Chardiwari
Author:
Deepa MehtaPublisher:
FlyDreams PublicationsLanguage:
HindiCategory:
Short-story-collections0 Ratings
Price: ₹ 159.2
₹
199
Available
नारी का जीवन एक अनंत यात्रा है। नारी की इसी अनकही जीवन यात्रा को शब्दों में समेटने का प्रयास है, प्रस्तुत लघु कथा संग्रह - चारदीवारी । नारी के बचपन, किशोरावस्था, युवावस्था, वृद्धावस्था के मूक क्षणों की आवाज है प्रस्तुत लघु कथाएं। नारी जीवन के कुछ अनदेखे - अनछुए पहलुओं का प्रतिनिधित्व करता प्रस्तुत लघु कथा संग्रह नारी के दुख, बैचेनी, परेशानियां, रोष, शिकायतों का पुलिंदा मात्र नहीं है। मां, पत्नी, बेटी आदि अनेकों भूमिकाओं को निभाती दृश्य - अदृश्य चारदीवारी में कैद भिन्न-भिन्न पहचान, शैक्षिक स्थिति, आयु वर्ग की नारी के रोजमर्रा के जीवन से संबंधित है यह लघु कथाएं। नारी की पहचान, समानता, ख्वाहिशों, सपनों, संबंधों, घरेलू हिंसा, छेड़छाड़, लैंगिक उत्पीड़न, प्रजनन, स्वास्थ्य, मातृत्व, बॉडी इमेज आदि महत्वपूर्ण मुद्दों से संबंधित यह विचारोत्तेजक लघु कथाएं प्रस्तुत है, पाठकों के अवलोकन और विचारमंथन के लिए। इस आशा के साथ कि प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप में यह प्रयास जनमानस की मानसिकता को बदल नारी जीवन में परिवर्तन की एक नई बयार ला पाने में सफल होगा…।
ISBN: 9789391439040
Pages: 211
Avg Reading Time: 7 hrs
Age: 18+
Country of Origin: India
Recommended For You
Kathantar Vol. 1 and 2
- Author Name:
Editor Mrityunjay Singh
- Book Type:

- Description: 1975-2000 कथांतर 'कथांत'र दरअसल सन् 1975 और उसके आस-पास के काल से लेकर सन् 2000 तक के पच्चीस वर्षों में उभरे कथा-लेखकों की कहानियों का संग्रह होने के साथ-साथ इस काल खंड के कथा-कर्म की ऐतिहासिकता के दस्तावेज़ीकरण की भी एक कोशिश है। कहानी की दुनिया की सम्यक जानकारी रखने वाले इस तथ्य से परिचित हैं कि यह दौर स्वयं प्रकाश, रमेश उपाध्याय, असगर वजाहत, पंकज बिष्ट, नमिता सिंह, इसरायल, कामतानाथ, रमाकांत, सतीश जमाली, सुभाष पंत, मधुकर सिंह जैसे समर्थ कथा-लेखकों के दौर के तुरंत बाद शुरू हुआ है। यह दौर सामाजिक-राजनीतिक चेतना से सम्पन्न व्यापक सामाजिक बोध और गहरी अंतर्दष्टि रखने वाले कथा लेखकों का दौर रहा है। अगर वस्तुपरक दष्टि से देखा जाये तो विपुलता और गुणवत्ता की दष्टि से यह दौर पूर्ववर्ती और परवर्ती दौरों से बहुत विशिष्ट है। यह नई अंतर्वस्तु के संधान और अंतर्वस्तु और शिल्प की अन्विति के नये दष्टांतों का दौर भी है। इस पीढ़ी की रचनाशीलता इतनी प्रखर रही है कि इसने इक्कीसवीं शताब्दी में भी अपने लेखन से सतत मौजूदगी बनाये रखी है और कई अविस्मरणीय कहानियाँ रचकर कहानी के परिदश्य को समृद्ध किया है। हिन्दी कथा आलोचना में इस दौर का सम्यक मूल्यांकन नि:संदेह पूर्ववर्ती दौरों के मूल्यांकन सरीखा नहीं हुआ है और अभी इस दौर का मूल्यांकन होना बाकी है। 'कथांतर' के ये दोनों खंड पाठकों को हिन्दी कहानी के इस दौर की पूरी जानकारी देते हैं और कुछ उत्कृष्ट कहानियों से रूबरू कराते हैं। ये दोनों खंड हिन्दी कहानी में रुचि रखने वाले कथा-लेखकों, विद्यार्थियों और शोधार्थियों के लिए अनिवार्य आधार-पुस्तकें हैं।
Rat Baki Evam Anya Kahaniyan
- Author Name:
Ranendra
- Book Type:

-
Description:
रणेन्द्र की कहानियाँ ‘मार्जिनालाइजेशन’ की प्रक्रिया का ‘मेटाफ़र’ रचती हैं। आदिवासी इनके यहाँ ‘कन्सर्न’ के रूप में मौजूद हैं। इस संग्रह की कहानियों से गुज़रते हुए इनके सरोकारों की शिनाख़्त की जा सकती है और कहा जा सकता है कि ये यथार्थ की आँच पर सीझती जीवन की कहानियाँ हैं। इन कहानियों के पात्रों की बेबसी और विफलता जिस त्रासदी को रचते हैं, वह व्यवस्थाजन्य है। व्यवस्था की उस क्रूरता और उदासीनता से उस अयाचित यातना (अनडिजर्ब्ड सफ़रिंग) का जन्म होता है जिसकी गहरी छाप कहानियों को पढ़ने के बाद भी दिलो-दिमाग़ पर क़ाबिज़ रहती है।
ये कहानियाँ ऐसे इलाक़े से सिर उठाने की जुर्रत करती हैं जहाँ अशिक्षा, ग़रीबी और बदहाली के घने जंगलों में व्यवस्था के हिंसक नरभक्षी मनमाना शिकार किया करते हैं।
रणेन्द्र का यथार्थबोध जीवन-जगत के प्रत्यक्ष अनुभवों से जन्मा और विकसित हुआ है। इस कारण यथार्थ की जटिलता और उसकी संश्लिष्टता को परत-दर-परत उघाड़ते हुए वे जब यथार्थ के प्रकृत रूप का प्रत्यक्षीकरण करते हैं तो कोई-कोई कहानी कहीं-कहीं औपन्यासिकता का भी आभास कराती है। इनकी कहानियों में प्रकृति, संस्कृति और मिथक जहाँ एक ओर मिलकर एक ‘देशज क़िस्म का जादुई यथार्थवाद’ रचते जान पड़ते हैं तो वहीं दूसरे स्तर पर प्रेम एवं अन्तरंगता के क्षणों में ऐन्द्रिकता के चित्रण में प्रयुक्त होनेवाली बिम्बात्मकता, काव्यात्मकता की प्रतीति कराती है।
रणेन्द्र की कहानियाँ सम्भावनाओं और संसाधनों से परिपूर्ण उस प्रदेश की कहानियाँ हैं जहाँ बंजरता धीरे-धीरे अपने पाँव पसार रही है। अपने समय के लकवाग्रस्त होने और समाज के बंजर होने की प्रक्रिया को रणेन्द्र ने पूरी शिद्दत और ईमानदारी से इतिहास में दर्ज करने का काम किया है।
Sampurna Kahaniyan : Usha Priyamvada
- Author Name:
Usha Priyamvada
- Book Type:

-
Description:
उषा प्रियम्वदा की कहानियाँ जीवन के सहज विडम्बनाबोध की कहानियाँ हैं। घने कुहासे की तरह त्रास जब पाठक को अपने आगोश में लेता है तो सुध-बुध खोता पाठक ख़ुद को छोड़ देता है, उसकी धीमी लय पर डूबने-उतराने को। और, जब कहानी समाप्त होती है तो पाठक ख़ुद को एक सन्नाटे में पाता है—जहाँ दुनिया-जहान की तल्ख़ सच्चाइयाँ उसे कुरेद रही होती हैं; वह प्रश्नाकुल व बेचैन हो उठता है कि आख़िर ऐसा क्यों है—यह दुनिया ऐसी क्यों है?
यह सन्नाटा है जो बोलता है और डोलता भी है और अपने साथ डुलाता भी है पाठक को। फिर वह एक संशयात्मा की तरह जीवन स्थितियों को मुड़-मुडक़र देखने को बाध्य हो जाता है।
ऐसे समय में जब रचना के लिए भी विमर्श के कई ख़ाने बना दिए गए हैं, उषा प्रियम्वदा की कहानियाँ जीवन को उसकी समग्रता में लेती हैं। इन कहानियों की त्रासदी को स्त्री-पुरुष के ख़ानों में नहीं बाँटा जा सकता है। ये मनुष्यता की त्रासदी को प्रतिबिम्बित करती कहानियाँ हैं।
रघुवीर सहाय ने कभी कहा था—जब मैं कविता पढ़कर उठूँ तो सन्नाटा छा जाए। उषा जी की कहानियों की बाबत भी कुछ ऐसा ही कहा जा सकता है।
Katha Katha - Anilprabha Kumar
- Author Name:
Anilprabha Kumar
- Book Type:

- Description: Description Awaited
Patna wala Pyar
- Author Name:
Abhilash Dutta
- Rating:
- Book Type:

- Description: पटना वाला प्यार (कहानी संग्रह) में पटना की जीवन शैली, वहां की संस्कृति का प्रभाव कहानियों की पृष्ठभूमि है। पटना के संस्कार कहानी के पात्रों में स्पष्ट दिखाई दे रहे हैं। पटना को जैसा एक आम आदमी अख़बारों और ख़बरों के माध्यम से जानता होगा बिलकुल वैसा ही इस कहानी संग्रह में सहज ही परिलक्षित होता है। कहानी ‘एक मुलाकात’ में दिल्ली और पटना के बीच की यात्रा, कैसे एक प्रेम में फंसी लड़की को वेश्या बना देती है। वहीं ‘पटना वाला प्यार’ कहानी के दोनों भागों के प्यार, एक छोटे शहर की युवा हो रही पीढ़ी की अल्हड़ मति का शानदार चित्रण प्रस्तुत करती है। ‘रीयूनियन’ कहानी पढ़कर व्यक्ति को अपने जीवन के कटु सत्य का सहज ही साक्षात्कार हो जाता है। कहानी से पता चलता है कि जीवन में आने वाला हर शख़्स अपना एक वजूद रखता है। ‘लाल चच्चा’ कहानी हो या ‘फैसला’, ‘अज्ञात आतंकवादी’ हो या ‘सुसाइड जिम्मेदार कौन’ या फिर ‘परछाई’ समाज को सीधे-सीधे आईना दिखाने वाली कहानियाँ कही जा सकती है।
Jhilmil Tare, Aankhon Mein Sare
- Author Name:
Shraddha Pandey
- Book Type:

- Description: बच्चों की दुनिया बड़ी ही अनूठी होती है। वहाँ कल्पना की उड़ान है, जिज्ञासा की ललक है, अपनों के प्रति प्यार है, कभी तकरार है, अपने अस्तित्व का संघर्ष है तो कहीं अभिभावक तथा अध्यापक के प्रति पूर्ण समर्पण का भाव दिखाई पड़ता है। एक अकेला बच्चा अपने आप में एक पूरी किताब है, जिसे पढ़कर समझ पाना किसी के लिए भी कठिन कार्य है। इन कहानियों के द्वारा यह प्रयास किया गया है कि उस बचपन की रंगीली, सपनीली, झिलमिलाती दुनिया में झाँका जा सके। बच्चे स्वाभाविक रूप से जितने सच्चे और भोले होते हैं, उतना ही कठिन होता है उनके मन को समझ पाना। बच्चों की अनूठी दुनिया का पन्ना-पन्ना रहस्यों से भरा होता है। झिलमिल तारे, आँखों में सारे कहानी-संग्रह की एक-एक कहानी बाल-जीवन के रहस्यों से परदा उठाने तथा बालकों के करीब पहुँचाने में सफल होगी।
Dharohar Kahaniyaan : Subhadra Kumari Chauhan
- Author Name:
Subhadra Kumari Chauhan
- Book Type:

- Description: अपनी समस्या पूरे देश की समस्या के साथ बँधी हुई है। सबकी मुक्ति में ही अपनी मुक्ति है। अन्धी परम्पराओं के बन्धन, चारों ओर सड़े-गले रस्म रिवाजों के गलीज घेरे, जिनमें क्रूर पाखंड की उँगलियाँ उठती हैं। एक दमन और घुटनवाला समाज, जो खुली तन्दुरुस्त जिन्दगी की साँस लेना जानता ही नहीं। सुभद्रा कुमारी चौहान की स्वस्थ और स्वतंत्र भावुकता ने यथार्थ के बहुत से मर्म पहचान लिये थे। हर चुनौती का जवाब उनके पास था। और यह जवाब था उनके अन्तःकरण और सच्चाई की हठ का। —शमशेर बहादुर सिंह
Khuli Chhatri
- Author Name:
Bhavana Shekhar
- Book Type:

-
Description:
जीवन के विविध प्रसंगों में कई बार धारणाएँ ध्वस्त होती हैं, भ्रान्तियाँ भग्न होती हैं, नवीन अनुभव नवनिष्कर्षों को गढ़ते हुए कभी मनुष्य को सन्तप्त करते हैं तो कभी चमत्कृत। ऐसे में जीवन-सरणि पर विचरते कुछ किरदारों की केंचुल उतरने लगती है—उनकी विद्रूपता झलकने लगती है तो कुछ किरदार साँचा तोड़ नवरूप धरते दिखाई देते हैं। नवरूपता ही नहीं, अपरूपता भी जीने का सलीक़ा सिखाती है।
पुस्तक की प्रायः सभी कहानियाँ द्रष्टा को ‘नॉन जजमेंटल’ होने और पूर्वग्रहों से मुक्त होकर जीवन को परखने को कहती हैं।
नारी है तो अभिशप्त है, पुरुष है तो परुष है, दलित है तो पीड़ित है, वेश्या है तो चरित्रहीन है, गुंडा है तो भ्रष्ट है—ये पूर्वग्रह बहुत बार भ्रम साबित होते हैं। ‘निरापद’, ‘वो युधिष्ठिर’, ‘गणिका’, ‘कबूतरी’, ‘दबंग’, ‘देवभूमि’ आदि पुस्तक की अधिकांश कहानियाँ इस बात को प्रतिबिम्बित करती हैं। सफ़ेदपोशी में कालिख की डुगडुगी तो सभी बजाते हैं पर कालिमा का भी उजास है—इसे स्वीकारना और तलाशना ही जीवन का मर्म है।
पर कुछ अनुभूतियाँ कालनिरपेक्ष सत्य की तरह अकाट्य होती हैं। सूरज-चाँद-सितारों की तरह सनातन प्रतीत होती हैं, जैसे अपनी माँ सबसे सुन्दर और अपना घर सबसे बड़ा स्वर्ग है। संवेदना ने जिस कुरूप चेहरे को सदा हिकारत से देखा, वही एक दिन सुन्दरता की मिसाल बन गया।
परदेस गए बेटे का वियोग बूढ़े माँ-बाप को कैसे सालता है—‘अपना घर अपना आसमान’ इस पीड़ा का आईना है, ‘खुली छतरी’ बाल मनोविज्ञान का चित्रण करती है तो ‘सज़ा’ आदर्श नारी के मिथक को तोड़कर उसके सहज रूप में संवेग और आवेग, प्यार और प्रतिकार की सृष्टि करती है।
अनब्याही माँ बनना, बलात्कार को मात्र दुर्घटना मानना, स्त्री द्वारा लीक तोड़कर शठे शाठ्यं समाचरेत् की परिपालना—समाज के ये नए मूल्य कहानियों में उजागर हुए हैं।
Visangati
- Author Name:
Jagdish Prasad Singh
- Book Type:

-
Description:
हमारे आसपास नित्य ऐसी घटनाएँ होती रहती हैं जिनमें अनेक कहानियों के बीज निहित होते हैं, लेकिन हम कभी उन पर ध्यान नहीं देते। लेकिन कुछ लोग ऐसे होते हैं जो ऐसी जगहों में बड़ी कहानियाँ तलाश कर लेते हैं। यह संग्रह ऐसी ही कहानियों से सजा है।
डॉ. जगदीश प्रसाद सिंह की ये कहानियाँ मानव-मन और समाज की ऐसी अनोखी परतों को उघाड़ती हैं कि सहसा विश्वास नहीं होता। मसलन संग्रह की पहली ही कहानी ‘विसंगति’ को लें। इसमें स्वामी गोविन्दानन्द का जीवन कुछ ऐसी घटनाओं का प्रतिबिम्ब है जो भारतीय समाज में बहुत आम रहा है—यानी विपरीत परिस्थितियों के चलते संन्यास ले लेना। माधव वसु को जब पता चलता है कि उसकी पत्नी का उसके छोटे भाई से सम्बन्ध है तो वह घर-बार छोड़ देता है और एक सफल आध्यात्मिक जीवन जीने लगता है। लेकिन फिर एक दिन अतीत एक अलग ही रूप में उसके सामने आ खड़ा होता है।
‘प्रतीम सिंह का ढाबा’, ‘दाँत का दर्द’, ‘राह का काँटा’, ‘भगवती का शाप’, और ‘सरस्वती का भोंपू’ सहित इस संग्रह की सभी कहानियाँ समाज के किसी न किसी पहलू की विडम्बना को सामने लाती है। ये कहानियाँ अपनी सरल कहन के चलते हमें किसी शैल्पिक उलझाव से परे वास्तविकता की एक सहज दुनिया में ले जाती हैं जिसकी तहों के नीचे कई विसंगतियाँ साँस लेती रहती हैं।
Katha Saptak Pragya
- Author Name:
Pragya
- Book Type:

- Description: Collection of 7 brilliant stories: - मन्नत टेलर्स - लो बजट - अमरीखान के लमड़े - स्याह घेरे - शोध-कथा - एक झरना ज़मींदोज़ - ज़िंदगी के तार
Aayenge Achche Din Bhi
- Author Name:
Swayam Prakash
- Book Type:

-
Description:
कथाकार स्वयं प्रकाश के पास वर्तमान भारतीय समाज—खासकर मध्यवर्ग—को आर-पार देखने वाली दृष्टि तो है ही, अर्थपूर्ण कथा-स्थितियों के चयन और भाषा के सृजनात्मक उपयोग के लिए भी उनका लेखन अलग से पहचाना जाता है। आकस्मिक नहीं कि पाठक स्वयं उनकी कहानी में शामिल हो जाता है अथवा उनके कथा-चरित्र उससे सीधे संवाद करने लगते हैं।
‘आएँगे अच्छे दिन भी’ संग्रह में लेखक की ग्यारह कहानियाँ संगृहीत हैं। इनमें ‘पार्टीशन’ और ‘आलेख’ जैसी मूल्यवान कहानियाँ यदि धर्मांधता और साम्प्रदायिक घृणा को बढ़ाने वाली ताकतों के अमानवीय क्रिया-कलाप को उघाड़ती हैं तो ‘बेमकान’ शीर्षक कहानी हमारे जीवन-व्यवहार में जड़ीभूत सामन्ती संस्कारों पर प्रहार करती है। ‘अफसर की मौत’ अफसरशाही पर चढ़ी चिकनाई और आभिजात्य की धज्जियाँ उड़ाती है तो ‘गुमशुदा’ भी प्रायः उसी जमीन पर एक गहरी विडम्बना को उजागर करती है। ‘संहारकर्ता’ और ‘चोर की माँ’ शीर्षक कहानियाँ पाठक को एक नैतिक समस्या के रू-ब-रू ला खड़ा करती हैं। ‘नैनसी का धूड़ा’ हमारे अपने दैन्य और दुर्भाग्य की अविस्मरणीय दास्तान है और ‘अशोक और रेनु की असली कहनी’ मेल शॉवनिज्म की बारीकियों पर विचार करते हुए एक सजग व्यक्ति के चेतना-सम्पन्न व्यक्ति में बदलने के आत्मसंघर्ष को रेखांकित करती है। ‘झक्की’ में वृद्धावस्था की ऊब और एकरसता की दिलचस्प प्रस्तुति है तो ‘मरनेवाले की जगह’ रोजगार से जुड़ी त्रासद जीवन-स्थितियों पर व्यंग्य करती है ।
संक्षेप में कहा जाए तो स्वयं प्रकाश की इन कहानियों ने अपने समय और समाज को जैसी रचनात्मक ईमानदारी, लोकोन्मुख दृष्टिमयता और कलात्मक सहजता से प्रस्तुत किया है, समकालीन हिन्दी कहानी इससे अनेक स्तरों पर समृद्ध हुई है।
Mar Gaya Deepnath
- Author Name:
Chandrakishore Jaiswal
- Book Type:

- Description: चन्द्रकिशोर जायसवाल अपने आसपास के समाज और जीवन को सहज भाव से देखते-पढ़ते हैं, और उसी सहजता से उसके विरोधाभासों की ओर संकेत करते हुए ऐसी कहानी लिखते हैं, जिससे पाठक फ़ौरन जुड़ जाता है। मर गया दीपनाथ कहानी-संग्रह में शीर्षक कथा के अलावा पाँच कहानियाँ और हैं। लगभग सत्तर पृष्ठों में फैली कहानी ‘मर गया दीपनाथ’ हिन्दू-मुस्लिम साम्प्रदायिकता को मनोवैज्ञानिक स्तर पर समझने की कोशिश करती है, और उन बड़े मूल्यों को रेखांकित करती है जिनके आधार पर भारत की साझी सामाजिकता आकार ग्रहण करती है। साधारण शैली में असाधारण कहानियाँ रचनेवाले कथाकार चन्द्रकिशोर जायसवाल ने मध्यवर्गीय पारिवारिक जीवन को गहरी संवेदनशीलता के साथ अंकित किया है, साथ ही ग्रामीण जीवन के ऐसे चित्र भी उनके यहाँ मिलते हैं जिनसे स्वातंत्र्योत्तर भारत में विभिन्न स्तरों पर घटित होनेवाले बदलावों के सामाजिक, राजनीतिक और नैतिक निहितार्थों को समझना आसान हो जाता है। इस संग्रह में शामिल कहानियाँ न सिर्फ़ उनके कथाकार के विभिन्न पक्षों को सामने लाती हैं, बल्कि अपनी पठनीयता और यथार्थबोध के चलते हमारी स्मृति का हिस्सा बन जाती हैं।
Mulakaat
- Author Name:
Sanjay Sahay
- Book Type:

-
Description:
नई कहानी के पारम्परिक ढाँचे को लगभग तोड़कर उदय प्रकाश, संजीव और शिवमूर्ति जैसे कथाकारों ने जो नई ज़मीन बनाई, उसे नब्बे के दशक में जिन कथाकारों ने विस्तार और गहराई देने का काम किया, उनमें संजय सहाय भी एक रहे। 1994 में ‘हंस’ में प्रकाशित अपनी कहानी ‘शेषान्त’ के साथ उन्होंने हिन्दी कथा-साहित्य में जैसे एक नई लकीर खींच दी थी। बेशक, उन्होंने कहानियाँ कम लिखीं। लेकिन जब भी लिखीं, पाठकों को एक नया आस्वाद, एक नया अनुभव दिया। अब लगभग दो दशक बाद उनका यह नया कहानी-संग्रह ‘मुलाक़ात’ नए सिरे से याद दिलाता है कि ज़िन्दगी की तरह कहानी में भी कितनी परतें हो सकती हैं। यह दरअसल शिल्प का कमाल नहीं, संवेदना की पकड़ है जो कथाकार को यह देखने की क्षमता देती है कि एक मुठभेड़ के भीतर कितनी मुठभेड़ें चलती रहती हैं, कि जब हम दूसरे को मारने निकलते हैं तो पहले कितना ख़ुद को मारते हैं, कि जीवन कितना निरीह और फिर भी कितना मूल्यवान हो सकता है, कि एक पछतावा उम्र-भर किसी का इस तरह पीछा कर सकता है कि वह अपनी देह के खोल से निकलकर उस शख़्स को खोजना चाहे जिसके साथ बचपन में कभी उसने अन्याय किया था, कि उसे एहसास हो कि यह अन्याय व्यक्तिगत नहीं, बल्कि सामाजिक था और इस वजह से कहीं ज़्यादा मार्मिक और मारक हो गया था।
ये कहानियाँ आपको तनाव से भर सकती हैं, आपको स्तब्ध कर सकती हैं और आपको इस तनाव से मुक्ति भी दिला सकती हैं, इस स्तब्धता से उबार भी सकती हैं। क़िस्सागोई की तरलता और जीवन के स्पन्दन से भरी इन कहानियों को पढ़ना एक विलक्षण अनुभव है जो आपको कुछ और बना देता है।
—प्रियदर्शन
Adhuri Ladki
- Author Name:
Akbar Aazam
- Book Type:

- Description: बुंदेलखंड, यूपी में जन्मे जुड़वा भाई, अकबर और आज़म क़ादरी मुंबई में बतौर लेखक-निर्देशक कार्यरत हैं। दोनों ने स्टार टीवी में बतौर ‘शो रनर’ तीन साल काम किया। दोनों जामिया मिल्लिया इस्लामिया से ‘मास मीडिया ऑनर्स (2005)’ ग्रेजुएट हैं। अकबर ने, थ्ज्प्प् पुणे से सिनेमेटोग्राफी में सर्टिफिकेट कोर्स किया। 2007 में अंतराल थिएटर की स्थापना की, बतौर निर्देशक दोनों ने तक़रीबन 20 नाटकों का निर्देशन किया जिनमें ‘मौसम को न जाने क्या हो गया’, ‘जिस लाहौर नई देख्या ओ जम्याई नई’, ‘एक और द्रोणाचार्य’, ‘जात ही पूछो साधु की’, ‘हकीम डॉट कॉम’ आदि शामिल हैं। ‘हकीम डॉट कॉम’ और ‘मौसम को न जाने क्या हो गया’ को उर्दू अकादमी दिल्ली और हिन्दी अकादमी दिल्ली ने 2019 में चयनित किया। 2011 में बॉलीवुड के डायरेक्टर इम्तियाज़ अली की फिल्म ‘रॉक स्टार’ में काम किया। 92.7 ठप्ळ थ्ड के मशहूर शो ‘यादों का इडियट बॉक्स विद नीलेश मिसरा’ के लिए 100 से अधिक कहानियाँ लिखने के अलावा डॉक्यूमेंटरी फिल्म, म्यूजिक वीडियो और विज्ञापनों का निर्देशन किया। 2020 मे रिलीज़, तिग्मांशु धूलिया की फिल्म ‘यारा’ मे अभिनय किया। ‘परखनली’ नाम से कहानी संग्रह प्रकाशित। वर्तमान में, विभिन्न प्रोडक्शन कंपनियों और ओटीटी प्लेटफार्मों के लिए फीचर फिल्म और वेब सीरीज़ डेवलमपेंट के अलावा, अकबर-आज़म यूट्यूब चौनल सर्चलाइट प्रोडक्शन के लिए एक कॉमेडी टॉक शो ‘टॉक ही टॉक’ का लेखन और निर्देशन कर रहे हैं। बतौर निर्देशक उनकी पहली फीचर फिल्म, ‘शहज़ादा अली’ अक्टूबर 2020 में डग् च्संलमत पर रिलीज़ हुई ।
Raftar
- Author Name:
Doorva Sahay
- Book Type:

-
Description:
आस-पास की बहुत परिचित-सी दुनिया को लेकर दूर्वा सहाय ने बेहद संवेदनशील कहानियाँ लिखी हैं। स्थितियों की जटिल नाटकीयता को पकड़ने की गहरी दृष्टि, जानी-पहचानी स्थितियों को पाठक के लिए एकदम नया बना देती है। इन कहानियों से गुजरना निहायत निजी दुनिया को नई दृष्टि से देखना है। मौसम, रफ्तार, डर, जिरह, रिमोट कंट्रोल या संग्रह की हर कहानी अपने चरित्रों, उनके अन्तर्द्वन्द्वों के कारण बहुत समय तक हमारी संवेदना का हिस्सा बनी रहती हैं।
दूर्वा उन जगहों पर ‘कहानी’ खोज निकालती हैं जहाँ उनकी बारीक दृष्टि, स्थितियों को आत्मीय क्षण में बदलने की कला बन जाती है। रफ्तार संग्रह साफ-सुथरे गद्य की चित्रात्मक अनुगूँजों को पाठक की चेतना का अन्तरंग बनाता है। ये उस बेचैन नारी की निजी अन्तर्द्वन्द्वों की कहानियाँ भी हैं जो दी हुई परिधियों को समझना और उनके पार जाना चाहती है...एक निःशब्द प्रतिरोध की धीमी रफ्तार के साथ, जहाँ हर स्त्री एक रिमोट कंट्रोल से बँधी है। दूर्वा सहाय का यह संग्रह नई सदी की नारी-चेतना का दस्तावेज है।
Dwandwa
- Author Name:
Smt. Sudha Murty
- Book Type:

- Description: मुकेश का सगा भाई जिंदा है क्या ? अगर है तो कहाँ है? उसे ढूँढना चाहिए । अपने जीवन की गाथा उसे सुनानी है । इस विशाल संसार में सिर्फ वे ही दोनों एक-दूसरे से रक्त से जुड़े हैं । जीवन की घटनाएँ विचित्र रूप ले रही थीं । तीन दिन पहले वह रूपिंदर-सुरिंदर का पंजाबी मुंडा था । बीस दिन पहले वह त्रिवेदीजी -सुमन का इकलौता बेटा था । लक्ष्मीपुत्र था । भारतीय था । आज वह भारत का भी नहीं है । इस भूमि का, इस देश का, इस संस्कृति का नहीं है । अब वह अमेरिकी है! - द्वंद्व' से '' मुझे आपसे कुछ पूछना है । अच्छा, पहले यह बताइए कि शंकर मेरा कुछ नहीं लगता, फिर हम दोनों हमशक्ल कैसे हैं ? '' माँजी, एक सवाल पूछूँ? बुरा तो नहीं मानेंगी? शंकर के पिता का देहांत हुआ कैसे? उनके मरण में बहुत राज छिपे हैं । जहाँ तक मेरी समझ है, मेरे पिताजी का कोई रिश्तेदार इस इलाके में नहीं रहा । न पहले थे, न अब हैं । हम लोग शुरू से ही दिल्ली में रहे ।.. ' तर्पण ' से सुप्रसिद्ध कन्नड़ लेखिका श्रीमती सुधा मूर्ति के ये दोनों पठनीय सामाजिक उपन्यास पाठकों की संवेदनशीलता और मर्म को भीतर तक छू जाएँगे ।
Shiuli Ki Gandh Aur Anya Kahaniyan
- Author Name:
Taslima Nasrin
- Book Type:

- Description: संसार को खुली आँखों से देखा हो, जीवन और जन का पर्यवेक्षण बिना किसी पूर्वग्रह के किया हो तो लेखक के रूप में आपके पास अनुभवों की अपार राशि होती है। तसलीमा नसरीन की कहानियों का यह संकलन ‘शिउली की गंध और अन्य कहानियाँ’ उनकी अनुभव-समृद्ध लेखनी की उल्लेखनीय उपलब्धि है। यह उनकी सोच की भी उपलब्धि है, उनकी अपनी स्वतंत्र-चेता दृष्टि की, जो इन कहानियों की पंक्ति-पंक्ति में दिखाई देती है। स्त्री के दुख को उन्होंने कभी अपनी निगाह से ओझल नहीं होने दिया, और यह विडंबना ही है कि स्त्री को उन्होंने दुनिया के हर कोने में एक ही सा दुख सहते पाया, जो एक हक़ीक़त है। ‘शिउली की गंध और अन्य कहानियाँ’ की कहानियों में भी देश-विदेश की अनेक स्त्रियाँ हैं जो अपने-अपने ढंग की पीड़ा सह रही हैं, फिर भी अपने आप की उनकी तलाश जारी है, अपनी आज़ादी और सुकून की चाह की लौ को वे बुझने नहीं देतीं। जिस तरह स्त्री अपने दुख में, उसी तरह पुरुष अपनी ताक़त के अहंकार और परपीड़ा-सुख में, कुछ अपवादों को छोड़कर, पूरी दुनिया में एक ही जैसा है। वह थाइलैंड की चाइलाई का स्वीडिश पति योहान हो, या किशोरी शिउली का सतहत्तर वर्षीय पति इदरीस अली और उसके बाद और ज़्यादा बूढ़े, और ज़्यादा निर्दय कई पति—सबके लिए वह सेवा-दासी भी है, यौन-दासी भी। भाइयों द्वारा ग्यारह बार ग्यारह बूढ़ों को बेची गई शिउली... इस संकलन में तसलीमा नसरीन की चौबीस कहानियाँ संकलित हैं। हर कहानी आपके सामने एक अलग दुनिया का दरवाज़ा खोलती है और अपने साहस और साफ़गोई से आपको चौंका देती है।
Hanukiah Ari Hogada Deepa 1939-2015
- Author Name:
Vittal Shenoy
- Book Type:

- Description: DESCRIPTION AWAITED
Manushya Hone Ke Sansmaran
- Author Name:
Devi Prasad Mishra
- Book Type:

- Description: ‘मनुष्य होने के संस्मरण’ की नवोन्मुख कथा प्रविधि जिसे देवी प्रसाद मिश्र अन्य कथा कहते हैं भारतीय ही नहीं विश्व साहित्य में आधुनिक फ़ेबल की वस्तु, संरचना और फैंटेसी को पाती दिखती है। यह समकालिक क़िस्सा है—संस्तरवान और तिर्यक। ये बहुत छोटी कहानियाँ हिन्दी की लघु कथा के सरलीकरण से बचकर अपनी ज़ेहनियत पाती रही हैं। खंड-खंड यातनाओं, प्रफुल्लताओं, और प्रतिरोध को अवाँगार्दीय अनुच्छेदों में कहने की अनिवार्यता, दबाव और ज़रूरत से इनकार किया जा सकता है क्या? इन छोटी कहानियों में कथात्मकता के पार जाता और फिर उनकी तरफ़ लौटता एक उड़ाउड़ापन है—कुछ काव्य, कुछ दार्शनिकता, कुछ मेटाफ़िज़िक्स जो काव्याख्यान-सा लगता है। कविता के साथ इन कथाओं के गहरे रिश्तों को झुठलाया नहीं जा सकता। ये कविता हैं तो कथा भी हैं और इसीलिए ये अन्य कथाएँ हैं। इन्हें एक ऐसे छोर से संगठित किया गया है जिसमें कथा कहने की स्वतन्त्रता हो लेकिन अन्तत: ग्रहण करें वे काव्याकार। ये कमतमता का उदाहरण हैं—मिनिमलिज़्म की मिसाल। अन्तर्वस्तु के बिखराव को खुलते हुए शिल्प में कह लेना इनकी उपलब्धि है। यह काव्योन्मुख फ़ेबलीय लोककथात्मक संरचना नयी वस्तु और विन्यास का आश्चर्यसंसार है जो प्रखर रूप से मौलिक और कृतिकारिता का अभूतपूर्व और उच्चतम है।
Maya Ne Ghumayo
- Author Name:
Mrinal Pande
- Book Type:

-
Description:
‘माया ने घुमायो’ उन कहानियों की आधुनिक प्रस्तुति है जो हमें वाचिक परंपरा से मिली हैं। ये कहानियाँ अपनी कल्पनाओं, अतिरंजनाओं और अपने पात्रों के साथ सुदूर अतीत से हमारे साथ हैं और मानव समाज, उसके मन-मस्तिष्क के साथ मनुष्य की महानताओं-निर्बलताओं का गहरा तथा सटीक अध्ययन करती रही हैं। बिलकुल नानी-दादियों की उन कहानियों की तरह जिन्हें हमारी कई पीढ़ियों ने बचपन में सुना, और दुनिया को अपनी तरह से समझा जो एक ही समय में इतनी विराट, इतनी क्षुद्र, इतनी कठिन और इतनी सहज होती है।
इन कहानियों में वर्चस्व की लिप्सा है, आतंक है, कमजोरों की दीनता और असहायता है, चालाक गीदड़ है, आतंकी सिंह है, और साथ ही है हमारी समकालीन राजनीति और आसपास के सामाजिक-आर्थिक तंत्र में नए-नए आए जुमलों और शब्दों की बुनत जो इन कथाओं को अनायास ही हमारे आज की 'सत्यकथा' में बदल देती हैं। यही वह बिन्दु है जहाँ बच्चों को पूरी-पूरी समझ में आ जाने वाली ये कहानियाँ पाठक से एक वयस्क मस्तिष्क की माँग करने लगती हैं।
वे आधारभूत सत्य, जिजीविषा की वे आदिम प्रेरणाएँ जो इस दुनिया को गति देती हैं, इसे 'रहने' और 'नहीं रहने' लायक बनाती हैं और जिनके कारण ही हर कला, हर कथा को अपने होने का तर्क मिलता है, और जो हर किस्म की प्रगति के बावजूद मनुष्य मन के दरवाजे पर अपना प्राचीन लट्ठ लिये पहरा देती आई हैं, लोककथाएँ उन्हें ही अपना खाद-पानी बनाती आई हैं। मृणाल पाण्डे ने यहाँ उसका प्रयोग अपनी सक्षम और प्रवहमान भाषा और गहरी सामाजिक-राजनीतिक समझ के साथ किया है।
Customer Reviews
Be the first to write a review...
0 out of 5
Book