Aaj Ke Ateet
Author:
Bhisham SahniPublisher:
Rajkamal Prakashan SamuhLanguage:
HindiCategory:
Biographies-and-autobiographies0 Ratings
Price: ₹ 319.2
₹
399
Available
भीष्म साहनी की कथा-शैली से जो बात सबसे पहले ध्यान खींचती है, वह ये कि हम एक ऐसे लेखक के पाठ के साथ हैं, जो लेखक बाद में है, पहले साथ बैठा हुआ मित्र है। ऐसा मित्र जो आपको कम-से-कम चौंकाते हुए, बल्कि शायद इस बात का ध्यान रखते हुए, अपनी बात कहता है कि उसकी कोई बात अगर आपके साथ कुछ करे तो आपके व्यक्तित्व की सबसे भीतरी तहों में वह सबसे पहले घटित हो।
'आज के अतीत’ में उनका यह मित्र भाव चरम पर है, और संयोग यह कि यहाँ वे अपने बारे में बता रहे हैं जो हमारा दोहरा लाभ है। हम अपने प्रिय लेखक को जान रहे हैं और उसकी कला के जादुई दायरे में ख़ुद को भी नवीकृत कर रहे हैं।
इस आत्मकथा से हम उनके जीवन के साथ-साथ उनकी कई कृतियों की रचना-प्रक्रिया से भी अवगत होंगे, जानेंगे कि 'तमस’ कैसे बना, 'हानूश’ ने आकार कैसे लिया, और किस तरह भीष्म जी ने बतौर लेखक अपने समय, समाज, साथियों और इतिहास को देखा-समझा।
इसमें उनके मास्को प्रवास का ब्यौरा भी आता है जहाँ वे काफ़ी समय रहे, और अनुवादक के रूप में कई पुस्तकों के अनुवाद हम तक पहुँचाए। यह हिस्सा ख़ास तौर पर पठनीय इसलिए है कि यहाँ हमें साम्यवादी सोवियत संघ के भीतर जारी उस प्रक्रिया की जानकारी भी मिलती है, जो धीरे-धीरे सोवियत संघ के पतन की तरफ़ गई।
'आज के अतीत’ से हमें उनके इप्टा के दौर और बड़े भाई बलराज साहनी के साथ उनके रिश्तों के बारे में भी बहुत कुछ जानने को मिलता है।
हिन्दी आत्मकथाओं में ईमानदारी और पारदर्शी सहजता को स्थापित करनेवाली एक अनूठी रचना।
ISBN: 9788126728640
Pages: 310
Avg Reading Time: 10 hrs
Age: 18+
Country of Origin: India
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जाने कितना जीवन,
पीछे छूट गया अनजाने में
अब तो कुछ क़तरे हैं बाक़ी,
साँसों के पैमाने में...
इतना जान लिया तो यारो,
कैसी बन्दिश उनवाँ की
अपना-अपना रंग भरेगा,
हर कोई अफ़साने में....!!
Dekhna
- Author Name:
Akhilesh 'Bhopal'
- Book Type:

- Description: उन दिनों मैं John Berger की किताब ‘Ways of Seeing’ पढ़ रहा था और इस पढ़ने के दौरान ही मुझे यह विचार आया कि लेखकों, कवियों का देखना बहुत अलग है, साथ ही इस बात पर भी ध्यान गया कि शब्द और चित्र का नाता भी गहरा है तो क्यों न इसे दर्ज किया जाए। जब भी हम कोई शब्द पढ़ते हैं तो उसका एक चित्र मन में उभरता है और जब भी हम कोई चित्र देख रहे होते हैं तब उसे मन के किसी गहरे कोने में शब्द से समझ रहे होते हैं। एक चित्र शब्द तक ले जाता है और एक शब्द चित्र में उभरता है। हर व्यक्ति का देखना विशिष्ट है, किन्तु हर व्यक्ति उसे अभिव्यक्त नहीं कर पाता। अपने इस देखने के प्रति वो इसीलिए इतना जागरूक भी नहीं होता। लेखक चूँकि अपने माध्यम का खिलाड़ी होता है और उसमें यह क्षमता दूसरों से अधिक होती है कि वो अपने देखे को व्यक्त कर सके। यह देखना इतना विशिष्ट है कि उसका सामान्यीकरण किया ही नहीं जा सकता। हर व्यक्ति के पास देखा हुआ रहस्य हमेशा रहस्य की तरह इसलिए भी मौजूद रहता है कि उसे किसी दूसरे माध्यम में कह पाना लगभग असम्भव हो जाता है। फिर भी हम इस कोशिश में रहते ही हैं कि देखा हुआ सच लिखे हुए सच में बदल जाए। यह कितने प्रतिशत हो पाता है, यह कहना मुश्किल है, किन्तु यह लिखा हुआ सच अक्सर देखे हुए सच से ज़्यादा आकर्षक, ज़्यादा सम्प्रेषणीय हो जाता है। इस देखी हुई दुनिया के लिखित उद्घाटन पर इतना ज़रूर हुआ कि जो रहस्य किसी एक के देखने का था, वो अनेक के देखने का कारण बना। —प्रस्तावना से
Naye Daur Ki Ore
- Author Name:
Kishore Biyani
- Book Type:

- Description: नए दौर की ओर’ भारतीय ग्राहक तथा फ्यूचर ग्रुप, बिग बाजार एवं पैंटलून्स की किशोर बियानी के अपने शब्दों में लिखी कहानी है। एक मध्यवर्गीय परिवार में जनमे किशोर बियानी ने ‘स्टोन वॉश’ कपड़े को रिटेल व्यापारियों को बेचने से अपने व्यापारिक जीवन की शुरुआत की। कुछ ही वर्षों में पैंटलून्स, बिग बाजार, फूड बाजार, सेंट्रल और अन्य कई रिटेल मॉडल शुरू कर उन्होंने भारतीय रिटेल व्यापार को एक नया आयाम और नई दिशा दी। किशोर बियानी की कोशिश रही कि वे मुंबई के निवेशक से लेकर मेरठ के किसान तक की जेब में रखे हर नए पैसे को अपने रिटेल व्यापार की तरफ आकर्षित कर सकें। बियानी शॉपिंग मॉल बनाने एवं उपभोक्ता ब्रांड्स बनाने से बीमा बेचने तक, हर उस क्षेत्र में प्रवेश कर रहे हैं जहाँ उपभोक्ता है और पैसा खर्च करता है। ‘नए दौर की ओर’ में सिर्फ उनके शब्द ही नहीं हैं, बल्कि इस उतार-चढ़ाव की यात्रा में उनके मित्र, सहयोगी, पार्टनर, परिवार के सदस्यों की राय एवं संस्मरण शामिल हैं। ‘रिटेल के राजा’ के रूप में प्रसिद्ध किशोर बियानी अनेक पुरस्कारों एवं सम्मानों से विभूषित हुए हैं। पैंटलून्स को अमेरिका के नेशनल रिटेल फेडरेशन ने ‘अंतरराष्ट्रीय रिटेलर-2007’ से सम्मानित किया है। ‘नए दौर की ओर’ दृढ़ निश्चय, आत्मविश्वास एवं अदम्य इच्छाशक्ति से सपने सच करने की कहानी है और ‘नियमों को बदलो—मूल्यों को बनाए रखो’ मंत्र का सजीव चित्रण है।
Tumhari Auqat Kya Hai Piyush Mishra
- Author Name:
Piyush Mishra
- Book Type:

- Description: पीयूष मिश्रा जब मंच पर होते हैं तो वहाँ उनके अलावा सिर्फ़ उनका आवेग दिखता है। जिन लोगों ने उन्हें मंडी हाउस में एकल करते देखा है, वे ऊर्जा के उस वलय को आज भी उसी तरह गतिमान देख पाते होंगे। अपने गीत, अपने संगीत, अपनी देह और अपनी कला में आकंठ एकमेक एक सम्पूर्ण अभिनेता! अब वे फिल्में कर रहे हैं, गीत लिख रहे हैं, संगीत रच रहे हैं; और यह उनकी आत्मकथा है जिसे उन्होंने उपन्यास की तर्ज पर लिखा है। और लिखा नहीं; जैसे शब्दों को चित्रों के रूप में आँका है। इसमें सब कुछ उतना ही ‘परफ़ेक्ट’ है जितने बतौर अभिनेता वे स्वयं। न अतिरिक्त कोई शब्द, न कोई ऐसा वाक्य जो उस दृश्य को और सजीव न करता हो। मध्य प्रदेश के ग्वालियर में एक ‘अनयूजुअल’—से परिवार में जन्मा एक बच्चा चरण-दर-चरण अपने भीतर छिपी असाधारणता का अन्वेषण करता है; और क़स्बाई मध्यवर्गीयता की कुंठित और करुण बाधाओं को पार करते हुए धीरे-धीरे अपने भीतर के कलाकार के सामने आ खड़ा होता है। अपने आत्म के सम्मुख जिससे उसे ताज़िन्दगी जूझना है; अपने उन डरों के समक्ष जिनसे डरना उतना ज़रूरी नहीं, जितना उन्हें समझना है। इस आत्मकथात्मक उपन्यास का नायक हैमलेट, यानी संताप त्रिवेदी यानी पीयूष मिश्रा यह काम अपनी ख़ुद की कीमत पर करता है। यह आत्मकथा जितनी बाहर की कहानी बताती है—ग्वालियर, दिल्ली, एनएसडी, मुम्बई, साथी कलाकारों आदि की—उससे ज़्यादा भीतर की कहानी बताती है, जिसे ऐसी गोचर दृश्यावली में पिरोया गया जो कभी-कभी ही हो पाता है। इसमें हम दिल्ली के थिएटर जगत, राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय और मुम्बई की फ़िल्मी दुनिया के कई सुखद-दुखद पहलुओं को देखते हैं; एक अभिनेता के निर्माण की आन्तरिक यात्रा को भी। और एक संवेदनशील रचनात्मक मानस के भटकावों-विचलनों-आशंकाओं को भी। लेकिन सबसे बड़ी उपलब्धि इस किताब की इसका गद्य है। पीयूष मिश्रा की कहन यहाँ अपने उरूज़ पर है। पठनीयता के लगातार संकरे होते हिन्दी परिसर में यह गद्य खिली धूप-सा महसूस होता है।
Stephen Hawking
- Author Name:
Vivek Govilkar
- Book Type:

- Description: विज्ञानातील अत्युच्च श्रेणीचे कार्य, त्यांच्या दिव्यांगामुळे आलेल्या मर्यादांच्या पलीकडे जाऊन किंबहुना त्यावर विजय मिळवून त्यांनी प्राप्त केलेले दैदिप्यमान यश, जीवनाला सामोरी जाणारी त्यांची दुर्दम्य ऊर्जा, त्याचबरोबर त्यांना मिळालेली अमाप प्रसिद्धी आणि प्रसारमाध्यमांमध्ये त्यांचे झालेले कौतुक अशा अनेक अंगांनी स्टीव्हन हॉकिंग यांचे व्यक्तिमत्त्व असाधारण बनले होते. त्यांचे हे अनेकविध पैलू वाचकांसमोर आणण्यात लेखक विवेक गोविलकर यशस्वी झाले आहेत. कधीकधी अशा व्यक्तिमत्त्वाचे विभुतिकरण करणारे एक अवाजवी चित्र मांडले जाऊ शकते. हे टाळून लेखकाने त्यांचे एक यथार्थ व्यक्तिचित्र रेखाटण्याचा कसोशीने प्रयत्न केला आहे. त्यामुळे मराठी वाचकांसाठी हे एक रंजक, प्रेरक आणि बोधक पुस्तक ठरेल याची मला खात्री आहे. - डॉ. अतीश दाभोलकर डिरेक्टर, अब्दुस सलाम इंटरनॅशनल सेंटर फॉर थिअरेटिकल फिजिक्स (ICTP), इटली Stephen Hawking | Vivek Govilkar स्टीव्हन हॉकिंग | विवेक गोविलकर
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