Yaden Basant ki
Author:
Leeladhar MandloiPublisher:
Shivna PrakashanLanguage:
HindiCategory:
Poetry0 Ratings
Price: ₹ 160
₹
200
Available
यादें बसंत की खुशबूएँ हैं|
ISBN: 9788119018543
Pages: 112
Avg Reading Time: 4 hrs
Age: 11-18
Country of Origin: India
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—भारतभूषण अग्रवाल की यह टिप्पणी आज भी उल्लेखनीय है।
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वहीं खड़े–खड़े मेरी जगह निश्चित हुई
थोड़ी हुई
ज़्यादा नहीं हुई।
एक ऐसे संसार और समय में जहाँ प्राय: सभी अपने लिए ज़्यादा से ज़्यादा की चाह करते और न पाकर दुखी होते रहते हैं, विनोद ‘थोड़े–से’ को ही टटोलने और उसी को अपनी निश्चित जगह मानकर उससे अपने समय को ज़्यादा से ज़्यादा पकड़ते–समझते रहते हैं। उनकी कविता हमारी समझ और संवेदना, जो होता है उसके लिए हमारी ज़िम्मेदारी के अहसास को बढ़ानेवाली कविता है। वह हम पर अपना बोझ नहीं डालती और न ही किसी नैतिक ऊँचाई से हमें आतंकित करने की चेष्टा करती है। उसमें आत्मदया नहीं, बेबाकी है : दोषारोपण नहीं, आत्मालोचन है। वह हमारी सहचारी कविता है और हर समय उसे पढ़ते हुए हम इस विस्मय से भर जाते हैं कि वह हमसे हमारी तकलीफ़, संघर्ष, बेचारगी और ज़िम्मेदारी की कथा कहती है और ऐसे कि कवि और हम दोनों का ही वह जैसे शामिलात खाता है। लम्बी कविताओं का यह संकलन हिन्दी कविता की निश्चय ही शताब्दी के अन्त पर एक नई उपलब्धि है।
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