🇮🇳 India’s home-grown full-stack ecosystem for Publishers, Authors, Writers, and Readers. 🎊🎊 Celebrate Your Language, Authors from Your Own Land, with Rachnaye!!! 🎊🎊 Enjoy 🎧 Audiobooks at Rachnaye, download the Rachnaye App from Play Store or App Store

Asarkari Prashasan : Nayi Soch, Nayi Drishti

Ships within 48 Hours

Free Shipping in India on orders above Rs. 1100


About the book

स्वतंत्रता के बाद से ही सरकारें शासन में जन-सहभागिता पर जोर देती रही हैं। परंतु परिणाम आशाजनक नहीं रहे हैं। इस संबंध में भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारी श्री भरतलाल मीणा द्वारा किए गए प्रयोग एक मिसाल हैं। उन्होंने कर्नाटक में सहायक आयुक्त के रूप में अपनी पहली नियुक्ति के दौरान रायचूर जिले में स्थित लिंगसुगुर तहसील में कष्टसाध्य पेयजल की समस्या का समाधान जनता के साथ मिलकर किया। उन्होंने विभिन्न सरकारी विभागों में सूचना तकनीक का बेहतर उपयोग किया। श्री भरतलाल मीणा की जिजीविषा ही रही कि आज राज्य में जन-सहभागिता ने एक आंदोलन का रूप ले लिया है। उनके द्वारा विभिन्न विभागों में क्रांतिकारी पहल की गई, जिनका इस पुस्तक में समावेश किया गया है। लगभग तीन दशक पूर्व श्री मीणा द्वारा प्रशासन में जिन नए प्रयोगों की शुरुआत की गई थी, आज केंद्र और राज्य की सरकारें उन्हीं प्रयोगों को लागू कर रही हैं, जैसे स्मार्ट सिटी, प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण, सॉयल हेल्थ कार्ड, सोशल ऑडिट, बायोमेट्रिक अटेंडेंस, आदि। सरकारी सेवा में लगे अधिकारियों को इस पुस्तक से अनेक प्रशासनिक समस्याओं के समाधान का मार्ग मिल सकता है। पुस्तक की एक और विशेषता यह है कि श्री मीणा ने प्रशासनिक अधिकारियों को ‘मैं’ की भावना से ऊपर उठकर ‘हम’ की भावना से काम करने की बात कही है। यह प्रशासनिक अधिकारी की सफलता का एक सशक्त और समझदारी का मार्ग है। यह पुस्तक उन लोगों के लिए भी उपयोगी है, जो प्रबंधन में कुछ कर दिखाना चाहते हैं।

Read more

₹ 500

400 20% off

Available

Rachnaye membership

Pick a membership and see exactly what it gets you

  • 15 Free Deliveries
  • 1 Free Book up to ₹500 MRP

Format

Frequently bought together
Asarkari Prashasan : Nayi Soch, Nayi Drishti This book ₹400
Innovations in Adminstration Bharat Lal Meena ₹500
Heeron Ki Kheti Russell H. Conwell ₹95
3 books selected ₹1,095 ₹995

100% Original

Fast Dispatch

Secure Payment

About the Book

स्वतंत्रता के बाद से ही सरकारें शासन में जन-सहभागिता पर जोर देती रही हैं। परंतु परिणाम आशाजनक नहीं रहे हैं। इस संबंध में भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारी श्री भरतलाल मीणा द्वारा किए गए प्रयोग एक मिसाल हैं। उन्होंने कर्नाटक में सहायक आयुक्त के रूप में अपनी पहली नियुक्ति के दौरान रायचूर जिले में स्थित लिंगसुगुर तहसील में कष्टसाध्य पेयजल की समस्या का समाधान जनता के साथ मिलकर किया। उन्होंने विभिन्न सरकारी विभागों में सूचना तकनीक का बेहतर उपयोग किया। श्री भरतलाल मीणा की जिजीविषा ही रही कि आज राज्य में जन-सहभागिता ने एक आंदोलन का रूप ले लिया है। उनके द्वारा विभिन्न विभागों में क्रांतिकारी पहल की गई, जिनका इस पुस्तक में समावेश किया गया है। लगभग तीन दशक पूर्व श्री मीणा द्वारा प्रशासन में जिन नए प्रयोगों की शुरुआत की गई थी, आज केंद्र और राज्य की सरकारें उन्हीं प्रयोगों को लागू कर रही हैं, जैसे स्मार्ट सिटी, प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण, सॉयल हेल्थ कार्ड, सोशल ऑडिट, बायोमेट्रिक अटेंडेंस, आदि।
सरकारी सेवा में लगे अधिकारियों को इस पुस्तक से अनेक प्रशासनिक समस्याओं के समाधान का मार्ग मिल सकता है। पुस्तक की एक और विशेषता यह है कि श्री मीणा ने प्रशासनिक अधिकारियों को ‘मैं’ की भावना से ऊपर उठकर ‘हम’ की भावना से काम करने की बात कही है। यह प्रशासनिक अधिकारी की सफलता का एक सशक्त और समझदारी का मार्ग है। यह पुस्तक उन लोगों के लिए भी उपयोगी है, जो प्रबंधन में कुछ कर दिखाना चाहते हैं।

Book details

Fast dispatchShips within 48 hours
Secure paymentOnline, or cash on delivery on eligible orders
100% OriginalGenuine copy from Prabhat Prakashan
Format
Hardbound
Publisher
Prabhat Prakashan
Publication year
2018
Weight
344 grams
ISBN-13
9789352665495
Pages
304
Reading time
~10 hrs
Age
18+
Country of origin
India
Dimensions
10 × 10 cm
Language
Hindi

Recommended for you

Customer reviews

Be the first to write a review

Read this one? Tell other readers what you thought about the story, the translation and the print.

Offers

Loading offers…

whatsapp