Pratinidhi Kahaniyan : Asghar Wajahat
(0)
Author:
Asghar WajahatPublisher:
Rajkamal Prakashan SamuhLanguage:
HindiCategory:
Short-story-collections₹
199
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असग़र वजाहत बेचैन लेखक हैं। लगातार प्रयोग करना और नएपन की तलाश करना उन्हें प्रिय है। कहानी में उन्होंने जोख़िम की हद तक प्रयोग किए हैं। लघुकथाओं के विन्यास से लगाकर संवाद और एकालाप जैसी प्रचलित-अप्रचलित नई-नई प्रविधियों में लिखना उन्हें आवश्यक लगता है। भाषा पर उनका जबरदस्त अधिकार, बारीक़ व्यंग्य और भीतरी करुणा का सहकार इन कहानियों को आकार देता है। साम्प्रदायिकता जैसी समस्या हो या मध्य वर्ग का पाखंड, एक ऐसे लेखक के लिए जो विचारधारा को साहित्य के लिए ज़रूरी समझता है, मनुष्यता के पक्ष में आशा का दामन कभी नहीं छोड़ सकता। प्रगतिशील जनवादी लेखन की समझ रही है कि मध्यवर्ग का काईंयापन और पाखण्ड मनुष्य समाज के विकास में बड़ा अवरोध है। असग़र वजाहत के यहाँ इस पाखण्ड के उद्घाटन के अनेक चित्र हैं जो बदलते समय के साथ प्रभावी होते गए हैं। आपातकाल के दौर में प्रतीकों में लिखी गई उनकी लघुकथाओं सरीख़ी कहानियाँ हों या हालिया दौर में असहिष्णुता से बजबजाते कारनामे सुनाती नई प्रविधि की कथाएँ, वे मनुष्यता के पक्ष में अपना स्वर कभी धीमा नहीं होने देते।
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असग़र वजाहत बेचैन लेखक हैं। लगातार प्रयोग करना और नएपन की तलाश करना उन्हें प्रिय है। कहानी में उन्होंने जोख़िम की हद तक प्रयोग किए हैं। लघुकथाओं के विन्यास से लगाकर संवाद और एकालाप जैसी प्रचलित-अप्रचलित नई-नई प्रविधियों में लिखना उन्हें आवश्यक लगता है। भाषा पर उनका जबरदस्त अधिकार, बारीक़ व्यंग्य और भीतरी करुणा का सहकार इन कहानियों को आकार देता है।
साम्प्रदायिकता जैसी समस्या हो या मध्य वर्ग का पाखंड, एक ऐसे लेखक के लिए जो विचारधारा को साहित्य के लिए ज़रूरी समझता है, मनुष्यता के पक्ष में आशा का दामन कभी नहीं छोड़ सकता।
प्रगतिशील जनवादी लेखन की समझ रही है कि मध्यवर्ग का काईंयापन और पाखण्ड मनुष्य समाज के विकास में बड़ा अवरोध है। असग़र वजाहत के यहाँ इस पाखण्ड के उद्घाटन के अनेक चित्र हैं जो बदलते समय के साथ प्रभावी होते गए हैं। आपातकाल के दौर में प्रतीकों में लिखी गई उनकी लघुकथाओं सरीख़ी कहानियाँ हों या हालिया दौर में असहिष्णुता से बजबजाते कारनामे सुनाती नई प्रविधि की कथाएँ, वे मनुष्यता के पक्ष में अपना स्वर कभी धीमा नहीं होने देते।
Book Details
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ISBN9789393768643
-
Pages160
-
Avg Reading Time5 hrs
-
Age18+ yrs
-
Country of OriginIndia
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—कृष्णा मोहन
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