Ek Sau Pachas Premikayen
About the book
इंदिरा दाँगी की भाषा में एक संयत खिलन्दड़ापन है और कथा-विषयों की एक नई रेंज। ये दोनों ही चीज़ें उन्हें अलग से पढ़े जानेवाले कथाकार के रूप में प्रतिष्ठित करती हैं। भाषा जब पाठक को अपने जादू में ले लेती है तब भी उनका क़िस्सागो सतर्क रहता है कि किस बिन्दु पर कौन-सा क़दम उठाना है, कि कहानी भी आगे बढ़े और पात्र का नक़्शा भी ज़्यादा साफ़ हो। कह सकते हैं कि वे अपने विवरणों में एक नई क़िस्सागोई का आविष्कार करती हैं, शैलीगत चमत्कारों में उलझकर नहीं रह जातीं। संग्रह की पहली ही कहानी ‘लीप सेकेंड’ को कथाकार के रूप में उनकी क्षमताओं की बानगी के रूप में पढ़ा जा सकता है। एक बिलकुल अछूता विषय, फिर उसका इतना चित्रात्मक ट्रीटमेंट, आदमी की जिजीविषा को ज़िन्दगी की वास्तविक सड़क पर मूर्त करने की क्षमता, सराहनीय है। इसी तरह ‘एक चोरी प्यासी घाटियों के नाम’ कहानी हमें व्यक्ति के आत्मान्वेषण के एक नए इलाक़े में ले जाती है और कहानी के रूप में अत्यन्त स्पष्टता के साथ अपना आकार पाती है। मध्यवर्गीय मन यहाँ अपनी सीमाओं को बहुत महीन ढंग से तोड़ने को व्याकुल दिखाई देता है। ऐसा ही कुछ ‘एक नन्ही तितली आती तो है’ कहानी में देखा जा सकता है जिसकी ज़मीन तो उतनी नई नहीं है लेकिन जिस ढंग से वह अपनी शैली और अपने पात्रों को बरतती हैं, उसमें अपने ढंग का एक अलग आकर्षण है। उम्मीद है, चर्चित-सुपरिचित इन कहानियों की यह प्रस्तुति पाठकों की प्रसन्नता का कारण बनेगी।
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About the Book
इंदिरा दाँगी की भाषा में एक संयत खिलन्दड़ापन है और कथा-विषयों की एक नई रेंज। ये दोनों ही चीज़ें उन्हें अलग से पढ़े जानेवाले कथाकार के रूप में प्रतिष्ठित करती हैं। भाषा जब पाठक को अपने जादू में ले लेती है तब भी उनका क़िस्सागो सतर्क रहता है कि किस बिन्दु पर कौन-सा क़दम उठाना है, कि कहानी भी आगे बढ़े और पात्र का नक़्शा भी ज़्यादा साफ़ हो। कह सकते हैं कि वे अपने विवरणों में एक नई क़िस्सागोई का आविष्कार करती हैं, शैलीगत चमत्कारों में उलझकर नहीं रह जातीं।
संग्रह की पहली ही कहानी ‘लीप सेकेंड’ को कथाकार के रूप में उनकी क्षमताओं की बानगी के रूप में पढ़ा जा सकता है। एक बिलकुल अछूता विषय, फिर उसका इतना चित्रात्मक ट्रीटमेंट, आदमी की जिजीविषा को ज़िन्दगी की वास्तविक सड़क पर मूर्त करने की क्षमता, सराहनीय है। इसी तरह ‘एक चोरी प्यासी घाटियों के नाम’ कहानी हमें व्यक्ति के आत्मान्वेषण के एक नए इलाक़े में ले जाती है और कहानी के रूप में अत्यन्त स्पष्टता के साथ अपना आकार पाती है। मध्यवर्गीय मन यहाँ अपनी सीमाओं को बहुत महीन ढंग से तोड़ने को व्याकुल दिखाई देता है। ऐसा ही कुछ ‘एक नन्ही तितली आती तो है’ कहानी में देखा जा सकता है जिसकी ज़मीन तो उतनी नई नहीं है लेकिन जिस ढंग से वह अपनी शैली और अपने पात्रों को बरतती हैं, उसमें अपने ढंग का एक अलग आकर्षण है।
उम्मीद है, चर्चित-सुपरिचित इन कहानियों की यह प्रस्तुति पाठकों की प्रसन्नता का कारण बनेगी।
Book details
- Format
- Paperback
- Publisher
- Rajkamal Prakashan Samuh
- Edition
- 2nd
- Publication year
- 2016
- Weight
- 172 grams
- ISBN-13
- 9788126724314
- Pages
- 144
- Reading time
- ~5 hrs
- Age
- 18+
- Country of origin
- India
- Dimensions
- 14 × 21.5 cm
- Language
- Hindi
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