Bezubaan
(0)
Author:
Subhash SharmaPublisher:
Rajkamal Prakashan SamuhLanguage:
HindiCategory:
Short-story-collections₹
395
316 (20% off)
Available
Ships within 48 Hours
Free Shipping in India on orders above Rs. 1100
सुभाष शर्मा ने नवें दशक में युवा कथाकार के रूप में अपनी स्पष्ट पहचान बनाई है। जीवन के विभिन्न आयामों को काफी गहराई से देखने एवं समझने का माद्दा उनमें है। वे सामाजिक घटनाओं को ऐसी दृष्टि से देखते हैं जो समाज को आगे ले जाने वाली होती है। उनकी सोच-समझ कभी भी बने-बनाए साँचे में फिट नहीं होती क्योंकि वह जीवनानुभव से संबद्ध है। उनकी कहानी 'बेजुबान' नवें दशक की एक महत्त्वपूर्ण कहानी है। इसकी चर्चा विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में होती रही है। समकालीन हिंदी कहानी से गुजरते हुए यह बात निर्विवाद रूप से कही जा सकती है कि सामाजिक अनुभवों का दायरा और अधिक व्यापक हुआ है, तथा मानवीय दृष्टिबोध और अधिक गहरा। अपने आसपास बिखरे जीवन-यथार्थ को अनदेखा कर आज का कथाकार किसी अगम्य फलसफे को रचने में विश्वास नहीं रखता। कहना न होगा कि सुपरिचित कवि-कहानीकार सुभाष शर्मा के इस संग्रह की कहानियों को इसी श्रेणी में रखा जाएगा। इस संग्रह में सुभाष की दस कहानियाँ संगृहीत हैं और इनमें से प्रायः प्रत्येक कहानी भारतीय जन-जीवन की किसी-न-किसी विडंबना को उजागर करती है। आजादी के बाद हमारे चारों ओर जिस सामाजिक, राजनीतिक, प्रशासनिक और शैक्षिक तंत्र का निर्माण हुआ है, मनुष्य उसमें किसी शिकार की तरह छटपटा रहा है। इस तंत्र में मौजूद जल्लादों के अनेक चेहरे 'जल्लाद' नामक व्यक्ति से कहीं अधिक भयावह हैं। 'हिंदुस्तनवा', 'फरिश्ते', 'जमीन', 'आँचल' और 'जल्लाद' जैसी कहानियाँ अपनी गंभीर अर्थवत्ता से हमें बहुत गहरे तक झकझोरती हैं, और यदि 'फरिश्ते' के सहारे कहा जाए तो हर प्रकार की अमानवीय दुर्गंध के बावजूद मानवीय संबंधों की महक का भी बखूबी अहसास कराती हैं।
Read moreAbout the Book
सुभाष शर्मा ने नवें दशक में युवा कथाकार के रूप में अपनी स्पष्ट पहचान बनाई है। जीवन के विभिन्न आयामों को काफी गहराई से देखने एवं समझने का माद्दा उनमें है। वे सामाजिक घटनाओं को ऐसी दृष्टि से देखते हैं जो समाज को आगे ले जाने वाली होती है। उनकी सोच-समझ कभी भी बने-बनाए साँचे में फिट नहीं होती क्योंकि वह जीवनानुभव से संबद्ध है। उनकी कहानी 'बेजुबान' नवें दशक की एक महत्त्वपूर्ण कहानी है। इसकी चर्चा विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में होती रही है। समकालीन हिंदी कहानी से गुजरते हुए यह बात निर्विवाद रूप से कही जा सकती है कि सामाजिक अनुभवों का दायरा और अधिक व्यापक हुआ है, तथा मानवीय दृष्टिबोध और अधिक गहरा। अपने आसपास बिखरे जीवन-यथार्थ को अनदेखा कर आज का कथाकार किसी अगम्य फलसफे को रचने में विश्वास नहीं रखता। कहना न होगा कि सुपरिचित कवि-कहानीकार सुभाष शर्मा के इस संग्रह की कहानियों को इसी श्रेणी में रखा जाएगा। इस संग्रह में सुभाष की दस कहानियाँ संगृहीत हैं और इनमें से प्रायः प्रत्येक कहानी भारतीय जन-जीवन की किसी-न-किसी विडंबना को उजागर करती है। आजादी के बाद हमारे चारों ओर जिस सामाजिक, राजनीतिक, प्रशासनिक और शैक्षिक तंत्र का निर्माण हुआ है, मनुष्य उसमें किसी शिकार की तरह छटपटा रहा है। इस तंत्र में मौजूद जल्लादों के अनेक चेहरे 'जल्लाद' नामक व्यक्ति से कहीं अधिक भयावह हैं। 'हिंदुस्तनवा', 'फरिश्ते', 'जमीन', 'आँचल' और 'जल्लाद' जैसी कहानियाँ अपनी गंभीर अर्थवत्ता से हमें बहुत गहरे तक झकझोरती हैं, और यदि 'फरिश्ते' के सहारे कहा जाए तो हर प्रकार की अमानवीय दुर्गंध के बावजूद मानवीय संबंधों की महक का भी बखूबी अहसास कराती हैं।
Book Details
-
ISBN9788171195718
-
Pages144
-
Avg Reading Time5 hrs
-
Age18+ yrs
-
Country of OriginIndia
Recommended For You
Patna wala Pyar
- Author Name:
Abhilash Dutta
- Rating:
- Book Type:

- Description: पटना वाला प्यार (कहानी संग्रह) में पटना की जीवन शैली, वहां की संस्कृति का प्रभाव कहानियों की पृष्ठभूमि है। पटना के संस्कार कहानी के पात्रों में स्पष्ट दिखाई दे रहे हैं। पटना को जैसा एक आम आदमी अख़बारों और ख़बरों के माध्यम से जानता होगा बिलकुल वैसा ही इस कहानी संग्रह में सहज ही परिलक्षित होता है। कहानी ‘एक मुलाकात’ में दिल्ली और पटना के बीच की यात्रा, कैसे एक प्रेम में फंसी लड़की को वेश्या बना देती है। वहीं ‘पटना वाला प्यार’ कहानी के दोनों भागों के प्यार, एक छोटे शहर की युवा हो रही पीढ़ी की अल्हड़ मति का शानदार चित्रण प्रस्तुत करती है। ‘रीयूनियन’ कहानी पढ़कर व्यक्ति को अपने जीवन के कटु सत्य का सहज ही साक्षात्कार हो जाता है। कहानी से पता चलता है कि जीवन में आने वाला हर शख़्स अपना एक वजूद रखता है। ‘लाल चच्चा’ कहानी हो या ‘फैसला’, ‘अज्ञात आतंकवादी’ हो या ‘सुसाइड जिम्मेदार कौन’ या फिर ‘परछाई’ समाज को सीधे-सीधे आईना दिखाने वाली कहानियाँ कही जा सकती है।
'Badchalan' Beevion Ka Dweep
- Author Name:
Krishna Baldev Vaid
- Book Type:

-
Description:
यह कृष्ण बलदेव वैद सरीखे अलबेले और हठी कथाकार से ही मुमकिन था कि पुरानी, बहुत पुरानी, कहानी का भी नए-नवेले, अनूठे और समसामयिक अन्दाज़ में एक बार फिर बयान सम्भव हो सके, जैसा सोमदेव रचित ‘कथासरित्सागर’ की कुछ संस्कृत कहानियों के साथ उन्होंने इस संग्रह में सफलतापूर्वक कर दिखलाया है।
यह उद्यम इस मायने में मौलिक और रचनाधर्मी है कि पारम्परिक कथाओं का रूप विन्यास करते हुए ‘पुनर्लेखक’ न जाने कितनी जगह कथा काया में एक सजग लेखक की तरह प्रवेश करता है : न सिर्फ़ प्रवेश ही, बल्कि अपनी चुटीली, चटपटी टिप्पणियों से कहानी की रसात्मकता को समसामयिक जीवन सज्जा में ढालने की सुविचारित चेष्टा भी। यही असल में परम्परा का नवीनीकरण है : एक सच्ची और सचमुच पुनर्रचना।
कथा की क्लासिकल, पर भाषा और शैली अभी और आज की। पात्र वही पुराने, पर उन्हें देखने, आँकने, टाँकने का अन्दाज़ ‘कृष्णबलदेवी’। घटनाएँ वही पुरानी, पर उन्हें बयान करते हुए उन्हें समकालिक जीवन-छवियों से जोड़ने का सपना नया। अगर कहानीकार का सरोकार, कहानी के सन्देश, पाठ या शिक्षा से कम और ख़ुद कहानी से ज़्यादा है, तो यह वैद जी जैसे कहानीकार के लिए निहायत स्वाभाविक बात है, जिसकी बुनियादी दिलचस्पी का सबब कहानी ही है : कहानी का निहितार्थ नहीं।
कृष्ण बलदेव वैद हमारे समय के ऐसे इने-गिने मूल्यवान और महत्त्वपूर्ण लेखकों में अग्रगण्य हैं, कथा कहने और अपनी शर्तों पर कहने की जिनकी उमंग न थकी है, न चुकी। कथित आलोचकों के सामने झुकी तो वह ज़रा भी नहीं है। प्रयोग और नएपन के प्रति उनका स्वाभाविक उल्लास और अनुराग हिन्दी की याद रखने लायक़ घटना हैं, वह इसलिए भी कि हर दफ़ा अपने ही ढब-ढंग का कुछ अलग, कुछ नया रचना, उनकी लेखकीय फ़ितरत में कुछ उसी तरह शरीक है जैसे इधर कम से कमतर होते जा रहे ‘प्रयोगशील’ हिन्दी गल्प में ख़ुद कृष्ण बलदेव वैद।
‘कथासरित्सागर’ की कुछ प्रसिद्ध कहानियों का यह रोचक ‘विचलन’ एक दफ़ा फिर वैद जी के नवाचारी मन-मस्तिष्क की रोमांचक उड़ान का असन्दिग्ध साक्ष्य है।
Visangati
- Author Name:
Jagdish Prasad Singh
- Book Type:

-
Description:
हमारे आसपास नित्य ऐसी घटनाएँ होती रहती हैं जिनमें अनेक कहानियों के बीज निहित होते हैं, लेकिन हम कभी उन पर ध्यान नहीं देते। लेकिन कुछ लोग ऐसे होते हैं जो ऐसी जगहों में बड़ी कहानियाँ तलाश कर लेते हैं। यह संग्रह ऐसी ही कहानियों से सजा है।
डॉ. जगदीश प्रसाद सिंह की ये कहानियाँ मानव-मन और समाज की ऐसी अनोखी परतों को उघाड़ती हैं कि सहसा विश्वास नहीं होता। मसलन संग्रह की पहली ही कहानी ‘विसंगति’ को लें। इसमें स्वामी गोविन्दानन्द का जीवन कुछ ऐसी घटनाओं का प्रतिबिम्ब है जो भारतीय समाज में बहुत आम रहा है—यानी विपरीत परिस्थितियों के चलते संन्यास ले लेना। माधव वसु को जब पता चलता है कि उसकी पत्नी का उसके छोटे भाई से सम्बन्ध है तो वह घर-बार छोड़ देता है और एक सफल आध्यात्मिक जीवन जीने लगता है। लेकिन फिर एक दिन अतीत एक अलग ही रूप में उसके सामने आ खड़ा होता है।
‘प्रतीम सिंह का ढाबा’, ‘दाँत का दर्द’, ‘राह का काँटा’, ‘भगवती का शाप’, और ‘सरस्वती का भोंपू’ सहित इस संग्रह की सभी कहानियाँ समाज के किसी न किसी पहलू की विडम्बना को सामने लाती है। ये कहानियाँ अपनी सरल कहन के चलते हमें किसी शैल्पिक उलझाव से परे वास्तविकता की एक सहज दुनिया में ले जाती हैं जिसकी तहों के नीचे कई विसंगतियाँ साँस लेती रहती हैं।
Manto : Pandrah Kahaniyan
- Author Name:
Saadat Hasan Manto
- Book Type:

-
Description:
‘अगर आप मेरी कहानियाँ बरदाश्त नहीं कर सकते, तो दरअसल ज़माना ही नाक़ाबिले-बरदाश्त है।’ यह कहना था मंटो का जो अपनी कहानियों में वह लिखते थे जो सब आवरणों को हटाने के बाद ज़माने के चेहरे पर नज़र आता है।
उन्होंने मज़लूमों, ग़रीब-गुरबा और उन औरतों की कहानियाँ लिखीं जिन्हें समाज ने हाशिए पर धकेलकर छोड़ दिया था। उन्होंने उन भावनाओं को लेकर भी कहानियाँ लिखीं जिन्हें सफ़ेदपोश समाज खुली रोशनी में स्वीकार नहीं कर पाता। उन्होंने ऐसे-ऐसे अहसासात को ज़बान बख़्शी जिन्हें हम कभी अपनी चालाकी और कभी अल्फ़ाज़ की कमी की वजह से यूँ ही ग़ायब हो जाने देते हैं।
इसलिए आज भी उनकी कहानियाँ हमें अपनी कहानियाँ लगती हैं; वे अपने वक़्त से इतना आगे चल रहे थे कि आज भी हमें अपने आगे ही चलते दिखाई देते हैं।
यह संकलन उनकी कुछ बहुत चर्चित और कुछ ऐसी कहानियों को लेकर बनाया गया है जिनका ज़िक्र बहुत ज़्यादा नहीं होता। संकलन किया है जानी-पहचानी सिने-अभिनेत्री और निर्देशक नंदिता दास ने। उनकी चर्चित फ़िल्म ‘मंटो’ के साथ-साथ प्रकाशित यह किताब क़िस्सागो मंटो की पूरी शख़्सियत को सामने ले आती है। बकौल नंदिता : ‘उनकी कहानियों के पात्र अक्सर वे लोग होते हैं जो समाज के कोनों में रहते हैं और औरतों के लिए सहानुभूति भरी नज़र रखते हैं। यही बात उन्हें और लेखकों से अलग करती है।’
Choti Upanyas(Volume-3)
- Author Name:
Dr.Sanjay Rout
- Book Type:

- Description: Unlock the secrets of success and become a best-selling author with Choti Upanyas(Volume-3)! This book covers the essentials of writing an engaging and compelling book, including tips on crafting believable characters, creating powerful plotlines and choosing the right title. With Choti Upanyas(Volume-3), you'll learn how to transform life . Take the plunge and discover the secrets of successful storytelling with Choti Upanyas(Volume-3)!
Lalmaniyan Tatha Anya Kahaniyan
- Author Name:
Maitreyi Pushpa
- Book Type:

-
Description:
नब्बे के दशक में जिन रचनाकारों ने अपनी विशिष्ट पहचान बनाई और जिन्हें पाठकों ने भी हाथों-हाथ लिया, मैत्रेयी पुष्पा का नाम उनमें प्रमुख है! आज वे हिन्दी साहित्य-परिदृश्य की एक महत्त्वपूर्ण उपस्थिति हैं। उन्होंने हिन्दी कथा-धारा को वापस गाँव की ओर मोड़ा और कई अविस्मरणीय चरित्र हमें दिए। इन चरित्रों ने शहरी-मध्यवर्ग को उस देश की याद दिलाई जो धीरे-धीरे शब्द की दुनिया से ग़ायब हो चला था। ‘इदन्नमम’ की मंदा, 'चाक' की सारंग, ‘अल्मा कबूतरी’ की अल्मा और ‘झूला नट’ की शीलो, ऐसे अनेक चरित्र हैं जिन्हें मैत्रेयी जी ने अपनी समर्थ दृश्यात्मक भाषा और गहरे जुड़ाव के साथ आकार दिया है।
यहाँ प्रस्तुत कहानियों में भाषागत बिम्बों और दृश्यों को सजीव कर देने की अपनी अद्भुत क्षमता के साथ वे जिस पाठ की रचना करती हैं, उसे पढ़ना कथा-रस के एक विलक्षण अनुभव से गुज़रना है। ‘ललमनियाँ’ की मौहरो, ‘रिजक’ कहानी की लल्लन, ‘पगला गई है भागवती!’ की भागो या ‘सिस्टर’ की डोरोथी, ये सब स्त्रियाँ अपने परिस्थितिगत गहरे करुणा भाव के साथ पाठक के मन में गहरे उतर जाती हैं, और यह चीज़ लेखिका की भाषा-सामर्थ्य और गहरे चरित्र-बोध को सिद्ध करती है।
A House On The Outskirts and Other Stories
- Author Name:
Devarakonda Balagangadhara Tilak
- Rating:
- Book Type:

- Description: This book is collection of ten short stories and translated from Telugu to English.The stories unveil the misery and pain buried in the depths of human predicament.They show sympathy for weakness,laugh at follies and appreciate love and kindness.
Toote Ghonsle Ke Pankh
- Author Name:
Ram Kumar Mukhopadhyaya
- Book Type:

-
Description:
यह एक महिला की डायरी के शिल्प में लिखा गया उपन्यास है। यह शिल्प इसलिए सही है कि डायरी में ही कोई नौजवान महिला जीवन के अनुभव, अपनी पसन्द-नापसन्द एवं समाज और अपनी निजी प्रतिक्रियाओं को दर्ज करती है। ऐसा लेखन जिस तरह स्वतःस्फूर्त होता है, वैसे ही स्पष्ट भी। यह उपन्यास पाठक को उबाऊ नहीं लगता। लेकिन उपन्यास की सबसे ख़ास बात है—उसके कथ्य और शिल्प का नयापन। नौजवानों की धमनियों में दौड़नेवाले ख़ून की गर्मी का अहसास और उत्साह इस उपन्यास की पंक्ति-पंक्ति में निहित है, जिसे हर पढ़नेवाला अनुभव करेगा।
—अपराजित नायक, (आलोचक)
उपन्यास की मुख्य पात्र दिशा चौधरी को पता चलता है कि ज्योतिरिन्द्र मोइत्रा का देहान्त क़रीब बीस वर्ष पूर्व हो चुका और सत्यजित राय की ‘कंचनजंघा’ का पक्षी-प्रेमी मामा (पहाड़ी सान्याल द्वारा अभिनीत) ज्योतिरिन्द्र मोइत्रा की नक़ल है। यह मैं नहीं जानता था, सो इस उपन्यास से मुझे कवि, गीतकार और संगीतज्ञ ज्योतिरिन्द्र मोइत्रा के बारे में नई जानकारी मिली।
—प्रो. पवित्र सरकार, (आलोचक व शिक्षाविद्)
‘टूटे घोंसले के पंख’ हालाँकि आकार में छोटा है, लेकिन निस्सन्देह इसने बांग्ला लेखन को एक नई शक्ल दी है।
—प्रो. कार्तिक लाहिड़ी, (उपन्यासकार व आलोचक)
‘टूटे घोंसले के पंख’ यह अहसास कराता है कि इसका लेखक एक समर्थ उपन्यासकार है। पुस्तक लेखक के भाव को प्रदर्शित करती है लेकिन यह कभी अतिरिक्त भावुकता की तरफ़ नहीं मुड़ती। मनोवेग और बुद्धि का एक सटीक सम्मिश्रण यह उपन्यास बांग्ला उपन्यास लेखन की मौजूदा शैली से नितान्त भिन्न है।
—आशीष बर्मन, (उपन्यासकार व आलोचक)
आपके उपन्यास को पढ़ते हुए मैं चकित हुआ। विषय का चयन, कथानक के कहने का ढंग, भाषा और दिशा, चौधरी के चरित्र का रूपांकन—सभी कुछ आपकी अनोखी कल्पना और शिल्प की गवाही देते हैं।
—प्रो. शिबनारायोन राय, (आलोचक व सम्पादक)
Sapne Mein Kabeer
- Author Name:
Premkumar mani
- Book Type:

- Description: हिन्दी कथा-साहित्य को जिन चुने हुए रचनाकारों ने उसकी जड़ता और अपठनीयता से मुक्ति दिलाई, उनमें प्रेमकुमार मणि प्रमुख हैं। पिछली सदी के सातवें दशक के आख़िर से उन्होंने लिखना आरम्भ किया और आठवें दशक में कथाकार के रूप में पहचान बनाई। मणि ने कहानियों को जनसरोकारों और समकालीनता की धड़कन से नत्थी किया और सहज भाव से भाषा व मिज़ाज के नए आयाम उद्घाटित किये। उनकी कहानियों में उत्तर भारतीय जनजीवन के ऐसे अनछुए परिदृश्य उभरते हैं, जो हमें आंतरिक स्तर तक आश्वस्त और कभी-कभार उद्वेलित करते हैं। प्रचलित अर्थों में न वह गाँव के कथाकार हैं और न ही शहर के। उन पर साहित्यिक आंदोलनों का भी कोई चंदोवा कभी प्रभावी नहीं हुआ। बदलते हुए सामाजिक-राजनीतिक जीवन के अंतर राग और उसमें व्याप्त विविध किस्म के मिथ्याचार उनकी कहानियों में हम पा सकते हैं। सबसे बढ़ कर यह कि इन्हें पढ़ते हुए हम ज्ञानात्मक संवेदना से स्वत: निमज्जित और संस्कारित अनुभव करते हैं। इस संकलन में उनकी कुछ ऐसी कहानियाँ भी हैं, जिन्हें आमतौर पर लघु कथा कहने का प्रचलन है। लेखक का आग्रह उन्हें कथा मानने का है। इनका एक अलग आस्वाद और बुनावट है। बहुत हौले-से हमारी संवेदना को ये गहरे स्तर पर प्रभावित करती हैं। इक्कीसवीं सदी के तीसरे दशक में बीसवीं सदी के उत्तराद्र्ध में उभरे एक कथाकार की कहानियों का पढऩा एक अलग अनुभव दे सकता है।
Sookhi Ret
- Author Name:
Zilani Bano
- Book Type:

-
Description:
जीलानी बानो के उपन्यासों और कहानियों से आज के समय के बदलते जीवन–मूल्यों और सामाजिक अन्तर्विरोधों की जो तस्वीर बनती है, वह बहुत संजीदा तो है ही साथ ही पूरी तरह दोमुँही सोच की असलियत को बेपर्दा करते हुए समाज और जीवन से तआल्लुक़ रखनेवाली हर चीज़ को अपने में शामिल करती चलती है।
‘सूखी रेत’ की कहानियाँ स्त्री–जीवन के उस मरुस्थल को भी प्रतिबिम्बित करती हैं, जो सदियों से विस्तारित होता चला आया है और उसकी तपिश और ख़लिश से वह न तो उकताती है और न ही हार मानती है। नारी का यही अन्तर्विरोध एक प्रतिकार बनने से कैसे, कहाँ चूक जाता है, इसी मसले की दास्ताँ है ‘सूखी रेत’, जहाँ ढेर सारे बहलावे हैं और ख़ूब सारे सपने, जो पूरी तरह मृग–मरीचिका बन जाते हैं। वह हमेशा इत्मीनान करती है कि अब पानी पास ही है, वहाँ तक पहुँचने की जद्दोजहद और फिर प्यासे रह जाने की तड़प। लेकिन जीलानी बानो की कहानियों के नारी–पात्र बार–बार प्यासे रह जाने और अपनी तकमील की तलाश के नाकाम हो जाने को अपनी क़िस्मत नहीं मानते, वे सब न तो छिछला विद्रोह करते हैं और न ही अपनी गरिमा से च्युत होते हैं; बस वे सुलग रहे हैं भीतर ही भीतर। इस रेगिस्तान से निकलने की मुकम्मल राह तलाशते हुए।
एक उल्लेखनीय और महत्त्वपूर्ण कथा-संग्रह।
Case Files of The Dead
- Author Name:
Various Authors
- Rating:
- Book Type:

- Description: Welcome to a mysterious land where ghosts. Ghouls and spirits rule. Welcome to a place where haunted houses and evil souls will make a shiver run down your spine. A spooky tale in the scenic hills of Mussoorie awaits you while uncanny happenings in a literary competition are sure to intrigue you. The case of a mysterious white Maruti baffles everyone, even as the unsuspecting jogger experiences something he had never bargained for. A group of friends will encounter the worst terror of their lives while nightmares of his death rack the young man! Author's In and The Book Bakers present an eclectic mix of true stories, legends, and fables that have often been a part of India's folklore—armed with some of the best authors in India's paranormal literature history. CASE FILES OF THE DEAD; India's first pure horror public anthology will turn every host into (G)Host!!!
Ek Shravni Dophari Ki Dhoop
- Author Name:
Phanishwarnath Renu
- Book Type:

-
Description:
एक श्रावणी दोपहरी की धूप प्रख्यात कथाकार फणीश्वरनाथ 'रेणु’ की असंकलित कहानियों का संग्रह है। विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित ये प्राय: उनकी प्रारम्भिक रचनाएँ हैं, इसलिए इनका दोहरा महत्त्व है। एक ओर ये हमें उनकी रचनात्मक प्रतिभा के शैशव तक ले जाती हैं, तो दूसरी ओर समकालीन कथा-साहित्य में उस नई कथा-प्रवृत्ति का उदयाभास कराती हैं जो बाद में उनकी अन्य महत्त्वपूर्ण कहानियों और उपन्यासों में परिपक्व हुई और जिसने एक समूचे कथायुग को प्रभावित किया।
रेणु की कहानियाँ मानव-जीवन के प्रति गहन रागात्मकता का परिणाम हैं। वे उनके यथार्थ को समग्रता में पकडऩे और उसकी तरल भावनात्मक अभिव्यक्ति में विश्वास रखते हैं। हम उनके पात्रों के साथ-साथ उदास और उल्लसित हो उठते हैं। उनमें जो लोक-मानस का विस्तार है, जो रस और संगीत है, वह हमारे मानवीय संवेगों को गहराता है।
इन कहानियों के माध्यम से वस्तुत: रेणु एक बार फिर हमें उस रचना-भूमि तक ले जाते हैं, जिसमें पहली बार नहाई धरती के सोंधेपन, बसन्त की मादकता और पसीने की अम्लीय गन्ध का अहसास होने लगता है
Seat Number Chheh
- Author Name:
Mamta Kaliya
- Book Type:

- Description: हिन्दी कथा साहित्य में अपनी एकल और अलग पहचान बनाती ममता कालिया की कहानियाँ पहले वाक्य से ही पाठक का ध्यान आकर्षित करती हैं। इन कहानियों में सातवें दशक के बाद के जीवन और जगत् की हलचल महसूस की जा सकती है। जब भारतीय समाज में परिवर्तन हो रहा था। इन कहानियों को महज़ स्त्री-लेखन के कोष्ठक में सीमित नहीं किया जा सकता, क्योंकि इनमें समूचे समाज की संघर्षधर्मिता विभिन्न पात्रों और स्थितियों द्वारा व्यक्त हुई है। प्रमुख आलोचक मधुरेश के शब्दों में, ‘संरचना की दृष्टि से ममता कालिया की कहानियाँ इस औपन्यासिक विस्तार से मुक्त हैं जिसके कारण ही कृष्णा सोबती की अनेक कहानियों को आसानी से उपन्यास मान लिया जाता है। काव्योपकरणों के उपयोग में भी ये संयत कहानियाँ हैं। यह अकारण नहीं कि उनकी भाषा में एक ख़ास तरह की तुर्शी है। जिसकी मदद से वे सामाजिक विद्रूपताओं पर व्यंग्य का बहुत सीधा और सधा उपयोग करती हैं।’
Aakaron Ke Aaspas
- Author Name:
Kunwar Narain
- Book Type:

-
Description:
'आकारों के आसपास' की कहानियों को पढ़कर कुछ ऐसा आस्वाद मिलता है जो आम तौर पर आज की कहानियों से सुखद रूप में अलग है। एक तरह से इन कहानियों की दुनिया कोई ख़ास निजी दुनिया नहीं है, इनमें भी रोज़मर्रा की ज़िन्दगी के ही आम परिचित अनुभवों को पेश किया गया है। मगर उन्हें देखनेवाली नज़र, उसके कोण और इन दोनों के कारण उभरनेवाले रूप और भाषाई संगठन का फ़र्क़ इतना बड़ा है कि इन कहानियों की दुनिया एकदम विशिष्ट और विस्मयकारी जान पड़ती है जिसमें किसी-न-किसी परिचित सम्बन्ध, अनुभव या रूख़ का या तो कोई अन्तर्विरोध या नया अर्थ खुल जाता है, या इसकी कोई नई परत उभर आती है—जैसा अक्सर कविता के बिम्बों से हुआ करता है।
कोई अजब नहीं कि इन कहानियों में यथार्थ और फैंटेसी के बीच लगातार आवाजाही है। फैंटेसी के साथ-साथ कुँवर नारायण अपनी बात कहने के लिए तीखे व्यंग्य के बजाय हलकी विडम्बना या 'आयरनी' का इस्तेमाल अधिक करते हैं। इसी से उनके यहाँ फूहड़ अतिरंजना या अति-नाटकीयता नहीं है, एक तरह का सुरोचिपूर्ण संवेदनशील निजीपन है ।
दरअसल, ये कहानियाँ काफ़ी फैले हुए फ़लक पा अनेक मानवीय नैतिक सम्बन्धों, प्रश्नों और मूल्यों को जाँचने, उधेड़ने और परिभाषित करने की कोशिश करती हैं, किसी क्रान्तिकारी मुद्रा में नहीं, बल्कि असलियत की बेझिझक निजी पहचान के इरादे से।
Janane ki Batein (Vol. 1)
- Author Name:
Deviprasad Chattopadhyay
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
Hare Skirt Wale Ped Ke Tale
- Author Name:
Neelam Kulshreshtha
- Book Type:

- Description: Book
Jungle Ki Baten
- Author Name:
Ramesh Bedi
- Book Type:

- Description: जंगल के जीव-जन्तुओं की छियासठ घटनाओं का इन कहानियों में वर्णन है। इनसान के समान ये जीव संवेदनशील होते हैं। सुख-दु:ख की अनुभूति, ममता, स्नेह, अनुराग, वात्सल्य जैसी कोमल भावनाएँ इनमें इनसान के समान ही देखी जाती हैं। इनमें जीवनसंगिनी और भाई-बहनों का रिश्ता सुखमय होता है। अपने-पराए में भेदभाव के बिना मौसियाँ एक दूसरे के बच्चों को अपना स्तनपान कराके पाल लेती हैं। बीमार, असहाय की जीवन-रक्षा के लिए भाई-बन्धु शिकार मारकर उसे खिलाते हैं। संकट में फँसे साथी की और सन्तान की जी-जान से रक्षा करते हैं। प्रिय के वियोग में या उसके मर जाने पर शोकाकुल साथी खाना छोड़ देते हैं और प्राण त्याग देते हैं। क़ुदरत के ओपन एअर थिएटर में नीले आसमान को चूमते हुए पहाड़ों और गहरी नदियों में अविराम बहती चंचल सरिताओं के बैकड्रॉप में गूँजते हुए दिलकश संगीत के साथ प्यार-मुहब्बत, प्रेयसी के लिए जानलेवा युद्ध, आहार जुटाने के लिए कड़ा संघर्ष करनेवाले जीवों की इन मर्मस्पर्शी कहानियों में शेर, सिंह, लकड़बग्घा, गीदड़ जैसे मांसाहारियों; हाथी, गैंडे, चीतल, साँभर जैसे शाकाहारियों; जलचरों, सरीसृपों; मोर, कबूतर जैसे शान्तिप्रिय पक्षियों ने सशक्त किरदार निभाए हैं।
Rekhayen Bolti Hain Bhag 2
- Author Name:
Geetashree
- Book Type:

- Description: Book
Eent Ke Upar Eent
- Author Name:
Mahashweta Devi
- Book Type:

-
Description:
कलकत्ता और उसके आसपास के इलाक़ों में ईंट के भट्ठों पर आदिवासी बँधुआ मज़दूरों के क्रूर शोषण को इस कहानी-संग्रह में महाश्वेता देवी ने अपनी तीक्ष्ण दृष्टि और बेबाक क़लम से नंगा किया है। आदिवासी क्षेत्रों में सक्रिय ठेकेदारों, सरकारी नौकरशाहों और पुलिस की संगीन-बूटों की मार से लाचार भूखे-नंगे आदिवासी स्त्री-पुरुष, लड़के-लड़कियाँ अपने मूल निवासों से खदेड़े जाकर कैसे भट्ठों की जलती आग का ईंधन बनते हैं; भट्ठों के मालिकों के गुंडे, दलाल, कुटनियाँ और रेल-स्टेशनों के पिट्ठू किस तरह मिलकर उन्हें ईंट-भट्ठों तक लाते हैं; जंगल में छिपी नंगी आदिवासी लड़कियों को अच्छे भोजन, वस्त्र और अच्छी मज़दूरी का लालच किन अमानवीय स्थितियों तक घसीट लाता है; वहाँ कैसे उनके शरीर और मन का शोषण किया जाता है—इन सबका इन कहानियों में बेबाक चित्रण है। प्रताड़ितों में भी प्रताड़ित आदिवासी नारी के तन और मन की व्यथा को इस संकलन में विशेष रूप से उकेरा गया है। साथ ही उन आदिवासी क्रान्तिकारियों का आह्वान और उनके आह्वान से उद्वेलित मन का चित्रण भी बख़ूबी हुआ है।
आदिवासियों के शोषण के प्रति महाश्वेता जी का गहरा सरोकार इन कहानियों में और तीखा होकर उभरा है। क्रान्तिकारी दिशा-संकेत इन कहानियों को विशिष्ट दस्तावेज़ बनाते हैं।
Chandausi Junction
- Author Name:
Shankar Sahay
- Rating:
- Book Type:


- Description: A collection of short-stories set in the 20th Century India for the 21st Century kids & a nostalgic walk, for their parents & grandparents. Although this book has been named after the city of Chandausi, it contains stories from various places like Rishikesh, Agra, Champaran, Tilhar, Sambhal, Kanpur, Banaras, Lucknow and many others. These are the short stories of a bygone era-a period when India had either not gained independence or had been independent for not more than 35 years. These are the tales of journeys-taken up from the early 20th century to the end of a millennium, from Shahjahanpur to Delhi, from Bijnor to Hyderabad, from Hathras to Sweden & Norway, from Lakshmi Talkies, Allahabad to Night Watchman, Bangalore, from Panki to USA, from Dehradun to Canada, from Chandausi to Australia and many others. We are sure in all these stories, you will be able to find at least one character, which reminds you of your own self-of what you are, were or always wanted to be. Let us know the character with whom you have been able to relate to the most. Happy reading. “Genius is one percent inspiration and 99 percent perspiration,”-Thomas A. Edison. -Here’s a collection of short stories to inspire the readers.
Customer Reviews
Be the first to write a review...
0 out of 5
Book