है। हिन्दी की रूप-रचना अर्थात् व्याकरण, शब्दकोश, पाठ्यक्रम, शोध, समीक्षा एवं सर्जनात्मक लेखन में सैकड़ों विदेशी विद्वानों की सहभागिता रही है।
इधर हिन्दी फ़िल्मों, धारावाहिकों, पत्र-पत्रिकाओं और मीडिया कार्यक्रमों ने उसे विश्व के कोने-कोने में पहुँचाया है। कम्प्यूटर, इंटरनेट से उसका काफ़ी परिविस्तार हुआ है। लेखक ने दो दशक पूर्व इस ‘विश्व पटल पर हिन्दी’ की दिशा में पहल की थी। इसे अभी और व्यवस्थित करने की आवश्यकता है। इस प्रयोजन पूर्ति में इस पुस्तक की अपनी एक विशिष्ट उपयोगिता है।
Kavyrekha : Aadhunik Kavya
- Author Name:
Dr. Ramesh Puri
- Book Type:

- Description: It is a reference book for B.A. III semester.
Vividha
- Author Name:
L.M. Singhvi
- Book Type:

- Description: डॉ. लक्ष्मीमल्ल सिंघवी अपने समय के सुचिंतित विचारक तथा विभिन्न विषयों के प्रसिद्ध विद्वान् थे। उनके चिंतन का आधार उनका राष्ट्र-प्रेम तथा भारतीय धरोहर के प्रति उनकी अनन्य निष्ठा थी। इसी आधारपीठिका पर वह अपने चिंतन का साम्राज्य फैलाते थे, चाहे वह भारतवंशियों के सांस्कृतिक जुड़ाव की बात हो या प्रकृति संबंधित जैन घोषणा-पत्र हो या वेद संहिताएँ हों अथवा वेदांत या फिर सगुण या निर्गुण साधना हो। डॉ. सिंघवी मानते थे कि भाषा, साहित्य और संस्कृति मनुष्य की सामाजिक अस्मिता के अंग और अवयव हैं। इनकी सुरक्षा और संवर्धन की बात राष्ट्रीय एकता को संपुष्ट करने के लिए जरूरी है। ‘विविधा’ में संकलित उनके 21 निबंधों में भारत की निरंतरता को समझने की कोशिश है और अतीत के उत्तराधिकार को सँजोकर आगे बढ़ने का आह्वान है। इन सब निबंधों में भारत की झलक दिखाई पड़ती है। डॉ. सिंघवी के लिए भारत स्वयं मनुष्यजाति की एक बहुत बड़ी कविता है। उसकी सांस्कृतिक आराधना में भारत के वाक् और अर्थ को डॉ. सिंघवी ने हमेशा संपृक्त पाया है। इन निबंधों का बार-बार पारायण भारत और उसकी संस्कृति तथा उसके विचार को समझने के लिए बहुत जरूरी है।
Ghar Ka Bhedi
- Author Name:
Salman Akhtar
- Book Type:

- Description: डॉक्टर सलमान अख़्तर के दादा मुज़्तर ख़ैराबादी, मामू मजाज़ लखनवी, वालिद जाँ निसार अख़्तर और भाई जावेद अख़्तर पर लिखे ये लेख साहित्यिक दुनिया में एक विशिष्ट स्थान रखते हैं। ‘घर का भेदी’ उर्दू शायरी की सोच-समझ और आलोचना की ऐसी पहली किताब है जिसमें लेखक ख़ुद अपने ख़ानदान के मशहूर और लोकप्रिय शोअरा के कलाम का विवेचन करता है और साथ ही उनके साहित्यिक ख़ज़ाने की तुलना तत्कालीन सम्माननीय शोअरा के साहित्य से भी करता है। बात की गहराई और बढ़ जाती है जब हमको ये पता चलता है कि इस किताब का लेखक न सिर्फ़ ख़ुद एक विश्वसनीय शायर और साहित्यकार है बल्कि अन्तरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त एक मनोवैज्ञानिक भी है। नतीजे के तौर पर ‘घर का भेदी’ किताब हमें कला के प्रतीकों और बिंबों से भी परिचित कराती है और उसमें निहित व्यक्तिगत पीड़ा और द्वंद्व से भी।
Tarkshastra
- Author Name:
Neelima Mishra
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
Customer Reviews
Be the first to write a review...
0 out of 5
Book