Padari Mafi Mango
About the book
सटीक शब्दों का चुनाव, चुस्त वाक्य और संवेदना को भाषा का बाना देने का कौशल—ये चीज़ें इन कहानियों को पढ़ते हुए सबसे पहले ध्यान खींचती हैं, ख़ास तौर से इसलिए कि इधर की हिन्दी कहानी में अकसर इन चीज़ों का, एक समर्थ भाषा का अभाव खटकता है। ये कहानियाँ एक सधे हुए हाथ से उतरी हुई रचनाएँ हैं। संग्रह की शीर्षक कहानी ‘पादरी, माफ़ी माँगो’ धार्मिक कट्टरता और एकांगिता पर हिन्दी की कुछ श्रेष्ठ कथा-रचनाओं में गिनने योग्य है। जहाँ तक विषय-वस्तु का सवाल है, ये कहानियाँ जैसे पूरे समाज, और व्यक्ति के समूचे मनोसंसार को कहीं-न-कहीं छूती हैं। कहानी एक सजीव इकाई की तरह जैसे अपनी आँख से हमें हमारी दुनिया का दर्शन कराती है, लेखक बस एक निमित्त-भर है। मसलन ‘अम्माँ’ कहानी में एक भी वाक्य अपनी तरफ़ से कहे बग़ैर सिर्फ़ स्थितियों और घटनाओं के अंकन से ही उस हृदय-विदारक पीड़ा को सम्प्रेषित कर दिया जाता है जिसके कारण कहानी का बीज पड़ा होगा। समकालीन समाज की भौतिक और नैतिक विडम्बनाओं को रेखांकित करना कहानीकार का प्रधान प्रेरक बिन्दु है जो ‘दूसरा वर्ग’, ‘बेड नं. दस’, ‘वक़्त की कमी’ और ‘जोंक’ के साथ सभी कहानियों में किसी-न-किसी रूप में उजागर हुआ है। कहानी में नएपन और भाषिक तथा संवेदनात्मक ताज़गी चाहनेवाले पाठकों को यह संग्रह निश्चित रूप से पसन्द आएगा।
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सटीक शब्दों का चुनाव, चुस्त वाक्य और संवेदना को भाषा का बाना देने का कौशल—ये चीज़ें इन कहानियों को पढ़ते हुए सबसे पहले ध्यान खींचती हैं, ख़ास तौर से इसलिए कि इधर की हिन्दी कहानी में अकसर इन चीज़ों का, एक समर्थ भाषा का अभाव खटकता है।
ये कहानियाँ एक सधे हुए हाथ से उतरी हुई रचनाएँ हैं। संग्रह की शीर्षक कहानी ‘पादरी, माफ़ी माँगो’ धार्मिक कट्टरता और एकांगिता पर हिन्दी की कुछ श्रेष्ठ कथा-रचनाओं में गिनने योग्य है। जहाँ तक विषय-वस्तु का सवाल है, ये कहानियाँ जैसे पूरे समाज, और व्यक्ति के समूचे मनोसंसार को कहीं-न-कहीं छूती हैं।
कहानी एक सजीव इकाई की तरह जैसे अपनी आँख से हमें हमारी दुनिया का दर्शन कराती है, लेखक बस एक निमित्त-भर है। मसलन ‘अम्माँ’ कहानी में एक भी वाक्य अपनी तरफ़ से कहे बग़ैर सिर्फ़ स्थितियों और घटनाओं के अंकन से ही उस हृदय-विदारक पीड़ा को सम्प्रेषित कर दिया जाता है जिसके कारण कहानी का बीज पड़ा होगा। समकालीन समाज की भौतिक और नैतिक विडम्बनाओं को रेखांकित करना कहानीकार का प्रधान प्रेरक बिन्दु है जो ‘दूसरा वर्ग’, ‘बेड नं. दस’, ‘वक़्त की कमी’ और ‘जोंक’ के साथ सभी कहानियों में किसी-न-किसी रूप में उजागर हुआ है।
कहानी में नएपन और भाषिक तथा संवेदनात्मक ताज़गी चाहनेवाले पाठकों को यह संग्रह निश्चित रूप से पसन्द आएगा।
Book details
- Format
- Hardbound
- Publisher
- Rajkamal Prakashan Samuh
- Edition
- 1st
- Publication year
- 2009
- Weight
- 316 grams
- ISBN-13
- 9788126716869
- Pages
- 168
- Reading time
- ~6 hrs
- Age
- 18+
- Country of origin
- India
- Dimensions
- 14 × 22 cm
- Language
- Hindi
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