Maqbool (English)
(0)
Author:
Akhilesh 'Bhopal'Publisher:
Rajkamal Prakashan SamuhLanguage:
HindiCategory:
Biographies-and-autobiographies₹
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‘Maqbool’ is not a cliched conventional biography; it is a unique tale of a matchless great artist’s childhood and early youth told by one of his discerning disciples. It has the mellifluous flow and limpidity of poetry, the flight of a boundless bird,a mellow tone. Akhilesh has freed it from the burden of excessive dates and facts and given it a lightness that impresses us with the mischievous innocence of the young Maqbool and also gives us the flavour of the future Husain’s magic and masterly craftsmanship. The adjective ‘magical’ occurs frequently in this work about the effects created by Husain’s later works; this adjective is apt for this work itself that has been created by an artist immersed in the Master’s art. – Krishna Baldev Vaid
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‘Maqbool’ is not a cliched conventional biography; it is a unique tale of a matchless great artist’s childhood and early youth told by one of his discerning disciples. It has the mellifluous flow and limpidity of poetry, the flight of a boundless bird,a mellow tone. Akhilesh has freed it from the burden of excessive dates and facts and given it a lightness that impresses us with the mischievous innocence of the young Maqbool and also gives us the flavour of the future Husain’s magic and masterly craftsmanship. The adjective ‘magical’ occurs frequently in this work about the effects created by Husain’s later works; this adjective is apt for this work itself that has been created by an artist immersed in the Master’s art.
– Krishna Baldev Vaid
Book Details
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ISBN9788190540131
-
Pages112
-
Avg Reading Time4 hrs
-
Age18+ yrs
-
Country of OriginIndia
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- Description: ‘मणिकर्णिका’ डॉ. तुलसी राम की आत्मकथा का दूसरा खंड है। पहला खंड ‘मुर्दहिया’ शीर्षक से प्रकाशित हुआ था। यह कहना अतिश्योक्ति नहीं कि ‘मुर्दहिया’ को हिन्दी जगत की महत्तपूर्ण घटना के रूप में स्वीकार किया गया। साहित्य और समाज विज्ञान से जुड़े पाठकों, आलोचकों व शोधकर्ताओं ने इस रचना के विभिन्न पक्षों को रेखांकित किया। शीर्षस्थ आलोचक डॉ. नामवर सिंह के अनुसार ग्रामीण जीवन का जो जीवन्त वर्णन ‘मुर्दहिया’ में है, वैसा प्रेमचन्द की रचनाओ में भी नहीं मिलता। ‘मणिकर्णिका’ में ‘मुर्दहिया’ के आगे का जीवन है। आज़मगढ़ से निकलकर लेखक ने क़रीब 10 साल बनारस हिन्दू यूनिवर्सिटी में बिताए। बनारस में आने पर जीवन के अन्त की प्रतीक ‘मणिकर्णिका’ से ही लेखक का जैसे नया जीवन शुरू हुआ। लेखक के शब्दों में ‘गंगा के घाटों तथा बनारस के मन्दिरों से जो यात्रा शुरू हुई थी, अन्ततोगत्वा वह कम्युनिस्ट पार्टी के दफ़्तर में समाप्त हो गई। मार्क्सवाद ने मुझे विश्व-दृष्टि प्रदान की, जिसके चलते मेरा व्यक्तिगत दुःख दुनिया के दुःख में मिलकर अपना अस्तित्व खो बैठा। मुर्दहिया में जो विचार सुप्त अवस्था में थे, वे ‘मणिकर्णिका’ में विकसित हुए।’ लेखक ने अपने जीवनानुभवों का वर्णन करते हुए उस ख़ास समय को भी विश्लेषित किया है जिसके भीतर प्रवृत्तियों का सघन संघर्ष चल रहा था। बनारस जैसे इस कृति के पृष्ठों पर जीवन्त हो उठा है। इस स्मृति-आख्यान में कलकत्ता भी है, अनेक वैचारिक सन्दर्भों के साथ। ‘मणिकर्णिका; डॉ. तुलसी राम के जीवन-संघर्ष की ऐसी महागाथा है जिसमें भारतीय समाज की अनेक संरचनाएँ स्वतः उद्घाटित होती जाती हैं।
UP FROM SLAVERY
- Author Name:
Booker T. Washington
- Book Type:

- Description: "Up from Slavery is the 1901 autobiography of American educator Booker T. Washington (1856-1915). The book describes his experience of working to rise up from being enslaved as a child during the Civil War, the obstacles he overcame to get an education at the new Hampton Institute, and his work establishing vocational schools like the Tuskegee Institute in Alabama to help black people and other persecuted people of colour learn useful, marketable skills and work to pull themselves, as a race, up by the bootstraps. He reflects on the generosity of teachers and philanthropists who helped educate black and Native Americans. He describes his efforts to instill manners, breeding, health, and dignity in students."
Satya Ke Mere Prayog
- Author Name:
Mohandas Karamchand Gandhi
- Book Type:

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Description:
विश्व के स्वप्नदर्शी और युगांतरकारी नेताओं में सर्वाधिक चर्चित और देश-काल की सीमाओं को लांघकर एक प्रतीक बन जानेवाले महात्मा गांधी की यह आत्मकथा न किसी परिचय की मुहताज है और न किसी प्रशंसा की। अनेक भाषाओं और देशों के असंख्य पाठकों के मन में राजनीति, समाज और नैतिकता से जुड़े सवालों को जगाने, विचलित करनेवाली इस पुस्तक का यह मूल गुजराती से अनूदित प्रामाणिक पाठ है।
समाज और राजनीति की धारा में गांधी जी ने असहयोग और अहिंसा जैसे व्यावहारिक औज़ारों से एक मानवीय हस्तक्षेप किया, वहीं अपने निजी जीवन को उन्होंने सत्य, संयम और आत्मबल की लगभग एक प्रयोगशाला की तरह जिया। नैतिकता उनके लिए सिर्फ़ समाजोन्मुख, बाहरी मूल्य नहीं, उनके लिए वह अपने अन्त:करण के पारदर्शी आइने में एक ऐसे नग्न प्रश्न के रूप में खड़ी थी, जिसका जवाब व्यक्ति को अपने सामने, अपने को ही देना होता है। अपने स्व की कसौटी ही जिसकी एकमात्र कसौटी होती है। यह पुस्तक गांधी जी के इसी अविराम नैतिक आत्मनिरीक्षण की विवरणिका है।
इस चर्चित पुस्तक की पुनर्प्रस्तुति यह बात ध्यान में रखते हुए की जा रही है कि महान कृतियों का अनुवाद बार-बार होते रहना चाहिए। इस अनुवाद में प्रयास किया गया है कि गांधी जी की इस सर्वाधिक पढ़ी जानेवाली कृति को आज का पाठक उस भाषा-संवेदना की रोशनी में पढ़ सके जो आज़ादी के बाद हमारी चेतना का हिस्सा बनी है।
Raja Rammohan Rai : Jeevan Aur Darshan
- Author Name:
K. C. Dutt
- Book Type:

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Description:
प्रस्तुत पुस्तक ‘राजा राममोहन राय’ अब तक मुद्रित अंग्रेज़ी और बांग्ला में उपलब्ध प्रमाणित ग्रन्थों और दस्तावेज़ों पर आधारित राममोहन राय पर एक पूर्णांग जीवनी है तथा भारतीय पुनर्जागरण के परिप्रेक्ष्य में धार्मिक, सामाजिक, राजनैतिक आन्दोलनों में राममोहन की भूमिका पर संक्षिप्त विवेचन है। जीवन भाग के लिए मुख्यतः सोफ़िया डॉबसन कोलेट की अंग्रेज़ी पुस्तक और नागेन्द्रनाथ व चट्टोपाध्याय की पुस्तक का आधार लिया गया है।
पुस्तक चार खंडों में विभाजित है। पहले खंड में तत्कालीन भारत की ऐतिहासिक, धार्मिक, सामाजिक और आर्थिक परिस्थिति की संक्षिप्त रूपरेखा खींची गई है। दूसरा भाग मोटे तौर पर राममोहन के संघर्षमय जीवन की चमत्कारपूर्ण गाथा है। तीसरा खंड उनके कृतित्व और विचार दर्शन पर संक्षिप्त विवेचन से सम्बन्धित है। इस खंड में आलोचना के प्रसंग में कभी-कभी विचारों और घटनाओं की पुनरावृत्ति हो गई है जो एक सीमा तक अपरिहार्य थी, इसी से बचा नहीं जा सका।
परिशिष्ट खंड में कुछ मूल अंग्रेज़ी दस्तावेज़ विद्यार्थियों, शोधकर्ताओं और जिज्ञासु पाठकों की सुविधा और सूचना को ध्यान में रखकर दिया गया है। पुस्तक में मूल अंग्रेज़ी उद्धरण भी इसी आवश्यकता को ध्यान में रखकर दिए गए हैं।
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