Taak Dhinadhin Bacche Nache

(1)

Author:

Rameshraaj

Language:

Hindi

Category:

Poetry

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मन को लुभाते बालगीत - ताक धिना धिन बच्चे नाचें प्रख्यात कवि रमेशराज बहुआयामी प्रतिभा के धनी है। आपने ग़ज़ल के समानांतर 'तेवरी' आंदोलन चलाया। 'तेवरी' की सार्थकता को सिद्ध करने के लिए 'तेवरीपक्ष' त्रैमासिक पत्रिका के साथ-साथ अनेक तेवरी संग्रहों का संपादन किया। आपने रसपरंपरा में एक नए रस 'विरोध' की स्थापना की। यही नहीं 'साधारणीकरण' जैसे सर्वमान्य सिद्धांत को चुनौती देते हुए एक नए सिद्धांत 'आत्मीयकरण' को प्रतिपादित किया। कवि रमेशराज एक अच्छे बालगीतकार भी हैं। आपके विगत एक वर्ष के भीतर दो बालगीत संग्रह प्रकाशित होने के उपरांत सद्यः प्रकाशित बालगीत संग्रह 'ताक धिनाधिन बच्चे नाचे' में विविध मौसमों के ऐसे बालगीत हैं जिनमें जाड़े के प्रकोप में स्वेटर अलाव, अंगीठी, गर्म चाय का जिक्र है तो वसंत के आते ही फूल भंवरों, तितलियों की बच्चों के मन को लुभाती मोहक छटाओं के दृश्य हैं।कोयल की प्यारी प्यारी कुहू कुहू की बोली है। होली के वे मदमाते पल हैं जिनमें बच्चे नकली मूछें लगाकर, पिचकारी हाथ में लेकर हुरियारे बने हुए धमाचौकड़ी मचाते हैं। रंग गुलाल उड़ाते है। बच्चों के मन को हर्षित करने वाले प्राकृतिक दृश्यों जैसे बर्फ के पहाड़, नदी, झरनों, विविध त्योहारों पर लिखे गए इन बालगीतों में मिठास है, उल्लास है। इनमें चलते हुए पटाखे है, फुलझडियां हैं। रंगबिरंगी अनारों से फूटती आतिशबाजी है। पतंगें हैं, छक्के लगाता बल्ला है। गेंद है। टिकटिक करती घड़ी है। नाचते मोर हैं। टर्र टर्र करते मेढक हैं। इन गीतों की शब्दावली सरस और रोचक है। विश्वास है इस संग्रह का स्वागत बच्चे ही नहीं साहित्य जगत के रसिक पूरे मनोयोग से करेंगे। आपकी 30 पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी है।अलीगढ़ के ग्रन्थायन प्रकाशन की ओर से आपको *साहित्यश्री* पुरस्कार से सम्मानित किया गया है।

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ISBN
RFRRTDDBN
Pages
25
Avg Reading Time
1 hrs
Age
0-11 yrs
Country of Origin
India

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About the Book

मन को लुभाते बालगीत - ताक धिना धिन बच्चे नाचें

प्रख्यात कवि रमेशराज बहुआयामी प्रतिभा के धनी है। आपने ग़ज़ल के समानांतर 'तेवरी' आंदोलन चलाया। 'तेवरी' की सार्थकता को सिद्ध करने के लिए 'तेवरीपक्ष' त्रैमासिक पत्रिका के साथ-साथ अनेक तेवरी संग्रहों का संपादन किया। आपने रसपरंपरा में एक नए रस 'विरोध' की स्थापना की। यही नहीं 'साधारणीकरण' जैसे सर्वमान्य सिद्धांत को चुनौती देते हुए एक नए सिद्धांत 'आत्मीयकरण' को प्रतिपादित किया।
कवि रमेशराज एक अच्छे बालगीतकार भी हैं। आपके विगत एक वर्ष के भीतर दो बालगीत संग्रह प्रकाशित होने के उपरांत सद्यः प्रकाशित बालगीत संग्रह 'ताक धिनाधिन बच्चे नाचे' में विविध मौसमों के ऐसे बालगीत हैं जिनमें जाड़े के प्रकोप में स्वेटर अलाव, अंगीठी, गर्म चाय का जिक्र है तो वसंत के आते ही फूल भंवरों, तितलियों की बच्चों के मन को लुभाती मोहक छटाओं के दृश्य हैं।कोयल की प्यारी प्यारी कुहू कुहू की बोली है। होली के वे मदमाते पल हैं जिनमें बच्चे नकली मूछें लगाकर, पिचकारी हाथ में लेकर हुरियारे बने हुए धमाचौकड़ी मचाते हैं। रंग गुलाल उड़ाते है।
बच्चों के मन को हर्षित करने वाले प्राकृतिक दृश्यों जैसे बर्फ के पहाड़, नदी, झरनों, विविध त्योहारों पर लिखे गए इन बालगीतों में मिठास है, उल्लास है। इनमें चलते हुए पटाखे है, फुलझडियां हैं। रंगबिरंगी अनारों से फूटती आतिशबाजी है। पतंगें हैं, छक्के लगाता बल्ला है। गेंद है। टिकटिक करती घड़ी है। नाचते मोर हैं। टर्र टर्र करते मेढक हैं।
इन गीतों की शब्दावली सरस और रोचक है। विश्वास है इस संग्रह का स्वागत बच्चे ही नहीं साहित्य जगत के रसिक पूरे मनोयोग से करेंगे। आपकी 30 पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी है।अलीगढ़ के ग्रन्थायन प्रकाशन की ओर से आपको *साहित्यश्री* पुरस्कार से सम्मानित किया गया है।

Book Details

  • ISBN
    RFRRTDDBN
  • Pages
    25
  • Avg Reading Time
    1 hrs
  • Age
    0-11 yrs
  • Country of Origin
    India

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