Manushya Hone Ke Sansmaran
(0)
Author:
Devi Prasad MishraPublisher:
Rajkamal Prakashan SamuhLanguage:
HindiCategory:
Short-story-collections₹
250
₹ 200 (20% off)
Available
Ships within 48 Hours
Free Shipping in India on orders above Rs. 1100
‘मनुष्य होने के संस्मरण’ की नवोन्मुख कथा प्रविधि जिसे देवी प्रसाद मिश्र अन्य कथा कहते हैं भारतीय ही नहीं विश्व साहित्य में आधुनिक फ़ेबल की वस्तु, संरचना और फैंटेसी को पाती दिखती है। यह समकालिक क़िस्सा है—संस्तरवान और तिर्यक। ये बहुत छोटी कहानियाँ हिन्दी की लघु कथा के सरलीकरण से बचकर अपनी ज़ेहनियत पाती रही हैं। खंड-खंड यातनाओं, प्रफुल्लताओं, और प्रतिरोध को अवाँगार्दीय अनुच्छेदों में कहने की अनिवार्यता, दबाव और ज़रूरत से इनकार किया जा सकता है क्या? इन छोटी कहानियों में कथात्मकता के पार जाता और फिर उनकी तरफ़ लौटता एक उड़ाउड़ापन है—कुछ काव्य, कुछ दार्शनिकता, कुछ मेटाफ़िज़िक्स जो काव्याख्यान-सा लगता है। कविता के साथ इन कथाओं के गहरे रिश्तों को झुठलाया नहीं जा सकता। ये कविता हैं तो कथा भी हैं और इसीलिए ये अन्य कथाएँ हैं। इन्हें एक ऐसे छोर से संगठित किया गया है जिसमें कथा कहने की स्वतन्त्रता हो लेकिन अन्तत: ग्रहण करें वे काव्याकार। ये कमतमता का उदाहरण हैं—मिनिमलिज़्म की मिसाल। अन्तर्वस्तु के बिखराव को खुलते हुए शिल्प में कह लेना इनकी उपलब्धि है। यह काव्योन्मुख फ़ेबलीय लोककथात्मक संरचना नयी वस्तु और विन्यास का आश्चर्यसंसार है जो प्रखर रूप से मौलिक और कृतिकारिता का अभूतपूर्व और उच्चतम है।
Read moreAbout the Book
‘मनुष्य होने के संस्मरण’ की नवोन्मुख कथा प्रविधि जिसे देवी प्रसाद मिश्र अन्य कथा कहते हैं भारतीय ही नहीं विश्व साहित्य में आधुनिक फ़ेबल की वस्तु, संरचना और फैंटेसी को पाती दिखती है। यह समकालिक क़िस्सा है—संस्तरवान और तिर्यक। ये बहुत छोटी कहानियाँ हिन्दी की लघु कथा के सरलीकरण से बचकर अपनी ज़ेहनियत पाती रही हैं। खंड-खंड यातनाओं, प्रफुल्लताओं, और प्रतिरोध को अवाँगार्दीय अनुच्छेदों में कहने की अनिवार्यता, दबाव और ज़रूरत से इनकार किया जा सकता है क्या? इन छोटी कहानियों में कथात्मकता के पार जाता और फिर उनकी तरफ़ लौटता एक उड़ाउड़ापन है—कुछ काव्य, कुछ दार्शनिकता, कुछ मेटाफ़िज़िक्स जो काव्याख्यान-सा लगता है। कविता के साथ इन कथाओं के गहरे रिश्तों को झुठलाया नहीं जा सकता। ये कविता हैं तो कथा भी हैं और इसीलिए ये अन्य कथाएँ हैं। इन्हें एक ऐसे छोर से संगठित किया गया है जिसमें कथा कहने की स्वतन्त्रता हो लेकिन अन्तत: ग्रहण करें वे काव्याकार। ये कमतमता का उदाहरण हैं—मिनिमलिज़्म की मिसाल। अन्तर्वस्तु के बिखराव को खुलते हुए शिल्प में कह लेना इनकी उपलब्धि है। यह काव्योन्मुख फ़ेबलीय लोककथात्मक संरचना नयी वस्तु और विन्यास का आश्चर्यसंसार है जो प्रखर रूप से मौलिक और कृतिकारिता का अभूतपूर्व और उच्चतम है।
Book Details
-
ISBN9789394902848
-
Pages160
-
Avg Reading Time5 hrs
-
Age18+ yrs
-
Country of OriginIndia
Recommended For You
Teesari Hatheli
- Author Name:
Rajee Seth
- Book Type:

-
Description:
राजी के कथा-संसार में आदमी के अस्तित्व के सांस्कृतिक आयामों और मूल्यात्मक विरोधाभासों की पड़ताल के ज़्यादा बड़े सवालों से जूझने के लिए परिवार भारतीय समाज की केन्द्रीय इकाई की हैसियत से प्रतिष्ठित है। राजी की कहानियों के सन्दर्भ में यह सामाजिक-सांस्कृतिक मूल्य संवेदना का पारिवारिक देहान्तर है। कभी इस बदलाव के पीछे इतिहास या रणनीति या अर्थ की तत्काल अनुपस्थित और अदृश्य व्यवस्थाएँ हैं तो कभी सम्बन्धों में शक्ति के सन्तुलन का बदला हुआ समीकरण। लेकिन इस सुबकते संसार में मौजूद आदमी की सोच और संवेदना के बहाव और मोड़ में इतिहास, राजनीति या अर्थ के हस्तक्षेप को पहचान लेना भर इन कहानियों के लिए काफ़ी नहीं है। इस हस्तक्षेप के साथ जूझते हुए आदमी का लहूलुहान मर्म और फिर भी किसी मूल्य को खोजने, खोदने या दुह लेने की ज़िद और जूझ इन कहानियों को वहाँ तक ले जाना चाहती है, जहाँ परिवर्तन की प्रक्रिया वैचारिक मीमांसाओं और बौद्धिक विश्लेषणों की पकड़ और पहुँच से बाहर रह जाया करती है।
देखने में ये बहुत शान्त और स्थिर कहानियाँ हैं। फेन और फिचकुर उगलती, मुट्ठियाँ लहराती, उगते हुए सूरज के साथ समापन की ओर जानेवाली प्रसिद्ध रूप में जुझारू कहानियों के विपरीत यहाँ संरचना की सुस्पष्ट चौहद्दियों के बीच एक सुपरिभाषित भाव-संसार है जिसे किसी परिचित मिथक मूल्य से विचलन के क्षण में पकड़ा गया है। सधे हाथों की तराश के अधीन संरचना एक संयत, सन्तुलित सुसम्बद्ध आकार बनकर उभरती है। अहसास के फैलाव को एक बिन्दु पर केन्द्रित और सघन करते जाने की घोर तन्मयता कथा को उद्घाटित करती है। ऊपर से राजी का अनूठा शब्दशिल्प। शब्द को जो एक विशिष्ट विलक्षण अस्तित्व राजी दे पाती हैं, उसके प्रति एक सजग विस्मय का भाव पैदा होता है। कथा यही प्राय: कथ्य का एक रूपकीय समतोल होती है। कथा की मूल्य-चेतना इस परिष्कार को अनिवार्य कर देती है क्योंकि वह राजी के लिए शायद सृजनकर्म की सार्थकता से जुड़ी हुई बात है।
—अर्चना वर्मा
Dekhan Mein Chhote Lage
- Author Name:
Champa Shrivastava
- Book Type:

-
Description:
प्रस्तुत पुस्तक ‘देखन में छोटे लगें' 101 लघुकथाओं का संकलन है। लघुकथा हिन्दी कथा साहित्य की एक नई उपलब्धि है। यों इस विधा को नीतिकथा, प्रबोधकथा, बालकथा आदि से जोड़ा गया है, परन्तु यह हिन्दी की एक स्वायत्त विधा है। इसमें लेखिका ने अपने आँखों देखे सत्य को और भोगे हुए यथार्थ को अभिव्यक्ति दी है।
इस कृति का फलक बड़ा व्यापक है। वर्तमान समाज के प्राय: प्रत्येक पक्ष पर इसमें विचार किया गया है। लेखिका ने आज की अमानुषिकता पर अपनी मनोव्यथा व्यक्त की है, राजनीतिक विसंगतियों के प्रति आक्रोश व्यक्त किया है तो दीनों—दुर्बलों के प्रति करुणा को स्वर दिया है। प्रस्तुत कथा-संकलन पाठकों के लिए पठनीय एवं संग्रहणीय है।
Mansarovar Vol. 5 : Ramleela Aur Anya Kahaniyan
- Author Name:
Premchand
- Rating:
- Book Type:

- Description: प्रेमचन्द का सम्पूर्ण साहित्य भारत के स्वाधीनता संग्राम की महागाथा है। ...स्वराज्य के लक्ष्य पर सतत दृष्टि होने के कारण प्रेमचन्द ने उन समस्याओं पर भी लिखा जो स्वराज्य-प्राप्ति के रास्ते में बाधा पैदा करती थीं। साम्प्रदायिकता की समस्या इनमें सबसे प्रमुख रही है। ...प्रेमचन्द उस मायने में विशिष्ट हैं कि उन्होंने हिन्दू और मुस्लिम दोनों प्रकार के सम्प्रदायवाद पर निर्भीकता के साथ प्रहार किया और इसके साथ ही जन साधारण में उस भाव को जगाने का प्रयास किया जिसे आजकल विभिन्न धर्मों के बीच 'सौमनस्य' अथवा 'एकात्म' की संज्ञा दी जाती है। ...इसी प्रकार प्रेमचन्द ने अपनी कृतियों में हिन्दू समाज में बद्धमूल जाति-पाँति के भेद पर चोट करते हुए विशेष रूप से अछूतों पर होने वाले अत्याचार की मार्मिक कहानियाँ भी लिखी हैं। ...नारी की वेदना भी समाज की उन्हीं दुर्बलताओं में से एक है जिस पर प्रेमचन्द की करुणामयी दृष्टि बहुत गहराई तक गई थी। —नामवर सिंह
Premchand ki hindi urdu Kahaniyan
- Author Name:
Kamal Kishore Goyanka
- Book Type:

- Description: प्रेमचंद की हिंदी-उर्दू कहानियाँ’ पुस्तक हिंदी में ऐसा पहला प्रयास है, जिसमें प्रख्यात लेखक प्रेमचंद की उर्दू से हिंदी तथा हिंदी से उर्दू में आई कहानियों को देवनागरी लिपि में एक साथ प्रस्तुत किया गया है। प्रेमचंद को केवल उर्दू का या केवल हिंदी का लेखक कहनेवालों की संख्या कम नहीं है, परंतु सत्य यह है कि वे पहले उर्दू के और बाद में हिंदी के लेखक बने तथा जीवन-पर्यंत दोनों ही भाषाओं में लिखते रहे। वे इसके लिए भी विशेष रूप से प्रयत्नशील रहे कि उनकी उर्दू कहानियाँ हिंदी में तथा हिंदी कहानियाँ उर्दू में निरंतर आती रहें। इससे वे दो भाषा-समूहों से जुड़कर पूरे देश से जुड़ना चाहते थे, परंतु साहित्य-संसार में यह अत्यंत रोचक एवं चुनौतीपूर्ण प्रश्न है कि प्रेमचंद किस प्रकार उर्दू तथा हिंदी दो भाषाओं के सर्जनात्मक तनाव को झेलते थे, किस प्रकार एक संवेदना को दो भाषा-रूप प्रदान करते थे तथा किस प्रकार वे हिंदी तथा उर्दू को निकट लाने के साथ उन्हें अपना-अपना वैशिष्ट्य भी दे रहे थे। इन सभी प्रश्नों को उठाने तथा उनका उत्तर पाने के लिए ही यह पुस्तक पाठकों के हाथों में है। इस दुस्साध्य कार्य को किया है देश-विदेश में प्रेमचंद-विशेषज्ञ के रूप में प्रख्यात डॉ. कमल किशोर गोयनका ने, जिन्होंने अपने 50 वर्षों के शोध-कार्य से अज्ञात एवं अलक्षित प्रेमचंद के उद्घाटन के साथ उनके अध्ययन की अनेक नई दिशाओं के द्वार भी खोले हैं। ‘नमक का दारोगा’ कहानी का उर्दू व हिंदी पाठांश उर्दू पाठ : नमक का दारोगा ‘‘जब नमक का महकमा ़कायम हुआ और ़खुदादाद (ईश्वर प्रदत्त) निआमत (वरदान) से ़फायदा उठाने की आम मुमानियत (मनाही) कर दी गई तो लोग दरवाज़ा सदर (मुख्य द्वार) बंद पाकर रोज़न व शिगा़फ (रंध्र, दरार) की ़िफके्रं करने लगे। चारों तऱफ ़खयानत (धरोहर का अपहरण) और गबन और तहरीस (लालच) का बाज़ार गरम था। पटवार गीरी का मुअज्ज़िज़ (प्रतिष्ठित) और मुना़फअत (लाभ) औहदा छोड़-छोड़कर सी़ग-ए-नमक (नमक विभाग) की ब़र्कंदाज़ी (चपरासगीरी) करते थे और इस महकमे का दारो़गा तो वकीलों के लिए भी रश्क (स्पर्धा) का बाइस था।’’ (‘हमदर्द’ उर्दू मासिक पत्रिका, अक्तूबर, 1913) हिंदी पाठ : नमक का दारोगा जब नमक का नया विभाग बना और ईश्वर-प्रदत्त वस्तु के व्यवहार करने का निषेध हो गया, तो लोग चोरी-छिपे इसका व्यापार करने लगे। अनेक प्रकार के छल-प्रपंचों का सूत्रपात हुआ, कोई घूस से काम निकालता था, कोई चालाकी से। अधिकारियों के पौबारह थे। पटवारीगीरी का सर्वसम्मानित पद छोड़-छोड़कर लोग इस विभाग की बरकंदाजी करते थे। इसके दारोगा पद के लिए तो वकीलों का भी जी ललचाता था। (‘सप्त-सरोज’, प्रथम हिंदी कहानी-संग्रह, जून, 1917)
Bhasmavrit Chingari
- Author Name:
Yashpal
- Book Type:

-
Description:
यशपाल के लेखकीय सरोकारों का उत्स सामाजिक परिवर्तन की उनकी आकांक्षा, वैचारिक प्रतिबद्धता और परिष्कृत न्याय-बुद्धि है। यह आधारभूत प्रस्थान बिन्दु उनके उपन्यासों में जितनी स्पष्टता के साथ व्यक्त हुए हैं, उनकी कहानियों में वह ज़्यादा तरल रूप में, ज़्यादा गहराई के साथ कथानक की शिल्प और शैली में न्यस्त होकर आते हैं। उनकी कहानियों का रचनाकाल चालीस वर्षों में फैला हुआ है। प्रेमचन्द के जीवनकाल में ही वे कथा-यात्रा आरम्भ कर चुके थे, यह अलग बात है कि उनकी कहानियों का प्रकाशन किंचित् विलम्ब से आरम्भ हुआ। कहानीकार के रूप में उनकी विशिष्टता यह है कि उन्होंने प्रेमचन्द के प्रभाव से मुक्त और अछूते रहते हुए अपनी कहानी-कला का विकास किया। उनकी कहानियों में संस्कारगत जड़ता और नए विचारों का द्वन्द्व जितनी प्रखरता के साथ उभरकर आता है, उसने भविष्य के कथाकारों के लिए एक नई लीक बनाई, जो आज तक चली आ रही है। वैचारिक निष्ठा, निषेधों और वर्जनाओं से मुक्त न्याय तथा तर्क की कसौटियों पर खरा जीवन—ये कुछ ऐसे मूल्य हैं जिनके लिए हिन्दी कहानी यशपाल की ऋणी है।
‘भस्मावृत्त चिंगारी’ कहानी-संग्रह में उनकी ये कहानियाँ शामिल हैं : ‘भस्मावृत्त चिंगारी’, ‘ग़ुलाम की वीरता’, ‘महादान’, ‘गवाही’, ‘वफ़ादारी की सनद’, ‘वान हिंडनबर्ग’, ‘भाग्य का चक्र’, ‘पुरुष भगवान’, ‘देवी का वरदान’, ‘इस टोपी को सलाम’, ‘सत्य का मूल्य’, ‘सआदत’, ‘साग’, ‘पहाड़ का छल’ और ‘घोड़ी की हाय’।
Manto : Pandrah Kahaniyan
- Author Name:
Saadat Hasan Manto
- Book Type:

-
Description:
‘अगर आप मेरी कहानियाँ बरदाश्त नहीं कर सकते, तो दरअसल ज़माना ही नाक़ाबिले-बरदाश्त है।’ यह कहना था मंटो का जो अपनी कहानियों में वह लिखते थे जो सब आवरणों को हटाने के बाद ज़माने के चेहरे पर नज़र आता है।
उन्होंने मज़लूमों, ग़रीब-गुरबा और उन औरतों की कहानियाँ लिखीं जिन्हें समाज ने हाशिए पर धकेलकर छोड़ दिया था। उन्होंने उन भावनाओं को लेकर भी कहानियाँ लिखीं जिन्हें सफ़ेदपोश समाज खुली रोशनी में स्वीकार नहीं कर पाता। उन्होंने ऐसे-ऐसे अहसासात को ज़बान बख़्शी जिन्हें हम कभी अपनी चालाकी और कभी अल्फ़ाज़ की कमी की वजह से यूँ ही ग़ायब हो जाने देते हैं।
इसलिए आज भी उनकी कहानियाँ हमें अपनी कहानियाँ लगती हैं; वे अपने वक़्त से इतना आगे चल रहे थे कि आज भी हमें अपने आगे ही चलते दिखाई देते हैं।
यह संकलन उनकी कुछ बहुत चर्चित और कुछ ऐसी कहानियों को लेकर बनाया गया है जिनका ज़िक्र बहुत ज़्यादा नहीं होता। संकलन किया है जानी-पहचानी सिने-अभिनेत्री और निर्देशक नंदिता दास ने। उनकी चर्चित फ़िल्म ‘मंटो’ के साथ-साथ प्रकाशित यह किताब क़िस्सागो मंटो की पूरी शख़्सियत को सामने ले आती है। बकौल नंदिता : ‘उनकी कहानियों के पात्र अक्सर वे लोग होते हैं जो समाज के कोनों में रहते हैं और औरतों के लिए सहानुभूति भरी नज़र रखते हैं। यही बात उन्हें और लेखकों से अलग करती है।’
Glimpses of Glory
- Author Name:
Santosh Shailja
- Book Type:

- Description: These short stories are about those great women (some girls too) who believed in great ideals of love, sacrifice, patriotism etc. and had the courage to live those ideals in their lives. They belong to different periods of history (some pre-historic) as well as different places and positions in society. I have not written their life history—it is just a glimpse into their life which shows their quality that proved them great and extraordinary. I do not present them as being super-human or heavenly bodies. They are just like any ordinary women but they achieved greatness by their commitment to their ideals. Therefore, readers will be surprised to read a new version of the story of Savitri or Parvati. But I believe that these great women need to be understood and emulated as our ideals. The new generation needs to know them in their true logical perspective. Otherwise we might forget them and their ideals in this age of materialism.
Amlghaat
- Author Name:
Sudha Om Dhingra
- Book Type:

- Description: अम्लघात या एसिड अटैक शब्द सुनते ही रूह काँप जाती है। भीतर दर्द की एक लहर लहरा जाती है। पीड़िता से उसका चेहरा और अंग ही नहीं उसका आत्मसम्मान, इंसान और नागरिक होने का मूल अधिकार, ईश्वर प्रदत्त उसका स्वरूप छीन लिया जाता है, जिसे छीनने का हक़ 'किसी को' भी नहीं है। कानून भी अपराध पर दंड देता है। अम्लघात के शिकार तो अक्सर निरपराधी होते हैं, फिर उन्हें किस अपराध की सज़ा दी जाती है और क्यों ? कौन दोषी है इसके लिए.... परिवार, समाज या कानून? एसिड अटैक पर कहानियाँ भेजने की सूचना मैंने अपनी फ़ेसबुक वॉल की एक पोस्ट में पोस्ट की थी, जिसे पढ़कर अनगिनत कहानियाँ आईं। शिवना प्रकाशन की टीम ने उनमें से बीस कहानियाँ चुनी। मैं उषाकिरण खान जी, कादम्बरी मेहरा जी, गीताश्री जी, आकांक्षा पारे काविश जी, रजनी मोरवाल जी, विकेश निझावन जी, अरुण अर्णव खरे जी, ज्योति जैन जी, आनंदकृष्ण जी, हर्षबाला शर्मा जी, रेनू यादव जी, डॉ. ऋतु भनोट जी, डॉ. निरुपमा राय जी, राधेश्याम भारतीय जी, रोचिका अरुण शर्मा जी , प्रबोध कुमार गोविल जी, पूनम मनु जी, सत्य शर्मा 'कीर्ति' जी, रेणु वर्मा जी, डॉ. लता अग्रवाल जी की आभारी हूँ, जिन्होंने इस हवन में खूबसूरत कहानियों की सामग्री डाली। इस पुस्तक का संपादन करते समय मैं बहुत तनाव से गुज़री हूँ, अम्लघात से पीड़ित स्त्री-पुरुषों का दर्द महसूस किय
Pratinidhi Kahaniyan : Yaikam Mohmmad Bashir
- Author Name:
Yaikam Mohmmad Bashir
- Book Type:

- Description: केरल के निम्न-मध्यवर्गीय समाज और मुस्लिम आबादी को गझिन पृष्ठभूमि से कथानक लेकर उन्हें जादुई कलात्मकता से कहानियों में प्रस्तुत करनेवाले वाइकम मुहम्मद बशीर भारतीय तथा साहित्य में अपना विशिष्ट स्थान रखते हैं। इस्लामिक सामाजिक परिवेश, इस्लाम के पौराणिक मिथकों और केरल के मुस्लिमों में प्रचलित भाषा रूपों का प्रयोग उनके कथा-जगत को एक अलग पहचान देता है। मलयाली ही नहीं, अन्य भाषाओं में भी इस कोटि का बहुत कुछ नहीं मिलता। इस संग्रह में उनकी पन्द्रह अद्भुत कहानियाँ संकलित हैं जो समाज के हाशिए पर रहनेवाले ग़रीब लेकिन जीवट और मनुष्यता से लवरेज लोगों का चित्रण करती हैं। पहली ही कहानी ‘जुआरी की बेटी’ कथाकार की मनोवैज्ञानिक और समाजशास्त्रीय समझ का एक आकर्षक नमूना है। बशीर स्वतंत्रता आन्दोलन में सक्रिय रहे थे। उस दौरान उनके कुछ अनुभव संग्रह में शामिल ‘माँ’, ‘हथकड़ी’ और ‘पुलिसवाले की बेटी’ आदि कहानियों में देखने को मिलते हैं। उनके कथासंसार में सिर्फ़ मनुष्य ही नहीं, बल्कि संसार की सभी चर-अचर वस्तुएँ जैसे चैतन्य होकर गति करती है।
Ek Tha Bhondu Aur Anya Kahaniyan
- Author Name:
Kajal Kumar
- Book Type:

- Description: This book has no description
Katha Katha - Anilprabha Kumar
- Author Name:
Anilprabha Kumar
- Book Type:

- Description: Description Awaited
Pratinidhi Kahaniyan : Balwant Singh
- Author Name:
Balwant Singh
- Book Type:

- Description: “...खेतों की मुँडेरों पर से दीखते बबूल, कीकर, कच्चे घरों से उठता धुआँ, रात के सुनसान में सरपट भागते घोड़े, छवियाँ लशकाते डाकू, घरों से पेटियाँ धकेलते चोर, कनखियों से एक-दूसरे को रिझाते जवान मर्द और औरतें, भोले-भाले बच्चे, लम्बे सफ़र समेटते डाची सवार—समय और स्थितियों से सीनाज़ोरी करते बलवन्त सिंह के पात्र पाठक को देसी दिलचस्पियों से घेरे रहते हैं। कुछ कर गुज़रने के लिए जिस साहस की ज़रूरत इन्हें है, उसे कलात्मक उर्जा से मंज़िल तक पहुँचाने का फ़न लेखक के पास मौजूद है। बलवन्त सिंह के यहाँ धुँधलके और ऊहापोह की झुरमुरी कहानियाँ नहीं, दिन के उजाले में, रात के एकान्त में स्थितियों को चुनौती देते साधारण जन और उनका असाधारण पुरुषार्थ है। बलवन्त सिंह सिर्फ़ आदमी को ही नहीं रचते, कहानी की शर्त पर उसके खेल और कर्म को भी तरतीब देते हैं। वे शोषण और संघर्ष का नाम नहीं लेते, इसे केन्द्र में लाते हैं। यही कारण है कि उनके यहाँ नुमाइशी-पात्र नहीं, जीते-जागते हाड़-मांस के साधारण खुरदरे लोग मिलते हैं। वह अपनी कोशिशों की कामयाबी और बड़ी नाकामयाबी को भी जिए जाते हैं किसी अगले मौक़े की उम्मीद में...” —कृष्णा सोबती (भूमिका से)
Vasant Ka Ujad
- Author Name:
Prakash Kant
- Book Type:

- Description: Collection of Short Stories
Na Bhoolanewali 100 Kahaniyan
- Author Name:
J.P. Vaswani
- Book Type:

- Description: दादा जे.पी. वासवानी हमेशा से उत्कृष्ट किस्सागो रहे हैं। उनकी अनौपचारिक वार्त्ताओं, प्रवचनों और पुस्तकों में भी पुराणों की कहानियाँ बहुतायत से बिखरी होती हैं, ताकि वे उन बातों को सुस्पष्ट कर सकें, जिन्हें वे चाहते हैं कि हम आत्मसात् कर लें। ये कहानियाँ इतनी यादगार हैं कि एक लंबे समय तक हमारे दिलों में बसी रहती हैं तथा उन संदेशों या जीवन-मूल्यों को हृदयंगम करने में हमारी मदद करती हैं, जिन्हें दादा ने इतने रचनात्मक रूप में हमारे सामने रखा है। इस पुस्तक में, पूज्य दादा की वार्त्ताओं और पुस्तकों से चुनी हुई एक सौ कहानियाँ संगृहीत हैं। प्रत्येक कहानी के साथ आपके द्वारा मनन करने के लिए आदरणीय दादा का या उनका पसंदीदा विचार तथा एक पुस्तक के रूप में व्यावहारिक अभ्यास भी दिया गया है, जो दादा की अपनी विशेषता है, जिसका अनुसरण करके आप लाभान्वित हो सकते हैं। न भूलनेवाली एक सौ रोचक-ज्ञानवर्धक कहानियों का प्रेरणादायक संग्रह।
Ek Sau Pachas Premikayen
- Author Name:
Indira Dangi
- Book Type:

-
Description:
इंदिरा दाँगी की भाषा में एक संयत खिलन्दड़ापन है और कथा-विषयों की एक नई रेंज। ये दोनों ही चीज़ें उन्हें अलग से पढ़े जानेवाले कथाकार के रूप में प्रतिष्ठित करती हैं। भाषा जब पाठक को अपने जादू में ले लेती है तब भी उनका क़िस्सागो सतर्क रहता है कि किस बिन्दु पर कौन-सा क़दम उठाना है, कि कहानी भी आगे बढ़े और पात्र का नक़्शा भी ज़्यादा साफ़ हो। कह सकते हैं कि वे अपने विवरणों में एक नई क़िस्सागोई का आविष्कार करती हैं, शैलीगत चमत्कारों में उलझकर नहीं रह जातीं।
संग्रह की पहली ही कहानी ‘लीप सेकेंड’ को कथाकार के रूप में उनकी क्षमताओं की बानगी के रूप में पढ़ा जा सकता है। एक बिलकुल अछूता विषय, फिर उसका इतना चित्रात्मक ट्रीटमेंट, आदमी की जिजीविषा को ज़िन्दगी की वास्तविक सड़क पर मूर्त करने की क्षमता, सराहनीय है। इसी तरह ‘एक चोरी प्यासी घाटियों के नाम’ कहानी हमें व्यक्ति के आत्मान्वेषण के एक नए इलाक़े में ले जाती है और कहानी के रूप में अत्यन्त स्पष्टता के साथ अपना आकार पाती है। मध्यवर्गीय मन यहाँ अपनी सीमाओं को बहुत महीन ढंग से तोड़ने को व्याकुल दिखाई देता है। ऐसा ही कुछ ‘एक नन्ही तितली आती तो है’ कहानी में देखा जा सकता है जिसकी ज़मीन तो उतनी नई नहीं है लेकिन जिस ढंग से वह अपनी शैली और अपने पात्रों को बरतती हैं, उसमें अपने ढंग का एक अलग आकर्षण है।
उम्मीद है, चर्चित-सुपरिचित इन कहानियों की यह प्रस्तुति पाठकों की प्रसन्नता का कारण बनेगी।
Vishwa Ki Shreshtha Kahaniya : Vol. 1
- Author Name:
Mamta Kaliya
- Book Type:

- Description: भारतीय भाषा परिषद ने भारतीय भाषाओं की कई चुनी हुई रचनाओं के संकलन पहले भी प्रकाशित किए हैं। अब इसी क्रम को बढ़ाते हुए, इसी शृंखला में विश्व की श्रेष्ठ कहानियाँ प्रकाशित की जा रही हैं। उम्र के हर मोड़ पर ये कहानियाँ पाठकों के जेहन से टकराई होंगी, कभी लिखित रूप में, कभी वाचिक। सुदूर देशों के भूगोल और इतिहास को उलाक कर इन रचनाओं ने हमारे स्मृति-कोष को समृद्ध किया है। इनकी गहरी मानवीय दृष्टि, मार्मिक सृष्टि और वृहत्तर अभिप्रायों ने हमें ऐसा छुआ है कि हमने इन्हें अपना पाथेय समझा। विश्व कथा साहित्य से परिचित होने की राह में भारतीय भाषा परिषद का यह विनम्र प्रयास है। —ममता कालिया
Vishwa Ki Shreshtha Kahaniya
- Author Name:
Abhay K.
- Book Type:

-
Description:
विश्व साहित्य का अध्ययन हमें न सिर्फ़ जीवन के एक व्यापक फ़लक से परिचित कराता है बल्कि उसके माध्यम से हम संसार के विभिन्न हिस्सों में रहनेवाले लोगों के रहन-सहन, उनकी नैतिक मान्यताओं, वर्जनाओं, दु:खों और प्रसन्नताओं से भी अवगत होते हैं। और यह सिर्फ़ जानकारी बढ़ाने का मसला नहीं है, इससे हम अपने अन्तस्तल को विस्तृत करते हैं, विविधताओं को खुले मन से स्वीकार करने की स्थिति में आते हैं, और दुनिया को देखने का एक उदार नज़रिया विकसित करते हैं।
कहानी दुनिया की सबसे प्राचीन विधाओं में है। उसकी सम्प्रेषण शक्ति को भी विशेष रूप से पहचाना गया है। संसार की सभी भाषाओं के पास अपने कुछ महान कथाकार हैं जो अपने जीवनकाल और उसके बाद भी लोगों के हमसफ़र रहे हैं।
इस संकलन में 14 देशों के कुल 43 कहानीकारों की कहानियाँ संकलित हैं जो अपने समय, समाज और रचना कौशल की प्रतिनिधि रचनाएँ मानी गई हैं। आशा है, पाठकों को यह प्रस्तुति रुचिकर और संग्रहणीय लगेगी।
Ka : Bhartiya Manas Aur Devataon Ki Kahaniyan
- Author Name:
Roberto Calasso
- Book Type:

-
Description:
एक अद्भुत, रोमांचक और रहस्यपूर्ण यात्रा से अभी-अभी लौटा हूँ। सिर घूम रहा है— कुछ भी स्थिर नहीं। मैं उस विचित्र विचार-यात्रा के अनुभव आप सबके साथ बाँटना चाहता हूँ। एक में अनेक मानस यात्राएँ, लेकिन ज़रा ठहरिए, अभी-अभी जान पाया हूँ कि जिस अद्भुत यात्रा की बात कर रहा हूँ, वह तो शुरू ही नहीं हुई अभी तक। बस मन में कामना जगी है। और मैं इसी को यात्रा का आरम्भ और अन्त मान बैठा। सब गड्ड-मड्ड हो रहा है। प्रस्थान बिन्दु ही गन्तव्य है, और जिसे मैं गन्तव्य कह रहा हूँ, वही तो आरम्भ था। कोई आरम्भ प्रथम नहीं, क्योंकि वह दूसरा है, अन्त में से निकला है। जो नया है वह पिछले अन्त के अवशेष-शेष पर टिका है और अन्त भी अन्तिम सलिए नहीं कि वही आरम्भ है। मैं हूँ लेकिन नहीं भी हूँ। मेरा होना मेरे न होने में समाया है।
कहते हैं बुद्ध ने निर्वाण प्राप्त किया था। बोधिसत्व बुद्धत्व प्राप्त कर अन्तिम बार जीवन-मरण के चक्र से निकलकर परे चले गए थे। लेकिन हम तक तो बुद्ध अपने अवशेष-आनन्द पर आधारित रहकर ही पहुँचे थे। यदि आनन्द न होते तो क्या हम बुद्ध के विचारों से इस तरह परिचित हो पाते? यही बात मैं इटली के भारत प्रेमी विद्वान श्री रॉबर्तो कलासो के बारे में कहना चाहता हूँ। संक्षेप में कहूँ तो कलासो के माध्यम से ही मैंने जटिल पुरातन भारतीय विचार-दर्शन को कथारस की लपेटन में पहली बार स्पर्श किया है। उसे पूरी तरह समझकर ग्रहण करने की परम स्थिति अभी दूर है। निर्वाण से पहले अनेक बार बोधिसत्व बनना होगा। प्रायः ही मेरे जैसे सामान्यजनों की दृष्टि अपने अतीत में पुराणों तक ही पहुँच पाती है। प्रागैतिहासिक वैदिक काल पवित्र अज्ञान की तरह है जिसे दूर से ही प्रणाम किया जा सकता है। पहले मन था, फिर विचार आया, विचार में से दूसरा विचार। सागर में लहर पर लहर की तरह जो तब से आज तक लगातार उठती जा रही हैं। और यह क्रम थमने वाला नहीं, अनन्त काल तक चलता जाएगा, उन चक्रीय कथाओं की तरह जो अश्वमेध के घोड़े के बलिस्थल पर लौटने की प्रतीक्षा में दस दिन के अन्तराल पर अपने को दोहराती चली जाती थीं।
इस पुस्तक को पढ़ते हुए ऐसी अनुभूति होती है मानो मैं एक चक्करदार झूले पर घूमता जा रहा हूँ। जो पहले था वही बार-बार दिखाई दे रहा है। आर्यों को ऐसा ही लगा था भारत-भूमि पर आगे बढ़ते हुए। न जाने क्यों ऐसा लगता था, जो नष्ट किया था, वही फिर से सामने प्रकट हो गया है और फिर ऐसा बार-बार होने लगा। वे चकित-चमत्कृत थे। फिर एक समय ऐसा आया, जब भारतीय विचार-दर्शन और जटिल कर्मकांडीय संयोजन की जटिलता ने मन को क्लान्त कर दिया। लोग चाहने लगे—गुनगुने सर्द मौसम में मद्धिम अलाव के चारों ओर बैठकर केवल रस-भरी कथाएँ सुनें और कुछ न करें। धीरे-धीरे यही क्रम चल निकला। जो कथाएँ संकोच से कर्मकांडीय अन्तराल के बीच चुपचाप सिमटकर आ बैठी थीं, वही प्रमुख हो गईं। अतीत के कर्मकांडीय सन्दर्भ कथा-विवरणों में ढल गए। इस पुस्तक के संयोजन में भी यही शैली अपनाई गई है। बात बिन्दु से उभरती है, विचार में ढलती है, विचार प्रक्रिया एक आवेशित, प्रचंड प्रवाह का रूप ले लेती है—लहरें इतनी ऊँची उठती हैं कि मन व्याकुल हो उठता है। और तभी कलासो कथा कहने लगते हैं। क़िस्सागोई का यह अन्दाज़ विचार-प्रवाह की गुरुता को कम नहीं करता उसे कहीं अधिक ग्राह्य बनाता है हम सभी के लिए।
श्री रॉबर्तो कलासो को बधाई। और उन जैसे भारत-प्रेमी विद्वान को जन्म देने के लिए इटली को धन्यवाद।—देवेन्द्र कुमार
Lal Haveli
- Author Name:
Shivani
- Book Type:

-
Description:
महिला कथाकारों में जितनी ख्याति और लोकप्रियता शिवानी ने प्राप्त की है, वह एक उदाहरण है श्रेष्ठ लेखन के लोकप्रिय होने का। शिवानी लोकप्रियता के शिखर को छू लेनेवाली ऐसी हस्ती हैं, जिनकी लेखनी से उपजी कहानियाँ कलात्मक और मर्मस्पर्शी होती हैं।
अन्तर्मन की गहरी पर्तें उघाड़ने वाली ये मार्मिक कहानियाँ शिवानी की अपनी मौलिक पहचान हैं जिसके कारण उनका अपना एक व्यापक पाठक वर्ग तैयार हुआ।
इनकी कहानियाँ न केवल श्रेष्ठ साहित्यिक उपलब्धियाँ हैं, बल्कि रोचक भी इतनी अधिक हैं कि आप एक बार शुरू करके पूरी पढ़े बिना छोड़ ही न सकेंगे।
प्रस्तुत संग्रह में ‘गूँगा’, ‘लाल हवेली’, ‘शिबी’, ‘नथ’, ‘गहरी नींद’, ‘ख़ुदा हाफिज़’, ‘ठाकुर का बेटा’, ‘मणिमाला की हँसी’, ‘फिरबे की?’ ‘फिरबे?’, ‘मँझले दद्दा’ एवं ‘टोला’ कहानियाँ संकलित हैं। हर कथा अपनी मोहक शैली में अभिभूत कर देने की अपार क्षमता रखती है।
कलात्मक कौशल के साथ रची गईं ये कहानियाँ हमारी धरोहर हैं जिन्हें आज की नई पीढ़ी अवश्य पढ़ना चाहेगी।
Patthar Gali
- Author Name:
Nasera Sharma
- Rating:
- Book Type:

-
Description:
‘‘मुस्लिम समाज सिर्फ़ ‘ग़ज़ल’ नहीं है, बल्कि एक ऐसा ‘मर्सिया’ है जो वह अपनी रूढ़िवादिता की क़ब्र के सिरहाने पढ़ता है। पर उसके साज़ और आवाज़ को कितने लोग सुन पाते हैं, और उसका सही दर्द समझते हैं?’’ लेखिका द्वारा की गई यह टिप्पणी इन कहानियों की पृष्ठभूमि और लेखकीय सरोकार को जिस संजीदगी से संकेतित करती है, कहानियों से गुज़रने पर हम उसे और अधिक सघन होता हुआ पाते हैं।
ग़ौर करने वाली बात है कि जिस अनुभव जगत को नासिरा शर्मा ने अपनी रचनात्मकता के केन्द्र में रखा है, वह उन्हें और उनकी संवेदना को पीढ़ियों और देश-काल के ओर-छोर तक फैला देता है। एक रूढ़िग्रस्त समाज में उसके बुनियादी अर्धांश—नारी जाति की घुटन, बेबसी और मुक्तिकामी छटपटाहट का जैसा चित्रण इन कहानियों में हुआ है, अन्यत्र दुर्लभ है। बल्कि ईमानदारी से स्वीकार किया जाए तो ये कहानियाँ नारी की जातीय त्रासदी का मर्मान्तक दस्तावेज़ हैं, फिर चाहे वह किसी भी सामन्ती समाज में क्यों न हो। दिन-रात टुकड़े-टुकड़े होकर बँटते रहना और दम तोड़ जाना ही जैसे उसकी नियति है। रचना-शिल्प की दृष्टि से भी ये कहानियाँ बेहद सधी हुई हैं। इनसे उद्घाटित होता हुआ यथार्थ अपने आनुभूतिक आवेग के कारण काव्यात्मकता से सराबोर है, यही कारण है कि लेखिका अपनी बात कहने के लिए न तो भाषायी आडम्बर का सहारा लेती है, न किसी अमूर्तन का और न किसी आरोपित प्रयोग और विचार का। उसमें अगर विस्तार भी है तो वह एक त्रासद स्थिति के काल-विस्तार को ही प्रतीकित करता है। कहना न होगा कि नासिरा शर्मा की ये कहानियाँ हमें अपने चरित्रों की तरह गहन अवसाद, छटपटाहट और बदलाव की चेतना से भर जाती हैं।
Customer Reviews
Be the first to write a review...
0 out of 5
Book