Gauri
Author:
Subhadra Kumari ChauhanPublisher:
Rajkamal Prakashan SamuhLanguage:
HindiCategory:
Short-story-collections0 Ratings
Price: ₹ 48
₹
60
Available
Awating description for this book
ISBN: 9789392186127
Pages: 103
Avg Reading Time: 3 hrs
Age: 18+
Country of Origin: India
Recommended For You
Bhookh Ke Teen Din
- Author Name:
Yashpal
- Book Type:

-
Description:
यशपाल के लेखकीय सरोकारों का उत्स सामाजिक परिवर्तन की उनकी आकांक्षा, वैचारिक प्रतिबद्धता और परिष्कृत न्याय-बुद्धि है। यह आधारभूत प्रस्थान बिन्दु उनके उपन्यासों में जितनी स्पष्टता के साथ व्यक्त हुए हैं, उनकी कहानियों में वह ज़्यादा तरल रूप में, ज़्यादा गहराई के साथ कथानक की शिल्प और शैली में न्यस्त होकर आते हैं। उनकी कहानियों का रचनाकाल चालीस वर्षों में फैला हुआ है। प्रेमचन्द के जीवनकाल में ही वे कथा-यात्रा आरम्भ कर चुके थे, यह अलग बात है कि उनकी कहानियों का प्रकाशन किंचित् विलम्ब से आरम्भ हुआ। कहानीकार के रूप में उनकी विशिष्टता यह है कि उन्होंने प्रेमचन्द के प्रभाव से मुक्त और अछूते रहते हुए अपनी कहानी-कला का विकास किया। उनकी कहानियों में संस्कारगत जड़ता और नए विचारों का द्वन्द्व जितनी प्रखरता के साथ उभरकर आता है, उसने भविष्य के कथाकारों के लिए एक नई लीक बनाई, जो आज तक चली आ रही है। वैचारिक निष्ठा, निषेधों और वर्जनाओं से मुक्त न्याय तथा तर्क की कसौटियों पर खरा जीवन—ये कुछ ऐसे मूल्य हैं जिनके लिए हिन्दी कहानी यशपाल की ऋणी है।
‘भूख के तीन दिन’ कहानी-संग्रह में उनकी ये कहानियाँ शामिल हैं : ‘भूख के तीन दिन’, ‘शुरफा’, ‘समय’, ‘दीनता का प्रायश्चित्त’, ‘भली लड़कियाँ’, ‘दाग़ ही दाग़’ ‘मॉडर्न’, ‘सीख’, ‘ख़ूब बचे!’, ‘पागल है!’ और ‘आशीर्वाद’।
Aparajita
- Author Name:
Shivani
- Book Type:

- Description: महिला कथाकारों में जितनी ख्याति और लोकप्रियता शिवानी ने प्राप्त की है, वह एक उदाहरण है श्रेष्ठ लेखन के लोकप्रिय होने का। शिवानी लोकप्रियता के शिखर को छू लेनेवाली ऐसी हस्ती हैं, जिनकी लेखनी से उपजी कहानियाँ कलात्मक और मर्मस्पर्शी होती हैं। अन्तर्मन की गहरी पर्तें उघाड़ने वाली ये मार्मिक कहानियाँ शिवानी की अपनी मौलिक पहचान हैं जिसके कारण उनका अपना एक व्यापक पाठक वर्ग तैयार हुआ। इनकी कहानियाँ न केवल श्रेष्ठ साहित्यिक उपलब्धियाँ हैं, बल्कि रोचक भी इतनी अधिक हैं कि आप एक बार शुरू करके पूरी पढ़े बिना छोड़ ही न सकेंगे। प्रस्तुत संग्रह में ‘दंड’, ‘मन का प्रहारी’, ‘श्राप’, ‘लिखूँ...’, ‘मेरा भाई’, ‘अपराजिता’, ‘निर्वाण’, ‘सौत’, ‘तीन कन्या’, ‘चन्नी’ एवं ‘धुआँ’ कहानियाँ संकलित हैं। हर कथा अपनी मोहक शैली में अभिभूत कर देने की अपार क्षमता रखती है। कलात्मक कौशल के साथ रची गई ये कहानियाँ हमारी धरोहर हैं जिन्हें आज की नई पीढ़ी अवश्य पढ़ना चाहेगी।
Choti Upanyas(Volume-1)
- Author Name:
Dr.Sanjay Rout
- Book Type:

- Description: Looking for an engaging, easy-to-read collection of short stories to get lost in? Look no further! Choti Upanyas(Volume-1) is the perfect choice. Get ready to be captivated by the relatable tales of everyday life. With its vivid description of characters and realistic plots, this book will make you feel like you’re a part of each story. It’s sure to leave you wanting more! So get ready to be transported into a world of imagination and exploration with Choti Upanyas(Volume-1).
Pyramid Ka Sapna
- Author Name:
Jack Harte
- Book Type:

-
Description:
जैक की कहानियों का यह चयन उनके लेखन की बहुआयामी छवि को प्रस्तुत करता है जहाँ कहानी के शिल्प और रूप की नई सम्भावनाओं की तलाश की गई है। कहानी सिर्फ़ कहानी है। ज़रूरत है पंख फैलाकर उड़ने की और एक सीमा से दूसरी सीमा तक के तमाम रूपों को पुनर्परिभाषित करने की।
जैक का लेखन कहानी को कविता के बेहद नज़दीक ले जाने का भी अद्भुत प्रयास है। इन कहानियों को पढ़ते हुए आपको ल फॉन्टेन एवं लेटिन अमरीकी अतियथार्थवादी लेखकों से लेकर भारत के विजयदान देथा तक याद आते रहते हैं। जैक हार्ट की कहानियों को विशुद्ध प्रतीकवाद और यथार्थवाद का मिश्रण कहना किसी भी तरह अनुचित न होगा।
जैक की कहानियाँ इस बात का सबूत हैं कि किस तरह कहानी मानव मन के अन्तरतम कोनों तक पहुँच सकती हैं। कल्पना के उच्चतम स्तर तक पहुँचने के लिए ये कहानियाँ लगातार प्रेरित करती रहती हैं। वे हमें कान पकड़कर उन अनजान जगहों पर ले जाती हैं जहाँ अचानक हम ख़ुद को पहचानते हैं और हैरान होते हैं। हम गवाह बन जाते हैं : प्रेम, दर्द, युद्ध की त्रासदी और कल्पना की असफलता के।
Metoo
- Author Name:
Akash Mathur
- Book Type:

- Description: Book
Ek Tha Bhondu Aur Anya Kahaniyan
- Author Name:
Kajal Kumar
- Book Type:

- Description: This book has no description
Vimarsh Naqqashidar Cabinet
- Author Name:
Pankaj Subeer
- Book Type:

- Description: Book
Vashinda @ Teesari Duniya
- Author Name:
Pankaj Mitra
- Book Type:

-
Description:
पंकज मित्र हिन्दी के सर्वप्रिय कथाकारों में हैं जिन्हें हमेशा ही पढ़ा जाता है। ग्रामीण और क़स्बाई समाज की गहरी पड़ताल और सघन संवेदना तथा थोड़े व्यंग्य के साथ समाज के ठेठ देसी यथार्थ की अक्काशी करनेवाले कथाकार के रूप में उन्होंने अपना एक विशेष स्थान बनाया है।
इस संग्रह में शामिल कहानियाँ गाँव-समाज में होनेवाले नित नए बदलावों को रेखांकित करते हुए देश का एक नया कथा-वृत्तान्त रचती हैं जिसमें युवा पीढ़ी, उसकी उम्मीदें, निराशाएँ, बदलते जीवन-मूल्य और चाकू के फल की तरह गाँव की हवा में घुसता शहर कई तरह से उजागर हुआ है। ये कहानियाँ बताती हैं कि गाँव या कहें वह भारतीय चेतना जो एक भाव-धारा की तरह गाँव से चलकर क़स्बों और फिर शहरों तक में हमारी ख़ास पहचान होती हैं, भूमंडलीय वास्तविकता के सामने जो रूप धारण करती हैं, वह एक अलग ही भाव-भूमि है। उसका सम्बन्ध न योरोप-अमेरिका से जुड़ता है और न भारत की अपनी मिट्टी से। यह एक ख़तरनाक भूगोल है जिसके समतल होने तक शायद हम बहुत कुछ गँवा दें। ‘फ़ेसबुक मेन्स पार्लर’, ‘अधिग्रहण’ आदि कहानियाँ इस यथार्थ को बहुत कलात्मकता के साथ रेखांकित करती हैं।
देश के इस बदलते सामाजिक-सांस्कृतिक भूगोल में स्त्री फिर एक उम्मीद की तरह दिखती है, वह शायद इसलिए कि उसे अपना रास्ता बनाना है, ऐसा कोई रास्ता उसके पास था नहीं जिसके खो जाने का भय उसे हो। ‘जलेबीबाई डॉट कॉम’ इस सन्दर्भ में पठनीय है। ‘मनेकि लबरा नाई की दास्तान’ अपने शिल्प और अपने मंतव्य दोनों में कथाकार की क्षमता को गहराई से रेखांकित करती है।
Aadim Ratri Ki Mehak
- Author Name:
Phanishwarnath Renu
- Book Type:

-
Description:
फणीश्वरनाथ रेणु के कथा साहित्य को आंचलिक कहा गया है किन्तु उनकी कहानियाँ (तथा उपन्यास भी) जहाँ एक ओर ग्राम्य-जीवन की आंचलिकता को ही नहीं उसकी सम्पूर्ण आन्तरिकता को व्यक्त करती हैं, वहीं दूसरी ओर ग्रामीण तथा शहरी जीवन के अन्त:सम्बन्धों की वास्तविकता का भी उद्घाटन करती हैं। रेणु की कहानियों में अत्यन्त ‘निजी’ को व्यापक सामाजिक यथार्थ से जोड़ पाने की अद्भुत क्षमता है और ऐसा वे अपूर्व काव्यात्मक रचाव के साथ कर पाते हैं। इस प्रक्रिया में उनकी कहानियाँ संगीत की सरहदों को छूने लगती हैं। उनके सहज प्रतीत होनेवाले कथा-शिल्प से अनायास ‘ऑडियो-विजुअल’ प्रभाव उत्पन्न होने लगता है। उनकी टेकनीक एक सर्ररियलिस्टिक पैटर्न निर्मित करती है जिसमें एक ‘प्रिज़्म’ की तरह छनकर रंगारंग विचारों तथा भावनाओं की घुलनशीलता शामिल हो जाती है। उनकी कहानियाँ हमारी सम्पूर्ण संवेदनाओं को एक साथ तृप्त करती हैं। अगर उनमें गहरी लयबद्ध ऐन्द्रिकता है तो बिना बौद्धिकता का छद्म धारण किए ही ‘वस्तु सत्य’ के मर्म तक पहुँच जानेवाली विश्लेषणपरकता भी है। आज़ादी के बाद के राजनैतिक परिवर्तनों का दस्तावेज़ी बयान प्रस्तुत करनेवाली कहानियों में यह तथ्य ख़ूब उभरकर आता है—‘जलवा’ तथा ‘आत्म-साक्षी’ जैसी कहानियों में तटस्थ राजनैतिक बोध की निर्ममता के साथ उस क्रूर ‘ट्रेजडी’ का एहसास भी है जिसमें कोमल मानवीय सच्चाइयों के निर्दयता से कुचले जाने का इतिहास अंकित है। ‘आदिम रात्रि की महक’ की कहानियों में एक नैसर्गिक विनोद वृत्ति है जो एक साथ भाषा, स्थितियों तथा चरित्रों से छेड़छाड़ करती चलती है—चुलबुलेपन की हद तक जाकर। लेकिन उनमें कब अचानक एक करुण मानवीय बोध उतर आता है, इसका पता पाठक को तब चलता है जब उसकी ‘हँसी’ में सहसा एक ‘हूक’ शामिल हो जाती है। ऐसे विरल संयोगों के हिन्दी में रेणु एकमात्र कथाकार हैं।
—विजय मोहन सिंह
Kaath Ke Putley
- Author Name:
Pragya
- Book Type:

- Description: काठ के पुतले कहानीकार-उपन्यासकार प्रज्ञा का पाँचवाँ कहानी-संग्रह है। इसमें नौ लम्बी कहानियाँ शामिल हैं। ये कहानियाँ हमारे समय का आईना भी हैं और उससे आगे की ओर निकलती राह भी। इन कहानियों में आपको नए समय की धड़कनें सुनाई देंगी। प्रज्ञा की कहानियाँ अपनी विषयगत विविधता के कारण अलग पहचान बनाती हैं। इस संग्रह में भी तकनीक, बाजार, प्रेम, श्रम, पूँजी, शिक्षा आदि क्षेत्रों में यथार्थ के छूट गए जरूरी कोनों से प्रज्ञा उस सच को अपने पाठकों के लिए निकाल लाई हैं जिसे देखकर भी अनेक बार अनदेखा कर दिया जाता है। ‘काठ के पुतले’ शहर, कस्बों और गाँवों के जीवन में आए तेज बदलावों के बीच घायल मनुष्यता की कहानियाँ जरूर हैं पर यह घायल मनुष्यता पूरी जिजीविषा के साथ संघर्षरत रहकर अपना अनूठा आसमान रचती है। यह कहानी-संग्रह यथार्थ की ऐसी तस्वीर सामने लाता है जिसमें बाजार और बदली हुई अर्थव्यवस्था मनुष्य को उसके सहज मानवीय संवेदनाओं से दूर करके एक ही साँचे में ढले हुए, एक ही काठ के कटे हुए पुतलों में तब्दील कर देना चाहती है। ऐसे पुतले जो प्रतिरोध न करें, अपने अधिकारों की माँग न करें। जो मनुष्य होते हुए भी खामोश रहें। जो अन्याय होते हुए भी आँख मूँद लें पर व्यवस्था को धता बताकर जब भी कोई व्यक्ति उसके मंसूबों के प्रतिपक्ष में खड़ा हो जाता है तब लड़ाई सिर्फ उसकी नहीं रह जाती। यह लड़ाई कहीं न कहीं पूरे मुनष्य जगत को बचाने की लड़ाई बन जाती है। जो विरोध का दामन थामकर कहती है—हम काठ के पुतले बनने से इंकार करते हैं। कथा कहने का प्रज्ञा का खास अन्दाज है। रहस्य और जिज्ञासा के ताने-बाने में किरदारों के जीवन के स्याह-धवल रंग और उनकी अपराजेय शक्ति ही इन कहानियों की आधारभूमि है। यथार्थ के सम-विषम स्वरों को सुनकर एक नया राग प्रज्ञा अपनी हर कहानी में साकार करने का प्रयत्न करती हैं। असम्भव में संभावना की तलाश उनकी कहानी-कला की खासियत है।
Volga Se Ganga
- Author Name:
Rahul Sankrityayan
- Rating:
- Book Type:

- Description: राहुल सांकृत्यायन की अत्यन्त चर्चित कृति ‘वोल्गा से गंगा’ ऐसी बीस ऐतिहासिक कहानियों का संकलन है जिनमें उन्होंने आर्यों के आठ हजार साल के इतिहास को कालानुक्रम से अंकित किया है। इन कहानियों में मातृसत्तात्मक समाज-व्यवस्था को पितृसत्तात्मक व्यवस्था में बदलने की प्रक्रिया भी दृष्टिगोचर होती है और आर्यों की यूरेशिया से वोल्गा तथा उसके बाद गंगा तक की यात्रा की रूपरेखा भी पता चलती है। ई.पू. 6000 से लेकर 1942 ई. तक के कालखंड को कड़ी-दर-कड़ी प्रस्तुत करनेवाली ये कहानियाँ एक तरफ जहाँ राहुल सांकृत्यायन के असीम अध्ययन का पता देती हैं, वहीं भारोपीय मानव-इतिहास के प्रति हमें एक व्यापक समझ भी देती हैं। इन कहानियों में इतिहास भी है, और कथा भी। सम्बन्धित काल खंडों की सामाजिक-आर्थिक परिस्थितियों की स्पष्ट रूपरेखा प्रस्तुत करते हुए ये कहानियाँ कथा-रस को भी कहीं भंग नहीं होने देतीं। भारतीय साहित्य में एक क्लासिक का दर्जा हासिल कर चुकी इस पुस्तक का अनुवाद असमिया, मराठी, बांग्ला, कन्नड़, तमिल, मलयालय, तेलुगु, पंजाबी आदि भारतीय भाषाओं के अलावा अंग्रेजी, चेक तथा पोलिश भाषाओं में भी हो चुका है।
DALDAL
- Author Name:
Sushant Supriy
- Book Type:

- Description: Stories
Pratinidhi Kahaniyan : Krishna Baldev Vaid
- Author Name:
Krishna Baldev Vaid
- Book Type:

- Description: कृष्ण बलदेव वैद समकालीन हिन्दी कथा-साहित्य में अलग से पहचाने जानेवाले कथा-शिल्पी हैं। उन्हें किसी भी साधारण खाने में रखना कठिन है। इस संग्रह में उनकी चुनिन्दा कहानियाँ शामिल हैं, जिनमें से प्रायः प्रत्येक एक गम्भीर पाठकीय अभिरुचि की माँग करती है, क्योंकि उनके कथा-अभिप्रायों में सीधे-सादे सामाजिक या आर्थिक सन्दर्भ-भर ही नहीं हैं—कई और ऐसे अर्थ भी हैं, जो इकहरी यथार्थवादी रचनाओं में नहीं होते। लिखने की प्रेरणा उन्हें ‘अतीत के उस काले शोर को बार-बार भोगने और बराबर उससे भागते रहने की परस्पर विरोधी विवशताओं’ से मिलती है। इस बारे में उनका यह आत्मस्वीकार भी महत्त्वपूर्ण है कि ‘जैसे वह शोर मेरा अपना है, वह सन्दर्भ (रचना-सन्दर्भ) भी मेरा अपना ही होना चाहिए, अपना ही हो सकता है।’ यथार्थ और अयथार्थ का सारा झमेला अप्रासंगिक है लेकिन इसका आशय यह नहीं कि इन कहानियों में यथार्थ का अभाव है, क्योंकि ‘कलाकार के लिए अयथार्थ कुछ भी नहीं’ होता। निस्सन्देह, कृष्ण बलदेव वैद की ये कहानियाँ उनकी विशिष्ट रचना-दृष्टि, प्रयोगधर्मिता और कसी हुई भाषा-शैली का प्रतिनिधित्व करती हैं।
The Village Well & Other Stories
- Author Name:
P. Jayalakshmi +1
- Rating:
- Book Type:

- Description: Oorabavi and Other Stories is a collection of Kolakaluri Enoch’s short stories on the life in rural India, predominantly the life of Dalits. Life in rural India revolves around the village well and water sharing, caste domination and operation by dominant castes. Enoch tried tackling the problem way back in 1969 through successful resistance and reclamation of water as a right by the marginalized in a village. The volume while successfully defining and giving concrete reality to rooted institutions of caste in India, it also brilliantly recreates suppressed and silenced histories of men and women of various caste occupations- cobbler, scavengers, barbers, washer men, and actors in street plays, beside sensitive portrayal of village youth small time workers in hotels etc. The narrative ranges between exploitation and revenge, hunger and vulnerability, oppression and submission, conscience and need, rebellion and resistance, deprivation and triumph.
Swayamsiddha
- Author Name:
Dr. Manjari Shukla
- Book Type:

- Description: स्वयंसिध्दा - समाज और स्त्री मन को टटोलती कहानियांधूप और छाँव-सी ज़िंदगी खेलती रहती है एक खेल। जब उजाला आता है तो चारो तरफ चकाचौंध सा हो जाता है और जब अँधेरा घिरता है तो मन का जैसे हर कोना रिसने लगता है। तमाम उम्र परछाइयों के पीछे भागती स्वयंसिद्धा, जिंदगी की अजीब सी पहेली को सुलझाने का लाख जतन करती है पर उसके बाद भी उस भीगे मन के कोने को खोलने के लिए कोई सिरा नहीं मिलता। स्वयंसिद्धा अपने विचारों के चक्रव्यूह से बाहर निकलने की जितनी कोशिश करती उसमें उतना ही गहराई तक चली जाती है। भला कोई कीट, मकड़ी के बेहद खूबसूरत और महीन जाले से क्या कभी बाहर आया है जो स्वयंसिद्धा आ जाती।स्त्री मन हर पल में ढेरों सपने बुनता है पर क्या कोई पुरुष उस मन के अंदर झाँककर उन भावों को पढ़ पाता है या सिर्फ देह से ही वापस लौटकर आ जाता है।
Kannadada Muvattu Kathegalu
- Author Name:
Krishnamurthy Hanur +1
- Rating:
- Book Type:

- Description: discriptation awaited
Krishnadwadashi
- Author Name:
Mahashweta Devi
- Book Type:

-
Description:
शीर्षक समेत कथा-संकलन में महाश्वेता देवी की तीन कहानियाँ संगृहीत हैं। सभी कहानियों का अपना ऐतिहासिक महत्त्व है। अथक परिश्रम और शोध के मंथन-निष्कर्षों के बाद यह कहानियाँ वजूद में आई हैं। बंगाल का अतीत, उसकी विडम्बनाएँ और विसंगतियाँ लेखिका के प्रिय विषय रहे हैं। मूलतः वे लोककथाओं तथा किंवदन्तियों की वैज्ञानिक सत्यता की भी पड़ताल करती हैं। संग्रह में शामिल सभी कहानियों के माध्यम से इतिहास की रोशनी में मौजूदा समय की नब्ज़ को टटोलने की कोशिश की गई है।
‘कृष्णद्वादशी’ तथा ‘केवल किंवदन्ती’ कहानियों के कथानक ‘बंगाली जाति का इतिहास’ तथा ‘बृहत् बंग’ ग्रन्थ से लिए गए हैं। नीहार रंजन, दिनेशचन्द्र और सुकुमार सेन जैसे इतिहासविदों ने वणिक-वधू माधवी का उल्लेख किया है। प्राचीन बंगाल में राजा बल्लाल के समय सुवर्ण-वणिकों के साथ क्रूर बर्ताव किया गया था। राजा वर्ग और वर्ण के आधार पर अपनी नीतियों का पालन करता था। महिलाओं की स्थिति सर्वाधिक त्रासद थी। ‘कृष्णद्वादशी’ की माधवी में द्रौपदी की झलक देखने को मिलती है। ‘केवल किंवदन्ती’ की वल्लभा अनन्या है ही। ‘यौवन’ कहानी के केन्द्र में ईस्ट इंडिया कम्पनी का विद्रूप चेहरा है। तब बंगाल से भारत लाए जानेवाले सैनिक बीच में विद्रोह कर देते तो उन्हें जेल में ठूँस दिया जाता था। कई सैनिक इस अमानुषिक माहौल से तंग आकर भाग जाया करते, ऐसे सैनिकों को ‘भागी गोरा’ कहा जाता था। महाश्वेता जी ने इस ऐतिहासिक समय को लगभग 30-32 वर्ष पूर्व ‘नृसिंहदुरावतार’ शीर्षक कहानी में विश्लेषित करने की कोशिश की थी। ‘यौवन’ उसी कथा की सार्थक पुनर्विवेचना है। इस कहानी में लुप्त हो रही ‘मनुष्यता’ का अन्वेषण है।
Pratinidhi Kahaniyan : Yaikam Mohmmad Bashir
- Author Name:
Yaikam Mohmmad Bashir
- Book Type:

- Description: केरल के निम्न-मध्यवर्गीय समाज और मुस्लिम आबादी को गझिन पृष्ठभूमि से कथानक लेकर उन्हें जादुई कलात्मकता से कहानियों में प्रस्तुत करनेवाले वाइकम मुहम्मद बशीर भारतीय तथा साहित्य में अपना विशिष्ट स्थान रखते हैं। इस्लामिक सामाजिक परिवेश, इस्लाम के पौराणिक मिथकों और केरल के मुस्लिमों में प्रचलित भाषा रूपों का प्रयोग उनके कथा-जगत को एक अलग पहचान देता है। मलयाली ही नहीं, अन्य भाषाओं में भी इस कोटि का बहुत कुछ नहीं मिलता। इस संग्रह में उनकी पन्द्रह अद्भुत कहानियाँ संकलित हैं जो समाज के हाशिए पर रहनेवाले ग़रीब लेकिन जीवट और मनुष्यता से लवरेज लोगों का चित्रण करती हैं। पहली ही कहानी ‘जुआरी की बेटी’ कथाकार की मनोवैज्ञानिक और समाजशास्त्रीय समझ का एक आकर्षक नमूना है। बशीर स्वतंत्रता आन्दोलन में सक्रिय रहे थे। उस दौरान उनके कुछ अनुभव संग्रह में शामिल ‘माँ’, ‘हथकड़ी’ और ‘पुलिसवाले की बेटी’ आदि कहानियों में देखने को मिलते हैं। उनके कथासंसार में सिर्फ़ मनुष्य ही नहीं, बल्कि संसार की सभी चर-अचर वस्तुएँ जैसे चैतन्य होकर गति करती है।
Katha Saptak Lakshmi Sharma
- Author Name:
Lakshmi Sharma
- Book Type:

- Description: इस संग्रह की हर एक कहानी अनूठी है। इस संग्रह में शामिल सात कहानियों में अलग ही तरह का आकर्षण है। इन कहानियों में पात्रों का जो चित्रण किया गया है, वो अनुपम है। पात्र सामने खड़े होकर बात करते हैं। मैंने सबसे पहले लक्ष्मी जी का उपन्यास 'स्वर्ग का अंतिम उतार' पढ़ा था। तब से मैं उनके लेखन का कायल हूँ। उपन्यास की जितनी प्रशंसा की जाए कम है, पर यहाँ तो हमें उनकी सात कहानियों के बारे में ही कहना है। इस संग्रह की दो कहानियाँ जो मुझे सबसे ज्यादा पसंद आईं, हालाँकि हर एक कहानी पसंद आई, पर बात उन्नीसा-बीसा जितनी ही है। जो ज्यादा पसंद आई बात उनकी पहले। 'पूस की एक और रात' और 'रानियाँ रोती नहीं।' पूस की एक और रात का जो अंत है वो चौंका देता है, अख़बार की एक ख़बर की शहर की ठंडी रात जिसका पूरा विवरण कहानी में बताया है, पर दूसरी ख़बर चौंका देती है, जिसका ज़िक्र यहाँ कर मैं कहानी को यहीं ख़त्म करना नहीं चाहता। वहीं दूसरी कहानी है 'रानियाँ रोती नहीं'। जिसमें दो काल एक साथ चलते हैं। इतिहास और वर्तमान दोनों में बड़ा अंतर है। गहनों से लदी रानियाँ और जीन्स पहने महिला। बस कपड़ों का ही तो अंतर है। महिलाओं की व्यथा तो वही है। वो रो नहीं सकती, मतलब आवाज़ नहीं उठा सकतीं। उन्हें सहने के लिए धरती पर भेजा है।
Pahala Path
- Author Name:
Bhisham Sahni
- Book Type:

-
Description:
इतिहास के जिस मोड़ पर यह कहानी-संग्रह प्रकाशित हुआ था, वह भारत के राजनीतिक-सामाजिक जीवन का सन्धि-काल था। आज़ादी के बाद का पहला दशक, जिसके साल 1957 में यह संग्रह प्रकाशित हुआ। इसी संग्रह में भीष्म जी की सर्वाधिक चर्चित कहानियों में से एक 'चीफ़ की दावत' प्रकाशित हुई, जो मध्यवर्ग की कैरियरिस्ट विडम्बनाओं और पारिवारिक मूल्यों के तेज़ी से बदलने की प्रक्रिया को बारीकी और मार्मिकता से पकड़ने के लिए आज भी प्रासंगिक बनी हुई है। बाद में इसके आलावा भी भीष्म जी की क़लम से ऐसी कहानियों की रचना हुई जो न सिर्फ़ अपनी संरचना, बल्कि अपनी पठनीयता के नज़रिए से भी मील का पत्थर साबित हुई।
इस संग्रह में संकलित कहानियाँ, उन तमाम विशेषताओं को कहीं-न-कहीं रेखांकित करती हैं, जो बीच-बीच में उनकी कालजयी कथा-रचनाओं में एक साथ उपस्थित होती रही हैं। इन कहानियों ने बताया था कि भीष्म जी ने अपनी वैचारिक प्रतिबद्धता को कहानी की नहीं, अपनी दृष्टि की पहचान बनाया। इसीलिए ये कहानियाँ बावजूद इसके कि लेखक के सोचने का अपना एक अनुशासन है, अपनी नियति की तरफ स्वतंत्र रूप से बढ़ती हैं, और उपदेश के बजाय जीवन को एक नई जगह से देखने का विकल्प सुझाती हैं।
Customer Reviews
Be the first to write a review...
0 out of 5
Book