Pajame Mein Aadmi
(0)
Author:
Nag BodasPublisher:
Rajkamal Prakashan SamuhLanguage:
HindiCategory:
Short-story-collections₹
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यद्यपि नाग बोडस एक नाटककार के रूप में अधिक प्रसिद्ध हैं, पर उनके साहित्यिक जीवन की शुरुआत कहानी-लेखन से ही हुई थी। उनकी पहली कहानी अज्ञेय द्वारा सम्पादित पत्रिका ‘नया प्रतीक’ में छपी थी। इसके बाद साहित्य की लगभग सभी महत्त्वपूर्ण पत्रिकाओं में उनकी कहानियाँ छपी हैं। उनकी कहानियों में एक बौद्धिक ऊर्जा देखी जा सकती है। ये सभी कहानियाँ न केवल विषयों के स्तर पर, बल्कि ‘कहने’ के स्तर पर भी भिन्न-भिन्न प्रकार की हैं। पर इसके बावजूद इनमें लेखक की छाप देखी जा सकती है और इसलिए कम-से-कम हिन्दी में ये अपनी अलग पहचान बनाती हैं।</p> <p>इनमें प्रयोगात्मकता तथा भाषा का विशेष प्रकार का उपयोग है और इसलिए इन्हें पढ़ना एक अलग तरह के अनुभव से गुज़रना है। इस हिसाब से इनके लोकप्रिय होने में सन्देह किया जा सकता है, पर स्तरीय होने में नहीं। वैसे आज की लोकप्रिय कहानियों की हालत को देखते हुए, लोकप्रिय न होना अपने-आप में कोई सीमा नहीं है।</p> <p>नाग बोडस के लेखन में अन्वेषण का उत्साह है, यद्यपि यह अन्वेषण किसी बुनियादी या बड़े सत्य के लिए न होकर स्थितियों के अन्दर से और अन्दर झाँकने की कोशिश के हिस्से की तरह लगता है।</p> <p>विडम्बना उनकी कहानियों का एक प्रमुख तत्त्व है और ‘जन्मदिन’ जैसी कहानी तो इसी पर आधारित है। जो पाठक लीक से हटकर किन्तु दिलचस्प पढ़ने की लालसा रखते हैं, वे निश्चय ही इस संग्रह को अपने पाठन-मन के अनुकूल पाएँगे।
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यद्यपि नाग बोडस एक नाटककार के रूप में अधिक प्रसिद्ध हैं, पर उनके साहित्यिक जीवन की शुरुआत कहानी-लेखन से ही हुई थी। उनकी पहली कहानी अज्ञेय द्वारा सम्पादित पत्रिका ‘नया प्रतीक’ में छपी थी। इसके बाद साहित्य की लगभग सभी महत्त्वपूर्ण पत्रिकाओं में उनकी कहानियाँ छपी हैं। उनकी कहानियों में एक बौद्धिक ऊर्जा देखी जा सकती है। ये सभी कहानियाँ न केवल विषयों के स्तर पर, बल्कि ‘कहने’ के स्तर पर भी भिन्न-भिन्न प्रकार की हैं। पर इसके बावजूद इनमें लेखक की छाप देखी जा सकती है और इसलिए कम-से-कम हिन्दी में ये अपनी अलग पहचान बनाती हैं।</p>
<p>इनमें प्रयोगात्मकता तथा भाषा का विशेष प्रकार का उपयोग है और इसलिए इन्हें पढ़ना एक अलग तरह के अनुभव से गुज़रना है। इस हिसाब से इनके लोकप्रिय होने में सन्देह किया जा सकता है, पर स्तरीय होने में नहीं। वैसे आज की लोकप्रिय कहानियों की हालत को देखते हुए, लोकप्रिय न होना अपने-आप में कोई सीमा नहीं है।</p>
<p>नाग बोडस के लेखन में अन्वेषण का उत्साह है, यद्यपि यह अन्वेषण किसी बुनियादी या बड़े सत्य के लिए न होकर स्थितियों के अन्दर से और अन्दर झाँकने की कोशिश के हिस्से की तरह लगता है।</p>
<p>विडम्बना उनकी कहानियों का एक प्रमुख तत्त्व है और ‘जन्मदिन’ जैसी कहानी तो इसी पर आधारित है। जो पाठक लीक से हटकर किन्तु दिलचस्प पढ़ने की लालसा रखते हैं, वे निश्चय ही इस संग्रह को अपने पाठन-मन के अनुकूल पाएँगे।
Book Details
-
ISBN9788119989065
-
Pages158
-
Avg Reading Time5 hrs
-
Age18+ yrs
-
Country of OriginIndia
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- Description: मानिक रायतंग की बाँसुरी’ डॉ. सुनीता की बच्चों और किशोर पाठकों के लिए लिखी गई बत्तीस अनूठी और भावनात्मक कहानियों का संग्रह है, जिनमें लोकजीवन की सुगंध है तो साथ ही दादी-नानी की कहानियों सरीखा अद्भुत रस और आकर्षण भी। डॉ. सुनीता बच्चों की जानी-मानी कथाकार हैं, जिनकी बाल कहानियाँ अपनी सादगी और सरलता के कारण सीधे बच्चों के दिलों में उतर जाती हैं। वे जिस भी कथानक को उठाती हैं, उसे मन के भावों में पिरोकर इतनी शिद्दत से लिखती हैं कि हमारा मन भी कहानी के पात्रों के साथ ही कभी हँसता तो कभी उदास हो जाता है और कभी मस्ती में भरकर खुशी और उल्लास के गीत भी गाता है। ‘मानिक रायतंग की बाँसुरी’ संग्रह की हर कहानी का अलग रंग, अलग अंदाज, अलग खुशबू है। बच्चे और किशोर पाठक ही नहीं, बड़े भी इन कहानियों से एक विशेष जुड़ाव महसूस करेंगे। वे इनमें बहुत कुछ ऐसा पाएँगे, जिनसे उनका जीवन महक उठेगा और उनमें औरों के लिए कुछ करने की प्रेरणा उत्पन्न होगी। अनुक्रम 1. एक था चला, एक थी थांगी — 9 2. उड़नेवाला घोड़ा — 15 3. मानिक रायतंग की बाँसुरी — 22 4. मेरा पहाड़ ऊँचा है — 25 5. लौ रीनडो और ली — 30 6. रींगा दादी की बेटियाँ — 34 7. फूल बन गई बेलमुठी — 37 8. बाघ भाई, जरा रुको — 43 9. मेरी तो दावत हो गई — 46 10. किट-किट गिलहरी — 49 11. चिनमा को लगा तीर — 54 12. बूढ़े हराकू ने सिया सबक — 59 13. मुझे पुकार लेना — 65 14. चार तारोंवाला बाजा — 70 15. निताई का बेटा — 79 16. जादुई तालाब — 82 17. कहानी टुइचौंग नदी की — 87 18. मोरांग की पुकार — 91 19. उसी चट्टान पर — 97 20. चार सहेलियाँ — 103 21. पक्षियों का दोस्त — 107 22. अमीर सहेली, गरीब सहेली — 111 23. लिजाबा ने बनाई दुनिया — 117 24. हरियल पक्षी — 121 25. किस्सा खोहरमहा का — 123 26. दरवाजा खोलो थाबेटन — 125 27. माँ का लाड़ला बेटा — 130 28. सैंडरैंबी बन गई रानी — 134 29. चम-चम सोने के गहने — 143 30. राजकुमार निंजुपानू का सपना — 147 31. मनमौजी छूरा और जादूगरनी — 155 32. और सामने था पहाड़ — 162
Bhari Dopheree Ke Andhere
- Author Name:
Madhu Kankariya
- Book Type:

-
Description:
मधु कांकरिया की कहानियों को कोई संज्ञा देनी हो तो कहना पड़ेगा–बेबाक। बेबाक विद्रोह! बिना किसी कुंठा और पूर्वाग्रह के खुले दिल से चीजों को देखना, समझना, स्वीकार हो तो स्वीकार, अस्वीकार हो तो अस्वीकार! बोल्ड भी और ब्यूटीफुल भी। अपनी गन्दगी पर परदा डालते व्यक्ति का गमछा खर्र से खींचने में भी उन्हें कोई दुविधा नहीं होती।
गाँव की सड़ती गलियों से लेकर महानगर के रिसते अँधेरे और वेश्यालयों के नरक–मधु के लिए कुछ भी वर्जित और अस्पृश्य नहीं। हर जगह फैली है मधु की कहानियों की दुनिया और मधु की भाषा-शैली! जोगन-जोगन रात...रेशम-रेशम यादें...यह वह कलम है जो पाखंड के लिए किसी को भी नहीं बख्शती लेकिन किसी की जलती हकीकत से आँख नहीं चुराती। मधु मानती हैं कि ‘कोई भी सत्य सार्वकालिक नहीं हो सकता...। कि सागर की विशालता की अपनी सीमा है, वहाँ कभी प्रेम के कमल नहीं खिलते...। कि जिन्दगी का हल खुद जिन्दगी है और प्यार का जवाब खुद प्यार !’
Gausevak
- Author Name:
Abdul Bismillah
- Book Type:

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Description:
नक्सल प्रभावित एक आदिवासी इलाक़े में विकास का मिथ, नक्सलियों और पुलिस-प्रशासन के बीच पिसते आदिवासी, लगातार मौत को अपने सामने देखते नाउम्मीद जीवन का अवसरवाद जो गौरक्षा की राजनीति करनेवाली एक पार्टी के लिए बहुत उर्वर ज़मीन तैयार करता है, और इन सबके बीच गाय की तस्करी करनेवाले एक गौसेवक आदिवासी नेता के टिकट पाने का जुगाड़...आदिवासी जीवन के संकटों का बयान करनेवाली मुद्रा से अनछुई यह कहानी संकटों के गतिविज्ञान में आपको गहरे ले जाती है, और मज़ा यह कि जाते हुए आपको लेखक के शोध/तजुर्बे से आतंकित/प्रभावित होने की याद भी नहीं रहती! आपको याद बस इतना रहता है कि आप ‘धामा चेरो’ नामक एक गौसेवक आदिवासी नेता की कहानी सुन रहे हैं जिसने कई और गोरखधंधों के साथ-साथ गौतस्करी से अच्छी कमाई की है और जो पिछली बार विफल रहने के बाद इस बार टिकट पाने के लिए कृतसंकल्प है। अनिल यादव की बारीक निगाह और कथाभाषा उनकी ख़ास पहचान है। वे चीज़ों को जिस तरह देखते हैं, उसमें निगाहें हर अवगुंठन को पार कर जाती हैं और 'दृश्य' के भीतर का 'अदृश्य' दिखने लगता है। इसी देखने से इस कहानीकार की ख़ास अपनी कथाभाषा जन्मी है। हिन्दी के युवा/लगभग-युवा कथाकारों में सम्भवतः अनिल यादव ही हैं जिन्हें, अब, कथाभाषा से पहचाना जा सकता है। यह उन्होंने क्रमशः अर्जित की है और 'गौसेवक' में यह अपनी पकी हुई पहचान के साथ है।
—संजीव कुमार
Kul Barah
- Author Name:
Satyajit Ray
- Book Type:

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Description:
अपनी फ़िल्मों के जरिये पूरी दुनिया में असाधारण शोहरत हासिल करनेवाले सत्यजित राय ने अपने लेखन से भी अपार लोकप्रियता हासिल की।
अपनी अति व्यस्तता के बावजूद उन्होंने बांग्ला भाषा में जिस विपुल परिमाण में साहित्य लेखन किया, वह किसी को भी विस्मित कर सकता है। अपने पितामह उपेन्द्र किशोर रायचौधरी और पिता सुकुमार राय की तरह किशोरों के लिए साहित्य-सृजन की परम्परा को आगे बढ़ाते हुए उन्होंने जासूस फेलूदा, वैज्ञानिक प्रोफेसर शंकु और बातूनी तारिणी चाचा जैसे नायाब पात्रों को साकार किया। यथार्थ और कल्पना तथा लौकिक और अलौकिक के मेल से उन्होंने दर्जनों ऐसे पात्रों और प्रसंगों को अपनी कहानियों में जीवन्त किया, जिन्हें भुला पाना असम्भव है।
सत्यजित राय की कहानियाँ अकल्पनीय रहस्य-रोमांच से भरपूर हैं, पर ये कहानियाँ परम्परागत रहस्य-रोमांच की कहानियों से बिलकुल भिन्न एक नई भाव-भूमि, एक नए संसार से साक्षात्कार कराती हैं। उनकी अधिकतर कहानियाँ हमारी जानी-पहचानी जगहों और लोगों के बीच से ही कुछ ऐसा उद्घाटित करती हैं जो हमें रोमांचित कर देता है और हमारी कल्पनाशीलता को नई गति प्रदान करता है।
‘कुल बारह’ की कहानियों में रहस्य-रोमांच के अलावा मानव मन की बारीकियाँ भी नजर आएँगी। कुतूहल से शुरू होने वाली इन कहानियों का कुतूहल कहानी खत्म होने के बाद भी बना रहता है।
Jeena Seekha Dengi
- Author Name:
Dr.Abrar Multani +1
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Pratinidhi Kahaniyan : Nirmal Verma
- Author Name:
Nirmal Verma
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- Description: निर्मल वर्मा मनुष्य-जीवन की ऐकांतिक अनुभूतियों के रचनाकार हैं। व्यक्ति और समाज का बाहरी एवं स्थूल यथार्थ उनकी कहानियों में नीरस विवरणों के रूप में नहीं आता, वे यथार्थ के उन सिरों को उभारते हैं, जिनसे हमारा साबिका अत्यन्त निजी क्षणों में पड़ता है और जिनका सरोकार समाज में निरन्तर अकेले होते जा रहे व्यक्ति के अन्तर्मन से है। वे उसके आन्तरिक कोलाहल और हाहाकार के चित्रण से ही अपने इस त्रासद समय पर टिप्पणी करते हैं। इसके लिए उन्हें किसी घटना का सहारा नहीं चाहिए, चाहिए सिर्फ़ एक परिवेश और उसकी धड़कनों को अनुभूत कर सकनेवाला एक संवेदनशील हृदय। निर्मल जी की प्रायः प्रत्येक कहानी इसी रचनात्मक ज़रूरत से उपजी है—एक विशेष मूड और मनःस्थिति के आद्यन्त निर्वाह से परिपूर्ण, जिसे हम अपने भीतर महसूस करते हैं। यह निर्मल वर्मा की सर्वाधिक पढ़ी जाने वाली कहानियों की प्रस्तुति है। जाहिर है ऐसी और भी कहानियाँ हैं जिन्हें इस संकलन में होना चाहिए था क्योंकि उनकी लगभग हर कहानी को उनके पाठकों ने विशेष मानकर ही पढ़ा है। नई हिन्दी कहानी को जैसी कलात्मक अर्थवत्ता उन्होंने दी वह उनका ऐतिहासिक अवदान है।
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