Rampur Ki Ramkahani
(0)
Author:
AmarnathPublisher:
Rajkamal Prakashan SamuhLanguage:
HindiCategory:
Short-story-collections₹
350
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रामपुर की रामकहानी बदलते भारत और खासतौर से वैश्वीकरण के बाद हो रहे तीव्र विकास और उसकी दिशा की कहानी है। विकास के उस दिशा की कहानी है, जिसकी ओर बढ़ते हुए मंजिल तो दूर, हमें पथ भी कहीं नजर नहीं आता। ‘पटरी पर पढ़ाई, मुल्ला की तावीज, भउजी, कृषि संस्कृति की समाधि, जद्दू पंडित का कुनबा, जाति जाति में जाति, अथ यज्ञोपवीत भंजन कथा, ठेके पर हरिनाम’ आदि संस्मरणों के इस संग्रह में छह दशकों का क्रमिक और प्रामाणिक इतिहास पूरी ईमानदारी के साथ रोचक शैली में अंकित है। ये संस्मरण, सत्यकथाएँ हैं। शैली आत्मकथात्मक है। कथा के सूत्र जोड़ने के लिए जहाँ बहुत जरूरी है, वहीं कल्पना का सहारा लिया गया है।
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रामपुर की रामकहानी बदलते भारत और खासतौर से वैश्वीकरण के बाद हो रहे तीव्र विकास और उसकी दिशा की कहानी है। विकास के उस दिशा की कहानी है, जिसकी ओर बढ़ते हुए मंजिल तो दूर, हमें पथ भी कहीं नजर नहीं आता।
‘पटरी पर पढ़ाई, मुल्ला की तावीज, भउजी, कृषि संस्कृति की समाधि, जद्दू पंडित का कुनबा, जाति जाति में जाति, अथ यज्ञोपवीत भंजन कथा, ठेके पर हरिनाम’ आदि संस्मरणों के इस संग्रह में छह दशकों का क्रमिक और प्रामाणिक इतिहास पूरी ईमानदारी के साथ रोचक शैली में अंकित है। ये संस्मरण, सत्यकथाएँ हैं। शैली आत्मकथात्मक है। कथा के सूत्र जोड़ने के लिए जहाँ बहुत जरूरी है, वहीं कल्पना का सहारा लिया गया है।
Book Details
-
ISBN9789348229144
-
Pages184
-
Avg Reading Time6 hrs
-
Age18+ yrs
-
Country of OriginIndia
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Description:
हो सकता है कि इधर कहानी कि परिभाषा बदल गई हो, लेकिन मेरे हिसाब से एक अच्छी कहानी कि अनिवार्य शर्त उसकी पठनीयता होनी चाहिए। आतंक जगानेवाली शुरुआत कहानी में न हो, वह अपनत्व से बाँधती हो तो मुझे अच्छी लगती है। आकांक्षा की कहानी 'तीन सहेलियाँ तीन प्रेमी' पढ़ना शुरू किया तो मैं पढ़ती चली गई। यह कहानी दिलचस्प संवादों में चली है। उबाऊ वर्णन कहीं है ही नहीं। सम्प्रेषणीयता कहानी के लिए ज़रूरी दूसरी शर्त है। लेखक जो कहना चाह रहा है, वह पाठक तक पहुँच रहा है। इस कहानी के पाठक को बात समझाने के लिए जद्दोजहद नहीं करनी पड़ती। संवादों में बात हम तक पहुँचती है। स्पष्ट हो जाता है कि कहानी कहती क्या है। लेखक क्या कहना चाहता है। एक चीज़ यह भी कि रचनाकार ने कोई महत्वपूर्ण मुददा उठाया है, वह है व्यक्ति या समाज का। आख़िर वह मुददा क्या है। सहज ढंग से, तीन अविवाहित लड़कियों कि कहानी है यह जो तीन विवाहित पुरुषों से प्रेम करती हैं। वहाँ हमें मिलना कुछ नहीं है, यह जानते हुए भी वे उस रास्ते पर जाती हैं। अच्छी बात यह है कि आकांक्षा ने न पुरुषों को बहुत धिक्कारा है, न आँसू बहाए हैं। कहानी सहज-सरल ढंग से चलती है। लड़कियाँ अपनी सीमाएँ जानते हुए भी सेलिब्रेट करती हैं और अन्त में अविवाहित जीवन कि त्रासदी होते हुए भी (त्रासदी मैं कह रही हूँ, कहानी में नहीं है), कहीं यह भाव नहीं है, यह जीवन का यथार्थ है। जो नहीं मिला है, उसे भी सेलिब्रेट करो। आकांक्षा से पहली बार मिलने पर मुझे लगा कि यह लड़की सहज है। फिर एक शहर का होने के नाते निकटता और बढ़ी।
—मन्नू भंडारी
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