Major Shaitan Singh, PVC: The Man In Half Light | Major Shaitan Singh Ki Shaurya Gathaa Complete Biography in Hindi Awarded by Param Veer Chakra For Courage and Sacrifice
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Author:
Jai SamotaPublisher:
Prabhat PrakashanLanguage:
HindiCategory:
Biographies-and-autobiographies₹
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मैं आपको आश्वस्त करता हूँ कि मेरा स्वास्थ्य उत्तम और उत्साह चरम पर है। आपने जहाँ चाहा, मैं वहाँ आया हूँ। मेरा विश्वास कीजिए कि यहाँ आकर मुझे सच में गर्व और खुशी का अनुभव हो रहा है। हम सब खुश हैं और चिंता की कोई बात नहीं है। — मेजर शैतान सिंह ने रेजांग ला से एक पत्र में लिखा।
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मैं आपको आश्वस्त करता हूँ कि मेरा स्वास्थ्य उत्तम और उत्साह चरम पर है। आपने जहाँ चाहा, मैं वहाँ आया हूँ। मेरा विश्वास कीजिए कि यहाँ आकर मुझे सच में गर्व और खुशी का अनुभव हो रहा है। हम सब खुश हैं और चिंता की कोई बात नहीं है।
— मेजर शैतान सिंह ने रेजांग ला से एक पत्र में लिखा।
Book Details
-
ISBN9789355626226
-
Pages264
-
Avg Reading Time9 hrs
-
Age18+ yrs
-
Country of OriginIndia
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यह किताब उस दिन से शुरू होती है जब 1940 में ‘पाकिस्तान प्रस्ताव' पास किया गया था। तब मैं स्कूल का एक छात्र मात्र था, लेकिन लाहौर के उस अधिवेशन में मौजूद था जहाँ यह ऐतिहासिक घटना घटी थी। यह किताब इस तरह की बहुत-सी घटनाओं की अन्दरूनी जानकारी दे सकती है, जो किसी और तरीक़े से सामने नहीं आ सकती—बँटवारे से लेकर मनमोहन सिंह की सरकार तक। अगर मुझे अपनी ज़िन्दगी का कोई अहम मोड़ चुनना हो तो मैं इमरजेंसी के दौरान अपनी हिरासत को ऐसे ही एक मोड़ के रूप में देखना चाहूँगा, जब मेरी निर्दोषिता को हमले का शिकार होना पड़ा था। यही यह समय था जब मुझे व्यक्तिगत स्वतंत्रता और मानवाधिकारों के हनन का अहसास होना शुरू हुआ। साथ ही, व्यवस्था में मेरी आस्था को भी गहरा झटका लगा था। पाकिस्तान और बांग्लादेश में बहुत-से लोगों के साथ मेरे व्यक्तिगत सम्बन्ध हैं और मुझे इन सम्बन्धों पर गर्व है। मेरा विश्वास है कि किसी दिन दक्षिण एशिया के सभी देश यूरोपीय संघ की तरह अपना एक साझा संघ बनाएँगे। इससे उनकी अलग-अलग पहचान पर कोई असर नहीं पड़ेगा। मैं पूरी ईमानदारी से कह सकता हूँ कि नाकामयाबियाँ मुझे उस रास्ते पर चलने से रोक नहीं पाई हैं जिसे मैं सही मानता रहा हूँ और लड़ने लायक़ मानता रहा हूँ। ज़िन्दगी एक लगातार बहती अन्तहीन नदी की तरह है, बाधाओं का सामना करती हुई, उन्हें परे धकेलती हुई, और कभी-कभी ऐसा न कर पाते हुए भी। यह बता पाना बस से बाहर है कि पिछले आठ दशकों से कौन सी चीज़ मुझे आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करती रही है—नियति या संकल्प? या ये दोनों ही? आख़िर तमाशा जारी रहना चाहिए। मैं इस मामले में महान उर्दू शायर ग़ालिब से पूरी तरह सहमत हूँ—शमा हर रंग में जलती है सहर होने तक। —भूमिका से
Aatmakatha : Dr. Karan Singh
- Author Name:
Karan Singh
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डॉ. कर्ण सिंह को आधुनिक भारत के चिन्तकों और राजनयिकों में एक महत्त्वपूर्ण स्थान प्राप्त है। मूलत: अंग्रेज़ी में प्रकाशित यह पुस्तक पहले दो खंडों में थी। बाद में इसे एक ही जिल्द में समेटा गया जिसमें ख़ास तौर से इसी संस्करण के लिए लिखी गई एक महत्त्वपूर्ण प्रस्तावना भी शामिल थी। यह इसी का हिन्दी संस्करण है। डॉ. कर्ण सिंह की यह ‘आत्मकथा’ भारतीय इतिहास के एक महत्त्वपूर्ण दौर का लेखा–जोखा प्रस्तुत करती है जिसमें भारत की स्वतंत्रता–प्राप्ति की घटना के अलावा जम्मू–कश्मीर की राजनीति, चीन और पाकिस्तान के साथ विवाद और पं. जवाहरलाल नेहरू व लालबहादुर शास्त्री के प्रधानमंत्रित्व काल की घटनाएँ शामिल हैं। इस बाह्य घटना–चक्र के अलावा इस पुस्तक में आप डॉ. कर्ण सिंह की पारिवारिक पृष्ठभूमि और उनकी आध्यात्मिक जिज्ञासाओं, आन्तरिक विकास–क्रम और जीवन के आधारभूत सत्यों की खोज का ब्यौरा भी पाएँगे ।
Ram Manohar Lohia: Jeevan Aur Vyaktitva
- Author Name:
Neelam Mishra
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इतिहास अध्ययन का वह स्त्रोत है, जो मानव जीवन, उसका लक्ष्य तथा उस लक्ष्य की प्राप्ति हेतु किए गए विभिन्न प्रयासों को विस्तृत रूप से प्रस्तुत करता है। 1917 से 1947 तथा उसके बाद का कालखंड भारतवर्ष के इतिहास में महत्त्वपूर्ण स्थान रखता है, क्योंकि इस युग में कई ऐसे महापुरुषों का प्रादुर्भाव हुआ, जिन्होंने अपनी कृतियों के द्वारा इतिहास में स्वर्णिम स्थान प्राप्त किया। ऐसे ही महापुरुषों में डॉ. राम मनोहर लोहिया का नाम स्तुत्य है, जिन्होंने आधुनिक भारत के निर्माण में, उसके आर्थिक तथा सामाजिक उत्थान में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई। लोहिया का दर्शन शाश्वत है, जो देश व काल की परिधि से ऊपर है। उनके विचारों को हम विश्व-राजनीति में परिलक्षित होते देख रहे हैं। भारतीय राजनीतिज्ञ उनके चिंतन-वर्धन से अत्यधिक प्रभावित तो हैं ही, साथ ही इस बात से भी इनकार नहीं किया जा सकता है कि उनके समाजवादी आंदोलन ने जनमानस पर गहरा प्रभाव डाला है। ऐसे बहुआयामी राम मनोहर लोहिया पर यह पुस्तक पाठकों और भावी पीढिय़ों के लिए प्रेरणादायी सिद्ध होगी।
Alaukik Yogini
- Author Name:
Shambhuratna Tripathi
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विद्रोह, वैराग्य, विद्वत्ता की विलक्षण विभूति योगिनी राधाबाई रूसी योगिनी मदाम एच.पी. ब्लावतस्की रूसी योगिनी राधाबाई (मदाम एच.पी. ब्लावतस्की) विश्व-इतिहास की अप्रतिम महिला हैं। रूस में जन्म लिया, लेकिन भारतीय योग और ब्रह्मविद्या के लिए जीवन अर्पित किया; सामंती परिवार की सदस्य थीं, लेकिन वैराग्यपूर्ण जीवन अपनाया; अल्पशिक्षित थीं, लेकिन पांडित्यपूर्ण ग्रंथ लिखे; महिला थीं, लेकिन तिब्बत में रहकर योग-साधना द्वारा अलौकिक शक्तियों पर अधिकार किया। लगभग एक शताब्दी पूर्व उनके तेज और ओज से संसार का प्रबुद्ध जगत् आंदोलित हो उठा था। महात्मा गांधी, महाकवि डब्ल्यू.वी. यीट्स, वैज्ञानिक डॉ. सी. कार्टर ब्लैक, कांग्रेस के संस्थापक सर ओ.ए. ह्यूम, दार्शनिक लीड बीटर आदि उनसे बहुत प्रभावित हुए थे तथा डॉ. एनी बेसेंट ने उनको अपना गुरु बनाकर अपने को धन्य माना था। उनका संपूर्ण जीवन साहस और संघर्ष, अलौकिकता और विलक्षणताओं, विद्रोह और वैराग्य, तप और त्याग से आपूरित रहा है। भारतीय संस्कृति की इस अनन्य सेविका और संपोषिका के जीवन का प्रत्येक पृष्ठ उपन्यास से अधिक रोचक, कविता से अधिक सम्मोहक तथा नीति-ग्रंथ से अधिक उद्बोधक है। हिंदी के पाठक इस विराट् व्यक्तित्व के महान् जीवन का पहली बार विस्तृत परिचय प्राप्त करेंगे।
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