Udar Islam Ka Soophi Chehara

(0)

Author:

Kanhaiya Singh

Language:

Hindi

450

360 (20% off)

Available

Ships within 48 Hours

Free Shipping in India on orders above Rs. 1100


सूफ़‍ियों का प्रेम-दर्शन मानवीय प्रेम से लेकर ईश्वरीय प्रेम तक प्रसार पाता है। जायसी के अनुसार ‘मानुस प्रेम भएउ बैकुंठी। नाहिंत काह छार एक मूठी।’ इस उदात्त प्रेम और उसकी आभा से आलोकित इन कवियों की प्रेम-गाथाओं का मर्म समझने के लिए उनके सिद्दान्‍तों के क्रमिक विकास और उनकी सैद्धान्तिक प्रेम-दृष्टि को समझना आवश्यक होता है। इस पुस्तक में सूफ़ी दर्शन का क्रमिक विकास दिखाया गया है। इस क्रम में देखा गया है कि सूफ़ी दर्शन (तसव्वुफ़) पर भारतीय वेदान्‍त दर्शन का प्रभाव है। मुसूर-अल-इलाज, इब्बुल अरबी, अब्दुल करीम-अल-जिली के विचार तो पुर्णतः वेदान्‍त सम्मन थे। इसे उनके कथनों के उद्धरण द्वारा प्रतिपादित किया गया है। अहं ब्रह्मास्मि के वेदान्तिक सूत्र का अनुवाद ही अनलहक है। ईश्वर-जीव की एकता के सिद्दान्‍त की सूफ़‍ियों ने ‘वहदतुल वजूद’ कहा था। इसका विरोध कर परवर्ती सूफ़‍ियों ने ‘वहदतुल शहूद’ का सिद्धान्‍त प्रतिपादित किया। यह एक रोचक अध्ययन इस पुस्तक में सर्वप्रथम मूल स्रोतों के आधार पर प्रस्तुत हुआ है। साथ ही ‘सूफ़ीमत’ के सिद्धान्‍तों, सम्प्रदायों तथा विशेषताओं को हिन्‍दी के सूफ़ी कवियों के उद्धरणों के साथ प्रस्तुत किया गया है। ‘सूफ़ीमत’ को समझने के लिए यह पुस्तक विद्वानों और विद्यार्थियों दोनों के लिए उपयोगी है।

Read more

ISBN
N/A
Pages
N/A
Avg Reading Time
4 hrs
Age
18+ yrs
Country of Origin
India

Format:

Piracy Free

Express Delivery

Secure Payment

About the Book

सूफ़‍ियों का प्रेम-दर्शन मानवीय प्रेम से लेकर ईश्वरीय प्रेम तक प्रसार पाता है। जायसी के अनुसार ‘मानुस प्रेम भएउ बैकुंठी। नाहिंत काह छार एक मूठी।’ इस उदात्त प्रेम और उसकी आभा से आलोकित इन कवियों की प्रेम-गाथाओं का मर्म समझने के लिए उनके सिद्दान्‍तों के क्रमिक विकास और उनकी सैद्धान्तिक प्रेम-दृष्टि को समझना आवश्यक होता है।

इस पुस्तक में सूफ़ी दर्शन का क्रमिक विकास दिखाया गया है। इस क्रम में देखा गया है कि सूफ़ी दर्शन (तसव्वुफ़) पर भारतीय वेदान्‍त दर्शन का प्रभाव है। मुसूर-अल-इलाज, इब्बुल अरबी, अब्दुल करीम-अल-जिली के विचार तो पुर्णतः वेदान्‍त सम्मन थे। इसे उनके कथनों के उद्धरण द्वारा प्रतिपादित किया गया है। अहं ब्रह्मास्मि के वेदान्तिक सूत्र का अनुवाद ही अनलहक है। ईश्वर-जीव की एकता के सिद्दान्‍त की सूफ़‍ियों ने ‘वहदतुल वजूद’ कहा था। इसका विरोध कर परवर्ती सूफ़‍ियों ने ‘वहदतुल शहूद’ का सिद्धान्‍त प्रतिपादित किया। यह एक रोचक अध्ययन इस पुस्तक में सर्वप्रथम मूल स्रोतों के आधार पर प्रस्तुत हुआ है।

साथ ही ‘सूफ़ीमत’ के सिद्धान्‍तों, सम्प्रदायों तथा विशेषताओं को हिन्‍दी के सूफ़ी कवियों के उद्धरणों के साथ प्रस्तुत किया गया है। ‘सूफ़ीमत’ को समझने के लिए यह पुस्तक विद्वानों और विद्यार्थियों दोनों के लिए उपयोगी है।

Book Details

  • ISBN
    9789352210824
  • Pages
    108
  • Avg Reading Time
    4 hrs
  • Age
    18+ yrs
  • Country of Origin
    India

Recommended For You

Customer Reviews

Be the first to write a review...

0 out of 5

Book

Hurry! Limited-Time Coupon Code

WORDPOWER
* Terms and Conditions applied.

Offers

Best Deal

Lorem ipsum dolor sit amet, consectetur adipiscing elit, sed do eiusmod tempor incididunt ut labore et dolore magna aliqua

Lorem ipsum dolor sit amet, consectetur adipiscing elit, sed do eiusmod tempor incididunt ut labore et dolore magna aliqua. Ut enim ad minim veniam, quis nostrud exercitation ullamco laboris nisi ut aliquip ex ea commodo consequat.

whatsapp