Kailash Gautam Samagra : Vols. 1-3
About the book
‘कैलाश गौतम समग्र’ (तीन खंड) वस्तुतः समय के सच को रेखांकित करते हुए, चुनौतियों में जूझते हुए आम जनमानस की ही आवाज़ है। यह सहज साहित्यिक मौलिक अभिव्यक्ति का बोलता-बतियाता दस्तावेज़ है। सुव्यवस्थित दुर्व्यवस्था की विद्रूपताओं-विसंगतियों पर चोट के साथ-साथ, राग-अनुराग मिलन-मनुहार विछोह भी है। बदलते हुए गाँव और शहरीकरण का टूटता तिलस्म भी। ‘गंगा’, ‘झुनिया’, ‘अमावस्या का मेला’, ‘कचहरी’, ‘भाभी की चिट्ठी’, ‘कुर्सी’, ‘अन्हरे से लड़ाई’, ‘पप्पू की दुलहिन’, ‘रामलाल का फगुआ’, ‘धुरन्धर’, ‘मीराबाई’ जैसी अनेकानेक कालजयी रचनाएँ भी जो आम आदमी से लेकर शीर्षस्थ आलोचकों व समीक्षकों के भी ज़ुबान पर हैं। वे सारे पात्र और देसज मुहावरे सब सजीव हो उठते हैं, ऐसा लगता है। इसमें लोकबोली की मिठास के साथ ही तीज-त्योहारों, हँसी-ख़ुशी और पनप रहा फीकापन भी है। महँगाई की मार है तो रिश्तों की मिठास-खटास भी। तीन खंडों में प्रस्तुत यह समग्र कैलाश गौतम के गद्य-पद्य का समूचा रचना-संसार है। सुविख्यात सम्पादकों व आलोचकों की भूमिकाओं के साथ मनकवि-जनकवि कैलाश गौतम की रचनात्मक अभिव्यक्ति का एक निष्पक्ष, सच्चा और सारगर्भित लेखा-जोखा है।
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About the Book
‘कैलाश गौतम समग्र’ (तीन खंड) वस्तुतः समय के सच को रेखांकित करते हुए, चुनौतियों में जूझते हुए आम जनमानस की ही आवाज़ है। यह सहज साहित्यिक मौलिक अभिव्यक्ति का बोलता-बतियाता दस्तावेज़ है।
सुव्यवस्थित दुर्व्यवस्था की विद्रूपताओं-विसंगतियों पर चोट के साथ-साथ, राग-अनुराग मिलन-मनुहार विछोह भी है। बदलते हुए गाँव और शहरीकरण का टूटता तिलस्म भी। ‘गंगा’, ‘झुनिया’, ‘अमावस्या का मेला’, ‘कचहरी’, ‘भाभी की चिट्ठी’, ‘कुर्सी’, ‘अन्हरे से लड़ाई’, ‘पप्पू की दुलहिन’, ‘रामलाल का फगुआ’, ‘धुरन्धर’, ‘मीराबाई’ जैसी अनेकानेक कालजयी रचनाएँ भी जो आम आदमी से लेकर शीर्षस्थ आलोचकों व समीक्षकों के भी ज़ुबान पर हैं। वे सारे पात्र और देसज मुहावरे सब सजीव हो उठते हैं, ऐसा लगता है। इसमें लोकबोली की मिठास के साथ ही तीज-त्योहारों, हँसी-ख़ुशी और पनप रहा फीकापन भी है। महँगाई की मार है तो रिश्तों की मिठास-खटास भी।
तीन खंडों में प्रस्तुत यह समग्र कैलाश गौतम के गद्य-पद्य का समूचा रचना-संसार है। सुविख्यात सम्पादकों व आलोचकों की भूमिकाओं के साथ मनकवि-जनकवि कैलाश गौतम की रचनात्मक अभिव्यक्ति का एक निष्पक्ष, सच्चा और सारगर्भित लेखा-जोखा है।
Book details
- Format
- Paperback
- Publisher
- Rajkamal Prakashan Samuh
- Edition
- 1st
- Publication year
- 2017
- Weight
- 1656 grams
- ISBN-13
- 9789352211302
- Pages
- 582
- Reading time
- ~19 hrs
- Age
- 18+
- Country of origin
- India
- Dimensions
- 14 × 21.5 cm
- Language
- Hindi
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