Bahurangi Madhupuri
(0)
Author:
Rahul SankrityayanPublisher:
Rajkamal Prakashan SamuhLanguage:
HindiCategory:
Contemporary-fiction₹
250
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राहुल सांकृत्यायन ने हिमालय के ऊपरी क्षेत्रों में यात्राएँ करके वहाँ के धार्मिक और सांस्कृतिक जीवन को पाठकों के लिए सुलभ किया। अपने यात्रा-वृत्तान्तों और अन्य पुस्तकों में उसके सप्रमाण और सुदीर्घ विवरण दिए, जिससे हिन्दी और पाठकों के ज्ञानकोष में उल्लेखनीय अभिवृद्धि हुई। लेकिन हिमालय के निचले तराई क्षेत्र के जीवन-जगत को भी उन्होंने बहुत नजदीक से देखा था। यहाँ हो रहे सामाजिक तथा सांकृतिक बदलावों और परिवर्तनशील वर्तमान की ये छवियाँ अकसर उनकी कहानियों में प्रकट हुई हैं। ‘बहुरंगी मधुपुरी’ में शामिल कहानियों को आप उसी के उदाहरण के रूप में पढ़ सकते हैं। मधुपुरी जिसे उन्होंने विलासपुरी भी कहा है, वह स्थान है जहाँ अंग्रेज गर्मियों के दिनों में रहने और काम करने जाते थे। उन्होंने उन क्षेत्र को अपने ढंग से विकसित करना शुरू किया था, फलतः वहाँ के मूल निवासियों से भी उनका सीधा सम्पर्क हुआ। ये कहानियाँ इसी गतिशील सामाजिकी को सामने लाती हैं। ये सिर्फ कहानियाँ नहीं हैं, इनमें एक तरह का समाजशास्त्रीय विश्लेषण भी है। अंग्रेजों की देखा-देखी देशी राजे-महाराजे भी इस राह चले, तो कहानियों में वे भी आते हैं, और स्थानीय लोग भी जिन पर इन गतिविधियों का सकारात्मक प्रभाव भी पड़ रहा था, और नकारात्मक भी।
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राहुल सांकृत्यायन ने हिमालय के ऊपरी क्षेत्रों में यात्राएँ करके वहाँ के धार्मिक और सांस्कृतिक जीवन को पाठकों के लिए सुलभ किया। अपने यात्रा-वृत्तान्तों और अन्य पुस्तकों में उसके सप्रमाण और सुदीर्घ विवरण दिए, जिससे हिन्दी और पाठकों के ज्ञानकोष में उल्लेखनीय अभिवृद्धि हुई।
लेकिन हिमालय के निचले तराई क्षेत्र के जीवन-जगत को भी उन्होंने बहुत नजदीक से देखा था। यहाँ हो रहे सामाजिक तथा सांकृतिक बदलावों और परिवर्तनशील वर्तमान की ये छवियाँ अकसर उनकी कहानियों में प्रकट हुई हैं। ‘बहुरंगी मधुपुरी’ में शामिल कहानियों को आप उसी के उदाहरण के रूप में पढ़ सकते हैं।
मधुपुरी जिसे उन्होंने विलासपुरी भी कहा है, वह स्थान है जहाँ अंग्रेज गर्मियों के दिनों में रहने और काम करने जाते थे। उन्होंने उन क्षेत्र को अपने ढंग से विकसित करना शुरू किया था, फलतः वहाँ के मूल निवासियों से भी उनका सीधा सम्पर्क हुआ। ये कहानियाँ इसी गतिशील सामाजिकी को सामने लाती हैं।
ये सिर्फ कहानियाँ नहीं हैं, इनमें एक तरह का समाजशास्त्रीय विश्लेषण भी है। अंग्रेजों की देखा-देखी देशी राजे-महाराजे भी इस राह चले, तो कहानियों में वे भी आते हैं, और स्थानीय लोग भी जिन पर इन गतिविधियों का सकारात्मक प्रभाव भी पड़ रहा था, और नकारात्मक भी।
Book Details
-
ISBN9789348157133
-
Pages224
-
Avg Reading Time7 hrs
-
Age18+ yrs
-
Country of OriginIndia
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