Gully Gully
Author:
Aditya IyerPublisher:
Penguin IndiaLanguage:
EnglishCategory:
General-non-fiction0 Ratings
Price: ₹ 414.17
₹
499
Unavailable
For all but the final day of six electric weeks during the winter of 2023, India’s campaign at a home World Cup blazed and sparkled, warming the soul of a cricket-crazed nation. As Rohit Sharma’s dominant side took their show on the road, from one delirious city to another hysterical town, stretching from the sunburnt coast of Chennai to the frozen mountains of Dharamshala, the greatest cricket team to not win a World Cup edition unified a vast and diverse country in their shade of blue.
Gully Gully reveals not only what cricket means to India, but also what Indians mean to cricket by capturing the best and the worst of us, along with the grit and the grime of the land. This book is as much about a fabulous team brimming with legends as it is about the game’s other, oft-forgotten heroes: nameless and faceless Indian fans, emerging from numerous gullies.
ISBN: 9780143466468
Pages: 344
Avg Reading Time: 11 hrs
Age: 18+
Country of Origin: India
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- Description: ऐसे भी बहुत से मालिक हैं, जिनमें इंसानियत है और निश्चित रूप से इसकी उलट प्रवृत्ति वाले मालिक हैं ही। ऐसे ग़ुलाम हो सकते हैं, जिनके तन पर कपड़ा हो, पेट में भरपेट भोजन हो और वे ख़ुश भी हों लेकिन यह भी पक्की बात है कि ऐसे भी फटे-हाल दास हैं, जिनके तन पर सिर्फ़ लंगोट है और पेट में सिर्फ़ भूख! मैं इस बात का गवाह हूँ कि वह व्यवस्था क्रूर, अत्याचारी और बर्बर है, जो इस प्रकार की अमानवीयता और विषमता को बरदाश्त करती है। लोग ग़रीब-ग़ुरबों के जीवन पर लंबी-लंबी झूठी और सच्ची कथाएँ बाँच सकते हैं और अज्ञानता के आनंद पर चतुराई से डींगे हाँक सकते हैं, चक्के वाली कुर्सी पर बैठकर ग़ुलामों के जीवन के आनंद पर बड़ी बेशर्मी से भाषण दे सकते हैं। लेकिन वे दूसरी कहानियाँ वापस लेकर आएंगे, जब उन्हें ग़ुलामों के साथ खेत में भेज दो, केबिन में उनके साथ सोने को कहो, भूसे पर बैठकर उनके साथ खाना खाने को कहो और ग़ुलामों के साथ कोड़े की मार और लात सहने को कहो। उन्हें बेचारे ग़ुलामों के दिल को जानने दो, उनके सीने में छिपे विचारों को जानने दो, वे विचार जो इस डर से नहीं व्यक्त किए जाते हैं कि कहीं गोरा सुन न ले। रात की ख़ामोश रातों में उनके साथ, उनके पास बैठ कर तो देखो, उनके साथ जीवन, आज़ादी, ख़ुशी आदि के बारे में भरोसेमंद माहौल में उनसे बात करके तो देखो, आप पाएँगे, हर सौ में से निन्यान्नवे में अपनी परिस्थिति को समझने की भरपूर समझदारी है। वह भी आपकी ही तरह अपने सीने में स्वतंत्रता से प्रेम के जुनून को वर्षों से बिल्कुल आपकी ही तरह संभाल के रखा हुआ है। --
Shiksha Ke Samajik Sarokar
- Author Name:
Kedarnath Pandey
- Book Type:

- Description: ‘शिक्षा के सामाजिक सरोकार’ शिक्षा, शिक्षक, छात्र और विद्यालय पर केन्द्रित वैयक्तिक निबन्धों का संग्रह है। केदारनाथ पाण्डेय की यह पुस्तक साहित्य की कई विधाओं का आस्वाद देती है। यह संस्मरण भी है, यात्रा-वृत्तान्त भी और शिक्षा के सामाजिक सरोकारों का आख्यान भी। शिक्षा के क्षेत्र में एक शिक्षक द्वारा किए गए अभिनव प्रयासों का यह ऐसा वृत्तान्त है, जिसे छात्र, शिक्षक और अभिभावक सभी के लिए पढ़ना ज़रूरी है। केदारनाथ पाण्डेय की इस पुस्तक का मूल स्वर है—सबको शिक्षा, सबको काम। लेखक न सिर्फ़ बच्चों को पढ़ा-लिखा देखना चाहता है बल्कि आम जन के लिए न्याय भी चाहता है। लेखक किसानों के लिए ज़मीन, ग़रीबों के लिए घर और सभी के लिए आशाएँ चाहता है। वह सुन्दर भविष्य का सपना देखता है जो परम्परा और संस्कृति के बिना अधूरा है। समाज की कई कल्पनाएँ, योजनाएँ पुस्तक में स्थान पाती हैं। स्मृतियों को सहेजकर रखने में लेखक माहिर है और उसका यथेष्ट इस्तेमाल इस पुस्तक में किया गया है।
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