Dharam Ka Marm
Author:
Akhilesh MishraPublisher:
Rajkamal Prakashan SamuhLanguage:
HindiCategory:
Religion-spirituality0 Ratings
Price: ₹ 144
₹
180
Unavailable
संस्कृत, पालि, अंग्रेज़ी, प्राकृत, उर्दू, अर्थशास्त्र, खगोलशास्त्र, गणित और भाषाविज्ञान आदि भाषाओं और विषयों के अधिकारी विद्वान अखिलेश मिश्र के बौद्धिक व्यक्तित्व की विशेषता यह थी कि उन्होंने ज्ञान को कर्म से जोड़ा। जीवन-भर वे ज्ञान, कर्म, वाणी और लेखनी की एकाग्र शक्ति के साथ जनसंघर्षों में संलग्न रहे। अस्सी के दशक में जब साम्प्रदायिक शक्तियाँ उभार पर थीं, उन्होंने अपनी पूरी ताक़त साम्प्रदायिकता विरोधी संघर्ष में झोंक दी। साक्षरता और जन-शिक्षण में उनकी बहुत गहरी और निजी दिलचस्पी थी।</p>
<p>इस पुस्तक में उनके राष्ट्रीय सहारा में जनवरी 1997 से दिसम्बर 1998 तक ‘धर्म-संस्कृति’ के अन्तर्गत लिखे गए निबन्धों को संकलित किया गया है। ये निबन्ध साबित करते हैं कि मिश्र जी हिन्दी के स्वतन्त्रचेता और विवेकशील विचारकों की गौरवशाली परम्परा की एक महत्त्वपूर्ण कड़ी थे।</p>
<p>डॉ. नामवर सिंह के शब्दों में : ‘उनके विचार से धर्म गुण है और हर वस्तु की तरह मनुष्य का गुण धर्म होता है जिसे मनुष्यता अथवा मानवता कहते हैं।’ और, ‘जो गुण धर्म का मर्म के लेखक के प्रति श्रद्धावनत होने को विवश करता है वह है उसकी निर्भयता।’</p>
<p>धर्म, संस्कृति, इतिहास और राष्ट्र आदि पदों को लेकर आज पैदा की जा रही धुन्ध के बीच ये निबन्ध हमें निश्चय ही रोशनी दिखाएँगे।
ISBN: 9788126708031
Pages: 392
Avg Reading Time: 13 hrs
Age: 18+
Country of Origin: India
Recommended For You
Rigved : Mandal-10 Purvardh
- Author Name:
Govind Chandra Pandey
- Book Type:

-
Description:
वेद सनातनविद्या के काव्यात्मक प्रतिपादन हैं। ऋग्वेद संहिता के अनुवाद एवं व्याख्या का प्रयास अनेक भाषाओं में समय-समय पर होता रहा है, किन्तु अभी तक उपलब्ध सभी अनुवादों में काव्यपक्ष की उपेक्षा अथवा पद्यानुवाद की प्रस्तुति के असम्भव प्रयास ही किए गए हैं जो ऋचाओं के साथ पूरा न्याय नहीं करते हैं। वेदों में भावों की सनातनता एक व्यापक ध्वनि के रूप में सूक्तों, संवादों और आख्यानों में विद्यमान है। प्रस्तुत अनुवाद में पादानुसारी किन्तु भावपरक अनुवाद पर विशेष आग्रह सोद्देश्य है ताकि ऋचाओं की काव्यात्मकता का यथासम्भव सम्प्रेषण एवं मूल की अर्थयोजना का क्रम अनुवाद में सुरक्षित रहे।
भाषान्तर में व्याख्या का सूक्ष्म प्रकार अनिवार्य होता है और वही अनुवाद का वर्तमान और अतीत के मध्य संवाद बनाकर बहुत कुछ को परम्परा में जीवित तथा प्रगतिशील रखता है। अतः ग्रन्थ में अनुवाद के लिए उपयुक्त भाषा, पुरातन ध्वनि बहुलता और समसामयिक सजीवता के संरक्षण की दृष्टि से तत्सम, तद्भव एवं देशी शब्दों के समन्वित प्रयोग किए गए हैं। साथ ही, गम्भीर और बहुमुखी अर्थों को स्पष्ट करने के लिए क्रियापदों के अनुवाद, दुरूह पदों के अर्थनिर्वचन में धातुपाठ, निरुक्त की पद्धति एवं आधुनिक तथा तुलनात्मक व्याकरण के अनुसरण से सहायता ली गई है।
वेद आर्षकाव्य के निर्देशन के साथ-साथ अध्यात्मगवेषियों के मार्गदर्शक भी हैं। अतः ऋचाओं में संश्लिष्ट आधियाज्ञिक, आधिभौतिक, आधिदैविक और आध्यात्मिक अर्थों को उद्घाटित करने का प्रयास किया गया है। व्याख्याकारों में जहाँ विवाद की स्थिति है, वहाँ प्राचीन एवं नवीन दोनों ही मतों का विवेचन प्रस्तुत किया गया है। इस प्रकार काव्यात्मक पक्ष की प्रस्तुति, निगूढ़ अर्थ के आयामों का विश्लेषण और विवादित स्थलों का तुलनात्मक विवेचन इस ग्रन्थ के अनुवाद एवं व्याख्या की अभीप्सित विशेषताएँ हैं।
इस खंड में ‘ऋग्वेद’ के दसवें मंडल (पूर्वार्द्ध) का व्याख्या सहित हिन्दी अनुवाद प्रस्तुत किया गया है।
Rigved : Mandal-9
- Author Name:
Govind Chandra Pandey
- Book Type:

-
Description:
वेद सनातनविद्या के काव्यात्मक प्रतिपादन हैं। ऋग्वेद संहिता के अनुवाद एवं व्याख्या का प्रयास अनेक भाषाओं में समय-समय पर होता रहा है, किन्तु अभी तक उपलब्ध सभी अनुवादों में काव्यपक्ष की उपेक्षा अथवा पद्यानुवाद की प्रस्तुति के असम्भव प्रयास ही किए गए हैं जो ऋचाओं के साथ पूरा न्याय नहीं करते हैं। वेदों में भावों की सनातनता एक व्यापक ध्वनि के रूप में सूक्तों, संवादों और आख्यानों में विद्यमान है। प्रस्तुत अनुवाद में पादानुसारी किन्तु भावपरक अनुवाद पर विशेष आग्रह सोद्देश्य है ताकि ऋचाओं की काव्यात्मकता का यथासम्भव सम्प्रेषण एवं मूल की अर्थयोजना का क्रम अनुवाद में सुरक्षित रहे।
भाषान्तर में व्याख्या का सूक्ष्म प्रकार अनिवार्य होता है और वही अनुवाद का वर्तमान और अतीत के मध्य संवाद बनाकर बहुत कुछ को परम्परा में जीवित तथा प्रगतिशील रखता है। अतः ग्रन्थ में अनुवाद के लिए उपयुक्त भाषा, पुरातन ध्वनि बहुलता और समसामयिक सजीवता के संरक्षण की दृष्टि से तत्सम, तद्भव एवं देशी शब्दों के समन्वित प्रयोग किए गए हैं। साथ ही, गम्भीर और बहुमुखी अर्थों को स्पष्ट करने के लिए क्रियापदों के अनुवाद, दुरूह पदों के अर्थनिर्वचन में धातुपाठ, निरुक्त की पद्धति एवं आधुनिक तथा तुलनात्मक व्याकरण के अनुसरण से सहायता ली गई है।
वेद आर्षकाव्य के निर्देशन के साथ-साथ अध्यात्मगवेषियों के मार्गदर्शक भी हैं। अतः ऋचाओं में संश्लिष्ट आधियाज्ञिक, आधिभौतिक, आधिदैविक और आध्यात्मिक अर्थों को उद्घाटित करने का प्रयास किया गया है। व्याख्याकारों में जहाँ विवाद की स्थिति है, वहाँ प्राचीन एवं नवीन दोनों ही मतों का विवेचन प्रस्तुत किया गया है। इस प्रकार काव्यात्मक पक्ष की प्रस्तुति, निगूढ़ अर्थ के आयामों का विश्लेषण और विवादित स्थलों का तुलनात्मक विवेचन इस ग्रन्थ के अनुवाद एवं व्याख्या की अभीप्सित विशेषताएँ हैं।
इस खंड में ‘ऋग्वेद’ के नौवें मंडल का व्याख्या सहित हिन्दी अनुवाद प्रस्तुत किया गया है।
AMAZING ALLOY HEALING
- Author Name:
Dr.Sanjay Rout
- Book Type:

- Description: This is the book that you need. It is a must read for anyone who is interested in Healing and Health. They can make this book your source of information about how to heal themselves physically and mentally."
In Service Of Sai
- Author Name:
Dr. Suresh Haware
- Book Type:

- Description: The opportunity of service of Sai Baba came into my life as a divine blessing. As a result, my life was completely transformed. Earlier, I rarely visited Shirdi. During this Period, I visited no other Place but Shirdi. I did not think about Sai Baba very often before. During this period, I thought about nothing other than sai. My feet would always yearn to go to Shirdi
Ramcharitmanas : Ocean of Science
- Author Name:
S.P. Gautam
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
Shri Leela Ramayan
- Author Name:
Bhanushankar Mehta
- Book Type:

- Description: प्रस्तुत पुस्तक ‘श्रीलीला रामायण’ में तुलसी की रामकथा है, उनका मानस है और गद्य-पद्य में उन्हीं की पंक्तियाँ हैं। प्रत्येक प्रसंग का मानस के अनुसार स्वरूप दिया गया है। यदि लीला करनेवाले चाहें तो उनका कवित्त-छन्द रीति से शृंगार कर सकते हैं, पर ध्यान रहे अतिरेक न हो, कथा का रस भंग न हो। क्षेपक जोड़ने से कथा का विस्तार होगा और यदि समय अनुमति दे तो वैसा कर सकते हैं। इस लीला-संग्रह में कोई दुराग्रह नहीं है, कोई बाध्यता नहीं है पर जो केवल तुलसी के ‘रामचरितमानस’ को रूपायित करना चाहते हैं, उनके लिए यह उपयोगी होगा। इसका पाठ आपको ‘रामचरितमानस’ के संक्षिप्त पाठ का सुख देगा। रामजी की प्रेरणा से यह लिखा गया और उन्हीं के युगल चरणों में अर्पित है।
Hindutwa Aur Uttar-Aadhunikta
- Author Name:
Sudhish Pachauri
- Book Type:

-
Description:
किसी दैनिक कमेंट्री की तरह लिखी गई ये टिप्पणियाँ उत्तर-औपनिवेशिक विमर्श का रेखांकन करने और उसके समस्या-बिन्दुओं को खोलने की प्रक्रिया में लिखी जाती रही हैं। उत्तर-आधुनिक विमर्श और उत्तर-संरचनावादी पाठ-प्रविधि के बिना उत्तर-औपनिवेशिकता की इस गुत्थी को नहीं खोला जा सकता। यहाँ हिन्दुत्व के द्वारा चयनित और सक्रिय किए गए नाना प्रकार के धार्मिक और सांस्कृतिक चिन्हों को पढ़ा गया है। वे इस लेखक के लिए ‘षड्यंत्र’ नहीं हैं, उत्तर-औपनिवेशिक एजेंडे और सत्तामूलक विमर्श के परिणाम हैं जिनकी कुल माँग आधुनिकता का एक सकलतावादी एजेंडा है। सती-दहन से लेकर अणुबम फोड़ने तक, मस्जिद के विध्वंस से लेकर मन्दिर निर्माण तक हर बात पर स्वदेशी एजेंडे की वकालत, पिछले दशकों के वे राजनीतिक-सांस्कृतिक समुच्चय हैं जो प्रचलित सेकुलर समीक्षा की मुठभेड़ों से परे और महफ़ूज़ ही रहे आए हैं। इसका कारण हिन्दुत्व शक्तियों द्वारा पैदा किए गए ‘प्रस्थापना परिवर्तन’ हैं, सेकुलर विमर्श जिन्हें समझने में कई बार नाकाम रहता है। उसे अगर कोई प्रस्थापनाएँ समस्याग्रस्त करती हैं तो लेट-कैपिटलिज़्म के द्वारा पैदा की गई उत्तर-आधुनिक प्रस्थापनाएँ हैं। उत्तर-आधुनिकता के समय में हिन्दुत्व एक ‘अ-सम्भावना’ ही है।
भारत जैसे समाजों के सन्दर्भ में उत्तर-आधुनिकता की भूमिका नए पूँजीवाद की भूमिका की तरह द्वन्द्वात्मकता से युक्त है क्योंकि उसमें लेट-कैपिटलिज़्म का द्वन्द्ववाद सक्रिय है। यही इस लेखक की उत्तर-आधुनिकता की अपने ढंग की उत्तर-मार्क्सवादी पाठ-प्रविधि है जो उत्तर-औपनिवेशिक एजेंडे के आगे उत्तर-आधुनिकता से फिर-फिर टकराती है और हिन्दुत्व के सकलतावाद के एकार्थवादी तत्त्व के बरक्स उत्तर-आधुनिकता के बहुलवाद के तत्त्व को अल्पवाद के हाशियावाद के विमर्श में उपयोगी पाती है और साथ ही एक समकालीन ‘कल्चर टर्न’ को पढ़ते हुए उपभोक्तावाद और पॉपुलर कल्चर में इस उत्तर-औपनिवेशिक तत्त्ववाद के सकंट को गहराता देखती है।
यह किताब हिन्दुत्व के अन्तरंग संकटों के इशारे देती है। यह हिन्दुत्व की समकालीन मार्केटिंग में निहित है। यह उत्तर-औपनिवेशिक विमर्श का उत्तर-आधुनिक ग्लोबल मंडली में बैठना भर है। इस मार्केटिंग के खेल को पुराने सेकुलर विमर्श की प्रस्थापनाओं से नहीं समझा जा सकता। बिन लादेनी ब्रांड का इस्लाम पहले इसी बाज़ार के लिए बना था, अब उसे उसी बाज़ार ने तोड़ा है। हिन्दुत्व की अन्तिम हद अगर कुछ है तो तालिबानीकरण है और वही उसकी समाधि भी है।
Shri Ram Janmabhoomi Ki Shaurya Gatha
- Author Name:
Saroj Upadhyaya
- Book Type:

- Description: यह गाथा है प्रभु श्रीराम की जन्मभूमि अयोध्या की। यह गाथा है श्रीरामजन्मभूमि के शौर्य की। । यह गाथा है, सनातन धर्म के वीरों की। यह गाथा है, लाखों सनातनियों के अमर बलिदान की। इस ऐतिहासिक उपन्यास 'श्रीरामजन्मभूमि की शौर्य गाथा' में श्रीरामजन्मभूमि मंदिर व अयोध्या के पूरे इतिहास व उससे जुड़ी पौराणिक-धार्मिक मान्यताओं के साथ-साथ इसके ऐतिहासिक और कानूनी लड़ाई के प्रत्येक पहलुओं को कुछ शब्दों में समेटने का प्रयास किया गया है। उपन्यास का प्रारंभ 5 अगस्त, 2020 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदीजी द्वारा श्रीराममंदिर निर्माण के भूमि-पूजन करने से होता है। भूमि-पूजन के इस पावन क्षण में अयोध्या को लाखों रामभक्तों का बलिदान स्मरण हो जाता है और वह उनके संघर्ष व बलिदानों को सजल नेत्रों से स्मरण करते हुए अपने अतीत में खो जाती हैं और इतिहास का एक-एक पन्ना पलटती हैं। प्रत्येक घटना एवं दृश्य उनके समक्ष जीवंत हो जाता है। इस प्रकार अयोध्या अपनी आत्मकथा के माध्यम से इस उपन्यास में श्रीरामजन्मभूमि के संघर्ष की शौर्य गाथा व अनेक रहस्योद्घाटन देशवासियों के समक्ष करती है।
May Be We'll All Go Mad
- Author Name:
Ulla Berkewicz
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
Sayiyin Vakuruthigal
- Author Name:
Sumit Ponda Bhaijee
- Book Type:

- Description: பாய்ஜி சிறுவயதிலிருந்தே சாயிபாபாவிடம் ஈர்க்கப்பட்டார் மற்றும் சாயி மீது ஆர்வம் கொண்ட எவருக்கும் பாபாவைப் பற்றி எண்ணற்று கைதகைள் கூறுவார் அவர் சாயிபாபாவிடமிருந்து உதவேகம் பெற்றார் என்று கூறுவார் பாபாவின் வாழ்ககை கைகைள் விவளிப்பதன் மூலமும் அவருடைய புகழைப் பாடுவதன் மூலமும் பாபாவின் பௌயர் பரப்பினார் அமுதம் போன்று சாயியின அன்பு சாபி அமிர்த் கதர் என்று அழைக்கப்பட்டு உலகெங்கிலும் பரவி வருகிறது பாயஜி தனது தனித்துவமான பாணியில் ஸ்ரீ சாயி சத்சரிதத்தின் போதைன்கைள இக்கால சங்கடங்களுடன தொடாபுபடுத்தி அதன் மூலம் ஏராளமான வாழ்ககை பிரச்சனைகளுக்கு விடை அளிக்கிறார். சாய்யாபா பற்றிய பாயறியிள வலைப்பதிவு: (Bleg) பத்து வட்சத்திற்கும் அதிகமான வாசிப்புகளைப் பெற்றுள்ளது. ஸ்ரீ சாயி அமிரத கதாவின் யூடியூப் சேன்ல் இருபது வடசம் பார்வைகளைக் கடந்துள்ளது. முகநூல் பக்கம் கிட்டத்தட்ட ஐந்து லட்சப் பின்தொடர்பவர்களைக் கொண்டுள்ளது பாய்றியிள தினசரி மேற்கோள் வாசகம் () மற்றும் அதன தெளிவான விரிவாக்கம் எப்போதும் அனைவராலும் எதிர்பார்க்கப்படுகிறது
Srikrishna, Buddha, Yeshu Aur Muhammed "श्रीकृष्ण, बुद्ध, ईसा और मुहम्मद" | Enlightening Insights Into The Life | Swami Vivekananda Book in Hindi
- Author Name:
Swami Vivekanand
- Book Type:

- Description: "स्वामी विवेकानंद ने भारत में उस समय अवतार लिया, जब यहाँ हिंदू धर्म के अस्तित्व पर संकट के बादल मँडरा रहे थे। पंडित-पुरोहितों ने हिंदू धर्म को घोर आडंबरवादी और अंधविश्वासपूर्ण बना दिया था। ऐसे में स्वामी विवेकानंद ने हिंदू धर्म को एक पूर्ण पहचान प्रदान की | इसके पहले हिंदू धर्म विभिन छोटे-छोटे संप्रदायों में बँटा हुआ था। तीस वर्ष की आयु में स्वामी विवेकानंद ने शिकागो, अमेरिका में विश्व धर्म संसद् में हिंदू धर्म का प्रतिनिधित्व किया और इसे सार्वभौमिक पहचान दिलवाई। स्वामीजी का विश्वास था कि पवित्र भारतवर्ष धर्म एवं दर्शन की पुण्यभूमि है। यहाँ बड़े-बड़े महात्माओं तथा ऋषियों का जन्म हुआ; यह संन्यास एवं त्याग की भूमि है तथा यहीं, केवल यहीं आदिकाल से लेकर आज तक मनुष्य के लिए जीवन के सर्वोच्च आदर्श एवं मुक्ति का द्वार खुला हुआ है। प्रस्तुत पुस्तक 'कृष्ण, बुद्ध, ईसा और मुहम्मद ' में स्वामीजी ने सरल शब्दों में देवत्व प्राप्त इन स्तुत्य महापुरुषों के व्यक्तितत और उनकी शिक्षाओं की अनिर्वचनीय व्याख्या की है। एक अत्यंत प्रेरक्त और ओजपूर्ण पुस्तक, जो जीवन में दैविक आशा का संचार करती है।"
Bhartiya darshan : saral Parichaya
- Author Name:
Deviprasad Chattopadhyay
- Book Type:

- Description: भारत जैसे बहुभाषी, सामासिक समाज में राष्ट्रीय मानस को समझने के लिए भारतीय दर्शन का अनुशीलन आवश्यक है। यह और भी जरूरी है क्योंकि भारतीय दर्शन की एक सुदीर्घ परंपरा रही है। इसमें आस्था, विश्वास, अंधविश्वास, धर्म जैसे अवयव भी घुले-मिले हैं। मोटे तौर पर दर्शन में दो परस्पर विरोधी धाराएँ तो सक्रिय रही ही हैं। विविधता इतनी विपुल है कि कुछ पंक्तियों में भारतीय दर्शन को परिभाषित करना कठिन है। इसीलिए तर्कसंगत, वैज्ञानिक, दार्शनिक दृष्टिकोण का विकास जरूरी हो जाता है। हम अक्सर अपने दार्शनिक सिद्धांतों, प्राचीन संस्कृति और सभ्यता के प्रति मोहवादी अतिवाद के शिकार हो जाते हैं। पुस्तक के लेखक विख्यात मनीषी देवीप्रसाद चट्टोपाध्याय ने इस संदर्भ में न केवल संतुलित दृष्टिकोण अपनाया है बल्कि जहाँ आवश्यक हुआ, वहाँ अवैज्ञानिक और अतार्किक मान्यताओं का खंडन भी किया है। दर्शन हवा में नहीं बल्कि यथार्थ के ठोस धरातल पर जन्म लेते हैं। देवीप्रसाद चट्टोपाध्याय भारतीय आदर्शवाद तथा मायावाद के पीछे सक्रिय सामाजिक शक्तियों, कर्मवाद के बजाय परलोकवाद का पाठ पढ़ानेवाले निहित स्वार्थों और भारतीय विज्ञान के विकास में बाधा बननेवाले हितों पर विमर्श करते हैं तथा वहीं सकारात्मक शक्तियों को चिह्नित भी करते हैं। इस तरह पुस्तक में भारतीय दर्शन सही परिपे्रक्ष्य में उपस्थित होता है। 'भारतीय दर्शन : सरल परिचय न केवल सामान्य बल्कि सुविज्ञ पाठकों के लिए बहुविध उपयोगी पुस्तक है।
Ghazal Kumbh 2020
- Author Name:
Dixit Dankauri
- Book Type:

- Description: This Book Doesn't have a Description
Sufiwad Ke Adhyatmik Ayam
- Author Name:
Zafar Raza
- Book Type:

-
Description:
हिन्दी में तसव्वु़फ या सूफ़ीमत पर दो प्रामाणिक पुस्तकें छपी हैं। एक चन्द्रबली पाण्डेय की, दूसरी डॉ. राममूर्ति त्रिपाठी की। इस्लाम धर्म के अनुयायी विद्वान् की हिन्दी में यह पहली पुस्तक है—सू़फ़ीवाद के आध्यामिक आयाम।
इस पुस्तक में ऐतिहासिक पृष्ठभूमि के साथ-साथ सू़फ़ी सिद्धान्तों का बहुत ही स्पष्ट और प्रामाणिक विवेचन है। प्रोफ़ेसर जाफ़र रज़ा ने अपने प्रतिपादन की पुष्टि क़ुर्आन के उद्धरणों से की है। इसके साथ-साथ विभिन्न सू़फ़ी सम्प्रदायों का ऐतिहासिक, दार्शनिक और साधनापरक विवेचन भी इसमें है।
इस पुस्तक की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसमें पूर्ववर्ती मूल अरबी-फ़ारसी विवेचकों का संक्षिप्त परिचय भी दिया गया है। विशेष रूप से भारत में प्रसिद्ध सू़फ़ी-फ़कीर सम्प्रदायों और उनके प्रमुख हस्ताक्षरों के बारे में बहुत ही प्रामाणिक विवेचन है। प्रोफ़ेसर जाफ़र ऱजा ने अत्यन्त निष्पक्ष होकर सूफ़ीवाद का एक प्रामाणिक दस्तावेज़ प्रस्तुत किया है।
सूफ़ी-दर्शन इस्लाम को मथ करके निकला मक्खन है। यह इस्लाम को प्रतिष्ठा दिलाने में तो सफल हुआ ही है, इसकी पृष्ठभूमि का दिग्दर्शन प्रोफ़ेसर जाफ़र ऱजा ने अच्छी तरह प्रस्तुत किया है।
Nath Sampraday
- Author Name:
Hazariprasad Dwivedi
- Book Type:

- Description: र्य हजारीप्रसाद द्विवेदी ऐसे वांड़्मय-पुरुष हैं जिनका संस्कृत मुख है, प्राकृत बाहु है, अपभ्रंश जघन है और हिन्दी पाद है। नाथ सिद्धों और अपभ्रंश साहित्य पर उनके शोधपरक निबन्ध पढ़ते समय मन की आँखों के सामने उनका यह रूप साकार हो उठता है। ‘नाथ सम्प्रदाय’ में गुरु गोरखनाथ के लोक-संपृक्त स्वरूप का उद्घाटन किया गया है। स्वयं द्विवेदी जी के शब्दों में 'गोरखनाथ ने निर्मम हथौड़े की चोट से साधु और गृहस्थ दोनों की कुरीतियों को चूर्ण-विचूर्ण कर दिया। लोकजीवन में जो धार्मिक चेतना पूर्ववर्ती सिद्धों से आकर उसके पारमार्थिक उद्देश्य से विमुख हो रही थी, उसे गोरखनाथ ने नई प्राणशक्ति से अनुप्राणित किय
Chaurasi Kos Ki Ayodhya
- Author Name:
Shri Rajendra Pandey::Shri Vishal Gupta
- Book Type:

- Description: भगवान् श्रीराम की पावन नगरी अयोध्या चौरासी कोस क्षेत्र में स्थित है, जिसे सनातन धर्म में अत्यंत पवित्र माना गया है। यह दिव्य क्षेत्र अनेक प्राचीन धार्मिक स्थलों, मंदिरों, आश्रमों और तीर्थस्थलों से परिपूर्ण है, जो श्रीराम भक्तों के लिए श्रद्धा और आस्था के केंद्र हैं। प्रस्तुत पुस्तक 'चौरासी कोस की अयोध्या' में इन पावन स्थलों का संक्षिप्त वर्णन किया गया है। इसमें प्रत्येक स्थान का धार्मिक, ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्त्व बताया गया है, जिससे पाठक अयोध्या के आध्यात्मिक वैभव से गहराई से परिचित हो सकें। श्रद्धालुजन इन पवित्र स्थलों तक सरलता से पहुँच सकें, इसके लिए मार्गदर्शन भी दिया गया है। प्रत्येक तीर्थस्थान तक पहुँचने के लिए मार्गों की विस्तृत जानकारी दी गई है, साथ ही आधुनिक तकनीक का उपयोग करते हुए 'क्यू आर कोड' भी प्रदान किया गया है, जिसे स्कैन करके बिना किसी कठिनाई के अपने गंतव्य तक पहुँच सकते हैं। यह पुस्तक केवल एक मार्गदर्शिका नहीं, बल्कि एक आध्यात्मिक यात्रा का निमंत्रण है, जो अयोध्या की दिव्यता और भक्ति भावना को हृदय में सँजोने का अवसर प्रदान करती है।
Bhagavadgeethe Kannada Kavya
- Author Name:
Prof V Narahari
- Book Type:

- Description: DESCRIPTION AWAITED
Sanskrtik Virasat Ke Dhani : Bharat Aur Japan
- Author Name:
Shila Jhunjhunwala
- Book Type:

- Description: "जापान में भी ईश्वर की पूजा-अर्चना, सेवा, देवों का आह्वान करने की रीतियाँ भारतीय जीवन से बहुत कुछ मिलती-जुलती हैं। भारत की तरह जापान में भी मकान बनाने से पहले भूमि-पूजन करते हैं। परिवार के मंगल के लिए पितरों से आशीर्वाद लेते हैं। गुरु-शिष्य परंपरा का दर्शन वहाँ भी होता है। जापान की पौराणिक कहानियों में पत्थर में परिवर्तित हुई लड़की अपने श्रीरामचरितमानस की अहल्या जैसी ही लगती है और जापान की सूर्य उपासना की पद्धति भारत के सूर्य नमस्कार के जैसी ही है। जिस प्रकार हिंदू कोई धर्म नहीं है, एक जीवन पद्धति है, उसी प्रकार शिंतो भी प्रकृति और मनुष्य के साहचर्य की जीवन पद्धति है, जिसका किसी दर्शन, धर्म, ग्रंथ अथवा उपदेश से साम्य नहीं है, बस वह रहन-सहन का एक तरीका भर है। जापान में भी दीपावली की तरह जगमगाहट है; होली की तरह रंगों की फुहार है; पतंगों के उत्सव में भिन्न-भिन्न प्रकार के पतंगों से रँगा हुआ पूरा आसमान है; शादी-विवाह के मौकों पर संगीत से सजी हुई महफिलें हैं तो साकुरा के बागों तले फूलों की अल्हड़ बरसात है; कठपुतलियों के नृत्य हैं। काबुकी के रंग-मंच में अभिनय के रंगों में रँगी हुई कोमल भावनाएँ हैं और भारत से मिलता-जुलता हर जगह बहुत कुछ है। यह पुस्तक इन्हीं अनुभवों पर आधारित एक प्रतिबिंब है, जिसमें जापान के अनेक रंगों को समेटने का प्रयास किया गया है। "
Shriramcharitmanas By Tulsidas (English)
- Author Name:
Tulsidas
- Book Type:

- Description: Lord Ram’s life and exploration is so popular that the story has been translated in many languages and versions of Ramcharitmanas. It has a historical enigma, spiritual aura and moral ideals. It’s a treasure of deep inside education, views and unparalleled virtues of righteousness. Many Ram devotees in India could recite the complete verses of the holy book.
Shankha Mein Samaye Huye Shabda
- Author Name:
Dr. Umesh Prasad Singh
- Book Type:

- Description: भारतीय मनीषा की चिरंतन चिंतन-परंपरा हमेशा ही अखंड, असीम और शाश्वत रही है। शाश्वत अस्तित्व का अवबोध ही अध्यात्म कहा जाता है। इस अवबोध की सूक्ष्म अभिव्यक्ति हमारे आर्ष ग्रंथों की गरिमामय विरासत है। गीता हमारे आर्ष साहित्य की उत्कृष्ट उपलब्धि है। गीता के संपूर्ण कथ्य का आधार दैहिक सत्ता और चेतनतत्त्व की पृथकता की समझ का परिज्ञान है। मनुष्य के जीवन के साथ संपूर्ण सृजन खंडित और सीमित स्वरूप में नहीं है। वह अखंड, असीम और अनंत है। अपरिवर्तनशील सत्य की धुरी पर समस्त परिवर्तनशील दृश्यप्रपंच की परिधि गतिशील है। परिवर्तनशीलता के उद्दाम प्रवाह में अपरिवर्तनशील को अभिज्ञात करके उसे उपलब्ध हो लेने को कृष्ण ने ज्ञान कहा है। गीता का कथ्य किसी विशेष समय और परिस्थिति के सापेक्ष नहीं है। उसमें असीम जीवन-प्रवाह में सामंजस्य की सनातन संगति है। इस पुस्तक में विराट् जीवन-बोध के मर्म को साहित्यिक संवेदना के धरातल पर पकड़ने की कोशिश है। विराट् अवबोध के परिप्रेक्ष्य में ही मनुष्य जीवन की अर्थवत्ता के फलित होने का विधान गीता में उद्घाटित होता है। अध्यात्म दूरारूढ़ परिकल्पनाओं की भूल भुलैया में भटकने का नाम नहीं, बल्कि सत्य से संवलित होकर द्वंद्वहीन सहज हो लेने की अनुभूति है। गीता के इस अनुभूति योग की रसमयता को ग्रहण कर सकने की उत्कंठा ही इस पुस्तक के प्रणयन की उत्प्रेरणा रही है।
Customer Reviews
Be the first to write a review...
0 out of 5
Book