Pakistan Mein Yudhkaid Ke Ve Din
(0)
Author:
Brig. Arun VajpayeePublisher:
Rajkamal Prakashan SamuhLanguage:
HindiCategory:
Biographies-and-autobiographies₹
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‘पाकिस्तान में युद्धक़ैद के वे दिन’ लेखक के साथ घटित सच्ची घटना पर आधारित किताब है। घटना को चार दशक से ज़्यादा बीत चुके हैं लेकिन लेखक ने स्मृतियों के सहारे इस पुस्तक को लिखते हुए उन त्रासद क्षणों को एक बार पुनः जिया है और पूरी संजीदगी के साथ अपने तल्ख़ अनुभवों का जीवन्त चित्रण किया है।</p> <p>1965 के भारत-पाक युद्ध में लेखक पाकिस्तान के सिन्ध प्रान्त में सीमा रेखा के 35 किलोमीटर भीतर युद्धक़ैदी बने और भारतीय सेना के दस्तावेज़ों में लगभग एक वर्ष तक लापता ही घोषित रहे। एक दुश्मन देश में एक वर्ष की अवधि युद्धक़ैदी के रूप में बिताना कितना त्रासद और साहसिक कार्य था तथा वहाँ उन्हें किन-किन समस्याओं से रू-ब-रू होना पड़ा, इन सबकी तल्ख़ जानकारी इस किताब में पाठकों को मिलेगी।</p> <p>यह किताब संशय और आशंकाओं से शुरू होती है तथा उम्मीद और आस्था की ओर बढ़ती है जो पाठकों को बेहद रोमांचित करेगी।
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‘पाकिस्तान में युद्धक़ैद के वे दिन’ लेखक के साथ घटित सच्ची घटना पर आधारित किताब है। घटना को चार दशक से ज़्यादा बीत चुके हैं लेकिन लेखक ने स्मृतियों के सहारे इस पुस्तक को लिखते हुए उन त्रासद क्षणों को एक बार पुनः जिया है और पूरी संजीदगी के साथ अपने तल्ख़ अनुभवों का जीवन्त चित्रण किया है।</p>
<p>1965 के भारत-पाक युद्ध में लेखक पाकिस्तान के सिन्ध प्रान्त में सीमा रेखा के 35 किलोमीटर भीतर युद्धक़ैदी बने और भारतीय सेना के दस्तावेज़ों में लगभग एक वर्ष तक लापता ही घोषित रहे। एक दुश्मन देश में एक वर्ष की अवधि युद्धक़ैदी के रूप में बिताना कितना त्रासद और साहसिक कार्य था तथा वहाँ उन्हें किन-किन समस्याओं से रू-ब-रू होना पड़ा, इन सबकी तल्ख़ जानकारी इस किताब में पाठकों को मिलेगी।</p>
<p>यह किताब संशय और आशंकाओं से शुरू होती है तथा उम्मीद और आस्था की ओर बढ़ती है जो पाठकों को बेहद रोमांचित करेगी।
Book Details
-
ISBN9788183612340
-
Pages171
-
Avg Reading Time6 hrs
-
Age18+ yrs
-
Country of OriginIndia
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Description:
गायिका, गुरु, पदाधिष्ठितज्ञ आदि अनेक प्रकार से संगीत के क्षेत्र में लम्बे समय से कार्यरत रही डॉ. सुधा पटवर्धन ने अपनी पुस्तक 'स्मरण संगीत' में संगीत से सम्बन्धित अनेक विषयों पर अपने निरीक्षण एवं अभिप्राय पेश किए हैं। निजी स्मृतियाँ, संगीत की प्रथाओं-परम्पराओं पर भाष्य, कुछ मौलिक संगीत विषयों पर संक्षेप में विवेचन, इस प्रकार से पुस्तक का स्वरूप बहुआयामी है। अभिजात संगीत और मुख्य रूप में गायन संगीत तथा घरानों से लेकर संगीत के आर्थिक व्यवहार तक कई विषयों का परामर्श इस पुस्तक में लिया गया है। प्रतिपादन में खुलापन, गिने-चुने शब्दों में आशय व्यक्त करने की क्षमता जैसे गुणों का होना इस पुस्तक की विशेषता माननी होगी। लेखनी में पैनापन, संगीत के निर्दोष एवं स्वस्थ सफ़र के लिए दी गई सूचनाएँ तथा निर्देश अच्छा योगदान दे सकते हैं।
शैली सीधी सरल है। गुरु-माहात्म्य, गुरु-निष्ठा, गुरु सेवा, गुरुमुखी विद्या, रियासतें, पठनीय विचार पुस्तक में हैं। संगीत-प्रेमियों के लिए एक अनिवार्य पठनीय पुस्तक।
—अशोक श्री रानडे
Azim Premji Ki Biography
- Author Name:
A.K. Gandhi
- Book Type:

- Description: भारतीय व्यापार-जगत के एक चमकते सितारे अजीम प्रेमजी सफल व्यापारी, आई.टी. उद्योग के सिरमौर और निवेशक हैं, जिन्होंने अपने अद्भुत कर्तृत्व से सफलता का नया इतिहास लिखा है। भारत सरकार द्वारा ‘पद्म विभूषण’, ‘पदम भूषण’ तथा अनेक प्रतिष्ठित सम्मानों से अलंकृत अजीम प्रेमजी को ‘टाइम’ मैगजीन ने उन्हें दो बार 100 सबसे प्रभावशाली लोगों की सूची में शामिल किया है। 1960 के दशक में जब विप्रो ने उपभोक्ता स्वास्थ्य उद्योग से हाई-टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में नई पारी की शुरुआत की तो अजीम प्रेमजी ने उसे सफलता दिलाई। व्यापारिक सफलता पाकर उन्होंने भारत की सनातन परंपरा ‘लोकोपकार’ को पुष्ट किया। ‘गिविंग प्लेज’ पर साइन किया है। परोपकार के लिए जाना जाता है। प्रेमजी ने ‘अजीम प्रेमजी फाउंडेशन’ को 2.2 बिलियन अमरीकी डॉलर का दान दिया है। शिक्षा के क्षेत्र में उन्होंने अद्वितीय काम किए हैं और एक ‘साक्षर भारत’ बनने की यात्रा में अपना अपूर्व योगदान किया है। उद्यमशीलता, नेतृत्व, कौशल, प्रशासनिक दक्षता, सहृदयता और परोपकार के प्रतीक अजीम प्रेमजी ने अपार धन-समृद्धि अर्जित की, पर मुक्त हाथों से उसे समाज को लौटाया भी। एक यशस्वी, लोककल्याणकारी व्यक्तित्व की यह प्रेरक जीवनगाथा समाज को मानवीयता और देने का महत्त्व बताएगी।
Bandhan: The Making Of A Bank
- Author Name:
Tamal Bandyopadhyay
- Rating:
- Book Type:

- Description: This is the story of Bandhan, the only bank that emerged in eastern India after Independence. Founded by the son of a sweet vendor, with a mere Rs 2 lakh, the sum total of his life savings. On 17 June, 2015, Chandra Shekhar Ghosh stepped out of the Reserve Bank of India building in Mumbai with the much-coveted banking licence, beating some of the country’s top corporate houses. This moment compensated for all the frustrations that had come along the way. A year later, Bandhan Bank was launched with 6.7 million small borrowers. So, how did Ghosh build India’s biggest MFI from scratch and then, along with his team, transform it into a universal bank? Bandhan: The Making of a Bank chronicles that journey. This is also Ghosh’s personal story-of a boy growing up in small-town Agartala struggling with poverty, but relentless in his ambition to make it big. He battles competition, hostile moneylenders, a tough economic climate and the perpetual lack of resources. Nobody in India perhaps knows better than him the psyche of a small borrower and the alchemy of doing business with the poor, profitably. This is one of India’s biggest entrepreneurial stories.
Khamosh Logon Ki Or Se By Dalai Lama
- Author Name:
Dalai Lama
- Book Type:

- Description: परम पूज्य दलाई लामा – खामोश लोगों की ओर से यह पुस्तक परम पूज्य दलाई लामा की आत्मकथात्मक कृति Voice for the Voiceless का हिंदी अनुवाद है। इसमें उन्होंने तिब्बत और तिब्बती लोगों के अधिकारों की रक्षा के लिए चीन के विरुद्ध अपने सात दशकों के शांतिपूर्ण संघर्ष को आत्मीयता से वर्णित किया है। पुस्तक में उन प्रश्नों के उत्तर दिए गए हैं जो चीन द्वारा तिब्बत और तिब्बतीयों को लेकर खड़े किए जाते हैं- और जो पाठकों के मन में भी स्वाभाविक रूप से उठते हैं। इसके साथ ही, अगली दलाई लामा की घोषणा और उससे जुड़ी जटिलताओं पर भी विस्तार से चर्चा की गई है, जो वर्तमान में चीन और अंतरराष्ट्रीय समुदाय में गंभीर बहस का विषय बना हुआ है। इसकी भाषा और शैली प पू दलाई लामा के व्यक्तित्व की तरह ही सहज और सरल है।
Bhujia ke Badshah
- Author Name:
Pavitra Kumar
- Book Type:

- Description: यह कहानी है साधारण से शहर बीकानेर के पारिवारिक व्यवसाय हल्दीराम की, जिसने स्वयं को एक अंतरराष्ट्रीय चहेते ब्रांड में बदल दिया। बीसवीं सदी की शुरुआत में, गंगा बिशन अग्रवाल उर्फ हल्दीराम नाम का युवक बीकानेर शहर में सबसे अच्छी भुजिया बनानेवाले के रूप में विख्यात हो गया। समय पंख लगाकर उड़ा और एक सदी के बाद हल्दीराम का साम्राज्य राजस्व के मामले में मैकडॉनल्ड्स और डोमिनोज के साझा राजस्व से भी बहुत आगे पहुँच गया। ‘भुजिया के बादशाह’ में पवित्रा कुमार अग्रवाल परिवार की बाँधकर रखनेवाली कहानी को उसकी समग्रता में सुनाती हैं। यह एक ऐसा असाधारण कार्य है, जिसे पहले किसी ने नहीं किया था। इसकी शुरुआत, धूल-धूसरित, उदारमना बीकानेर से होती है और यह इस स्वदेशी लेबल के उदीयमान होने और निरंतर उदित होने का वर्णन करती है, जो दुनिया भर में आज सबसे जाने-माने भारतीय ब्रांडों में से एक बन गया है। हल्दीराम्स की यह कहानी किसी सामान्य कारोबार की कहानी नहीं है। इसमें भरपूर फैमिली ड्रामा है, कोर्ट के मुकदमे हैं, ईर्ष्या की अग्नि में जलकर किया गया क्षेत्रीय विस्तार है, एक दशक से भी अधिक समय से चली आ रही ट्रेडमार्क की लड़ाई है, और घर-घर में प्रसिद्ध व लोकप्रिय भुजिया बनाने का वह रहस्य है जिसे एक परिवार ने सीने से लगाकर रखा है। तेज रफ्तार और बाँधकर रखनेवाली यह पुस्तक, परिवार के कारोबार के विभिन्न आयामों तथा कारोबार करने के भारतीय तौर-तरीकों पर सुस्वादु और मधुर नजर डालती है।
Sansar Mein Nirmal Verma : Poorvarddh
- Author Name:
Nirmal Verma
- Book Type:

- Description: इतिहास के भीतर जो घटनाएँ होती है, उनके पीछे कोई बहुत ही (अति पवित्र) सर्वमान्य नियम हो, ऐसा कोई ज़रूरी नही है। यह बोध जब आपको हो जाए तो यह ज़रूरी हो जाता है हम सृष्टि के अर्थ को ईश्वर या इतिहास में न देखकर उसे अपने नैतिक अर्थ में पाएँ, और मनुष्य ख़ुद इस नैतिकता का निर्माण करे। इस पुस्तक में शामिल एक साक्षात्कार में अस्तित्ववाद को लेकर अपने विचार व्यक्त करते हुए निर्मल वर्मा आगे कहते हैं कि उस दर्शन से जो बहुमूल्य चीज़ मैंने अपने लिए पाई वह यह कि ईश्वर और इतिहास से मुक्त होकर, यह आदमी पर निर्भर है कि वह अर्थ और नैतिकता को जन्म दे; क्या सही है, क्या ग़लत है, इसे तय करने की ज़िम्मेदारी वह ख़ुद उठाए। मार्क्सवाद से शुरु हुई अपनी वैचारिक यात्रा में अस्तित्ववाद के प्रति अपने आकर्षण को ज़रूरी क़दम मानते हुए वे इन साक्षात्कारों में अपने लेखक, अपने मनुष्य और अपने नागरिक के गहरे दायित्व बोध को बार-बार रेखांकित करते हैं। नई कहानी आन्दोलन में अपनी भूमिका को लेकर किए गए प्रश्न के जवाब में वे कहते हैं कि मेरी कोशिश सिर्फ़ यही थी कि मैं अपने अनुभवों को कितने प्रामाणिक स्तर पर व्यक्त कर पा रहा हूँ। अपनी रचना प्रक्रिया और लेखकीय नैतिकता के अलावा इन साक्षात्कारों में वे अपने विदेश प्रवास, वहाँ के निर्णायक अनुभवों, साहित्य, कला, विचारधारा और अन्य अनेक ऐसे मुद्दों पर अपनी बात कहते हैं जो आज भी प्रासंगिक और विचारोत्तेजक हैं। इस जिल्द में उनके 1998 से पहले दिए गए साक्षात्कारों को संकलित किया गया है। इसके बाद के साक्षात्कार ‘संसार में निर्मल वर्मा’ के ‘उत्तरार्द्ध’ खंड में संकलित हैं।
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