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"किसी की आत्मकथा कोई दूसरा नहीं लिख सकता क्योंकि किसी दूसरे द्वारा लिखी आत्मकथा संवेदनाओं और भावनाओं से न्याय नहीं कर सकती। इसलिए पत्रकार और संपादक अश्विनी कुमारजी ने आत्मकथा लिखने का काम 2019 में ही शुरू कर दिया था, जिसका प्रकाशन पंजाब केसरी दिल्ली के प्रथम पन्ने पर क्रमशः होने लगा था। रोगग्रस्त होने के कारण उनके पास समय कम था; वे जल्दी-से-जल्दी इसे पूरा कर लेना चाहते थे। उनके निधन के कारण उनकी आत्मकथा की कई शृंखलाएँ प्रकाशित नहीं हो पाई थीं। कैंसर से जूझते हुए अस्पताल के बिस्तर पर भी वह अपने लेखों को डिक्टेट कराते रहते थे। अब अश्विनी कुमारजी की आत्मकथा को पुस्तक का रूप दिया गया है ताकि उनकी यादों को चिरस्मरणीय रखा जा सके। उन्होंने अपने संपादन काल में अपनी संपादकीय कुशलता का परिचय देकर पंजाब केसरी समाचार-पत्र को लाखों पाठकों की पसंद बना दिया। उन्होंने लाखों पाठकों तक अपनी उत्कृष्ट लेखनी से अपने विचारों को पहुँचाया जिससे पंजाब केसरी सर्वाधिक प्रकाशित होनेवाला समाचार-पत्र बन गया। उन्होंने न केवल नई प्रतिभाओं को गढ़ा वरन् हर एक विषय को अपने अखबार के साँचे में ढाला। राजनीति, धर्म, साहित्य, फिल्म, कला कोई भी विषय उनसे अछूता नहीं रहा। इसलिए यह पुस्तक उन पाठकों को समर्पित है, जो उनकी कलम के चलते उनसे जुड़े रहे। राष्ट्रीय भाव की पत्रकारिता को मुखर स्वर देनेवाले एक संकल्पित व समर्पित समाजधर्मी की जीवनयात्रा है यह कृति।"

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"किसी की आत्मकथा कोई दूसरा नहीं लिख सकता क्योंकि किसी दूसरे द्वारा लिखी आत्मकथा संवेदनाओं और भावनाओं से न्याय नहीं कर सकती। इसलिए पत्रकार और संपादक अश्विनी कुमारजी ने आत्मकथा लिखने का काम 2019 में ही शुरू कर दिया था, जिसका प्रकाशन पंजाब केसरी दिल्ली के प्रथम पन्ने पर क्रमशः होने लगा था। रोगग्रस्त होने के कारण उनके पास समय कम था; वे जल्दी-से-जल्दी इसे पूरा कर लेना चाहते थे। उनके निधन के कारण उनकी आत्मकथा की कई शृंखलाएँ प्रकाशित नहीं हो पाई थीं। कैंसर से जूझते हुए अस्पताल के बिस्तर पर भी वह अपने लेखों को डिक्टेट कराते रहते थे।
अब अश्विनी कुमारजी की आत्मकथा को पुस्तक का रूप दिया गया है ताकि उनकी यादों को चिरस्मरणीय रखा जा सके। उन्होंने अपने संपादन काल में अपनी संपादकीय कुशलता का परिचय देकर पंजाब केसरी समाचार-पत्र को लाखों पाठकों की पसंद बना दिया। उन्होंने लाखों पाठकों तक अपनी उत्कृष्ट लेखनी से अपने विचारों को पहुँचाया जिससे पंजाब केसरी सर्वाधिक प्रकाशित होनेवाला समाचार-पत्र बन गया। उन्होंने न केवल नई प्रतिभाओं को गढ़ा वरन् हर एक विषय को अपने अखबार के साँचे में ढाला। राजनीति, धर्म, साहित्य, फिल्म, कला कोई भी विषय उनसे अछूता नहीं रहा। इसलिए यह पुस्तक उन पाठकों को समर्पित है, जो उनकी कलम के चलते उनसे जुड़े रहे।
राष्ट्रीय भाव की पत्रकारिता को मुखर स्वर देनेवाले एक संकल्पित व समर्पित समाजधर्मी की जीवनयात्रा है यह कृति।"

Book details

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100% OriginalGenuine copy from Prabhat Prakashan
Format
Paperback
Publisher
Prabhat Prakashan
Weight
350 grams
ISBN-13
9789390366606
Pages
288
Reading time
~10 hrs
Age
18+
Country of origin
India
Dimensions
14 × 22 cm
Language
Hindi

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