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Book Details
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ISBNshivna20261
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Pages124
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Avg Reading Time4 hrs
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Age11-18 yrs
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Country of OriginIndia
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- Description: 'शिलाक्षर बन मेरे मन' उपन्यास एक साथ स्त्री-संघर्ष और लड़ते-मरते कृषक समाज की आधुनिक महागाथा है। बिहार के 1967 के विश्व-व्यापी सूखे और अकाल की परिघटनाओं को लेकर मीना झा ने बहुत ही जीवंत और विश्वसनीय ढंग से इस उपन्यास के ताने-बाने को बुना है। अन्नदायिनी धरती की कोख में दरारें पड़ी हैं, खेत में खड़ी फसलें जल गई हैं या उसमें दाने नहीं हैं, नदियों का पानी सूख गया है, मछलियों के जीवन पर भी संकट आ गए हैं और छोटे बच्चों को स्कूलों में मिलने वाली खिचड़ी दुर्लभ पकवान से भी बढ़कर हो गई है और उसी समय सरकारी राशन की कालाबाज़ारी भी चरम पर—ऐसे अमानुषिक अकालबेला के जीवन का चित्रण कथाकार और यात्रा वृत्तांत की सिद्ध लेखिका मीना झा ने इस तरह किया है कि आप उस जीवन के तल में उतरने से खुद को रोक नहीं सकते। यहाँ सूखे और अकाल से जूझते लोगों की भीड़ से मीना झा ने कुछ ऐसे स्त्री-पुरुष, युवक-युवतियों और बच्चों को अपने कैनवस पर उतारा है जो उस समाज के प्रतिनिधि चरित्र के रूप में सामने आते हैं और जिनके दीर्घ काल तक पाठकों के मन-मस्तिष्क में टिके रहने की प्रबल संभावना है। मिथिला समाज के मिट्टी-पानी में लिथड़े ये पात्र महज़ औपन्यासिक पात्र नहीं, उस समाज के प्रतिनिधि चरित्र हैं—नागार्जुन के 'बलचनमा' और 'वरुण के बेटे' के चरित्रों की तरह। मास्टर काका, विजय, बुढिय़ा दादी, शंभू, रागिनी तक को आप विस्मृत नहीं कर पाएँगे; प्रधान नायिका कुसुम की तो बात ही मत कीजिए। बेहद पठनीय यह उपन्यास जितना ही जीवंत और चाक्षुष है, उतना ही विचारोत्तेजक भी। —श्रीधरम
Chokher Bali
- Author Name:
Rabindranath Thakur
- Book Type:

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Description:
ईर्ष्या और प्रेम, दोनों में ही स्त्री का अन्तर्संघर्ष शरद पूर्णिमा की ज्योत्स्ना में उद्वेलित समुद्र के दुर्दमनीय ज्वार की भाँति होता है, लेकिन यदि उसे मर्यादा के पिंजरे में बन्द कर दिया जाए, तो स्त्री की आत्म-प्रताड़णा भी उतनी ही प्रचंड हो उठती है। पुरुष इन्हीं स्थितियों के बीच कहीं खिलौना बनता है, कहीं स्त्री का भाग्य-निर्णायक। परिवार और समाज स्त्री और पुरुष को सँभाले अपनी मान्यताओं के झोंकों से जीवन की नाव को खेते रहते हैं। जीवन यों ही गतिमान रहता है...
जब रवीन्द्रनाथ उपन्यासों में अपने काल के समाज को सँजो रहे थे, तब स्त्री अपने व्यक्तित्व के प्रति सजग होना प्रारम्भ ही हुई थी। ‘चोखेर बालि’ को पढ़ने से इस बात की पुष्टि हो जाएगी।
Tapas
- Author Name:
Varun Kumar Pandey
- Book Type:

- Description: तापस' केवल एक उपन्यास नहीं है; यह व्यक्ति के अंतःकरण के समूल परिवर्तन की एक यात्रा है। यह सामाजिक, सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विकास के गहरे संगम की खोज करता है, यह दरशाते हुए कि कैसे ये तत्त्व आपस में मिलकर युवाओं के बीच एक गहरे उद्देश्य और जुड़ाव की भावना को बढ़ावा दे सकते हैं। यह उपन्यास वर्तमान समय की पृष्ठभूमि पर आधारित है, जहाँ परंपरा नवाचार से मिलती है और प्राचीन ज्ञान समकालीन चुनौतियों का सामना करता है। कहानी रवि और सीमा पर केंद्रित है, जो युवा और अत्यधिक सफल व्यवसायी हैं। उनकी यात्रा के माध्यम से पाठकों को यह देखने का अवसर मिलता है कि कैसे सांस्कृतिक विरासत, आध्यात्मिक खोज और सामाजिक सहभागिता व्यक्तियों को अपने जीवन और समुदायों को बदलने की शक्ति दे सकती हैं। रवि के अनुभव एक सार्वभौमिक पहचान और संतोष की खोज को दरशाते हैं, जो इस विश्वास पर आधारित हैं कि सच्ची वृद्धि तब होती है, जब किसी की व्यक्तिगत आकांक्षाएँ बड़े हितों के साथ मेल खाती हैं। यह उपन्यास आपस में जुड़े उत्थान के सार को पकड़ने का प्रयास करता है, यह दिखाते हुए कि व्यक्तिगत विकास को उन सांस्कृतिक और आध्यात्मिक आयामों से अलग नहीं किया जा सकता, जो हमारे जीवन को आकार देते हैं।
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