Mitti Ki Sugandh
Author:
Gajanan Madhav MuktibodhPublisher:
Rajkamal Prakashan SamuhLanguage:
HindiCategory:
Short-story-collections0 Ratings
Price: ₹ 636
₹
795
Available
<span style="font-weight: 400;">इस संकलन की लगभग सभी कहानियाँ प्रवासी भारतीयों के जीवन-संघर्ष</span><span style="font-weight: 400;">, </span><span style="font-weight: 400;">अनुभव और ऊहापोह की कहानियाँ हैं</span><span style="font-weight: 400;">; </span><span style="font-weight: 400;">लेकिन भारत की मिट्टी की सुगंध हर कहानी में रची-बसी है</span><span style="font-weight: 400;">, </span><span style="font-weight: 400;">चाहे वह लत हो</span><span style="font-weight: 400;">, </span><span style="font-weight: 400;">तमाशा खत्म हो या काल सुंदरी। घर का ठूँठ की चन्नी विभाजन</span><span style="font-weight: 400;">, </span><span style="font-weight: 400;">टूटन और बिखराव की पीड़ा के चलते तमाम सुख-सुविधाओं के बावजूद ठूँठ होकर रह जाती है। पराया देश का नायक रंग और नस्ल भेद के दमघोंटू वातावरण में जी रहा है। अभिशप्त का नायक प्रवासी जीवन से तालमेल न बिठा पाने के संकट से ग्रस्त है तो सुबह की स्याही लंदन की स्याह और संकीर्ण मानसिकता का परिचय कराती है। पुराना घर</span><span style="font-weight: 400;">, </span><span style="font-weight: 400;">नए वासी में पश्चिमी संस्कृति में अपनी पहचान के गुम हो जाने का दर्द है तो सर्द रात का सन्नाटा में अपनों से छले जाने की पीड़ा। आदमखोर उपभोक्ता संस्कृति की स्वार्थांधता की परतें खोलती है तो फिर कभी सही... भौतिक मूल्यों और मानव-मन की भटकन का विश्लेषण करती है। इस बार कहानी...</span><span style="font-weight: 400;">, </span><span style="font-weight: 400;">बुधवार की छुट्टी</span><span style="font-weight: 400;">, </span><span style="font-weight: 400;">बेघर</span><span style="font-weight: 400;">, </span><span style="font-weight: 400;">एक मुलाकात और चाँदनी भी प्रवासी मन की पीड़ाओं का सघन ब्यौरा देने वाली कहानियाँ हैं। अपने देश से बाहर रहते हुए अपने देश की मिट्टी से जुड़ने की ललक से भरे रचनाकारों की ये कहानियाँ निश्चय ही हिंदी के कथा-जगत् में अपना विशिष्ट स्थान रखती हैं।</span>
ISBN: 9788171194216
Pages: 195
Avg Reading Time: 7 hrs
Age: 18+
Country of Origin: India
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Description:
पिछले दो दशकों में ‘सूखा बरगद’ और ‘दास्तान-ए-लापता’ जैसे श्रेष्ठ उपन्यासों के लिए चर्चित मंज़ूर एहतेशाम ने एक महत्त्वपूर्ण कथाकार के रूप में भी अलग पहचान अर्जित की है। यह कहना कि उनकी कहानियाँ मध्यवर्गीय (मुस्लिम) वर्ग के बारे में हैं, उनके कथानक का अति-सरलीकरण होगा। दरअसल मंज़ूर एहतेशाम उन थोड़े-से कथाकारों में हैं, जिन्होंने इधर की साहित्यिक बहसों के बुनियादी मुद्दे ही बदल दिए हैं।
प्रस्तुत कहानी-संग्रह ‘तमाशा तथा अन्य कहानियाँ’ में शामिल कहानियाँ, विषयों की नहीं, एक व्यक्ति के होने-न-होने की कहानियाँ हैं। अक्सर इनके केन्द्र में एक संस्कारवान, संवेदनशील व्यक्ति है। और उसे बनाता-ढहाता एक परिवेश। कुछ इस तरह कि कभी काँच के हाथ में पत्थर और कभी पत्थर के हाथ में काँच होने का अहसास बराबर बना रहता है। मध्यवर्गीय अस्तित्व की विडम्बना की ये कहानियाँ कभी शोर और कभी सन्नाटे से स्वयं को बुनती-उधेड़ती हैं। यूँ इनका कथानक बहुत बारीक़ी से अपना उपकथन, अपना सब-टेक्स्ट बनाता-मिटाता चलता है। अपने अल्पकथन के बावजूद ये आश्चर्यजनक रूप से मार्मिक कथाएँ हैं। यहाँ प्रस्तुत बहुचर्चित ‘रमजान में मौत’ से लेकर ‘तमाशा’ तक ये कहानियाँ अपनी यात्रा भी हैं, और पड़ाव भी।
Sanjhak Gaachh : Maithili Kathak sangrha
- Author Name:
Rajkamal Chaudhary
- Book Type:

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