Udar Islam Ka Soophi Chehara
(0)
Author:
Kanhaiya SinghPublisher:
Rajkamal Prakashan SamuhLanguage:
HindiCategory:
Religion-spirituality₹
450
360 (20% off)
Available
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सूफ़ियों का प्रेम-दर्शन मानवीय प्रेम से लेकर ईश्वरीय प्रेम तक प्रसार पाता है। जायसी के अनुसार ‘मानुस प्रेम भएउ बैकुंठी। नाहिंत काह छार एक मूठी।’ इस उदात्त प्रेम और उसकी आभा से आलोकित इन कवियों की प्रेम-गाथाओं का मर्म समझने के लिए उनके सिद्दान्तों के क्रमिक विकास और उनकी सैद्धान्तिक प्रेम-दृष्टि को समझना आवश्यक होता है। इस पुस्तक में सूफ़ी दर्शन का क्रमिक विकास दिखाया गया है। इस क्रम में देखा गया है कि सूफ़ी दर्शन (तसव्वुफ़) पर भारतीय वेदान्त दर्शन का प्रभाव है। मुसूर-अल-इलाज, इब्बुल अरबी, अब्दुल करीम-अल-जिली के विचार तो पुर्णतः वेदान्त सम्मन थे। इसे उनके कथनों के उद्धरण द्वारा प्रतिपादित किया गया है। अहं ब्रह्मास्मि के वेदान्तिक सूत्र का अनुवाद ही अनलहक है। ईश्वर-जीव की एकता के सिद्दान्त की सूफ़ियों ने ‘वहदतुल वजूद’ कहा था। इसका विरोध कर परवर्ती सूफ़ियों ने ‘वहदतुल शहूद’ का सिद्धान्त प्रतिपादित किया। यह एक रोचक अध्ययन इस पुस्तक में सर्वप्रथम मूल स्रोतों के आधार पर प्रस्तुत हुआ है। साथ ही ‘सूफ़ीमत’ के सिद्धान्तों, सम्प्रदायों तथा विशेषताओं को हिन्दी के सूफ़ी कवियों के उद्धरणों के साथ प्रस्तुत किया गया है। ‘सूफ़ीमत’ को समझने के लिए यह पुस्तक विद्वानों और विद्यार्थियों दोनों के लिए उपयोगी है।
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सूफ़ियों का प्रेम-दर्शन मानवीय प्रेम से लेकर ईश्वरीय प्रेम तक प्रसार पाता है। जायसी के अनुसार ‘मानुस प्रेम भएउ बैकुंठी। नाहिंत काह छार एक मूठी।’ इस उदात्त प्रेम और उसकी आभा से आलोकित इन कवियों की प्रेम-गाथाओं का मर्म समझने के लिए उनके सिद्दान्तों के क्रमिक विकास और उनकी सैद्धान्तिक प्रेम-दृष्टि को समझना आवश्यक होता है।
इस पुस्तक में सूफ़ी दर्शन का क्रमिक विकास दिखाया गया है। इस क्रम में देखा गया है कि सूफ़ी दर्शन (तसव्वुफ़) पर भारतीय वेदान्त दर्शन का प्रभाव है। मुसूर-अल-इलाज, इब्बुल अरबी, अब्दुल करीम-अल-जिली के विचार तो पुर्णतः वेदान्त सम्मन थे। इसे उनके कथनों के उद्धरण द्वारा प्रतिपादित किया गया है। अहं ब्रह्मास्मि के वेदान्तिक सूत्र का अनुवाद ही अनलहक है। ईश्वर-जीव की एकता के सिद्दान्त की सूफ़ियों ने ‘वहदतुल वजूद’ कहा था। इसका विरोध कर परवर्ती सूफ़ियों ने ‘वहदतुल शहूद’ का सिद्धान्त प्रतिपादित किया। यह एक रोचक अध्ययन इस पुस्तक में सर्वप्रथम मूल स्रोतों के आधार पर प्रस्तुत हुआ है।
साथ ही ‘सूफ़ीमत’ के सिद्धान्तों, सम्प्रदायों तथा विशेषताओं को हिन्दी के सूफ़ी कवियों के उद्धरणों के साथ प्रस्तुत किया गया है। ‘सूफ़ीमत’ को समझने के लिए यह पुस्तक विद्वानों और विद्यार्थियों दोनों के लिए उपयोगी है।
Book Details
-
ISBN9789352210824
-
Pages108
-
Avg Reading Time4 hrs
-
Age18+ yrs
-
Country of OriginIndia
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Shri Hanuman Chalisa | Devotional & Spirituality Prayer of Lord Hanuman Book in Hindi
- Author Name:
Kishor Makwana::Rasikba Kesariya
- Book Type:

- Description:
श्री हनुमान चालीसा भगवान् श्रीराम तक पहुँचने का एक मार्ग है। जन-मानस में व्याप्त श्रीहनुमान चालीसा कोई सिद्ध कर ले, नित्य सौ बार पठन करे तो हनुमानजी उसकी सब इच्छा-आकांक्षा पूर्ण करते हैं, ऐसी मान्यता है। मनुष्य के जीवन को सफल बनानेवाली ये रत्नमणिकाएँ हैं। श्रीहनुमानजी का संपूर्ण चरित्र हम सबमें श्रद्धा, विश्वास, ज्ञान, शक्ति, पुरुषार्थ, भक्ति, सत्य, प्रामाणिक प्रयत्न, समर्पण भाव, पराक्रम, संस्कार- संपन्न वाणी, विवेक और निष्काम कर्म जीवन में सफलता प्राप्ति के लिए अनेक गुणों का सिंचन करता है।
Gita-Mata
- Author Name:
Mahatma Gandhi
- Book Type:

- Description:
महात्मा गांधीजी ने गीता को ‘माता’ की संज्ञा दी थी। उसके प्रति उनका असीम अनुराग और भक्ति थी। उन्होंने गीता के श्लोकों का सरल-सुबोध भाषा में तात्पर्य दिया, जो ‘गीता-बोध’ के नाम से प्रकाशित हुआ। उन्होंने सारे श्लोकों की टीका की और उसे ‘अनासक्तियोग’ का नाम दिया। कुछ भक्ति-प्रधान श्लोकों को चुनकर ‘गीता-प्रवेशिका’ पुस्तिका निकलवाई। इतने से भी उन्हें संतोष नहीं हुआ तो उन्होंने ‘गीता-पदार्थ-कोश’ तैयार करके न केवल शब्दों का सुगम अर्थ दिया, अपितु उन शब्दों के प्रयोग-स्थलों का निर्देश भी किया। गीता के मूल पाठ के साथ वह संपूर्ण सामग्री प्रस्तुत पुस्तक में संकलित है। गीता को हमारे देश में ही नहीं, सारे संसार में असाधारण लोकप्रियता प्राप्त है। असंख्य व्यक्ति गहरी भावना से उसे पढ़ते हैं और उससे प्रेरणा लेते हैं। जीवन की कोई भी ऐसी समस्या नहीं, जिसके समाधान में गीता सहायक न होती हो। उसमें ज्ञान, भक्ति तथा कर्म का अद्भुत समन्वय है और मानव-जीवन इन्हीं तीन अधिष्ठानों पर आधारित है। महात्मा गांधी की कलम से प्रसूत गीता पर एक संपूर्ण पुस्तक, जो जीवन के व्यावहारिक पक्ष पर प्रकाश डालकर पाठक की कर्मशीलता को गतिमान करेगी।
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