Listen to a Sample
Chandausi Junction
(4)
Author:
Shankar SahayPublisher:
Rachnaye FulfilledLanguage:
EnglishCategory:
Short-story-collections₹
499
₹ 424.15 (15% off)
Available
Ships within 48 Hours
Free Shipping in India on orders above Rs. 1100
A collection of short-stories set in the 20th Century India for the 21st Century kids & a nostalgic walk, for their parents & grandparents. Although this book has been named after the city of Chandausi, it contains stories from various places like Rishikesh, Agra, Champaran, Tilhar, Sambhal, Kanpur, Banaras, Lucknow and many others. These are the short stories of a bygone era-a period when India had either not gained independence or had been independent for not more than 35 years. These are the tales of journeys-taken up from the early 20th century to the end of a millennium, from Shahjahanpur to Delhi, from Bijnor to Hyderabad, from Hathras to Sweden & Norway, from Lakshmi Talkies, Allahabad to Night Watchman, Bangalore, from Panki to USA, from Dehradun to Canada, from Chandausi to Australia and many others. We are sure in all these stories, you will be able to find at least one character, which reminds you of your own self-of what you are, were or always wanted to be. Let us know the character with whom you have been able to relate to the most. Happy reading. “Genius is one percent inspiration and 99 percent perspiration,”-Thomas A. Edison. -Here’s a collection of short stories to inspire the readers.
Read moreAbout the Book
A collection of short-stories set in the 20th Century India for the 21st Century kids & a nostalgic walk, for their parents & grandparents. Although this book has been named after the city of Chandausi, it contains stories from various places like Rishikesh, Agra, Champaran, Tilhar, Sambhal, Kanpur, Banaras, Lucknow and many others. These are the short stories of a bygone era-a period when India had either not gained independence or had been independent for not more than 35 years. These are the tales of journeys-taken up from the early 20th century to the end of a millennium, from Shahjahanpur to Delhi, from Bijnor to Hyderabad, from Hathras to Sweden & Norway, from Lakshmi Talkies, Allahabad to Night Watchman, Bangalore, from Panki to USA, from Dehradun to Canada, from Chandausi to Australia and many others. We are sure in all these stories, you will be able to find at least one character, which reminds you of your own self-of what you are, were or always wanted to be. Let us know the character with whom you have been able to relate to the most. Happy reading. “Genius is one percent inspiration and 99 percent perspiration,”-Thomas A. Edison. -Here’s a collection of short stories to inspire the readers.
Book Details
-
ISBN9781685638610
-
Pages168
-
Avg Reading Time6 hrs
-
Age18+ yrs
-
Country of OriginIndia
Recommended For You
Sapne Mein Kabeer
- Author Name:
Premkumar mani
- Book Type:

- Description: हिन्दी कथा-साहित्य को जिन चुने हुए रचनाकारों ने उसकी जड़ता और अपठनीयता से मुक्ति दिलाई, उनमें प्रेमकुमार मणि प्रमुख हैं। पिछली सदी के सातवें दशक के आख़िर से उन्होंने लिखना आरम्भ किया और आठवें दशक में कथाकार के रूप में पहचान बनाई। मणि ने कहानियों को जनसरोकारों और समकालीनता की धड़कन से नत्थी किया और सहज भाव से भाषा व मिज़ाज के नए आयाम उद्घाटित किये। उनकी कहानियों में उत्तर भारतीय जनजीवन के ऐसे अनछुए परिदृश्य उभरते हैं, जो हमें आंतरिक स्तर तक आश्वस्त और कभी-कभार उद्वेलित करते हैं। प्रचलित अर्थों में न वह गाँव के कथाकार हैं और न ही शहर के। उन पर साहित्यिक आंदोलनों का भी कोई चंदोवा कभी प्रभावी नहीं हुआ। बदलते हुए सामाजिक-राजनीतिक जीवन के अंतर राग और उसमें व्याप्त विविध किस्म के मिथ्याचार उनकी कहानियों में हम पा सकते हैं। सबसे बढ़ कर यह कि इन्हें पढ़ते हुए हम ज्ञानात्मक संवेदना से स्वत: निमज्जित और संस्कारित अनुभव करते हैं। इस संकलन में उनकी कुछ ऐसी कहानियाँ भी हैं, जिन्हें आमतौर पर लघु कथा कहने का प्रचलन है। लेखक का आग्रह उन्हें कथा मानने का है। इनका एक अलग आस्वाद और बुनावट है। बहुत हौले-से हमारी संवेदना को ये गहरे स्तर पर प्रभावित करती हैं। इक्कीसवीं सदी के तीसरे दशक में बीसवीं सदी के उत्तराद्र्ध में उभरे एक कथाकार की कहानियों का पढऩा एक अलग अनुभव दे सकता है।
Badlon Ke Ghere
- Author Name:
Krishna Sobti
- Book Type:

- Description: आधुनिक हिन्दी कथा-जगत में अपने संवेदनशील गद्य और अमर पात्रों के लिए जानी जानेवाली कथाकार कृष्णा सोबती की प्रारम्भिक कहानियाँ इस पुस्तक में संकलित हैं। शब्दों की आत्मा से साक्षात्कार करनेवाली कृष्णा सोबती ने अपनी रचना-यात्रा के हर पड़ाव पर किसी-न-किसी सुखद विस्मय से हिन्दी-जगत को रू-ब-रू कराया है। ये कहानियाँ कथ्य और शिल्प, दोनों दृष्टियों से कृष्णा जी के रचनात्मक वैविध्य को रेखांकित करती हैं। इनमें जीवन के विविध रंग और चेहरे अपनी जीवन्त उपस्थिति से समकालीन समाज के सच को प्रकट करते हैं। समय का सच इन कहानियों में इतनी व्यापकता के साथ अभिव्यक्त हुआ है कि आज के बदलते परिवेश में भी इनकी प्रासंगिकता बनी हुई है। अनुभव की तटस्थता और सामाजिक परिवर्तन के द्वन्द्व से उपजी ये कहानियाँ अपने समय और समाज को जिस आन्तरिकता और अन्तरंगता से रेखांकित करती हैं, वह निश्चय ही दुर्लभ है।
Mitramilan Tatha Anya Kahaniyan
- Author Name:
Amarkant
- Book Type:

-
Description:
‘ज़िन्दगी और जोंक’, ‘देश के लोग’ और ‘मौत का नगर’ के बाद ‘मित्र-मिलन तथा अन्य कहानियाँ’ अमरकान्त की नई कहानियों का संकलन है। ये कहानियाँ न केवल इतिहास की विसंगतियों और असफलताओं पर गम्भीर चिन्ता व्यक्त करती हैं, बल्कि यथा-स्थितिवाद का कोहरा हटाकर हमारे दृष्टिकोण को बदलती हैं, और हमें मनुष्य के अधिक निकट ले जाती हैं। इन कहानियों में बदलाव की व्याकुलता है, प्रगतिशील जीवन-दृष्टि के प्रति आस्था है।
अमरकान्त भारतीय निम्न मध्यवर्गीय मनुष्य की भावनाओं को जितना समझते हैं, उतना ही उसके अन्तर्विरोधों पर व्यंग्य करते हैं। ‘फ़र्क़’ हो या ‘शक्तिशाली मैत्री’ हो या ‘मित्र-मिलन' वास्तविकता का इतना आत्मीय अंकन अन्यत्र दुर्लभ है। विश्वनाथ त्रिपाठी का यह कथन सार्थक है कि अमरकान्त का रचना-संसार महान रचनाकारों के रचना-संसारों जैसा विश्वसनीय है। उस विश्वसनीयता का कारण है स्थितियों का अचूक चित्रण जिससे व्यंग्य और मार्मिकता का जन्म होता है। वास्तव में प्रेमचन्द के बाद जीवन की इतनी गहरी पकड़ अमरकान्त में ही मिलती है।
Andhe Mod Se Aage
- Author Name:
Rajee Seth
- Book Type:

-
Description:
मानवीय सम्बन्धों के द्वन्द्व और अन्तर्द्वन्द्व की आन्तरिक विकलता, मंथर प्रवाह और गहराई; कथ्य-चयन में संकेन्द्रण, शिल्प रचने में धीरज, कृति की सधी हुई काठी—बेहद कमसिन, लचीली मगर भीतर से मज़बूत इरादे की तरह राजी की विशेषताएँ हैं। ऐसे रचना-गुण कुछ अलग संयोजनों में अन्य लेखकों में भी कमोबेश मिल जाएँगे परन्तु इन्हें एक अलग स्पर्श और लावण्य देती है राजी की ‘स्त्री’ जो वहाँ सिर्फ़ संवेदन में ही नहीं, जैविक पदार्थता में भी है। पुरुष-स्पर्द्धी आधुनिक स्त्री की तरह राजी अपने लेखन में न तो स्त्री होने से इनकार करती हैं और न उसे नष्ट करती हैं, बल्कि अपने नैसर्गिक रूप में उसकी शक्ति और सम्भावना, उसके सत्य और अनुभव, उसकी नियति और उत्कटता का वह सृजनात्मक उपयोग करती हैं। स्त्री होने को स्वीकारते हुए, राजी के लेखक ने इस स्वीकार के भीतर जितने इनकार रचे हैं, यथास्थिति में जितने हस्तक्षेप किए हैं, उसे उनकी आधुनिक पहचान के लिए देखना ज़रूरी है। राजी ने स्त्री के भीतर पराजित पुरुष को; बल्कि व्यवस्था को, जितनी भंगिमाओं में उकेरा है और अपनी विंध्यात्मक दृष्टि से जो मूल्यवत्ता अर्जित की है, उससे नए-नए सृष्ट्यर्थ प्रकट हुए हैं। वे ऐसी महिलावादी नहीं हैं जिन्हें पुरुष नकारात्मक उपस्थिति लगता है, वे स्त्री की खोट भी पहचानने की कोशिश करती हैं और भरसक निरपेक्ष बनी रहकर अधिक विश्वसनीय होती हैं। वे बार-बार इस प्रश्न से जूझती हैं कि क्या समाज आधुनिकता के नाम पर जारी विघटनों और विद्रूपों के सहारे ज़िन्दा रह सकेगा। अपने को देखता हुआ लेखक इसका साभिप्राय और सचेष्ट उपयोग कर सके तो वह व्यक्तित्व को विशिष्टता देता है और रचना को विरलता। राजी इसी वास्ते धारा में भी अलग हैं। अपनी पहचान आप। राजी की कहानियाँ हिन्दी जगत में एक अलग जगह की अधिकारी हैं और अलग ढंग से बात करने की ज़रूरत महसूस कराती हैं।
—प्रभाकर क्षोत्रिय
Kohare Mein Kandeel
- Author Name:
Avdhesh Preet
- Book Type:

- Description: Short Stories
Pratinidhi Kahaniyan : Bhisham Sahni
- Author Name:
Bhisham Sahni
- Rating:
- Book Type:

- Description: भीष्म साहनी के कथा-साहित्य से गुज़रना अपने समय को बेधते हुए गुज़रना है। हिन्दी के प्रगतिशील कहानीकारों में उनका स्थान बहुत ऊँचा है। यहाँ उनके सात कहानी-संग्रहों से प्राय: सभी प्रतिनिधि कहानियों को संकलित कर लिया गया है। युग-सापेक्ष सामाजिक यथार्थ, मूल्यपरक अर्थवत्ता और रचनात्मक सादगी इन कहानियों के कुछ ऐसे पहलू हैं, जो हमारे लिए किसी भी काल्पनिक और मनोरंजक दुनिया को ग़ैर-ज़रूरी ठहराते हैं। विभिन्न जीवन-स्थितियों में पड़े इनके असंख्य पात्र आधुनिक भारतीय समाज की अनेक जटिल परतों को पाठकों पर खोलते हैं। उनकी बुराइयाँ, उनका अज्ञान और उनके हालत व्यक्तिगत नहीं, सार्वजनीन और व्यवस्थाजन्य हैं। इसके साथ ही इन कहानियों में ऐसे चरित्रों की भी कमी नहीं, जो गहन मानवीय संवेदना से भरे हुए हैं और अपने-अपने यथास्थितिवाद से उबरते हुए एक सार्थक सामाजिक बदलाव के लिए संघर्षरत शक्तियों से जुड़कर नया अर्थ ग्रहण करते हैं। वे न तो अपनी भयावह और दारुण दशा से आक्रान्त होते हैं न निराश, बल्कि अपने साथ-साथ पाठकों को भी संघर्ष की एक नई उर्जा से भर जाते हैं।
Khidki
- Author Name:
Sheela Roy Sharma
- Book Type:

- Description: "विदेश में लंबे समय से रह रही युवती जब स्त्री के रूप में माता-पिता के घर लौटती है तो पुराने नक्श खोजती है, लेकिन अब तो उसके लिए वह खिड़की भी नहीं खुलती जिसके इंद्रधनुषी पारदर्शी शीशे कभी उसके अपने थे। हमारे सांप्रदायिक संस्कार शिक्षा और सभ्यता पर अकसर ही भारी पड़ते हैं। भाषा के महीन रेशों से बुनी जानेवाली कहानी के लिए लेखिका को मेरा साधुवाद। —मैत्रेयी पुष्पा शीला राय शर्मा की कहानियों का पर्यावरण सामाजिक होकर भी अधिकतर पारिवारिक है। कहानियाँ ‘सौतेली माँ’ और ‘चिल्लर बहू’ दो भिन्न वातावरण से जनमती हैं लेकिन दोनों के जीवन-मूल्य जैसे विवाह संस्था और धर्म के आधार पर संचालित हैं। इस जंजीर की कड़ी ही कहानी ‘खिड़की’ है। इसमें मनोविज्ञान की भीतरी तहों का कार्य-व्यापार है। सूक्ष्म मनोभावों का अंकन यहाँ गौरतलब है। कहन की ऐसी विशेषता भी द्रष्टव्य है जो अन्य कथा-कथन से अप्रभावित है। यही पाठ में विश्वसनीयता पैदा करता है। यह कहानीकार का अपना संवेदना, कथ्य और कहन का संसार है। यह निजता का ऐसा हस्ताक्षर है जो मौलिक है। —लीलाधर मंडलोई
Pathar Ke Neeche Dabe Hue Hath
- Author Name:
Rajkamal Chaudhary
- Book Type:

-
Description:
राजकमल चौधरी की कहानियाँ परमाणु में पर्वत के समावेश की कहानियाँ हैं, जो मानव-जीवन के अनछुए प्रसंगों से उठाकर लाई गई हैं, जिनमें राजकमल की सारी की सारी कहानी-कला मौजूद है और लगता ऐसा है कि इनमें कोई कला नहीं दिखाई गई है। जनजीवन का सत्य ज्यों का त्यों रख दिया गया है। सच्ची घटनाएँ तो अख़बारी रिपोर्टों में बयान होती हैं, कहानी में घटनाएँ सच की तरह आती हैं। घटनाएँ सच हों, इससे ज़्यादा ज़रूरी है कि वे सच लगें भी। राजकमल की कहानियों की यह ख़ास विशेषता है कि वे सारी घटनाएँ सच हों या न हों, सच लगती अवश्य हैं।
धर्म, साहित्य, नौकरी, व्यापार, फ़िल्म, सामाजिक जीवन-यापन...तमाम क्षेत्रों की विकृतियों का इतनी सूक्ष्मता से यहाँ पर्दाफ़ाश किया गया है कि वे अचानक तार-तार हो जाती हैं। छोटे-छोटे स्वार्थों की पूर्ति, क्षणिक मनोवेगों की पुष्टि के लिए मनुष्य किस सीमा तक गिर सकता है; संन्यासी और सिद्ध योगी और यहाँ तक कि देवता की छवि रखनेवाला भी पल-भर में कैसा जानवर हो जाता है; ख़ूँख़ार जानवर कैसा गऊ हो जाता है; शेर की दहाड़ और आतंक का मालिक पल-भर में कैसे गीदड़, चूहा, केंचुआ, चींटी हो जाता है और रेंगने लगता है—मानव-जीवन की इसी उठा-पटक का एलबम है—राजकमल की कहानियाँ।
Dharohar Kahaniyaan : Rahul Sankrityayan
- Author Name:
Rahul Sankrityayan
- Rating:
- Book Type:

- Description: कौन ऐसा पाठक है जिसने एक बार प्रेमचन्द की कहानियों को पढ़ा हो और उन्हें भूल पाया हो! यह इसलिए कि हम उनकी रचनाओं को उनके देदीप्यमान, प्रखर व्यक्तित्व की लौ में देखने, ग्रहण करने लगते हैं। जहाँ उनकी रचनाएँ हमारे सामने जीवन का प्रामाणिक, जीवन्त चित्र प्रस्तुत करती हैं, सामाजिक जीवन के विभिन्न पहलुओं के प्रति हमें सचेत करती हैं, वहीं वे हमारे दिल में सद्भाव जगाती हैं, हमारे मस्तिष्क को झकझोरती हैं, हमें जिन्दगी को देखने समझने का नजरिया देती हैं। —भीष्म साहनी
jadoo : Ek Hansi, Ek Heroine
- Author Name:
Ravindra Arohi
- Book Type:

-
Description:
जीवन की उदासियों के रंग इतने गाढ़े और प्रबल हैं कि वे असहनीय हैं। अकसर फ़िक्शन जीवन से अधिक दुर्दान्त रूप में उपस्थित होता है। उपस्थित होकर वह क्या करता है? ‘यह क्या’ रवीन्द्र आरोही की कहानियों का मूल सत्त्व है। इन कहानियों में उदासी, पीड़ा, छल और प्रेम यानी जीवन का सब कुछ है। पर वह इन रूपों में है कि सहनीय है और सहने का साहस भी देता है।
रवीन्द्र की कहानियाँ उदासियों से जीवन का सौन्दर्य शिल्प रचती हैं। इनमें एक नदी है जो लोक चेतना की ठसक के साथ क़स्बों, गाँवों और नगरों के बीच डोलती है और पिछले वक़्तों से किन्हीं अनाम बिन्दु तक की कथा यात्रा करती है। जिस प्रकार आँसू वेदना के अणुसूत्र हैं वैसे ही इन कहानियों में स्मृति के अणुसूत्र हैं। स्मृतिविहीन निचाट संसार के समानान्तर स्मृतिलोक रचती इन कहानियों में वैसा कोई पात्र नहीं है जिसके प्रेम में आप न पड़ जाएँ।
—उपासना
Bhartiya Bhooton Ki Ajeeb Dastan-1
- Author Name:
Riksundar Banerjee
- Book Type:

-
Description:
भारत में हर समुदाय, जनजाति और उप-समुदाय के अपने भूत-प्रेत हैं। सदियों से भूत-प्रेतों की दुनिया भारतीयों को आकर्षित करती रही है। माना जाता है कि कुछ भूत जलाशयों के पास पाए जाते हैं और वे गुपचुप आते-जाते राहगीरों पर नज़र बनाए रखते हैं, तो कुछ गर्मियों के दोपहर में खेतों में भटकते रहते हैं और रास्ता खोए हुए पुरुषों को बहकाते हैं, तो कुछ ऐसे भी हैं जो अन्य बुराइयों से हमारी रक्षा करते हैं। शिकार की तलाश में पास-पड़ोस में भटकती उत्तर भारत की चुड़ैलों से लेकर मछली पसंद करने वाले पश्चिम बंगाल के मेछो भूत और तमिलनाडु के भयानक मुनि पेई भूतों तक—भारतीय भूतों की श्रेणियाँ अत्यंत विशाल है, जिनकी संख्या का कोई आधिकारिक रिकॉर्ड मौजूद नहीं है।
कौन हैं ये घने जंगलों में विचरने वाले रहस्मयी जीव? गहरे, शांत जल की सतह के नीचे कौन से रहस्य छिपे हैं? हम इन अतृप्त आत्माओं को कैसे समझें, जिन्होंने हमारी स्मृतियों, हमारे मानस, कल्पनाओं और साहित्य में व्यापक स्थान बना रखा है?
रिकसुंदर बनर्जी भारतीय भूतों के अध्येता एवं विशेषज्ञ हैं, जो लोकप्रिय और प्रचलित किंवदंतियों, आस्थाओं, अंधविश्वासों और अनुभवों के पीछे की सच्चाई को जानने के प्रयास में भारतभर में भूत-प्रेतों की दुनिया की पड़ताल करते हैं। उनके अध्ययन और शोध का परिणाम है यह पुस्तक—जो भारत और भारतीयों को आतंकित करते भूत-प्रेतों के बारे में एक प्रामाणिक, गहन शोध-पूर्ण और रोमांचक विवरण देता है।
Phoolo Ka kurta
- Author Name:
Yashpal
- Book Type:

-
Description:
यशपाल के लेखकीय सरोकारों का उत्स सामाजिक परिवर्तन की उनकी आकांक्षा, वैचारिक प्रतिबद्धता और परिष्कृत न्याय-बुद्धि है। यह आधारभूत प्रस्थान बिन्दु उनके उपन्यासों में जितनी स्पष्टता के साथ व्यक्त हुए हैं, उनकी कहानियों में वह ज़्यादा तरल रूप में, ज़्यादा गहराई के साथ कथानक की शिल्प और शैली में न्यस्त होकर आते हैं। उनकी कहानियों का रचनाकाल चालीस वर्षों में फैला हुआ है। प्रेमचन्द के जीवनकाल में ही वे कथा-यात्रा आरम्भ कर चुके थे, यह अलग बात है कि उनकी कहानियों का प्रकाशन किंचित् विलम्ब से आरम्भ हुआ। कहानीकार के रूप में उनकी विशिष्टता यह है कि उन्होंने प्रेमचन्द के प्रभाव से मुक्त और अछूते रहते हुए अपनी कहानी-कला का विकास किया। उनकी कहानियों में संस्कारगत जड़ता और नए विचारों का द्वन्द्व जितनी प्रखरता के साथ उभरकर आता है, उसने भविष्य के कथाकारों के लिए एक नई लीक बनाई, जो आज तक चली आ रही है। वैचारिक निष्ठा, निषेधों और वर्जनाओं से मुक्त न्याय तथा तर्क की कसौटियों पर खरा जीवन—ये कुछ ऐसे मूल्य हैं जिनके लिए हिन्दी कहानी यशपाल की ऋणी है।
‘फूलो का कुर्ता’ कहानी-संग्रह में उनकी ये कहानियाँ शामिल हैं : ‘आतिथ्य’, ‘भवानी माता की जय’, ‘शिव-पार्वती’, ‘ख़ुदा की मदद’, ‘प्रतिष्ठा का बोझ’, ‘डरपोक कश्मीरी’, ‘धर्मरक्षा और ज़िम्मेवारी’।
Chaya Ke Pyale Mein Gend
- Author Name:
Vijay Mohan Singh
- Book Type:

- Description: बकौल विजयमोहन सिंह: ‘‘कहानियाँ लिखना दिनोंदिन दुष्कर होता जा रहा है। इसका एक कारण तो शायद यह है कि मनुष्य की प्रकृति क्रमशः ऐन्द्रिकता तथा संवेदनात्मकता से बौद्धिकता की ओर जाने वाली है। इस परिवर्तन में अनुभव और उम्र की भी बड़ी भूमिका प्रमुख होती है। हमारी संवेदनाएँ उम्र के साथ उतनी सरस तथा ऐन्द्रिक नहीं रह पातीं। कथा-साहित्य कविता जितना भाव-केन्द्रित नहीं होता, लेकिन शुष्क विमर्श और बौद्धिक विश्लेषण पर भी आधारित नहीं होता। ऐसा होने पर उसका कथा-तत्त्व ही नहीं, पठनीयता भी क्षीण होती जाती है। कथा की पठनीयता विचार-साहित्य से पृथक् एक अलग धरातल पर निर्धारित होती है। यह अलग बात है कि अक्सर बड़ा कथा-साहित्य अनुभूति और विचार के एक विरल सन्तुलन पर आधारित होता है, किन्तु जिसे परिपक्वता कहते हैं, वह अनुभूति की तीव्रता की कीमत पर ही प्राप्त होती है।’’ यही कारण है कि इस संग्रह में वे ही कहानियाँ शामिल की गई हैं जिनमें अनुभूति की ताजगी बरकरार है, और जो पाठक की रुचि को बाँधे रख सकें। विजयमोहन सिंह कहानी के लिए सामाजिक- राजनीतिक रूप से प्रासंगिक होना अनिवार्य नहीं मानते, लेकिन वह केवल बुद्धि या कल्पना का विलास होकर रह जाए, इससे भी वे सहमत नहीं हैं। प्रस्तुत संग्रह की कहानियाँ अपने समय और समाज के धरातल पर खड़ी होकर कथा-रस का निर्वाह भी करती हैं, और इस तरह एक स्वस्थ और समग्र पठनीयता का आधार पाठक को देती हैं।
Nanga
- Author Name:
Srinjay
- Book Type:

- Description: अपने पहले कथा-संकलन ‘कामरेड का कोट’ से ही चर्चित कथाकार सृंजय ने स्पष्ट कर दिया था कि वे ‘महाजनों’ की पिटी-पिटाई लीक पर नहीं चलेंगे, कि उनकी प्रतिबद्धता ‘जन’ के साथ होगी, जन के सिवा किसी अन्य के साथ नहीं। इस प्रतिज्ञा को और भी पुख़्ता करता है उनका यह दूसरा कथा-संकलन—‘नंगा’। दृश्य, अदृश्य कितनी ही बेड़िया और कितने-कितने दबाव हैं इस ‘जन’ पर, इनके बीच उसकी आकांक्षाएँ हैं, सपने हैं, दुर्निवार संकल्प हैं, जीवट है, जिजीविषा है, साथ ही क़दम-क़दम पर स्खलन और भटकाव भी। अतीत की धुँधली परछाइयों से लेकर अनागत की आहटों तक फैले सृंजय के कथा-संसार में एक और लोककथाओं का परम्परा-प्रवाह है तो दूसरी ओर लोक-शत्रुओं को पहचानने की अधुनातन दृष्टि भी। इस तरह राष्ट्रीय से लेकर अन्तरराष्ट्रीय साज़िशों को नंगा करती हैं ‘नंगा’ की कहानियाँ। एकरसता से दूर सृंजय की इन कहानियों का रचना-संसार अलग-अलग बुनावटों और बनावटों, अलग-अलग मिज़ाज और तेवरों से लैस है। इस तरह इनके व्यापक फलक में अगर सामन्तवाद का पूँजीवाद के आगे आत्मसमर्पण कराती ֹ‘मूँछ’ है, तो विश्व बाज़ार के नवऔपनिवेशिक जाल में गुड़प होता स्वदेशी ‘बुद्धिभोजी’ भी, असमान विकास को एक्सपोज करती ‘खल्ली छुलाई’ है, तो धर्म के पाखंड को एक्सपोज करती ‘हममज़हब’ भी...स्वप्नों और आग्रहों की स्वनिर्मित ग़ुलामी की शिनाख़्त करती ‘बैल’ और तमाम अशुभ छायाओं के दंश के बीच आदमी की आदमियत को बचाए रखने की कोशिश के रूप में ‘डमर’ भी...साथ ही सत्ता-समीकरण के प्रलोभन और दबाव के अन्तर्गत जनप्रतिबद्धता के अपचय की प्रक्रिया को दर्शाती अतीत के मिथक के माध्यम से अपने समय को व्यंजित करती ‘राजमार्ग पर’ भी। इन कहानियों की एक विरल विशेषता यह है कि इनकी व्यंजना ऊपर से कम, मगर अन्दर गहरे, बहुत गहरे उतरती जाती है और अपने परिवृत्त में कितने ही प्रत्ययों को समेटती चलती है। कलात्मकता की सर्वथा नूतन बानगी प्रस्तुत करती ये कहानियाँ एक बार पुन: बलपूर्वक प्रमाणित करती हैं कि कला का आरोपण ऊपर से नहीं होता, बल्कि जीवन में गहरे धँसकर ही उसका अवगाहन होता है।
Boson
- Author Name:
Narendra Nagdeo
- Book Type:

- Description: This book has no description
Pratinidhi Kahaniyan : Rajkamal Choudhary
- Author Name:
Rajkamal Chaudhary
- Book Type:

- Description: प्रस्तुत संकलन की कहानियाँ रोटी, सेक्स एवं सुरक्षा के जटिल व्याकरण से जूझते आम जनजीवन की त्रासदी की कथा कहती हैं। राजकमल की मैथिली कहानियों के पात्र जहाँ सामाजिक मान्यताओं के व्यूह में फँसकर भी अपनी परम्पराओं के मानदंड में परहेज़ से रहते हैं, वहाँ इनकी हिन्दी कहानियों के पात्र महानगरीय जीवन के कशमकश में टूट-बिखर जाते हैं। यौन-विकृतियाँ इनकी मैथिली एवं हिन्दी—दोनों भाषाओं की कहानियों का प्रमुख विषय है और दोनों जगह यह अर्थतंत्र द्वारा ही संचालित होती हैं। ये कहानियाँ कहानीकार की गहन जीवनानुभूति और तीक्ष्णतम अभिव्यक्ति का सबूत पेश करती हैं। राजकमल की कहानियाँ न केवल विषय के स्तर पर, बल्कि भाषा एवं शिल्प की अन्यान्य प्रविधियों के स्तर पर भी एक चुनौती है जो कई मायने में सराहनीय भी है और ग्रहणीय भी। इनकी कहानियों का सबसे बड़ा सच है कि जहाँ इनकी कहानी ख़त्म होती है, उसकी असली शुरुआत वहीं से होती है।
Criminal Race
- Author Name:
Hemant
- Book Type:

-
Description:
हिन्दी पट्टी के टोन और टेंपरामेंट, अंडरटोंस एवं अंडरकरेंट्स को न तो दूर रहकर 'आह-वाह' के भाववादी नज़रिए से जाना जा सकता है, न ही नज़दीक रहकर आग्रही नज़र से। वर्ग, वर्ण, लिंग, जाति-उपजाति, परम्परा और परिवेश एवं धर्म और राजनीति के मकड़जाल में उलझे आदमी के मर्म तक पहुँचना आज के सही रचनाकार का दायित्व है। मनुष्य की प्रकृति-नियति, उसकी कमज़ोरियाँ और उसकी ताक़त, उसके ज़हर और उसके अमृत से जूझते-सीझते हेमन्त के कथाकार ने कितनी वयस्कता अर्जित कर ली है, इसका साक्ष्य हैं ‘क्रिमिनल रेस’ की कहानियाँ। यहाँ हेमन्त न सिर्फ़ अपने कई समकालीनों को अतिक्रमित करते हैं, बल्कि ख़ुद अपने ‘पिछले हेमन्त’ को भी...। विज्ञान का बीज शब्द है—‘क्यों?’ ‘ऐसा क्यों?’ ‘ऐसा ही क्यों?’ हेमन्त का बीज शब्द है’—फंशय।' इतने चिकने-चुपड़े चेहरे, संवाद और आचरण—‘आख़िर मंशा क्या है?’, ‘हासिल क्या होगा?’ यह संशय कभी सम्पूर्ण कथा में प्रच्छन्न भाव से व्याप्त है (क्रिमिनल रेस), कभी अन्दर से बाहर फैलता हुआ (धक्का)! कभी देश की आदिम शौर्य परम्परा बनकर ग़ुलाम बनानेवाली गलीज औपनिवेशिक शक्तियों से लेकर आज के मल्टीनेशनल्स के ऐटीट्यूड्स को सूँघता-झपटता है (ओवरकोट) तो कभी औरतों के तन-मन के साथ धन पर भी क़ाबिज़ होने की पुरुष-चाल पर सवाल उठाता है (लाश-तलाश) तो कभी सभ्यता के उषा-काल और मिथकीय कुहासों से लेकर वर्तमान के तपते द्विप्रहर तक को खँगालते हुए प्रश्नवाचक बन बैठता है कि जीवन के महाभारत में औरत के प्रति यदि कौरवों और पांडवों का रवैया एक-सा है तो ऐसा युद्ध से क्या बदल जाएगा और अगर युद्ध होता ही है तो स्त्रियाँ युद्ध में शामिल क्यों नहीं होंगी। अन्तत: ‘क्रिमिनल रेस’ के केन्द्र दिल्ली की आपराधिकी की भूल-भुलैया में भटककर मासूम देशवासी को रास्तों और गंतव्य तक पर संशय होने लगता है—मैं कहाँ हूँ? (सुबह का भूला)।
संघर्ष और जन आन्दोलनों की आग में जीकर रची हुई अपनी नफ़ीस भाषा-शैली की हेमन्त की कहानियाँ अपने पाठकों को किसी आनन्द वन या नक़ली उसाँसों के मरुस्थल में नहीं ले जातीं बल्कि धसकते धरातलों, गिरते आसमानों और हरहराते तूफ़ानों की क्राइसिस के सम्मुख ला खड़ा करती हैं—तुम यहाँ हो और तुम्हारी मंज़िल यहाँ।
—संजीव
Naach Gaan
- Author Name:
Dr. Urmila Shirish
- Book Type:

- Description: Book
Apni Si Rang Dinhin Re
- Author Name:
Sapna Singh
- Book Type:

- Description: Sapna Singh Famous Stories Collection
Tasveer Ka Pher
- Author Name:
Unita Sachchidanand
- Book Type:

-
Description:
जापानी लोककथाओं के प्रस्तुत संग्रह में दो तरह की कथाएँ सम्मिलित हैं—हास्य और पौराणिक मिथक, जिनसे जापान के सांस्कृतिक परिप्रेक्ष्य का पता चलता है।
‘मोमोतारो’ के प्रसंग से जापान का बच्चा–बच्चा वाक़िफ़ है और ‘तानाबाता’ की कहानी सदियों से जापान के सबसे लोकप्रिय उत्सव ‘तानाबाता’ से सम्बन्धित है।
‘टप-टप गुम्बा’, ‘तस्वीर का फेर’ और ‘नदी में देवता’ के हास्य प्रसंग बच्चों और बड़ों को अवश्य ही लोट-पोट कर देंगे।
Customer Reviews
5 out of 5
Performance
4.25 out of 5
Book
22/04/2025
safwan sumra
Great Review
01/08/2024
Awantika Singh
Awesome voiceover!! I must say that Rachnaye has wonderful selection of speakers…it increases the interest to listen all the shorties…It’s a must buy…