It'S My Life
Author:
Ashwini KumarPublisher:
Prabhat PrakashanLanguage:
HindiCategory:
General-non-fiction0 Ratings
Price: ₹ 560
₹
700
Available
"किसी की आत्मकथा कोई दूसरा नहीं लिख सकता क्योंकि किसी दूसरे द्वारा लिखी आत्मकथा संवेदनाओं और भावनाओं से न्याय नहीं कर सकती। इसलिए पत्रकार और संपादक अश्विनी कुमारजी ने आत्मकथा लिखने का काम 2019 में ही शुरू कर दिया था, जिसका प्रकाशन पंजाब केसरी दिल्ली के प्रथम पन्ने पर क्रमशः होने लगा था। रोगग्रस्त होने के कारण उनके पास समय कम था; वे जल्दी-से-जल्दी इसे पूरा कर लेना चाहते थे। उनके निधन के कारण उनकी आत्मकथा की कई शृंखलाएँ प्रकाशित नहीं हो पाई थीं। कैंसर से जूझते हुए अस्पताल के बिस्तर पर भी वह अपने लेखों को डिक्टेट कराते रहते थे।
अब अश्विनी कुमारजी की आत्मकथा को पुस्तक का रूप दिया गया है ताकि उनकी यादों को चिरस्मरणीय रखा जा सके। उन्होंने अपने संपादन काल में अपनी संपादकीय कुशलता का परिचय देकर पंजाब केसरी समाचार-पत्र को लाखों पाठकों की पसंद बना दिया। उन्होंने लाखों पाठकों तक अपनी उत्कृष्ट लेखनी से अपने विचारों को पहुँचाया जिससे पंजाब केसरी सर्वाधिक प्रकाशित होनेवाला समाचार-पत्र बन गया। उन्होंने न केवल नई प्रतिभाओं को गढ़ा वरन् हर एक विषय को अपने अखबार के साँचे में ढाला। राजनीति, धर्म, साहित्य, फिल्म, कला कोई भी विषय उनसे अछूता नहीं रहा। इसलिए यह पुस्तक उन पाठकों को समर्पित है, जो उनकी कलम के चलते उनसे जुड़े रहे।
राष्ट्रीय भाव की पत्रकारिता को मुखर स्वर देनेवाले एक संकल्पित व समर्पित समाजधर्मी की जीवनयात्रा है यह कृति।"
ISBN: 9789390366606
Pages: 288
Avg Reading Time: 10 hrs
Age: 18+
Country of Origin: India
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- Description: दूर नीड़ के पक्षी' जय प्रकाश पांडेय का प्रथम कहानी-संग्रह है, जिसमें पच्चीस कहानियाँ संकलित हैं। सभी कहानियों का विषय पृथक्-पृथक् है। इन कहानियों में लेखक ने हिंदी साहित्य के कुछ अनछुए विषयों को चुना है। 'दूर नीड़ के पक्षी ' पुस्तक की प्रतिनिधि रचना है, जिसमें टूटते, पारिवारिक नाते-रिश्ते और संस्कारों के बदलाव की आहट है। अरमान, पुनर्विवाह, जीवन-संघर्ष, रेत का साम्राज्य जैसी कहानियाँ मानव-मन की अनेक परतों को प्रतिबिंबित करती हैं। यंत्रवत् बाजार व्यवस्था, प्लेटिनम जुबली, बर्थ नंबर पच्चीस, आवास जैसी कहानियाँ वर्तमान सामाजिक परिस्थितियों को उसके वास्तविक स्वरूप में उजागर करती हैं। अधूरा समर्पण, बिंदास और बदलाव जैसी कहानियों में स्त्री-पुरुषों की ग्रंथियों, उनके संबंधों, परंपप और बदलते परिवेश की बयार को महसूस करने की कोशिश है। लाल अंगारे और दाखिला कहानी में मध्यम वर्ग की छोटी-छोटी खुशियों के लिए जीवन-रूपी सागर में डूबने-उतारने का सजीव और मार्मिक चित्रण है। कहानी-संग्रह की सभी कहानियों में समाज और व्यक्ति के बीच हिचकोले खाता जीवन अपने विविध रूपों और अनेकानेक विरोधाभासों में रूपायित हुआ है। हर आयु वर्ग के पाठकों के लिए एक पठनीय एवं मनोरंजक कहानी-संग्रह ।
Manusmriti
- Author Name:
Dr. Ramchandra Verma Shastri
- Rating:
- Book Type:

- Description: मनुष्य ने जब समाज व राष्ट्र्र के अस्तित्व तथा महत्त्व कौ मान्यता दी, तो उसके कर्तव्यों और अधिकारों की व्याख्या निर्धारित करने तथा नियमों के अतिक्रमण करने पर दण्ड व्यवस्था करने की भी आवश्यकता उत्पन्न हुई । यही कारण है कि विभिन्न युगों में विभिन्न स्मृतियों की रचना हुई, जिनमें मनुस्मृति को विशेष महत्व प्राप्त है । मनुस्मृति में बारह अध्याय तथा दो हज़ार पांच सौ श्लोक हैं, जिनमें सृष्टि की उत्पत्ति, संस्कार, नित्य और नैमित्तिक कर्म, आश्रमधर्म, वर्णधर्म, राजधर्म व प्रायश्चित्त आदि अनेक विषयों का उल्लेख है। ब्रिटिश शासकों ने भी मनुस्मृति को ही आधार बनाकर ' इण्डियन पेनल कोड ' बनाया तथा स्वतन्त्र भारत की विधानसभा ने भी संविधान बनाते समय इसी स्मृति को प्रमुख आधार माना । व्यक्ति के सर्वतोमुखी विकास तथा सामाजिक व्यवस्था को सुनिश्चित रूप देने व व्यक्ति की लौकिक उन्नति और पारलौकिक कल्याण का पथ प्रशस्त करने में मनुस्मृति शाश्वत महत्त्व का एक परम उपयोगी शास्त्र मथ है । वास्तव में मनुस्मृति भारतीय आचार-संहिता का विश्वकोश है, जो भारतीय समाज के लिए अत्यन्त उपयोगी सिद्ध होगा।
Hindutva Ka Mohini Mantra
- Author Name:
Badri Narayan
- Book Type:

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Description:
भारत के वर्तमान सामाजिक-राजनीतिक परिदृश्य में दलित एक बड़ी चुनावी ताक़त के रूप में उभरकर आए हैं और लगभग सभी राजनीतिक दलों के लिए यह अनिवार्य हो गया है कि वे उन्हें अपने पाले में लाने की कोशिश करें।
‘हिन्दुत्व का मोहिनी मंत्र’ पुस्तक हिन्दुत्ववादी शक्तियों द्वारा दलितों को अपनी तरफ़ खींचने की मोहक रणनीतियों का विखंडन दिखाती है कि कैसे ये ताक़तें दलित जातियों के लोकप्रिय मिथकों, स्मृतियों और किंवदन्तियों को खोजकर उनकी हिन्दुत्ववादी व्याख्या करती हैं। उत्तर प्रदेश और बिहार में किए गए मौलिक शोध पर आधारित इस पुस्तक में बताया गया है कि दलित नायकों को मुस्लिम आक्रान्ताओं के विरुद्ध लडऩेवाले योद्धाओं के रूप में प्रस्तुत करते हुए हिन्दुत्ववादी शक्तियाँ उन्हें हिन्दू धर्म और संस्कृति के रक्षकों के रूप में पुनर्व्याख्यायित करती हैं, या फिर उन्हें राम का अवतार बताकर दलित मिथकों को एक बड़े और एकीकृत हिन्दू महावृत्तान्त से जोड़ने का प्रयास करती हैं। लेखक ने पुस्तक में उत्तर भारत के ग्रामीण समाज में ‘पॉपुलर’ की संरचना और उसमें पिरोए गए साम्प्रदायिक तत्त्वों को भी समझने की कोशिश की है। सबसे दिलचस्प तथ्य पुस्तक में यह निकलकर आता है कि दलितों के अतीत की हिन्दुत्ववादी पुनर्व्याख्या को दलित समुदाय एक शक्तिशाली पूँजी के रूप में लेते हैं जिसे वे एक तरफ़ ऊपरी जातियों में अपनी स्वीकार्यता बढ़ाने और दूसरी तरफ़ सवर्ण प्रभुत्व को क्षीण करने के लिए साथ-साथ इस्तेमाल करते हैं। इतिहास, राजनीति, नृतत्त्वशास्त्र और दलित अध्ययन में रुचि रखनेवाले छात्रों, शोधार्थियों और राजनीतिक कार्यकर्ताओं के लिए समान रूप से उपयोगी पुस्तक।
Digital Revolutionaries Who Have Change The World
- Author Name:
Kalyani Mookherji
- Book Type:

- Description: The invention of the transistor, the earliest computing machines, the World Wide Web and its evolution into the internet marked the high points of this part of the digital revolution. These inventions changed the way people worked, studied, and sought information and entertainment. These inventions transformed entertainment, socialising, commerce, politics, and studies in ways that would hardly have been conceivable a generation ago. The following central stage in the digital revolution was the arrival of mobile devices, beginning with the cellphone in 1973. Eventually, this led to the development of tablets and smartphones, which feature significant integration with the internet and online products and services. This has, in turn, opened up the scope for business, networking – both social and professional – and entertainment as never before. Not surprisingly, a new breed of technology experts and entrepreneurs has sprung up to take advantage of this dynamic new medium. Greatest Digital Revolutionaries offers a brief glimpse into the work, achievements, and plans of individuals who have made significant contributions to e-commerce, information technology, and related fields.
Chala, Karodpati Houya!
- Author Name:
Anil Patil
- Book Type:

- Description: कुटुंबाचा गाडा प्रगतीकडे न्यायचा असेल, तर घरातल्या प्रत्येक महिलेकडे आर्थिक शहाणपण असलं पाहिजे. ती आर्थिक साक्षर झाली पाहिजे. म्हणजेच आर्थिक शिस्तीबरोबरच हाती येणाऱ्या पैशाचं व्यवस्थापन करण्याची शास्त्रशुद्ध कला तिच्याकडे असायला हवी. ती अंगी बाणायची असेल तर अनिल पाटील लिखित ‘चला, करोडपती होऊया' हे पुस्तक प्रत्येक महिलेनं वाचलंच पाहिजे. हे पुस्तक महिलांना आर्थिकदृष्ट्या साक्षर तर बनवतंच पण त्याचबरोबरीनं अर्थसाक्षर झालेल्या महिलांना श्रीमंतीची वाटही दाखवतं. मुलांच्या शिक्षणपासून वृद्धापकाळातील आधारापर्यंतचं आर्थिक नियोजन कसं करावं आणि हाती येणारा पैसा कसा वाढवला जाऊ शकतो याची शास्त्रशुद्ध परंतु सहज समजेल अशा सोप्या पद्धतीने माहिती देणारं हे पुस्तक आपल्या संग्रही असायलाच हवं.
Bharat Mein Darshanshastra
- Author Name:
Mrinal Kanti Gangopadhyay
- Book Type:

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Description:
‘दर्शनशास्त्र : पूर्व और पश्चिम’ ग्रन्थमाला की यह तीसरी पुस्तक है, जिसके लेखक डॉ. मृणालकान्ति गंगोपाध्याय की गणना भारतीय संस्कृति और दर्शन के विशिष्ट विद्वानों में की जाती है।
ऋग्वैदिक काल से लेकर ईसा की पहली शताब्दी तक लगभग डेढ़ हज़ार वर्ष के दौरान भारतीय दर्शन में ईश्वरवादी-विचारवादी चिन्तन से लेकर लोकायत जैसी भौतिकवादी दर्शनिक धाराएँ देखने को मिलती हैं। प्रस्तुत पुस्तक में विद्वान लेखक ने इन समस्त धाराओं का मन्थन करते हुए भारतीय दर्शन की प्रकृति और अन्तर्वस्तु का यथार्थवादी परिचय दिया है।
पुस्तक की प्रस्तावना में भारतीय दर्शन की कुछ मूलभूत विशेषताओं की सामान्य विवेचना की गई है, और उसके पश्चात् प्रमुख सम्प्रदायों—उनके प्रणेताओं और ग्रंथों के साथ-साथ उनके बुनियादी सिद्धान्तों की चर्चा की गई है। भारतीय विचारकों ने दर्शन की महत्त्वपूर्ण समस्याओं पर अपने-अपने तरीक़े से जो तर्क-वितर्क किया था, उसकी विवेचना भी प्रस्तुत पुस्तक में है।
निस्सन्देह इस विषय पर अनेक पाठ्य पुस्तकें उपलब्ध हैं, परन्तु डॉ. गंगोपाध्याय ने वस्तुनिष्ठता बनाए रखने के लिए पुरानी लीक पीटने के स्थान पर विवेचना की नई विधि अपनाई है और भारतीय दर्शन को, पांडित्य का प्रदर्शन किए बिना, ऐसे सरल शब्दों में प्रस्तुत किया है कि यह पुस्तक उन सामान्य पाठकों के लिए भी उपयोगी हो गई है, जिनमें से कुछ के लिए, सम्भव है, यह अपने विषय की पहली पुस्तक हो। तथापि, हम आशा करते हैं कि दर्शन के विद्यार्थियों के लिए भी यह पुस्तक विचारोत्तेजक और ज्ञानवर्द्धक सिद्ध होगी।
Shrikrishnacharitra
- Author Name:
Bankim Chandra Chatterjee
- Book Type:

- Description: श्रीकृष्णचरित्र बंकिमचन्द्र चट्टोपाध्याय की मूलतः बांग्ला में इसी नाम से रचित कालजयी कृति का अनुवाद है जिसमें भगवान श्रीकृष्ण के वास्तविक चरित्र को ऐतिहासिक, दार्शनिक और सांस्कृतिक दृष्टिकोण से प्रस्तुत किया गया है। गहन शोध और तर्कपूर्ण विश्लेषण के साथ, बंकिमचन्द्र ने श्रीकृष्ण को केवल एक पौराणिक नायक के रूप में नहीं बल्कि एक आदर्श मानव, दूरद्रष्टा राजनयिक और अलौकिक ज्ञान-सम्पन्न दार्शनिक के रूप में चित्रित किया है। लगभग 130 वर्ष पहले रची गई इस पुस्तक में भगवान श्रीकृष्ण के जीवन को कालानुक्रम में प्रस्तुत किया गया है। महाभारत, प्रमुख पुराणों तथा अन्य धार्मिक सन्दर्भों के प्रामाणिक उद्धरणों से समृद्ध यह पुस्तक प्राचीन और मान्य ग्रन्थों के आधार पर श्रीकृष्ण के जीवन, व्यक्तित्व-कृतित्व और उनकी शिक्षाओं को पुनर्परिभाषित करती है, जो भारतीय संस्कृति और नैतिकता के मूल्यों को सहजता से स्पष्ट करती हैं। इस कालजयी रचना की सामग्री तथा मूल शैली को बनाए रख कर, अपरिहार्य संशोधनों के साथ, इस अनूदित संस्करण को आधुनिक पाठकों के लिए अधिक प्रासंगिक बनाया गया है। निस्सन्देह यह कृति साहित्य, इतिहास, अध्यात्म, दर्शन और भारतीय संस्कृति में रुचि रखने वालों के लिए नितान्त पठनीय और अवश्य संग्रहणीय है।
Devrukhchya Savitribai
- Author Name:
Abhijit Hegshetye
- Book Type:

- Description: इंदिराबाई हळबें यांच्या आयुष्यात बरेच योगायोग आले. त्यातून त्यांच्या जीवनाला एक अनोखे वळण लागत गेले. गांधीविचाराच्या, सेवादलाच्या, सोशालिस्ट विचाराच्या हळुवार लाटा त्यांच्या जीवनाला स्पर्श करत गेल्या; पण त्यांचे वेगवेगळ्या वेळचे निर्णय त्यांचे स्वत:चे होते. 1940 आणि 1950 ही दोन दशके त्यांच्या जीवनात अनेक उलथापालथी होत राहिल्या. त्यात यत्किंचितही खचून न जाता स्वत:ला सावरण्याचे साहस हे त्यांचे होते. ते उद्भवले त्यांच्या आत्मबळातून आणि सद्सदविवेकातून, त्यांच्या मानव- वात्सल्यातून आणि कार्यश्रद्धेतून. म्हणून त्यांचा स्वत:च्या आयुष्याला नवे वळण देणारा प्रत्येक निर्णय अगदी सहजासहजी, ऑरगॅनिकली, जितक्या सहजतेने झाडांना पालवी फुटते, तितक्या खळखळाटाशिवायच्या नि:शब्दतेत घेतला गेला. ही त्यांची किमया, इंदिराबाईंना त्यांच्या काळातील स्त्रीवादी चळवळीसाठी एक अत्यंत महत्त्वाचा आदर्श बनवते, जणू त्या देवरुखच्या सावित्रीबाईच! एका कर्तृत्ववान स्त्रीची ही प्रेरक गाथा अभिजित हेगशेट्ये यांनी तितक्याच ताकदीने आपल्यासमोर ठेवली आहे. ती प्रत्येकाने एकदा तरी वाचायलाच हवी. पद्मश्री डॉ. गणेश देवी भाषाशास्त्रज्ञ आणि साहित्य समीक्षक Devrukhchya Savitribai | Abhijeet Hegshetye देवरुखच्या सावित्रीबाई | अभिजित हेगशेट्ये संपादन : विलास पाटील
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