Barik Baat

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बारीक बात पुरस्कृत राजस्थानी कहानी-संग्रह बारीक बात का हिन्दी अनुवाद है। इस संग्रह की कहानियाँ राजस्थानी साहित्य की विशिष्ट चेतना का प्रतिनिधित्व करते हुए लोक संस्कृति और आधुनिकता के द्वन्द को चिह्नित करती है और नये साहित्यिक प्रतिमान स्थापित करने के लिए आगे बढ़ती है। लेखक ने प्रयोगात्मक, अपरंपरागत कहानी कहने की कला एवं मुहावरेदार भाषा के उत्कृष्ट उपयोग ने कहानियों को श्रेष्ठ बना दिया है।

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ISBN
9789355485533
Pages
104
Avg Reading Time
3 hrs
Age
18+ yrs
Country of Origin
India

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About the Book

बारीक बात पुरस्कृत राजस्थानी कहानी-संग्रह बारीक बात का हिन्दी अनुवाद है। इस संग्रह की कहानियाँ राजस्थानी साहित्य की विशिष्ट चेतना का प्रतिनिधित्व करते हुए लोक संस्कृति और आधुनिकता के द्वन्द को चिह्नित करती है और नये साहित्यिक प्रतिमान स्थापित करने के लिए आगे बढ़ती है। लेखक ने प्रयोगात्मक, अपरंपरागत कहानी कहने की कला एवं मुहावरेदार भाषा के उत्कृष्ट उपयोग ने कहानियों को श्रेष्ठ बना दिया है।

Book Details

  • ISBN
    9789355485533
  • Pages
    104
  • Avg Reading Time
    3 hrs
  • Age
    18+ yrs
  • Country of Origin
    India

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Barik Baat brings Rajasthani literary consciousness into Hindi through a collection that refuses simple categorisation. Originally an award-winning Rajasthani work, this translation retains the idiomatic vigour and structural inventiveness that made the original a landmark in regional modernism. Each story tracks the tension between inherited folk culture and the dislocations of contemporary life — not as nostalgia, but as a lived problem for characters navigating a changing Rajasthan. The author's command of experimental form and vernacular idiom pushes beyond conventional storytelling templates, establishing new narrative standards within Hindi short fiction. Published by Sahitya Akademi, this collection rewards readers who seek literary craft over plotted entertainment, and who value the precision embedded in the title itself: barik baat — the fine thing, the subtle observation that reveals a world.

बारीक बात पढ़ने का अनुभव कैसा है?

यह संग्रह आपको धीरे-धीरे अपनी गिरफ्त में लेता है। ये कहानियाँ तेज़ गति या भावुक नाटकीयता पर निर्भर नहीं करतीं, बल्कि सूक्ष्म अवलोकन और प्रयोगात्मक रूप पर केंद्रित हैं। लोक संस्कृति और आधुनिकता के बीच जो द्वंद्व है, वह पात्रों के भीतर धीमी बेचैनी पैदा करता है। भाषा मुहावरेदार है, राजस्थानी साहित्य की विशिष्ट चेतना को बनाए रखती है। यह पाठक को विचार और भाषिक बारीकियों पर ध्यान देने की माँग करती है, और जो पाठक इस धैर्य के साथ पढ़ते हैं, उन्हें गहरा साहित्यिक संतोष मिलता है।

यह संग्रह किस तरह के पाठक के लिए उपयुक्त है?

  • जो पाठक प्रयोगात्मक और अपरंपरागत कहानी कहने की कला को महत्व देते हैं।
  • जिन्हें राजस्थानी लोक संस्कृति और समकालीन जीवन के टकराव में रुचि है।
  • जो साहित्यिक शिल्प, मुहावरेदार भाषा और सूक्ष्म अवलोकन की कद्र करते हैं।
  • जो तेज़ कथानक की बजाय विचारशील और संवेदनशील साहित्य पसंद करते हैं।
  • जो क्षेत्रीय साहित्य में नये प्रतिमान खोजने के इच्छुक हैं।

भारतीय पाठकों के लिए इस संग्रह का सांस्कृतिक महत्व क्या है?

यह संग्रह उस द्वंद्व को चिह्नित करता है जो आज पूरे भारत में जीवंत है — परंपरा और आधुनिकता के बीच का संघर्ष। राजस्थान की लोक संस्कृति सिर्फ़ पृष्ठभूमि नहीं, बल्कि एक जीवित शक्ति है जो समकालीन जीवन से टकराती है। यह टकराव केवल ग्रामीण-शहरी विभाजन नहीं, बल्कि मूल्यों, भाषा और पहचान का सवाल है। आज जब क्षेत्रीय पहचान और वैश्वीकरण के बीच तनाव बढ़ रहा है, ये कहानियाँ उस अनुभव को साहित्यिक गहराई के साथ प्रस्तुत करती हैं।

लेखक का दृष्टिकोण इस विषय पर क्या विशिष्ट है?

लेखक ने प्रयोगात्मक और अपरंपरागत कथा-रूप को अपनाया है, जो परंपरागत कहानी की रैखिकता और स्पष्टता से अलग है। मुहावरेदार भाषा का उत्कृष्ट उपयोग कहानियों को सिर्फ़ अनुवाद नहीं, बल्कि एक स्वतंत्र साहित्यिक अनुभव बनाता है। लोक और आधुनिक के द्वंद्व को लेखक सरल विरोध के रूप में नहीं, बल्कि जटिल मानवीय अनुभव के रूप में प्रस्तुत करते हैं। यह दृष्टिकोण राजस्थानी साहित्य में नये प्रतिमान स्थापित करता है और हिंदी में इसका अनुवाद उस विशिष्टता को बनाए रखता है।

पढ़ने के बाद यह संग्रह पाठक के साथ क्या छोड़ जाता है?

यह संग्रह पाठक को परंपरा और आधुनिकता के बीच अपनी स्वयं की स्थिति पर विचार करने के लिए प्रेरित करता है। कहानियाँ समाप्त होने के बाद भी उनके सूक्ष्म अवलोकन और भाषिक बारीकियाँ मन में रहती हैं। भावनात्मक रूप से, यह एक शांत बेचैनी छोड़ता है — न तो निराशावादी, न ही आशावादी, बल्कि ईमानदार। बौद्धिक रूप से, यह क्षेत्रीय साहित्य की शक्ति और प्रयोगात्मक रूप की संभावनाओं की गहरी समझ देता है। सांस्कृतिक रूप से, यह लोक चेतना को समकालीन संदर्भ में पुनः परिभाषित करता है।

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